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‘मोदी मिशन’ को घर-घर फैला रहे प्रधानमंत्री के फैन्स

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरोधी भले ही उनकी कितनी भी आलोचना करे, लेकिन देश के भविष्य के दिल में वे गहरे तक उतरे हुए हैं। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से पद सम्भाला है वह तभी से बिना थके देश की सेवा कर रहे हैं। यही कारण है कि पीएम मोदी देश में अब तक के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री हैं। हजारों युवाओं के आदर्श बन चुके प्रधानमंत्री मोदी के कई प्रशंसक भी अब नमो मिशन के साथ जुड़कर समाज को कुछ न कुछ देना चाह रहे हैं। हरियाणा के जींद जिले के एक युवक ने ऐसा ही कार्य किया है जो न केवल प्रधानमंत्री मोदी की पॉपुलेरिटी को दर्शाती है बल्कि युवाओं में सामाजिक बुराईयों के प्रति आ रही जागरूकता को भी बताती है। 

शादी कार्ड पर छपवाई पीएम मोदी की तस्वीर
हरियाणा के जींद जिले के बराहकलां गांव के निवासी सुशील शांडिल्य की 19 फरवरी, 2018 को शादी होनी है। सुशील के साथ ही उसकी बहन रेणू और छोटे भाई चेतन की भी उसी दिन शादी है। तीनों बहन भाईयों की शादी के एक साथ कार्ड छपवाए गए हैं, लेकिन इस कार्ड में शादी के आमंत्रण के साथ ही प्रधानमंत्री की तस्वीर और उनके सामाजिक संदेश भी छापे गए हैं। 

उसने अपने कार्ड के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्लोगन ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ को भी स्थान दिया। साथ ही उन्होंने कार्ड के अंदर मोटे-मोटे अक्षरों में मोदी लाओ-देश बचाओ का नारा भी छपवाया है। इतना ही नही कार्ड कवर पर भी उन्होंने पीएम मोदी की तस्वीर छपवाई है। 

श्लोक की जगह ‘मोदी मिशन’ की पंक्तियां
पिछले वर्ष राजस्थान के झालावाड़ जिले में 29 अप्रैल, 2017 को होने वाली एक शादी का निमंत्रण कार्ड सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। क्योंकि इस कार्ड पर श्लोक की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन और बाल विवाह रोकथाम के नारे लिखे गए हैं।

कार्ड पर स्वच्छता Logo के नीचे लिखा था-

‘मेरा सपना, घर परिवार का सपना, शौचालय उपयोग ही, सम्मान है अपना।’
‘घर महकेगा, परिवार महकेगा, बेटी पढ़ाओ, जग महकेगा।’
‘जन-जन का है, बस एक ही सपना, खुले में शौच मुक्त हो भारत अपना।’
‘जन-जन की है जिम्मेदारी, घर-घर शौचालय ही समझदारी।’

कार्ड पर बाल विवाह के बारे में भी लिखा कि- ‘बाल विवाह अभिशाप ही नहीं, कानून अपराध भी है।’ बाल विवाह पर रोकथाम के लिए ही दूल्हा पूरीलाल के नाम के आगे उसकी जन्म तिथि (11-2-1996) और दुल्हन पद्मा की जन्म तिथि (19-3-1999) लिखी गई थी। दरअसल दूल्हे पूरीलाल के चाचा रामविलास मीना ने यह कार्ड छपवाकर लोगों के बीच स्वच्छता के प्रति जागरूकता लाने की कोशिश की है। मीना पंचायत प्रसार एवं स्वच्छता अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।

शौचालय न हो तो खाने न आएं
मई, 2017 में राजस्थान के ही राजसमंद जिले के नाथद्वारा तहसील में ग्राम पंचायत उपली ओड़न के गांव डिंगेला के रहने वाले लालसिंह कितावत ने भी निमंत्रण कार्ड पर स्वच्छ भारत अभियान का संदेश छपवाया। शादी के कार्ड पर यह संदेश लिखा गया है कि घर में शौचालय नहीं है तो जीमने (खाना खाने) न आएं।

लालसिंह कितावत के भाई राजेन्द्र सिंह की शादी 6 मई को है। गांव के सरपंच सुरेशचंद्र जलानिया ने उन्हें निमंत्रण पत्र पर स्वच्छ भारत अभियान को बढ़ावा देने वाला संदेश लिखने का सुझाव दिया। शादी कार्ड पर लिखा कि जिसके घर शौचालय न हो, कृपया जीमने न पधारें और नीचे स्वच्छ भारत मिशन भी लिखा।

बिन शौचालय दुल्हन का श्रृंगार अधूरा
2017 में ही में बिहार के पूर्णिया जिले के बिरनिया गांव में भी एक दूल्हे ने अपनी शादी के कार्ड में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘बिन शौचालय दुल्हन का श्रृंगार अधूरा है’ का संदेश छपवाया था। शादी कार्ड पर छपा शौचालय जागरुकता का यह स्लोगन पूरे पूर्णिया में चर्चा में रहा। दूल्हा वरुण कुमार केंद्र प्रायोजित ग्रामीण आवास योजना के बैसा प्रखंड के सहायक पद पर हैं और ये ग्रामीण आवास की हकीकतों को रोज देखते रहे हैं। उनका कहना था कि गांव में बाहर शौच करना महिला सम्मान के खिलाफ हैं।

शादी कार्ड पर स्वच्छ भारत अभियान का Logo
आकाश जैन ने अपनी बहन की शादी के कार्ड पर स्वच्छ भारत अभियान का लोगो छपवाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकाश जैन के ट्वीट को री-ट्वीट किया। जिसके बाद आकाश जैन अचानक सेलेब्रेटी बन गए। 

शादी के व्यस्त समय में भी आकाश जैन और उसके पिता ने स्वच्छ भारत अभियान के प्रति जो लगाव दिखलाया, उस पर देशभर में जैन परिवार सुर्खियों में आ गया।

शौचालय के लिए बेच दिया मंगलसूत्र 

गोरखपुर में भटहट क्षेत्र के बूढ़ाडीह गांव की सविता देवी आम लोगों के लिए एक प्रेरणा बन गई हैं। उन्होंने उन लोगों को स्वच्छता की राह दिखाई है, जो पैसे की कमी का हवाला देकर शौचालय का निर्माण नहीं करवाते। सविता देवी ने शौचालय बनाने के लिए अपना मंगलसूत्र बेचकर एक मिसाल पेश की हैं। बिहार के पटना जिले की सविता देवी की शादी बूढ़ाडीह निवासी दिव्यांग वीरेंद्र मौर्या से हुई। शादी के बाद गांव आने पर शौचालय ना होना उन्हें अखरता था। आखिरकार उन्होंने मंगलसूत्र बेचकर शौचालय बनाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरणा लेकर शौचालय बनाने वाली सविता देवी पहली महिला नहीं हैं। आइए आपको मिलवाते उन कुछ खास महिलाओं से जिनका कहना है कि शौचालय मूल जरूरत है और यह आभूषण से बढ़कर है।

कानपुर की लता देवी
उत्तर प्रदेश के कानपुर की रहने वाली लता देवी दिवाकर ने भी घर में शौचालय बनवाने के लिए अपना मंगलसूत्र बेच दिया। शौचालय ना होने की वजह से परिवार को काफी दिक्कतें होती थीं। इस महिला ने अपने सुहाग की निशानी मंगलसूत्र और अन्य जेवर बेचकर घर में शौचालय बनवाया। मंगलसूत्र बेचकर घर में शौचालय बनाने की बात पूरे इलाके में फैल गई। गांव के लोगों ने लता की सोच और हौसले को सलाम किया। लता की सोच से सबक लेते हुए गांव के कई परिवारों ने घर में शौचालय का निर्माण शुरू करा दिया है।

बरेली की सुमन गंगवार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता अभियान और घर-घर में शौचालय बनवाने के अभियान का आम लोगों पर गहरा असर होता दिख रहा है। उत्तर प्रदेश के ही बरेली की रहने वाली सुमन गंगवार ने अपने घर में शौचालय बनवाने के लिए अपने गहने तक गिरवी रख दिए। गुलरिया भवानी गांव की रहने वाली 31 साल की सुमन का कहना है कि हर सुबह हमें शौच के लिए अलग-अलग जगह की खोज करनी पड़ती थी। खेतों में अक्सर पानी भरा रहता है और जंगली जानवरों का खतरा भी रहता है। इसलिए मैंने फैसला किया कि मैं अपने घर में शौचालय बनवाउंगी फिर चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े। पहले मैंने अपना मंगलसूत्र गिरवी रखा जिससे मुझे 6 हजार रुपए मिले लेकिन फिर एक हजार रुपए के लिए मुझे अपनी कान की बालियां भी गिरवी रखनी पड़ी।

रोहतास की फूल कुमारी
बिहार के रोहतास जिले की फूल कुमारी ने भी में शौचालय निर्माण के लिए अपने मंगलसूत्र को गिरवी रखकर एक उदाहरण पेश की है। संझौली प्रखंड के बरहखाना गांव की फूल कुमारी ने अपने पति के घर में शौचालय नहीं होने पर उसके निर्माण के लिए अपना मंगलसूत्र गिरवी रख दिया। फूल कुमारी के पति खेतिहर मजदूर होने के कारण वे अपने घर में शौचालय नहीं बना पा रहे थे। ऐसे में फूल कुमारी ने मंगलसूत्र को गिरवी रखकर शौचालय बनवाया। जिला प्रशासन ने अब अन्य लोगों को प्रेरित करने के लिए फूल कुमारी को संपूर्ण स्वच्छता कार्यक्रम का ब्रांड एंबेस्डर बनाया है।

विदर्भ की संगीता अवहले
महाराष्ट्र के विदर्भ जिले में वाशिम के सिक्खड़ गांव की संगीता अवहले ने मंगलसूत्र बेचकर घर में शौचालय बनवाकर एक अनोखी मिसाल पेश की है। संगीता ने घर में शौचालय बनवाने के लिए मंगलसूत्र बेच दिया। यह खबर गांव से लेकर पूरे महाराष्ट्र में फैल गई। संगीता के इस कदम की प्रशंसा करते हुए महाराष्ट्र की मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा कि राज्य में हम ज्यादा से ज्यादा संख्या में शौचालय बनवाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाने के लिए मुंडे ने उसकी प्रशंसा करते हुए उसे एक नया मंगलसूत्र भेंट किया, जिसे उसने अपने पति के हाथों गले में पहना।

केंद्र सरकार की ओर से 2019 तक ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रो में सभी घरों में शौचालय उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। भारत की 75 करोड़ आबादी गावों में रहती है, लेकिन 50 करोड़ के पास आज भी शौचालय नहीं है। वर्तमान सरकार ने इसके लिए प्रोत्साहन राशि को 9000 हजार रुपये से बढ़ाकर 12000 रुपये कर दिया है। महज दो साल के भीतर ही दो करोड़ शौचालयों का निर्माण हो चुका है। इसके साथ तकरीबन 2.75 लाख स्कूलों में विशेष तौर पर लड़कियों के लिए करीब 4.25 लाख शौचालयों का निर्माण किया गया है। सबसे खास ये है कि प्रधानमंत्री स्वयं हर बुधवार को होने वाली बैठकों में स्थिति का जायजा लेते हैं।

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