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विश्व दिव्यांग दिवस : मोदी सरकार ने जीता दिव्यांगों का भरोसा

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भारत में 2.68 करोड़ लोग दिव्यांगता की श्रेणी में आते हैं। इस आबादी को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार लगातार कोशिश कर रही है। मोदी सरकार दिव्यांगों को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण पर जोर दे रही है। उनके लिए नए-नए कार्यक्रम और योजनाएं तैयार कर रही हैं, जिससे मोदी सरकार उनका भरोसा जीतने में कामयाब रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 3 दिसंबर, 2015 को सुगम्य भारत अभियान की शुरुआत की। यह अभियान सामुदायिक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में दिव्यांगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है । इस योजना के तहत सार्वजनिक भवनों, स्थलों और परिवहन के साधनों को दिव्यांगों के अनुकूल बनाने पर जोर दिया गया है। जहां 31 दिसंबर, 2018 तक राज्यों में 1662 भवनों की सुगम्य लेखा परीक्षा पूरी की गई। वहीं  644 रेलवे स्टेशनों और 12,894 बसों को ऐक्सेसिबिलिटी फीचर से लैस किया गया। इसके अलावा सभी 34 इंटरनेशनल एयरपोर्ट और 48 डोमेस्टिक एयरपोर्ट पर दिव्यांगों के लिए आवश्यक सुविधाओं के प्रबंध किए गए, जिनमें रैम्प्स, ऐक्सेसिबल टॉयलेट्स, ब्रेल सिंबल और ऑडिटरी सिगनल्स की व्यवस्था शामिल है।

सरकारी सूचनाओं तक दिव्यांगों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार की 100 वेबसाइटों को सुगम्य बनाने का लक्ष्य है, जिसमें 94 वेबसाइटों को सुगम्य बनाया जा चुका है। 15 अगस्त, 2019 से निजी टीवी चैनलों पर दिव्यांगों के लिए साइन लैंग्वेज में लघु कार्यक्रम और हफ्ते में एक बार न्यूज बुलेटिन की शुरूआत की गई।

पीएम मोदी ने दिव्यांगों के लिए ‘अशक्त मित्र राज्य’ बनाने की अनोखी पहल की। इस योजना के अंतर्गत शुरूआत में 18 राज्यों को प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया। साथ ही देश के 58 शहरों को भी दिव्यांगों के अनुकूल बनाने का फैसला किया गया। मोदी सरकार देश में स्मार्ट सिटी का विकास कर रही है, जिसमें दिव्यांगों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया है। 

स्वच्छ भारत अभियान के तहत दिव्यांगों के लिए सुगम्य शौचालयों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। 8 सितंबर, 2019 तक देश में 15 लाख सुगम्य व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण किया गया है। सार्वजनिक स्थलों, विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों आदि में सुगम्य शौचालय की व्यवस्था की गई है। सुगम्य शौचलायों के निर्माण या सुधार की योजना में दिव्यांग व्यक्तियों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।

दिव्यांगों की शारीरिक कमजोरियों को दूर करने के लिए मनोचिकित्सा, फीजियोथेरेपी, सर्जिकल सुधार, उपचार, स्पीच थेरेपी की सुविधा दी जा रही है। 29 राज्यों में  416 मैगा कैंप या विशेष कैंपो के माध्यम से सहायक यंत्रों और उपकरणों का वितरण किया गया। पिछले पांच वर्षों में 80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगजनों को मोटर चालित तिपहिया साइकिल दी गई। साथ ही दिव्यांगों के लिए मोटर चालित तिपहिया साइकिल की पात्रता उम्र 18 साल से घटाकर 16 वर्ष की गई। जुलाई 2018 में दिव्यांगों की साइन लैंग्वेज में एकरूपता लाने के लिए 3000 शब्दों का एक शब्दकोश ‘दि इंडियन साइन लैंग्वेज’ लॉन्च किया गया।

मोदी सरकार ने मार्च 2019 में दिव्यांगों की सुविधा के लिए पहली बार 20 रुपये का सिक्‍का जारी किया। इसके अलावा 1 रुपये, 2 रुपये, 5 रुपये और 10 रुपये के नए सिक्‍के भी जारी किए गए। ये सिक्‍के दिव्‍यांगों के लिए खास है, क्योंकि इन सिक्‍कों को वे आसानी से पहचान सकते हैं।

सरकारी और सरकारी अनुदान पाने वाले शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों के लिए आरक्षण 3% से बढ़ाकर 4% किया गया। दिव्यांगता की श्रेणी में आने वाले 6 से 18 वर्ष के विद्यार्थियों की मुफ्त शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित किया गया। ऑटिज्म से परेशान छात्रों को घर से परीक्षा देने की सुविधा उपलब्ध करायी गई । नेत्रहीन छात्रों को कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए कीबोर्ड में बदलाव किया गया, ताकि कंप्यूटर के क्षेत्र में रोजगार मिल सके। 

21 मार्च, 2015 को दिव्यांगों के कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना शुरू की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने 38 लाख दिव्यांगों को लक्ष्य बनाकर राष्ट्रीय कौशल नीति पेश की। दिव्यांगों के लिए कौशल परिषद (ScPWD) बनायी गयी है, जो कौशल नीति तैयार करती है। 31 अक्टूबर, 2019 तक दिव्यांगों को कौशल प्रशिक्षण देने के लिए 266 संगठनों को सूचीबद्ध किया गया। कौशल प्रशिक्षण से दिव्यांगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। पिछले 5 वर्षों में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में दिव्यांगों के लिए रोजगार के मौकों में सुधार आया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से और मुलाकात कर दिव्यांग खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की है। वहीं दिव्यांग खिलाड़ियों की खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए मोदी सरकार ने फरवरी 2019 में देश में पांच दिव्यांग स्पोर्टस कॉम्प्लेक्स बनाने की मंजूरी दी। ये खेल केंद्र मेघालय, ग्वालियर, चंडीगढ़, जीरकपुर (पंजाब) और विशाखापट्टनम में बनाये जा रहे हैं। इन केंद्रों पर विश्व के अग्रणी देशों के बराबर आधुनिक प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी।

मोदी सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए अवसर और सुविधाओं का लाभ दिव्यांगों को मिल रहा है, जिससे उनमें आत्मविश्वास पैदा हुआ है। अब वे जीवन के सभी क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। वहीं मोदी सरकार उनकी जरूरतों को लेकर काफी सजग है। इसलिए नए अनुसंधान और तकनीकी विकास पर जोर दे रही है। 

 

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