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मोदी सरकार में अल्पसंख्यकों का कायाकल्प

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अभी तक अल्पसंख्यकों के कल्याण की सिर्फ बातें होती रही हैं। लेकिन पिछले करीब तीन साल में मोदी सरकार ने इस परंपरा को तोड़ने का काम किया है। ‘सबका साथ सबका विकास’ की अवधारणा को लेकर आगे बढ़ रही मोदी सरकार ने अल्पसंख्यकों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इसी कड़ी में अब मदरसों को आधुनिक और स्वच्छ बनाने की योजना शुरू की गई है।

मोदी सरकार ने फैसला किया है कि जो मदरसे मुख्यधारा की शिक्षा देते हैं या देना चाहते हैं उनकी वो बड़े पैमाने पर मदद करेगी। यह मोदी सरकार की इन पारपंरिक शिक्षा केंद्रों के विकास करने की योजना का हिस्सा है। ये योजना ‘थ्री टी’ स्कीम का हिस्सा है। ‘थ्री टी’ यानी टॉयलेट, टिफिन और टीचर।

टॉयलेट, टिफिन और टीचर

इसके तहत अगले वित्त वर्ष के अंत तक केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने देशभर के मदरसों में एक लाख से ज्यादा शौचालय बनवाने का लक्ष्य रखा है। ये योजना स्वच्छ भारत मिशन का ही विस्तार है। यही नहीं अब केंद्र सरकार ने मुख्यधारा की शिक्षा देने वाले मदरसों में बच्चों को ‘मिड डे मील’ या ‘मध्याह्न भोजन योजना’ शुरू करने का भी फैसला किया है। इसके अलावा मंत्रालय ने मदरसा टीचरों के लिए ‘अपग्रेड कौशल योजना’ भी शुरू करने का फैसला किया है, जिससे शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार की जा सके और उन्हें समय की जरुरतों के हिसाब से प्रशिक्षित भी किया जा सके।

‘बेगम हजरत महल नेशनल स्कॉलरशिप’ और ‘गरीब नवाज स्किल डेवलपमेंट’ स्कीम

यही नहीं, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के तहत काम करने वाले मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन की ओर से अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं की शिक्षा को लेकर चल रही योजनाओं के भी विस्तार का फैसला लिया गया है। इसके तहत दो लोकप्रिय योजनाएं चल रही हैं, जैसे ‘बेगम हजरत महल नेशनल स्कॉलरशिप’ और ‘गरीब नवाज स्किल डेवलपमेंट’ स्कीम। ‘बेगम हजरत महल नेशनल स्कॉलरशिप’ के तहत अबतक 20,000 अल्पसंख्यक छात्राओं को लाभ मिल चुका है। अगले वित्त वर्ष में इसकी संख्या 45,000 तक करने का लक्ष्य रखा गया है।

अल्पसंख्यक छात्रों और युवाओं के लिए योजनाएं

इन दोनों योजनाओं के साथ ही छात्रवृत्ति, फेलोशिप, सीखो और कमाओ, नयी मंजिल, नयी रोशनी और उस्ताद योजनाओं पर कुल 2600 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किये जायेंगे। ‘सीखो और कमाओ’ योजना में पिछले साल के 40 करोड़ रुपये की वृद्धि कर 250 करोड़ रुपये और नयी मंजिल योजना में 56 करोड़ रुपये की वृद्धि कर 176 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यूं समझ लीजिए कि मोदी सरकार अल्पसंख्यकों के संपूर्ण विकास और अल्पसंख्यक महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। मोदी सरकार अल्पसंख्यकों को बेहतर शिक्षा देने के साथ-साथ उनके कौशल विकास पर भी जोर दे रही है ताकि युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सके।

अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए बजट में भारी इजाफा

ये इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि मोदी सरकार के आने के बाद से अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के योजना बजट में हर साल साल तेजी से बढ़ोत्तरी की गई है। जैसे 2016-17 में अल्पसंख्यक मंत्रालय का बजट 3827.25 करोड़ रुपये था, तो 2017-18 के बजट में इसे 9.6 प्रतिशत बढ़ाकर इसे 4195.48 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए चल रहे 15 सूत्री कार्यक्रम के तहत 11 मंत्रालयों से 24 योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि मिलेगी। जाहिर है कि बजट में बढ़ोत्तरी से अल्पसंख्यकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सशक्तीकरण में काफी मदद मिलेगी ।

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