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मोदी राज में सशक्त हुआ किसान, आमदनी बढ़ाने के लिए उठाए गए कई कदम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने किसानों और गरीबों को लिए इतने काम किए हैं कि इससे पहले किसी और सरकार ने नहीं किए। प्रधानमंत्री मोदी का सपना है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो जाए और वे विकास की मुख्य धारा में अपनी भागीदारी को सहज भाव से महसूस करें। इसी को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 19 फरवरी को किसानों की समस्याओं पर विचार करने एवं उनका समाधान निकालने की पहल के तहत दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया है। इस सम्मेलन में कृषि क्षेत्र से जुड़े अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक महत्व के विषयों और 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने के उपायों पर चर्चा की जायेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस सम्मेलन में 20 फरवरी को हिस्सा लेंगे ।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कितने गंभीर है, यह इस बार के बजट से आसानी से समझा जा सकता है। 2018 का आम बजट पूरी तरह से किसानों पर केंद्रित है।

किसानों को लागत का डेढ़ गुना MSP 
किसानों की सबसे बड़ी समस्या है कि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। इसके लिए मोदी सरकार ने किसानों के लिए प्रतिबद्धता को दिखाते हुए किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का ऐलान किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसानों को डेढ़ गुना मूल्य देने के लिए बाजार मूल्य और एमएसपी में अंतर की रकम सरकार वहन करेगी। इसके साथ ही, मोदी सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए 11 लाख करोड़ का फंड बनाने का भी ऐलान किया है। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी फसलों को एमएसपी के अंतर्गत लाया जाएगा।

गांवों में ही किसानों को मिलेगा उपज का बाजार
देश में 86 प्रतिशत से ज्यादा छोटे या सीमांत किसान हैं। इनके लिए मार्केट तक पहुंचना आसान नहीं है। इसलिए सरकार इन्हें में ध्यान रखकर इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करेगी। इसके लिए सरकार 22 हजार ग्रामीण हॉट को ग्रामीण कृषि बाजार में बदलेगी। 2,000 करोड़ से कृषि बाजार और संरचना कोष का गठन होगा। ई-नैम को किसानों से जोड़ा गया है, ताकि किसानों को उनकी उपज का ज्यादा मूल्य मिल सके। 585 EMPC को ई-नैम के जरिए जोड़ा जाएगा। यह काम मार्च 2019 तक ही खत्म हो जाएगा।कृषि उत्पादों के निर्यात को 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी सरकार ने रखा है। पीएम कृषि सिंचाई योजना के तहत हर खेत को पानी उपलब्ध कराने की योजना चलाई जा रही है. इसके तहत सिंचाई के पानी की कमी से जूझ रहे 96 जिलों को चिन्हित कर 2,600 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। 

पशुपालन और मत्य क्षेत्र के विकास के लिए फंड
केंद्र सरकार ने कृषि के साथ ही किसानों की आय को बढ़ाने वाले दूसरे साधनों को प्रोत्साहित करने का फैसला किया है। सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये से पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्टर विकास और फिशरीज डेवलपमेंट फंड बनाने का ऐलान किया है। इस फंड से पशुपालन और मत्य पालन में लगे किसानों को ऋण दिया जाएगा। 1290 करोड़ रुपये से राष्ट्रीय बांस मिशन का गठन किया जाएगा। कृषि क्षेत्र को संस्थागत ऋण का आवंटन 2018-19 में बढ़ा कर 11 लाख करोड़ रुपये किया गया है। बड़ी संख्या में किसान कृषि लोन की सुविधा से वंचित रह जाते हैं, ज्यादातर ये बंटाईदार होते हैं और इन्हें बाजार से कर्ज लेना पड़ता है। वित्त मंत्री ने अनुसार नीति आयोग ऐसी व्यवस्था बना रहा है कि ऐसे किसानों को कर्ज लेने में सुविधा मिले।

खाद्य प्रसंस्करण का बजट दोगुना किया
देश में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में विकास पर मोदी सरकार का फोकस है, क्षेत्र 8 प्रतिशत वार्षिक की दर से वृद्धि कर रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए खाद्य प्रसंस्करण का बजट दोगुना कर दिया गया है। 42 मेगा फूड पार्क बनाने का भी प्रावधान किया गया है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से देश की बागडोर संभाली है, किसानों के हित में कई फैसले लिए हैं। एक नजर डालते हैं उन योजनाओं पर।

मोदीराज में सशक्त हुआ किसान, दूध उत्पादन से बढ़ने लगी आमदनी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार की योजनाओं का ही असर है कि इस साल वर्ष 2016-17 के दौरान देश में दूध उत्‍पादन में वर्ष 2013-14 के मुकाबले 20.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद दूध उत्‍पादन की वृद्धि दर वर्ष 2014-15 में 6.3 प्रतिशत, वर्ष 2015-16 में 6.3 प्रतिशत और वर्ष 2016-17 में 6.4 प्रतिशत रही है। अत: पिछले तीन वर्षों के दौरान दूध उत्‍पादन की वृद्धि दर उच्‍च स्‍तर पर बरकरार रही है। जहां तक सीजनल अनुमान का सवाल है, कुल दूध उत्‍पादन वर्ष 2016-17 (ग्रीष्‍म) के 51.33 मिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2017-18 (ग्रीष्‍म) में 53.77 मिलियन टन के स्‍तर पर पहुंच गया है, जो 4.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। वर्ष 2017-18 के ग्रीष्‍म सीजन के दौरान प्रथम पांच सर्वाधिक दूध उत्‍पादक राज्‍यों में उत्तर प्रदेश, राजस्‍थान, गुजरात, मध्‍य प्रदेश और आंध्र प्रदेश शामिल हैं।

पहली बार 10 करोड़ टन तक पहुंच सकता है गेहूं उत्पादन
केंद्र सरकार की योजनाओं का ही असर है कि इस साल 2017-18 के फसल वर्ष (जुलाई से जून) के दौरान देश में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 10 करोड़ टन तक पहुंचने की उम्मीद है। पिछले फसल वर्ष 2016-17 में गेहूं का रिकॉर्ड 9 करोड़ 83.6 लाख टन उत्पादन हुआ था। कृषि सचिव एसके पटनायक ने कहा, सरकार ने चालू फसल वर्ष में 9 करोड़ 75 लाख टन गेहूं की पैदावार का लक्ष्य रखा था, लेकिन रकबा बढ़ने और उपज में बढ़ोतरी होने से पैदावार पिछले साल से अधिक होने की संभावना है।

देश भर में किसानों को मिलेगी निर्बाध बिजली
खेती-किसानी में बिजली का अहम योगदान होता है, क्योंकि खेतों में ट्यूबबेल चलाने, सिंचाई के लिए बिजली जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात को बाखूबी समझते हैं। हालांकि किसानों के लिए बिजली की अलग फीडर लाइन पर पिछले डेढ़ दशक से चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी के दखल के बाद इस पर अमल की प्रक्रिया शुरू हो गई है। देश में “पीएम सहज बिजली हर घर योजना” लांच की गई है। इसका फायदा खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में होगा, लेकिन किसानों को बिजली का असली फायदा देने के लिए अब फीडर लाइन को अलग किया जाएगा। अलग बिजली फीडर होने से किसानों को बिजली सब्सिडी सीधे बैंक खाते में देने की व्यवस्था शुरू करने में भी काफी आसानी होगी। साथ ही किसानों को समय पर पर्याप्त बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित होगी।

10 करोड़ किसानों को मिला सॉयल हेल्थ कार्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि उत्पदकता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने के लिए केंद्र सरकार ने देश के सभी किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना चलायी है। सॉयल हेल्थ कार्ड में सॉयल हेल्थ सुधार और उसकी उर्वरता बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाने वाले पोषक तत्वों की उचित मात्रा की जानकारी के साथ खेतों की पोषण स्थिति पर किसानों को सूचना दी जाती है। इसके तहत अब तक 10 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। इससे 2015-16 की तुलना में वर्ष 2016-17 में खाद के उपयोग में 8 से 10 प्रतिशत की कमी और उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही मिट्टी के नमूनों की जांच में तेजी के लिए सरकार ने वर्ष 2011-14 (174 मृदा-परीक्षण प्रयोगशालाएं) की तुलना में वर्ष 2014-17 के दौरान 9,063 प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी गई।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का उद्देश्य ही यह है कि ‘हर खेत में पानी।‘ शायद ही इस कारण की जटिलता को पहले किसी और सरकार ने इस गंभीरता से समझा हो, जितना मोदी सरकार ने कि भारतीय खेती की सिंचाई संबंधी निर्भरता बहुत बड़े स्तर पर वर्षा पर है। वर्षा की अनिश्चितता सीधे तौर पर फसलों के उत्पादन को प्रभावित करती है, जिससे किसान का हित प्रभावित होता है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सिंचाई योजना इसी समस्या का सशक्त समाधान है।

प्रधानमंत्री कृषि कौशल योजना
किसी भी कार्य का व्यावसायिक तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण उस कार्य में प्रगति की संभावनाओं को कई गुना बढ़ा देता है। प्रधानमंत्री कृषि कौशल योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि से संबंधित विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान करवाना है। विशेषकर ऐसे युवाओं को, जो बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं अथवा खेती से विमुख हो रहे हैं। इस प्रशिक्षण द्वारा कुशल कामगारों को विकसित किया जाता है। इसके अंतर्गत पाठ्यक्रमों में सुधार करना, बेहतर शिक्षण और प्रशिक्षित शिक्षकों पर विशेष जोर दिया गया है। प्रशिक्षण में अन्‍य पहलुओं के साथ व्‍यवहार कुशलता और व्‍यवहार में परिवर्तन भी शामिल है।

नीम कोटेड यूरिया
किसानों के हितों को दूरदर्शितापूर्वक नीति प्रदान करते हुए मोदी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल की। सरकार ने सभी उर्वरक कंपनियों को सौ प्रतिशत नीम कोटेड यूरिया बनाने के दिशा-निर्देश जारी किए। नीम कोटिंग वाले यूरिया को बढ़ावा दिया गया है ताकि यूरिया के इस्तेमाल को नियंत्रित किया जा सके, फसल के लिए इसकी उपलब्धता बढ़ाई जा सके और उर्वरक की लागत कम की जा सके। घरेलू तौर पर निर्मित और आयातित यूरिया की संपूर्ण मात्रा अब नीम कोटिंग वाली है। किसान द्वारा सामान्यत प्रयोग किया जाने वाला यूरिये का अधिकांश भाग पौधों द्वारा उपयोग किए बिना ही नष्ट हो जाता है। इस यूरिया की विशेषता है- ट्राइंटपींस तथा डीनाइट्रीफाइंग तत्त्वों की अधिकता का होना। नीम कोटेड यूरिया मिट्टी में धीरे-धीरे समावेशित उसकी गुणवत्ता को बढ़ाना। साथ ही यूरिया की बार-बार होने वाली अनुपलब्धता व कालाबाजारी की समस्या समाप्त होना। यह सिर्फ खेती के लिए किसानों को ही मिल पाती है

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
किसानों के हित में बनने वाली किसी भी अन्य योजना के मुकाबले इस योजना का महत्त्व कई गुना अधिक इसलिए है, क्योंकि यह अन्य योजनाओं की समीक्षा कर, उसके गुण-दोषों की विवेचना के आधार पर बनाई गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों की फसल को प्राकृतिक आपदाओं के कारण पहुंची क्षति को प्रीमियम के भुगतान द्वारा एक सीमा तक कम किया जा सकेगा। इसके अंतर्गत 8,800 करोड़ रुपये खर्च होंगे, ताकि किसानों के प्रीमियम का भुगतान देकर एक सीमा तक कम किया जा सके। यह खरीफ और रबी की फसल के अतिरिक्त वाणिज्यिक और बागवानी फसलों को भी सुरक्षा प्रदान करेगी। खराब फसलों के विरूद्ध किसानों द्वारा दी जा रही बीमा की फसलों को बहुत नीचे रखा गया है।

सस्ता कर्ज उपलब्ध कराना
पहले की सरकारों द्वारा किसानों के लिए नीति के नाम पर कर्ज की ऐसी व्यवस्था की गई थी, जिसमें उन्हें नौ प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज मिलता था। मोदी शासन में ब्याज-दर को घटाकर केवल चार प्रतिशत कर दिया गया। सरकार इस स्कीम के अंतर्गत ब्याज का 5 प्रतिशत भाग किसानों को वापस करेगी। नए प्रस्ताव के अनुसार केंद्र सरकार किसानों के ब्याज में दो प्रतिशत की सब्सिडी देगी। सही समय पर कर्ज वापस करने वाले किसानों को ब्याज में 3 फीसदी की राहत अतिरिक्त रूप से दी जाएगी। इसमें 3 लाख तक के कर्ज की सुविधा भी दी गई है।

कृषि एप का लाभ
मौसम से जुड़ी सही-सही जानकारी को समय पर किसानों को उपलब्ध कराना इस योजना का उद्देश्य है। मौसम में बदलाव, वर्षा अथवा इस विषय से संबंधित सभी महत्वपूर्ण सूचनाएं इस एप पर उपलब्ध हैं।

ई-कृषि मंडी योजना
कड़ी से कड़ी मेहनत और उत्पादन का कोई लाभ नहीं, यदि किसान को उसके उत्पादन के सही दाम न मिलें। यही वह विषय है, जो पूरी कृषि-प्रक्रिया का सबसे संवेदनशील पक्ष है। बिचौलियों के वर्चस्व के चलते किसानों का हित हमेशा से प्रभावित होता रहा है। इसी समस्या के समाधान के तौर पर इ-कृषि मंडी योजना की रूपरेखा तय की गई, ताकि किसान अपनी उपज के सही दाम जानकर उसी पर फसल बाजार में बेच पाएं।

परंपरागत कृषि विकास योजना
परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) को लागू किया जा रहा है ताकि देश में जैव कृषि को बढ़ावा मिल सके। इससे मिट्टी की सेहत और जैव पदार्थ तत्वों को सुधारने तथा किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

भंडार गृह की सुविधा
किसानों द्वारा मजबूरी में अपने उत्पाद बेचने को हतोत्साहित करने और उन्हें अपने उत्पाद भंडार गृहों की रसीद के साथ भंडार गृहों में रखने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे छोटे और मझौले किसानों को ब्याज रियायत का लाभ मिलेगा, जिनके पास फसल कटाई के बाद के 6 महीनों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड होंगे।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) को सरकार उनकी जरूरतों के मुताबिक राज्यों में लागू कर सकेगी, जिसके लिए राज्य में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। राज्यों को उऩकी जरूरतों, प्राथमिकताओं और कृषि-जलवायु जरूरतों के अनुसार योजना के अंतर्गत परियोजनाओँ/कार्यक्रमों के चयन, योजना की मंजूरी और उऩ्हें अमल में लाने के लिए लचीलापन और स्वयत्ता प्रदान की गई है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम), केन्द्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत 29 राज्यों के 638 जिलों में एनएफएसएम दाल, 25 राज्यों के 194 जिलों में एनएफएसएम चावल, 11 राज्यों के 126 जिलों में एनएफएसएम गेहूं और देश के 28 राज्यों के 265 जिलों में एनएफएसएम मोटा अनाज लागू की गई है ताकि चावल, गेहूं, दालों, मोटे अऩाजों के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाया जा सके। एनएफएसएम के अंतर्गत किसानों को बीजों के वितरण (एचवाईवी/हाईब्रिड), बीजों के उत्पादन (केवल दालों के), आईएनएम और आईपीएम तकनीकों, संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकीयों/उपकणों, प्रभावी जल प्रयोग साधन, फसल प्रणाली जो किसानों को प्रशिक्षण देने पर आधारित है, को लागू किया जा रहा है।

राष्ट्रीय तिलहन और तेल मिशन कार्यक्रम
राष्ट्रीय तिलहन और तेल (एनएमओओपी) मिशन कार्यक्रम 2014-15 से लागू है। इसका उद्देश्य खाद्य तेलों की घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए तिलहनों का उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाना है। इस मिशन की विभिन्न कार्यक्रमों को राज्य कृषि/बागवानी विभाग के जरिये लागू किया जा रहा है।

बागवानी के समन्वित विकास के लिए मिशन
बागवानी के समन्वित विकास के लिए मिशन (एमआईडीएच), केन्द्र प्रायोजित योजना फलों, सब्जियों के जड़ और कन्द फसलों, मशरूम, मसालों, फूलों, सुगंध वाले वनस्पति,नारियल, काजू, कोको और बांस सहित बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 2014-15 से लागू है। इस मिशन में ऱाष्ट्रीय बागवानी मिशन, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए बागवानी मिशन, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, नारियल विकास बोर्ड और बागवानी के लिए केन्द्रीय संस्थान, नागालैंड को शामिल कर दिया गया है।

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