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टेक्नोलॉजी के उपयोग से गरीबों का जीवन बेहतर किया जा सकता है- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ के 41वें एपिसोड में देशवासियों से सीधे बात की। इस एपिसोड में प्रधानमंत्री जी ने जिन विषयों को अधिक महत्त्व दिया है, उसमें साइंस एवं टेक्नोलॉजी का विषय भी शामिल है। प्रधानमंत्री ने कहा है, कि “टेक्नोलॉजी का उपयोग गरीबों, वंचितों या जरूरतमंदों का जीवन बेहतर करने के काम आ सकता है।” उन्होंने कहा कि
“साइंस एवं टेक्नोलॉजी वैल्यू न्यूट्रल होती हैं। कोई भी मशीन वैसा ही कार्य करेगी जैसा हम चाहेंगे। यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम मशीन से क्या काम लेना चाहते हैं? यहां पर मानवीय उद्धेश्य महत्वपूर्ण हो जाता है।”

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपार संभावनाएं
मुंबई में हाल ही में हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, कि “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से रोबोट्स, बोट्स और स्पेसिफिक टास्क करने वाली मशीनें बनाने में सहायता मिलती है। आजकल मशीनें सेल्फ लर्निंग से अपने आप के इंटेलिजेंस को और स्मार्ट बनाती जाती हैं।” प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि उन्होंने उस कार्यक्रम में वैज्ञानियों से आग्रह किया कि, “दिव्यांग भाइयों और बहनों का जीवन सुगम बनाने के लिए, किस तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मदद मिल सकती है ? क्या हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं के बारे में बेहतर अनुमान लगा सकते हैं ? किसानों को फसलों की पैदावार को लेकर कोई सहायता कर सकते हैं ? क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को आसान बनाने और आधुनिक तरीके से बीमारियों के इलाज में सहायक हो सकता है?

भारत की समृद्ध वैज्ञानिक परंपरा
प्रधानमंत्री ने कहा है कि भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में कई महान वैज्ञानिकों को जन्म दिया है। एक तरफ महान गणितज्ञ बौधायन, भास्कर, ब्रह्मगुप्त और आर्यभट्ट की परंपरा रही है, तो दूसरी तरफ चिकित्सा के क्षेत्र में सुश्रुत और चरक हमारे गौरव हैं। सर जगदीश चन्द्र बोस और हरगोविंद खुराना से लेकर सत्येन्द्र नाथ बोस जैसे वैज्ञानिक भारत के गौरव हैं। सत्येन्द्र नाथ बोस के नाम पर तो मशहूर पार्टिकल ‘Boson’ का भी नामकरण हुआ है। प्रधानमंत्री ने बताया कि हर साल हम 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस इसलिए मनाते हैं, क्योंकि इसी दिन भारतरत्न सर सी.वी. रमन ने प्रकाश के प्रकीर्णन पर उत्कृष्ट कार्य किया था। इसके लिए उन्हें नोबल पुरस्कार भी दिया गया था। यह खोज रमन्स इफेक्ट के नाम से प्रसिद्ध है।

श्री नरेन्द्र मोदी ने बल्ब आविष्कार करने वाले थॉमस अल्वा एडिसन का उदाहरण देकर बताया कि उन्होंने कैसे अपनी असफलताओं को भी अपनी शक्ति बना ली। इसी तरह उन्होंने महर्षि अरबिंदो का जिक्र करते हुए बताया कि सच्चाई को जानने के लिए बार-बार प्रश्न पूछने की भावना महत्वपूर्ण होती है। वैज्ञानिक खोज के पीछे की असल प्रेरणा यही है। इस अवसर पर उन्होंने आने वाले राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के लिए इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को बधाई दी और युवा-पीढ़ी को सत्य और ज्ञान की खोज के लिए प्रेरित होने के साथ विज्ञान की मदद से समाज की सेवा करने का आह्वान किया।

 

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