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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की 10 कलंक कथा, जिसमें आज तक उन्होंने नहीं मांगी माफी

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इस देश के ‘देहाती औरत’ और भोले-भाले-बेचारे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में ऐसी बातें पढ़कर आपको आश्चर्य हो सकता है, परंतु सच्चाई यह है कि मनमोहन सिंह इस समय आत्मघाती रास्ते पर चल पड़े हैं। जब प्रधानमंत्री थे, तब तो घोटालों पर भी चुप्पी साध लेते थे और अपनी मजबूरियां गिनाते थे, अब जब विपक्ष में बैठे हैं तो राष्ट्रद्रोहियों के साथ जाकर मिल बैठे हैं। अपनी ही गलतियों पर उल्टा प्रधानमंत्री से माफी की मांग कर उनकी पार्टी ने संसद की कार्यवाही ठप कर रखी है। आज स्थिति यह पैदा हो गई है कि हम मनमोहन सिंह की बेचारगी को छोड़कर तथ्यों के तराजू पर उनका आकलन करें। हमने जो रिसर्च किया, उसके हिसाब आज वो पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर कलंक साबित हो रहे हैं, लेकिन आज तक उन्होंने किसी भी मामले में माफी नहीं मांगी।

एक-एक कर हम इसकी वजह आपके सामने रख रहे हैं – 

कलंक कथा: 1- अपने घोटालों पर जश्न मना रहे हैं।
सीबीआई की विशेष अदालत ने 2G घोटालों के मामले में सबूत के अभाव में आरोपियों को क्या छोड़ा, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जश्न मनाने लग गए। उनको इस बात की भी शर्म नहीं आई कि जिस प्रकार उनकी सरकार ने सबूतों को खत्म करने की साजिश रची, आज उसकी परिणति सामने है। लेकिन क्या वे भूल गए कि सीएजी ने जांच में पाया था कि 2जी स्पेक्ट्रम नीलामी में 1.76 लाख करोड़ का घोटाला हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने मनमोहन सरकार द्वारा पहले आओ,पहले पाओ की नीति के तहत आवंटित सभी 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी रद्द कर दिए थे। तब मनमोहन ने भी माना था कि गठबंधन की राजनीति के चलते उनकी कुछ मजबूरियां थीं। अब सबूतों के अभाव में कोर्ट ने भले ही आरोपियों को बरी कर दिया, लेकिन ये साफ माना कि उस समय के पीएमओ की गलती थी, जिसके बॉस बेचारे मनमोहन सिंह थे। 

कलंक कथा: 2- सिर्फ मनमोहन की वजह से संसद नहीं चल रही है
गुजरात चुनाव के दौरान मनमोहन सिंह ने पाकिस्तानी राजनयिकों के साथ एक गुप्त मीटिंग की थी। जब इस मामले का खुलासा हुआ तो कांग्रेस ने शुरू में इस मुलाकात का खंडन कर दिया, लेकिन बाद में मनमोहन सिंह ने खुद माना कि वे उस मीटिंग में मौजूद थे। हालांकि उन्होंने आजतक देश को नहीं बताया कि वे देश के पूर्व प्रधानमंत्री हैं, फिर मणिशंकर अय्यर जैसे संदिग्ध कांग्रेसी के साथ पाकिस्तानी नेताओं के साथ क्या बात करने गए थे ? जबकि तथ्य यह है कि मणिशंकर अय्यर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सत्ता से बेदखल करने के लिए पाकिस्तान जाकर वहां के नेताओं तक से गुहार लगा चुके थे। यानी जिस हरकत के लिए मनमोहन को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए, वे प्रधानमंत्री मोदी से माफी की मांग करके संसद नहीं चलने देना चाहते।

कलंक कथा: 3- नर्मदा बांध को लेकर झूठ बोला
गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान मनमोहन सिंह ने सफेद झूठ बोला कि, मुख्यमंत्री रहते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध को लेकर कभी उनसे मुलाकात नहीं की। मनमोहन ने कहा, ”बांध के मुद्दे पर मोदी जी ने कभी मेरे साथ बैठक नहीं की,” लेकिन गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने दस्तावेज दिखाकर मनमोहन सिंह की इस झूठ की पोल खोल दी। दस्तावेजों से साफ हो गया कि मोदी जी ने नर्मदा के मुद्दे पर न सिर्फ मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी, बल्कि इस संबंध में उन्हें कई पत्र भी लिखे थे।

कलंक कथा: 4- राहुल ने सरकारी दस्तावेज फाड़ा और पीएम रहते भी मनमोहन का सम्मान नहीं जागा
घटना सितंबर, 2013 की है। भ्रष्टाचार में डूबी तत्कालीन मनमोहन सरकार अपने दागी नेताओं को बचाने के लिए एक अध्यादेश लेकर आई थी, लेकिन कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक प्रेस कांफ्रेंस में उस सरकारी अध्यादेश को फाड़कर फेंक दिया। राहुल ने कहा, “अध्यादेश पर मेरी राय है कि यह सरासर बकवास है और इसे फाड़कर फेंक देना चाहिए।” मनमोहन सिंह उस समय विदेश यात्रा पर थे। लोगों को लगा कि इस अपमान पर उनका जमीर जरूर जाग जाएगा, लेकिन विदेश से लौटने के बाद भी वे चुप ही रहे और उस विवादित अध्यादेश को रद्दी की टोकड़ी में डाल दिया।

कलंक कथा: 5- शर्म-अल-शेख में देश को शर्मिंदा किया
पाकिस्तान हमेशा से भारत पर आरोप लगाता रहा है कि उसके अंदरूनी मामलों में भारत देखल देता है, लेकिन मनमोहन सिंह ने जुलाई, 2009 में ऐसा कांड कर दिया कि पाकिस्तान के आरोपों की पुष्टि हो गई। मिस्र के शर्म-अल-शेख में तत्कालीन पाकिस्तानी पीएम युसूफ रजा गिलानी के साथ मनमोहन सिंह की बैठक के बाद जारी साझा बयान में भारत की ओर से एक तरह से पाकिस्तान के आरोपों को स्वीकार कर लिया गया था। मनमोहन सिंह की इस करतूत के चलते देश को न सिर्फ शर्मिंदा होना पड़ा, बल्कि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ झूठा प्रोपेडेंडा करने का एक हथियार भी मिल गया।

कलंक कथा: 6- प्रधानमंत्री पद की गरिमा गिराते रहे हैं – नवाज शरीफ के ‘देहाती औरत’ कहने पर भी चुप रहे
सितंबर, 2013 में वॉशिंगटन में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ दोनों मौजूद थे। इस दौरान मनमोहन सिंह ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से बातचीत में भारत में पाकिस्तानी आतंकवाद का मुद्दा उठाया था। इसपर चिढ़कर नवाज शरीफ ने उन्हें ‘देहाती औरत’ कह दिया था, लेकिन मनमोहन आज तक भारत के प्रधानमंत्री के खिलाफ उस अपमानजनक टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे पाए हैं।

कलंक कथा: 7- घोटाले ही घोटाले
मनमोहन सरकार के 10 साल के कार्यकाल में 12 लाख करोड़ से भी ज्यादा के घोटाले सामने आए। इसमें 1.86 लाख करोड़ का कोयला घोटाला और 1.76 लाख करोड़ का स्पेक्ट्रम घोटाला तो यहां की आम जनता तक के भी जुबान पर है। इसके अलावा कॉमन वेल्थ गेम्स घोटाला (90 करोड़ से ज्यादा), आदर्श सोसाइटी घोटाला, मधु कोड़ा खदान घोटाला (4 हजार करोड़), चौपर घोटाला (3,600 करोड़), टाट्रा ट्रक घोटाला, ऑयल फॉर फूड घोटाला, वोट के बदले नोट घोटाला भी शामिल है।

कलंक कथा: 8- संसाधनों पर मुसलमानों का पहला अधिकार बताकर देश का अपमान किया
बात दिसंबर, 2006 की है। तब प्रधानमंत्री के तौर पर राष्ट्रीय विकास परिषद में भाषण के दौरान मनमोहन सिंह ने यहां तक कह दिया था कि देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों को विकास में हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए पहले उनका सशक्तीकरण जरूरी है। मनमोहन उस मंच पर बोल रहे थे, जिसमें देश के सारे राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद थे। उनके इस बयान का वहीं पर विरोध भी हुआ, लेकिन अपनी आदत के अनुसार मनमोहन ने अपनी देश को तोड़ने वाली हरकत के लिए आजतक माफी नहीं मांगी है।

कलंक कथा: 9- पाकिस्तान को ही आतंकवाद से पीड़ित बता दिया 
हद तो तब हो गई जब सितंबर, 2006 में हवाना में उन्होंने ये कह दिया कि भारत की तरह पाकिस्तान भी ‘आतंकवाद से पीड़ित’ है। तत्कालीन पाकिस्तानी परवेज मुशर्रफ से मुलाकात के बाद वे पाकिस्तानियों के ऐसे दीवाने हो गए थे कि, उन्होंने यहां तक कह दिया कि भारत में होने वाले आतंकवादी हमलों में आईएसआई का नहीं, बल्कि स्वतंत्र जेहादी संगठनों का हाथ है। यह देश आज भी मनमोहन सिंह की इस हरकत के लिए उनसे माफी की उम्मीद ही कर रहा है ?

कलंक कथा: 10- संविधान की गरिमा को कम किया
मनमोहन सिंह जनता के चुने हुए प्रधानमंत्री नहीं थे। वे एक्सिडेंटल पीएम थे, ये बात उनके सहयोगी रहे संजय बारू ने ही कबूल किए हैं। वे इसलिए प्रधानमंत्री बने क्योंकि सोनिया गांधी में वो पद संभालने की हिम्मत नहीं थी। उन्हें रबर स्टांप के रूप में मनमोहन सिंह से बेहतर कोई नहीं दिखा। कुर्सी संभालते ही मनमोहन ने सोनिया के अहसानों को बदला भी चुकाया। उन्होंने संविधान से अलग नेशनल एडवाइजरी काउंसिल बनाई और सोनिया को उसका चेयरपर्सन। पूरा देश जानता है कि 10 सालों तक यूपीए सरकार के सारे अहम फैसले एनएसी के माध्यम से सोनिया गांधी ही लेती रहीं, जबकि संविधान की शपथ डॉक्टर मनमोहन सिंह ने ले रखी थी। यानी सत्ता के स्वार्थ में मनमोहन ने प्रधानमंत्री के पद को ही 10 जनपथ में गिरवी रख दिया था।

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