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रेलवे में 4 लाख कर्मचारियों की होगी बंपर बहाली , सामान्य वर्ग का आरक्षण भी होगा लागू

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रोजगार के क्षेत्र में मोदी सरकार ने ऐतिहासिक वेकेंसी का एलान किया है।    केंद्र सरकार रेलवे में 4 लाख लोगों को नौकरी देने जा रही है। केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को इसकी घोषणा की। इन पदों के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए हाल ही में सुनिश्चित किया गया 10 प्रतिशत का कोटा भी लागू होगा। रेलवे 2.25-2.50 लाख अतिरिक्त वेकैंसी निकालेगा, जबकि 1.5 लाख लोगों की भर्ती का काम पहले से ही चल रहा है। पीयूष गोयल ने कहा, ‘2.25-2.50 लाख लोगों को और अधिक मौका मिले, 1.50 लोगों की भर्ती का काम चल रहा है। एक प्रकार से 4 लाख नई नौकरियां रेलवे अकेले देने जा रहा है, जिसमें 1.50 की प्रोसेस बहुत आगे बढ़ चुकी है, करीब 2-2.5 महीने में प्रोसेस खत्म हो जाएगा।’ रेलवे भर्ती के पहले चरण में 31 हजार 428 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन फरवरी या मार्च में जारी करेगा, जबकि दूसरे चरण में 99 हजार पदों पर भर्ती के लिए मई-जून 2020 में नोटिफिकेशन जारी किए जाएंगे। 

ईपीएफओ की रिपोर्टः पिछले साल नवंबर में 7.32 लाख लोगों को मिला रोजगार

देश भर में नवंबर, 2018 में 7.32 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ। यह आंकड़ा नवंबर, 2017 के मुकाबले 48 फीसदी (4.93 लाख) अधिक है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के मुताबिक, पिछले 15 महीनों में नवंबर के दौरान सबसे ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा हुए।

मोदी सरकार की नीतियों और योजनाओं की वजह से पिछले साढ़े चार वर्षों में देश में रोजगार के करोड़ों मौके पैदा हुए हैं। आइए एक नजर डालते हैं रोजगार सृजन पर-

मुद्रा लोन ने 3 साल में 13 करोड़ लोगों को दिए रोजगार

8 अप्रैल, 2015 को शुरू किया गया मुद्रा लोन योजना आज देश में सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए रोजगार ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास भी लेकर आया है। सिर्फ सरकारी आंकड़ों की बात की जाए तो जब से यह योजना शुरू हुई है, तब से 13 करोड़ नए ऋण दिए गए हैं। आ्रर्थिक अंग्रेजी अखबार Financial Express की एक दिसंबर की खबर के मुताबिक पिछले तीन साल में इस योजना से 13 करोड़ रोजगार का सृजन हुआ। इस योजना के तहत सरकार ने 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का लोन दिया गया है। इसमें 55 प्रतिशत से ज्यादा लाभार्थी SC/ST और OBC कैटेगरी से हैं। खास बात ये है कि 13 करोड़ लोगों में से 28 प्रतिशत यानी सवा तीन करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने पहली बार लोन लिया है। एक और विशेष बात ये है कि इनमें से 75 प्रतिशत यानी 9 करोड़ लाभार्थी महिलाएं हैं।

स्किल डेवलपमेंट से 2.5 करोड़ लोगों को रोजगार

15 जुलाई, 2015 को शुरू की गई मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना स्किल डेवलपमेंट मिशन ने युवाओं की किस्मत बदलने का काम किया है। Skill Development and Entrepreneurship (MSDE) मंत्रालय के अंतर्गत साल 2017 तक ही 2.5 करोड़ युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके थे, जिनमें से एक करोड़ तो सिर्फ 2017 में ही प्रशिक्षित हुए थे। Skill Development के लिए युवाओं को घर से अधिक दूर नहीं जाना पड़े, इसके लिए सरकार ने 2017 तक 27 राज्यों के 484 जिलों में 527 प्रधानमंत्री कौशल केंद्र बनाए थे। जो युवा Long Term Training करना चाहते हैं, उनके लिए उनकी आवश्यकता के अनुरूप भी व्यवस्था की गई है।

2017 तक कुल 13,912 ITI स्थापित की गई। मात्र पिछले वर्ष ही इनकी Seating Capacity 77,040 बढ़ाकर कुल 22.82 लाख कर दी गई। 2017 में ITI Ecosystem से 12.12 लाख युवाओं को प्रशिक्षण का अवसर मिला। सरकार ने अब इस स्कीम की सफलता को देखते हुए वर्ष 2020 तक 1 करोड़ युवाओं के कौशल विकास का लक्ष्य रखा है। साथ ही, सरकार इसमें 12 हजार करोड़ रुपये का निवेश भी करेगी।

मेक इन इंडिया’ से 2020 तक 10 करोड़ रोजगार 

देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 सितंबर, 2014 को ‘मेक इन इंडिया’ योजना की शुरुआत की थी। यह योजना रोजगार के क्षेत्र में क्रांति लाने की ताकत रखती है। ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए 2020 तक 10 करोड़ नए रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य है।

सड़कपोत परिवहनजल संसाधन विभागों में पैदा हुए 1 करोड़ रोजगार

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, उनके मंत्रालयों की परियोजनाओं से चार साल में रोजगार के एक करोड़ से अधिक अवसर सृजित हुए हैं। उनके अधीन आने वाले विभागों ने मई 2014 में एनडीए सरकार आने के बाद से एक करोड़ युवाओं को रोजगार दिया है। नितिन गडकरी के पास सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग, पोत परिवहन और नदी विकास एवं गंगा संरक्षण जैसे अहम मंत्रालय हैं। 

टेक्सटाइल सेक्टर में 10 करोड़ लोगों को मिलेगा रोजगार

मोदी सरकार ने 300 से अधिक टेक्सटाइल प्रोडक्ट पर इंपोर्ट ड्यूटी दोगुनी करने का फैसला किया। सरकार ने टेक्सटाइल उत्पादों के आयात पर शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया। सरकार के इस फैसले से घरेलू कपड़ा उद्योग को मजबूती मिलेगी और इससे देश में टेक्सटाइल सेक्टर में 10 करोड़ रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

रोजगार सृजन के मामले में मोदी सरकार ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

प्रधानमंत्री मोदी को आज पूरी दुनिया एक ग्लोबल लीडर के तौर पर जानती है, लेकिन रोजगार को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, उसने भी दुनिया के लिए नजीर पेश की है। रेलवे में चाहे दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी भर्ती का वर्ल्ड रिकॉर्ड हो या फिर मुद्रा योजना, स्टार्ट अप और स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रम के तहत करोड़ों लोगों को रोजगार देना हो, मोदी सरकार की नीतियां युवाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।

पर्यटन को बढ़ावा देने से 1.46 करोड़ लोगों को मिला रोजगार

पर्यटन के क्षेत्र में पिछले चार वर्षों में 1.46 करोड़ रोजगार के अवसर मिले हैं। पर्यटन मंत्रालय अब पूर्वोत्तर के राज्यों के प्रति पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रचार गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जैसे मेघालय में एशिया के सबसे बड़े गुफा वाले नेटवर्क के प्रचार पर ध्यान दिया जा रहा है। पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक, विदेशों में भारतीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने अमेरीका, यूरोपीय और चीन जैसे देशों में कई ‘अतुल्य भारत रोड शो’ आयोजित किए हैं।

हेल्थ और बीमा सेक्टर में सृजित हो रही हैं 10 लाख नौकरियां

मोदी सरकार की महात्वाकांक्षी स्कीम आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भी हेल्थ और इंश्योरेंस सेक्टर में नौकरियों के अपार मौके लाने वाली है। एक अनुमान के मुताबिक जितने बड़े स्तर पर इस योजना को शुरू किया गया है, उससे देशभर में स्वास्थ्य और बीमा क्षेत्र में 10 लाख रोजगार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसर सृजित हो रही हैं। आयुष्मान भारत योजना के सीईओ डॉ. इंदू भूषण के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस स्कीम से स्वास्थ्य और बीमा के क्षेत्र में 10 लाख नौकरियों का सृजन होगा। आपको बता दें कि इस योजना के तहत देश के दस करोड़ गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों यानि 50 करोड़ से अधिक लोगों को 5 लाख रुपये सालाना का हेल्थ कवर दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) से बने 6 करोड़ से ज्यादा रोजगार के अवसर

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) से देश में अब तक 6 करोड़ से ज्यादा रोजगार के अवसर बने हैं। आवास और शहरी मामलों के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि National Council of Applied Economic Research (एनसीएईआर) की रिपोर्ट के अनुसार, आवास क्षेत्र में निवेश किए गए प्रत्येक 1 लाख रुपये से अर्थव्यवस्था में 2.65 नए रोजगार के अवसर बन रहे हैं। इस आधार पर, पूरे देश में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी के जरिए अब तक कुल 6.07 करोड़ रोजगार के अवसर बने हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत एक करोड़ मकान बनाए जाने हैं। अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत मंजूर मकानों की संख्‍या 65.43 लाख से अधिक हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2022 तक देश के हर परिवार को घर देने का वादा किया है। 2022 तक सभी के लिए मकान सुनिश्चित करने के लक्ष्य को लेकर 25 जून, 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) शुरू की गई थी।

स्टार्ट-अप इंडिया से 1 लाख 17 हजार लोगों को रोजगार

भारत में दुनिया का बहुत बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित हो चुका है। 28 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 419 जिलों में 9, 750 स्टार्टअप पंजीकृत हुए हैं। सर्वे के मुताबिक एक स्टार्टअप में औसतन 12 लोगों को रोजगार मिलते हैं। यानि 1 लाख 17 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। 2013-14 में लगभग 68,000 ट्रेड मार्क रजिस्टर होते थे, लेकिन चार साल में ही अब ये आंकड़ा ढाई लाख से भी ऊपर पहुंच गया है। स्टार्ट-अप के तहत पेटेंट रजिस्ट्रेशन पूर्व के प्रति वर्ष चार हजार की तुलना में अब 11, 500 पेटेंट रजिस्टर हो रहे हैं। गौरतलब है कि चार साल पहले भारत में मोबाइल फोन बनाने वाली सिर्फ दो फैक्ट्रियां थीं, आज 120 फैक्ट्रियां मोबाइल बना रहीं हैं। विशेष बात यह है कि 45 प्रतिशत स्टार्टअप महिलाओँ द्वारा शुरू किए गए हैं।

IT सेक्टर में 39 लाख लोगों को रोजगार

NASSCOM के अनुसार भारत में आईटी कंपनियों में 39 लाख लोग वर्तमान में काम कर रहे हैं। इसी वर्ष भी एक लाख और लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे यह आंकड़ा 40 लाख हो जाएगा। NASSCOM का अनुमान है कि 2025 तक देश में आईटी क्षेत्र का कारोबार 350 करोड़ डॉलर का होगा और जिसमें 25 से 30 लाख और अधिक नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। इस वर्ष एक लाख नई नौकरियों के साथ ही देश के समग्र आईटी-बीपीओ उद्योग का आकार 14-16 अरब डॉलर तक बढ़ जाएगा।

डिजिटल इंडिया के तहत 10 लाख रोजगार

डिजिटल इंडिया से युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर पैदा हुए हैं। 2014 में जहां देश में मात्र 83 हजार Common Services Centres (CSC) थे, मार्च 2018 तक उनकी संख्या 2 लाख 92 हजार तक पहुंच चुकी थी। इस समय देश में 1 लाख 83 हजार ग्राम पंचायतों तक डिजिटल सेवाएं उपलब्ध हैं। इन सेवाओं में बैंकिंग, बीमा, पेंशन, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और आधार आधारित दूसरी सुविधाएं भी शामिल हैं। इन केंद्रों में से 52 हजार केंद्र महिला उद्यमियों द्वारा संचालित हो रहे हैं और वहां 10 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। 

इसके अलावा, महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि 2014 में देश में मोबाइल फोन और उससे जुड़े Accessories बनाने के मात्र 2 यूनिट कार्य कर रहे थे। सिर्फ 3 वर्षों में यह संख्या बढ़कर 120  तक पहुंच गई। इनमें से अकेले मोबाइल हैंडसेट बनाने की आज 59 यूनिट काम कर रही हैं।  सिर्फ इस क्षेत्र ने देश में मात्र 3 वर्षों में ही साढ़े 4 लाख रोजगार का अवसर सृजित किया है।

2018 में जनवरी से जून के बीच आईटी क्षेत्र में हुई रिकॉर्ड भर्ती

Times Jobs RecruiteX Biannual की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई, 2018 में भारतीय बाजार में भर्ती गतिविधियों में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जनवरी-जून, 2018 के मध्य आईटी सेक्टर में बंपर भर्तियां हुई हैं। इस रोपोर्ट के मुताबिक खुदरा क्षेत्र में 19%, हेल्थकेयर/फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर में 10%, बीएफएसआई में 9%, एफएमसीजी में 7% और बीपीओ/आईटी 5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही ऑटोमोबाइल और इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में इस वर्ष की पहली छमाही में नौकरियों में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक आईटी उद्योग में पिछले 3 वर्षों में जनवरी-जून की समीक्षा अवधि के मुकाबले इस वर्ष सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है। भारत में शीर्ष आईटी कंपनियों टीसीएस, कॉग्नीजेंट, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीस ने जून, 2018 में बड़ी संख्या में आईटी प्रोपेशनल्स को भर्ती किया है। आईटी कंपनियों में यह भर्ती पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है।

पीएम रोजगार प्रोत्साहन योजना से 61 लाख लोगों को रोजगार

मोदी सरकार द्वारा वर्ष 2016-17 में रोजगार सृजन की दिशा में शुरू की गई प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत अब तक 61.12 लाख को रोजगार मिला है। इस योजना के तहत सर्वाधिक 11.07 लाख रोजगार सृजन महाराष्ट्र में दर्ज किया गया है। जबकि छत्तीसगढ़ में 59,164, मध्य प्रदेश में 1,81,825, हरियाणा में 5,12,317 और दिल्ली में 3,71,122 लोगों को इस योजना का लाभ गत 25 जुलाई तक दिया जा चुका है। इसी प्रकार देश के अन्य राज्यों में इस योजना के तहत रोजगार का तेजी के साथ सृजन किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसके तहत ईपीएफ और ईपीएस देने हेतु नियोक्ताओं को भी अंशदान के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

अक्षय ऊर्जा क्षेत्र ने 2017 में दिया 4.3 लाख लोगों को रोजगार

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आर्थिक परिदृश्य बदलने से रोजगार के बंपर मौके भी बन रहे हैं। मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में साल 2017 में 4.32 लाख लोगों को रोजगार मिला। रिपोर्ट के अनुसार भारत के हरित ऊर्जा क्षेत्र में 2016 में 3.85 लाख रोजगार के अवसर बने थे, 2017 में यह आंकड़ा 12 प्रतिशत बढ़कर 4.32 लाख हो गया। भारत ने मई 2018 तक 69 गीगावॉट संचयी अक्षय ऊर्जा की क्षमता प्राप्त कर ली है। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को अप्रैल 2014 से सितंबर 2016 तक गैर पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में 1.77 बिलियन डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ।

राजमार्ग योजना से 15 करोड़ श्रम दिवसों का रोजगार

प्रधानमंत्री मोदी की सरकार बनने के बाद से देश में राजमार्गों के निर्माण कार्यों में तेजी आई है। आज राजमार्ग के साथ-साथ रोजगार के भी अवसरों की भरमार है। 83 हजार किलोमीटर के राजमार्गों के निर्माण और चौड़ीकरण की योजना को लागू करने के लिए 7 लाख करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी गई है । इस योजना के साथ 15 करोड़ श्रम दिवसों का रोजगार युवाओं को मिल रहा है।

दीन दयाल कौशल्य योजना से साढ़े तीन लाख रोजगार

दीन दयाल ग्रामीण कौशल्य योजना में 7 लाख 88 हजार लोगों को प्रशिक्षित करने के लक्ष्य के तहत 5 लाख 70 हजार लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इनमें से 3 लाख 48 हजार से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है।

योग बना रोजगार और करियर का बड़ा क्षेत्रभारत आज योग के ब्रांड के रूप में उभरकर सामने आया है और देश-विदेश में रोजगार के लिए भी एक बड़ा क्षेत्र बन गया है। एसोचैम की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में करीब 20 करोड़ लोग योग सीख रहे हैं। भारत में योग ट्रेनिंग का कारोबार लगभग 2.5 हजार करोड़ रुपये का हो चुका है। इसमें योग शिविर, कॉरपोरेट्स कंपनियों को दी जाने वाली ट्रेनिंग और प्राइवेट ट्रेनिंग शामिल है। योग टीचर प्रति घंटे 400 से लेकर 1500 रुपये तक की फीस लेते हैं। रुपये से हिसाब लगाएं तो अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में योग गुरु 3 से 5 घंटे के योग सेशन की फीस 2 से 3 लाख के बीच वसूलते हैं।

मीडिया और मनोरंजन उद्योग में 7-8 लाख रोजगार

Confederation of Indian Industries (CII) और ग्लोबल मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी Boston Consulting Group (BCG) की रिपोर्ट से यह अनुमान सामने आया है कि आने वाले पांच वर्षों में भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में सात से आठ लाख नौकरियां निकलने जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में मीडिया और मनोरंजन की सामग्रियों को लेकर रुझान काफी बढ़ा है जिसके चलते इस सेक्टर में रोजगार के अवसर काफी बढ़ने वाले हैं।

साल 2018 में सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय ने रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए। एक नजर कुछ ऐसी पहलों पर भी..

रोजगार सृजन मदद के लिए नेशनल करियर सर्विस

नेशनल करियर सर्विस- एनसीएस- परियोजना नियोक्ताओं, प्रशिक्षकों और बेरोजगारों को एक मंच पर लाती है। 31 नवंबर, 2018 तक इस पोर्टल पर रोजगार चाहने वाले लोगों की संख्या 98,92,350 और रोजगार देने वाले सक्रिय नियोक्ताओं की संख्या 9822 दर्ज की गई। एनसीएस ने डाक विभाग से साथ पोस्ट ऑफिस के माध्यम से नौकरी चाहने वालों के पंजीकरण के लिए भागीदारी की है। युवाओं की रोजगार के अवसरों तक पहुंच और जानकारी उपलब्ध कराने के लिए शीर्ष नौकरी पोर्टलों, प्लेसमेंट संगठनों और प्रसिद्ध संस्थानों के साथ रणनीतिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गये हैं। सरकार ने हाल ही में सरकारी नौकरियां एनसीएस पोर्टल पर पोस्ट करना जरूरी कर दिया है।एनसीएस रोजगार मैचिंग, करियर सलाह और कौशल विकास पाठ्यक्रमों, एप्रैंटिसशिप और इंटर्नशिप आदि के बारे में जानकारी उपलब्ध कराता है। एनसीएस के पास 52 क्षेत्रों में 3600 से अधिक नौकरियों के बारे में नौकरी से संबंधित जानकारी का समृद्ध भंडार उपलब्ध है। एनसीएस पोर्टल नौकरी मेलों को आयोजित करने में भी सहायता प्रदान करता है, जहां नियोक्ता और नौकरी की तलाश करने वाले आपस में बातचीत कर सकते हैं।

मॉडल करियर केंद्र

सरकार ने 107 मॉडल करियर केंद्र स्थापित किए हैं, जिन्हें राज्यों और अन्य संसाधनों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इन केंद्रों में विभिन्न सुविधाएं प्रदान कराने के लिए पर्याप्त सुविधाएं और बुनियादी ढांचा उपलब्ध किया गया है। इन्हें राज्यों द्वारा अन्य स्थलों पर भी स्थापित किया जा सकेगा। इसके अलावा, 1.50 लाख से अधिक सामान्य सेवा केंद्र दूरदराज के स्थानों में एनसीएस की पहुंच का विस्तार करने में मदद करते हैं। 

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के बारे में सर्वेक्षण

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के तहत जुटाये गये रोजगारों का अनुमान लगाने के लिए सर्वेक्षण करने का कार्य श्रम ब्यूरो को सौंपा गया। पीएमएमवाई सर्वेक्षण से संबंधित तकनीकी विवरण को अंतिम रूप देने के बाद सर्वेक्षण का काम पूरा कर डाटा एंट्री का कार्य प्रगति पर है।

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