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रघुराम राजन की तो मान लो कांग्रेसियों, रुपया गिर नहीं रहा, और मजबूत हो रहा है!

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कांग्रेस और विरोधी दल के लोग आजकल रुपये और डॉलर की तुलना कर कुछ अधिक ही बेचैन दिख रहे हैं। वे मोदी सरकार पर हमलावर हैं और सरकार को नाकाम बताते हुए आरोप लगा रहे हैं कि वह गिरते रुपये को संभाल नहीं पा रही है। हालांकि कांग्रेस और विरोधी दल को आईना दिखाया है रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने। 

एक टेलिविजन चैनल से बात करते हुए रघुराम राजन ने कहा, ”रुपया कुछ समय के लिए असली शर्तों में मजबूत रहा है, जबकि मुद्रास्फीति दर मामूली रही है, लेकिन विश्व मुद्रास्फीति दर से ऊपर है। नतीजतन रुपये के साथ मामूली कमजोर पड़ने की जरूरत है। इससे हालात बेहतर होंगे।”

उन्होंने कहा, ”रुपये में गिरावट किसी भी तरह से चिंता का विषय नहीं है। क्योंकि एमर्जिंग मार्केट्स की स्थिति 2013 के मुकाबले बहुत ज्यादा अच्छे हैं। इसलिए रुपये के गिरने से कोई खतरा नहीं है।”

आपको बता दें कि ये वही रघुराम राजन हैं जिन्हें कांग्रेस ने रिजर्व बैंक का गवर्नर बनाया था और वे कांग्रेस के करीबी भी माने जाते रहे हैं।  

जाहिर है रघुराम राजन का यह बयान कई मायनों में खास है क्योंकि सरकार भी कई बार कह चुकी है कि रुपया गिर नहीं रहा, बल्कि और मजबूत हो रहा है। सरकार का भी मानना है कि विदेशी कारणों के चलते रुपये में तत्कालिक अस्थिरता है।

बहरहाल कांग्रेस का प्रोपेगैंडा जारी है। हालांकि इसी दुष्प्रचार के बीच आइये हम अमेरिका के ‘डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी’ के आंकड़ों के जरिये समझते हैं कि आखिर रुपया डॉलर को छोड़ कर अन्य बड़े देशों की मुद्राओं के मुकाबले कैसे मजबूत है। इसके साथ यह भी देखते हैं कि यूपीए की तुलना में रुपये की स्थिति कितनी अच्छी है।

                           मूल्य ह्रास की दर
                अवधि वर्ष              मूल्य ह्रास 
          2009-2014            4.17 प्रतिशत
          2014-2018            01.1 प्रतिशत

स्पष्ट है कि पिछली यूपीए सरकार की तुलना में मॊदी सरकार के समय में रूपया मूल्यह्रास की दर में यह लगभग 75 प्रतिशत की गिरावट है। मूल्य ह्रास की दर में .ये कमी मोदी सरकार के तहत रुपया के बेहतर प्रदर्शन का एक स्पष्ट संकेत है।

           चार वर्षों की अवधि में मूल्य ह्रास की दर
            अवधि/सरकार            गिरावट प्रतिशत में
         2009-2013 यूपीए                 43.75
          2014-18 एनडीए                 20.69

उपर्युक्त आंकड़ों से स्पष्ट है कि एनडीए सरकार के तहत 50 प्रतिशत से अधिक दर की गिरावट यूपीए के कार्यकाल से कई गुना बेहतर है।

ये आंकड़े भी देखें-

  • अमरीकी डॉलर के मुकाबले ब्राजीलियाई रियल ने 74.77 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है।
  • दक्षिण अफ्रीकी रैंड में 46.97 प्रतिशत की दर से गिरावट दर्ज किया गया है।
  • ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की तुलना में भारतीय रुपये में मात्र 19.13 प्रतिशत की गिरावट आई है।

जाहिर है मॊदी सरकार के कार्यकाल में अन्य देशों के मुकाबले भारत के रुपये ने स्थिरता का प्रदर्शन किया है। गौरतलब है कि – 

  • भारतीय रुपये ने अर्जेंटीना के मुद्रा के खिलाफ 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है।
  • भारतीय रुपये ने तुर्की की मुद्रा लीरा के खिलाफ 61 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की है।
  • BRICKS के सदस्य राष्ट्र ब्राजीलियाई रियल के खिलाफ 32 प्रतिशत बढ़ोतरी।
  • भारतीय रुपया ने मजबूत ब्रिटिश पाउंड के खिलाफ 9.77 प्रतिशत बढ़ोतरी।
  • ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये ने 6.56 प्रतिशत बढ़ोतरी की है।

बहरहाल रुपये की मजबूती के बाद हल्ला मचाने वाले ये जरूर देखें कि यूके पाउंड और न्यूजीलैंड डॉलर जैसी मजबूत मुद्राएं भी क्रमश: 10.23 प्रतिशत और 9.9 प्रतिशत की गिरावट के स्तर पर हैं।

इतना ही नहीं उभरती अर्थव्यवस्थाएं और BRICKS के सदस्य देश, दक्षिण अफ्रीका -19 .66 प्रतिशत, ब्राजील -17.4 प्रतिशत और रूस- 16.43 प्रतिशत भी अपनी मुद्राओं के मूल्यह्रास के उच्च स्तर हैं। जाहिर है अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बावजूद भी भारत जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्था ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8.34 प्रतिशत दर से मूल्यह्रास दर्ज किया है, जो अन्य देशों के मुकाबले बहुत कम है। 

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