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नोटबंदी के बाद देश भर के लोगों के लिए मिसाल बन गई ये शादियां

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फिल्म सौतन में एक गाना है ‘शायद मेरी शादी का ख्याल दिल में आया है, इसीलिए मम्मी ने मेरी तुम्हें चाय पर बुलाया है।’ यह गीत तीन दशक पुरानी है लेकिन नोट बंदी के बाद यह शादी के ख्याल से बढ़कर शादी संपन्न होने तक पहुंच गया है।

दरअसल, नोट बंदी के फैसले के बाद, देश में जो माहौल बना, उससे ऐसा लग रहा था कि इन 50 दिनों में होने वाली शादियां कैसे होगी? क्योंकि भारत में शादियों बहुत सारे खर्च हैं जिसमें नकदी नोटों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है, चाहे गीत-संगीत हो, मेंहदी रस्म हो या तिलक, सजावट, मेहमानों की चहल-पहल के साथ-साथ कई व्यजंनों के साथ दावत। नोट बंदी के बाद ये काम मुश्किल लगने लगा।

ऐसे में, देश के नौजवानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोट बंदी वाले फैसले को शत प्रतिशत सही माना। लोगों ने इन दिनों तय हो चुकी शादियों को संपन्न करने के लिए नए तरीके अपनाए, जो देश के सामने एक मिसाल बनकर सामने आया।

सूरत में चाय-पानी पर हुई शादी

गुजरात के सूरत में 17 नवंबर, 2016 को एक शादी हुई। इस शादी का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में 27 नवंबर, 2016 को किया। इसके बाद वह शादी देशभर में चर्चा का विषय बन गया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मैंने चुनावों के दौरान ‘चाय पर चर्चा’ की बात कहा करता था, लेकिन मुझे नहीं पता था कि ये संदेश शादी हॉल तक पहुंच जाएगा। सूरत में एक जोड़े ने चाय पर ही शादी कर ली।

चाय और पानी पर शादी करने वाली सूरत की दुल्हन रक्षा ने कहा, ‘मैं बहुत खुश हूं कि हमारा संदेश पीएम मोदी तक पहुंच गया। जिस चाय पे मोदी जी चर्चा करते हैं, मैंने उससे अपनी नई जिंदगी शुरू की। इसमें हमारे केवल 500 रुपए खर्च हुए।‘ रक्षा ने बताया कि नोटबंदी की घोषणा से हम सब तनाव में थे, मगर परिस्थिति को देखते हुए हमने बजट में काफी कटौती करते हुए मेहमानों को केवल चाय और पानी देने का निर्णय लिया।

वाराणसी में चाय व रसगुल्ले पर हुई शादी

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में एक जोड़े ने नोटबंदी का समर्थन करते हुए मेहमानों को सिर्फ चाय, समोसे और रसगुल्ले खिलाकर शादी की। काशी की रहने वाली रिचा और राज की शादी 27 नवंबर को होनी थी। उन्होंने माना कि नोट बंदी का फैसला देशहित में है। उन्होंने कहा कि इस फैसले पर प्रत्येक नागरिक को प्रधानमंत्री का साथ देना चाहिए।

उन्होंने बताया कि शादी का न्योता महंगे कार्ड के बजाय हल्दी और सुपारी से दिया। शादी के लिए गेस्ट हाउस के बजाय लक्ष्मी कुंड जैसे सार्वजनिक स्थल चुना मेहमानों को लजीज व्यंजन की जगह चाय, समोसे और रसगुल्ले परोसे गए।

रिचा के दूल्हा बने राज ने कहा कि अगर मेरे और रिचा के परिवार वाले ढाई-ढाई लाख रुपए निकाल लेते तो कैश किल्लत से जूझ रहे लोगों को बैंक से मायूस होकर जाना पड़ता। ये पैसे दो हजार रुपए के हिसाब से 250 जरूरतमंदों के काम आए होंगे।

रतलाम में हुई एक हजार रुपए में शादी

मध्य प्रदेश के रतलाम में दो परिवारों ने कोर्ट मैरिज का सहारा लिया। नोटबंदी के दौर में लक्कड़पीठा के रहने वाले कपिल राठौर और सिलावटों का वास क्षेत्र की रहने वाली अंतिमबाला ने महज एक हजार रुपए में शादी कर मिसाल पेश की। हालांकि कोर्ट मैरिज करने के लिए दूल्हा-दुल्हन को खुद ही अपने परिवारों को मनाना पड़ा। शादी के बाद कलिका माता मंदिर पहुंचकर देवी मां का आशीर्वाद लिया और रिश्तेदारों का चाय पिलाकर मुंह मीठा करवाया।

बिहार के कटिहार में मात्र ₹1100 में हुई शादी

योगेंद्र साहनी ने अपनी बेटी सरस्वती की शादी अपने ही गांव के रहने वाले मुंशी साहनी के बेटे राजाकुमार से तय की थी। योगेंद्र साहनी चाहते थे कि बेटी की शादी धूमधाम से करें पर नोटबंदी की वजह से वह परेशान थे। इसकी जानकारी होने वाले समधी को हुई। उन्होंने योगेंद्र साहनी को सलाह दी कि वह शादी पर कोई खर्च न करें और ऐसा करने पर उन्हें या उनके बेटे को कोई परेशानी नहीं होगी।

तय तिथि के अनुसार राजकुमार साहनी बारात लेकर सरस्वती के घर पहुंचे। बिना किसी तड़क-भड़क या तामझाम के दोनों ने शादी की। इस शादी में बारातियो को सिर्फ एक-एक कप चाय और लड्डू खिलाया गया जिस पर कुल मिलाकर खर्च 1100 रुपए आया। गौरतलब है कि राजकुमार और सरस्वती के विवाह को किसी पंडित ने संपन्न नहीं कराया बल्कि दोनों ने खुद अग्नि को साक्षी मानकर एक-दूसरे से शादी कर ली।

बुलंदशहर में हुई चाय पर शादी

बुलंदशहर जिले के जहांगीराबाद इलाके में एक कप चाय पर शादी हुई। गांव जलीलपुर के विजेंद्र सिंह के बेटे दिनेश की शादी जेपी नगर की वीना से हुई। शादी में आए मेहमानों को दावत की जगह चाय पिलाई गई। दुल्हे दिनेश कुमार का कहना है कि पैसा नहीं था तो यही सही। बैंकों की लाइन में कई दिन लगने के बाद भी जब पैसे नहीं मिले तो मोदी जी की चाय पर चर्चा ध्यान में आया और चाय वाली शादी का आइडिया आया। दूल्हे ने बताया कि उन्होंने लड़की पक्ष के लोगों से केवल चाय की डिमांड की। बस फिर क्या था, लड़की पक्ष के लोगों ने बरातियों का स्वागत चाय से किया। चाय वाली इस अनोखी शादी को देखने के लिए पूरे जलीपुर गांव के वाशिंदे मंदिर आए थे।

सादगीपूर्ण तरीके से दो आईएएस शादी के बंधन में बंधे

मध्य प्रदेश के भिंड में दो आईएएस अधिकारियों आशीष वशिष्ठ और सलोनी ने कोर्ट में शादी की। इस शादी में कोई खर्च हुआ ही नहीं। आशीष और सलोनी दोनों एक ही बैच के अधिकारी हैं। उन्होंने कोर्ट में शादी का फ़ैसला करके बेवजह के तामझाम से दूर रहने का इरादा बनाया।

आशीष कहते हैं, ‘खर्च इसलिए नहीं हुआ कि हमने कोर्ट में शादी की है। मैं यहां नौकरी कर रहा हूं, एसडीएम हूं। हम लोग यहां पर आए। कोर्ट में गए और शादी कर ली. तो खर्च कैसे होगा?’ आशीष की पत्नी सलोनी आंध्र प्रदेश कैडर की अधिकारी हैं। आशीष का कहना है कि उनका इरादा नोटबंदी या किसी और मुद्दे पर कोई संदेश देने का नहीं था। वो व्यस्तता की वजह से शादी के लंबे कार्यक्रम के पक्ष में नहीं थे। फिर भी इससे अगर कोई संदेश जाता है तो अच्छा ही है।

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