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मोदी सरकार ने लांच की दुनिया की सबसे बड़ी स्‍वास्‍थ्य बीमा योजना

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वित्तमंत्री अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘न्‍यू इंडिया का बजट’ पेश किया। वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में स्वास्थ्य को खास जगह देते हुए कई बड़े ऐलान भी किए। इस बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ का ऐलान किया। इस योजना के तहत अब 10 करोड़ गरीब परिवारों के लिए सालाना 5 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा का ऐलान किया गया। श्री जेटली ने कहा, ‘अब हम देश के 10 करोड़ गरीब परिवारों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना शुरू कर रहे हैं। यह योजना लगभग 50 करोड़ लाभार्थियों को अस्पताल में द्वितीय एवं तृतीय दर्जे की देखभाल के लिए प्रति परिवार 5 लाख रुपये प्रति वर्ष तक उपलब्ध कराएगी।’ इस तरह देश के सवा सौ करोड़ लोगों में से करीब 40 प्रतिशत लोगों को हर साल 5 लाख रुपये तक के इलाज पर अपने पैसे खर्च नहीं करने होंगे।

श्री जेटली ने कहा कि हम गरीब और दुखी परिवारों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये की सहायता दे सकें। यह विश्व का सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा। अस्पातल में भर्ती के लिए यह सुनिश्चित करेंगे इस कार्यक्रम को पूरी तरह से पूरा किया जा सके।’ वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि एक स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ देश का निर्माण कर सकता है। स्वास्थ्य बीमा का ऐलान करते हुए वित्तमंत्री जेटली ने कहा कि सरकार गरीबों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है। इस नई हेल्थ बीमा में गरीबों को अस्पताल में भर्ती होने की सूरत में बीमा कवरेज दिया जाएगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि देश भर में पांच लाख नए स्वास्थ्य केंद्र बनाए जाएंगे। श्री जेटली ने टीबी के मरीजों के लिए भी बड़ा ऐलान किया। टीबी के रोगियों को पोषक पदार्थ मुहैया कराने के लिए 600 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, इस स्कीम के तहत टीबी मरीज को हर महीने 500 रुपए दिए जाएंगे। इसके साथ ही हेल्थ वेलनेस केंद्र बनाने पर 1200 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि हम हेल्थ पॉलिसी को एक मिशन के रूप में अपना रहे हैं। उन्होंने बजट में ‘आयुष्मान भारत’ प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा की। इसके तहत देशभर में 1.50 लाख हेल्थ सेंटर बनाकर दवा और जांच की मुफ्त सुविधा दी जाएगी। उन्होंने 24 नए मेडिकल कॉलेज खोलने का भी ऐलान किया। वित्त मंत्री ने कहा कि तीन संसदीय क्षेत्र पर एक मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की लोगों को मुफ्त दवाईयां देने की योजना है। श्री जेटली ने कहा कि तीन हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों में 800 से ज्यादा दवाइयां मुफ्त वितरित किए जा रहे हैं।

बजट में नए भारत के लिए आयुष्मान भारत 2022 के साथ दो महत्तवपूर्ण पहलों की घोषणा की गई। ये पहल निम्न हैं-

स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्र- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की नींव के रूप में स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्रों की परिकल्पना की गई है। ये 1.5 लाख केंद्र स्वास्थ्य देखरेख प्रणाली को लोगों के घरों के पास लाएंगे। ये स्वास्थ्य केंद्र असंचारी रोगों और मातृत्व तथा बाल स्वास्थ्य सेवाओं सहित व्यापक स्वास्थ्य देखरेख उपलब्ध कराएंगे। ये केंद्र आवश्यक दवाईयां और नैदानिक सेवा भी मुफ्त उपलब्ध कराएंगे। इस महत्त्वपर्ण कार्य के लिए 1200 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। इन केंद्रों को अपनाने के लिए सीएसआर और लोकोपकारी संस्थाओं के जरिए निजी क्षेत्र को आमंत्रित किया गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना- आयुष्मान भारत के तहत इन दुर्गामी पहलों के तहत 10 करोड़ से अधिक गरीब एवं कमजोर परिवारों (लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) को दायरे में लाने के लिए एक फ्लेगशिप राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना शुरू की जाएगी जिसके तहत द्वितीय और तृतीय देखरेख अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति परिवार 5 लाख रूपये प्रति वर्ष तक का कवरेज प्रदान किया जाएगा। यह विश्व का सबसे बड़ा सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य देखरेख कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम के सूचारू कार्यान्वयन हेतु पर्याप्त धन राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत के तहत ये दो स्वास्थ्य क्षेत्र की पहल नए भारत वर्ष 2022 का निर्माण करेंगी और उनसे समबर्धित उत्पादकता, कल्याण में वृद्धि होगी और इनसे मजदूरी की हानी और दरिद्रता से बचा जा सकगा। इन योजनाओं से विशेष कर महिलाओं के लिए रोजगार के लाखों अवसर सृजित होंगे।

वित्त मंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य देखरेख की पहुंच में वृद्धि करने के उद्देश्य से देश में मौजूदा जिला अस्पतालों को अपग्रेड करके 24 नए सरकारी चिकित्सा कॉलेजों और अस्पतालों की स्थापना की जाएगी। इस कदम से सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक 3 संसदीय क्षेत्रों के लिए कम से कम एक चिकित्सा कॉलेज और देश के प्रत्येक राज्य में कम से कम एक सरकारी चिकित्सा कॉलेज उपलब्ध हो।

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