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LIES AGAINST MODI : यूपीए की योजनाओं को अपना नाम देती है मौजूदा सरकार

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17 जून को कोच्चि में पीएन पानिकर फाउंडेशन के Reading Month Celebration कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोगों को उपहार में ‘बुके’ नहीं बुक की आदत डालनी चाहिए। प्रधानमंत्री की ये सलाह सुर्खियों में क्या आई कांग्रेस नेता शशि थरूर ने दावा किया कि ये उनका आइडिया है जिसे प्रधानमंत्री ने अपना बनाकर पेश कर दिया। ये कोई पहला मौका नहीं जब कांग्रेस की ओर से ये दावा किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या उनकी सरकार कांग्रेस के ही पुराने आइडिया को अपना बताकर वाहवाही बटोर रहे हैं। जन-धन और बीमा सुरक्षा योजना जैसी स्कीमों को भी कांग्रेस अपना बताती रही है…ऐसे में उसके दावों का सच क्या है, उसकी पड़ताल जरूरी है।  

सबसे लंबे पुल पर कांग्रेसी झूठ

अपनी सरकार के तीन साल पूरे होने के दिन यानी 26 मई को  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे ढोला-सादिया पुल का उदघाटन किया। असम को अरुणाचल से जोड़ने वाले इस पुल का नाम भूपेन हजारिका पुल रखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन क्या किया, कांग्रेस इस परियोजना को अपने खाते में डालने की पुरजोर कोशिश करती दिखी… कांग्रेस नेताओं ने ट्विटर हैंडल पर यहां तक लिखा कि मनमोहन सिंह ने निर्माण कराया और नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया, यानी बनवाया किसी ने और क्रेडिट ले गया कोई और। लेकिन जल्द ही कांग्रेस की पोल खुल गई। सरकारी रिकॉर्ड से सच सामने आ गया कि ढोला-सादिया पुल के डिजाइन को हरी झंडी 2003  में ही दिखाई जा चुकी थी जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे । यानी कांग्रेस ने अपने क्रेडिट के लिए एनडीए सरकार के एक महत्वपूर्ण तथ्य को रफा-दफा करने की कोशिश की।  

जन धन योजना

60 साल तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने कभी इसकी सुध नहीं ली कि समाज के वंचित तबके के लोगों का भी अपना बैंक अकाउंट हो और विकास की दौड़ में वो भी शामिल हों। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे ही जन धन योजना लान्च की, कांग्रेस ने उसे अपना बताने में देर नहीं की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जन धन योजना उसकी Basic Savings Bank Deposit Account (BSBDA) योजना से ही बनाई गई है। वैसे आम जनता से जुड़ी योजना का इतना जटिल नाम ही सिरदर्द पैदा करने वाला है… कल्पना कीजिए अंग्रेजी नहीं जानने वाला कोई ग्राहक बैंक में इस योजना का नाम सुनकर कितनी कठिनाई का अनुभव करेगा! कांग्रेस की ओर से जन-धन को अपना बताने वाले कोई नहीं बल्कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे। दावा तो उन्होंने यहां तक किया कि इसके तहत नौ साल में 24.3 करोड़ बैंक अकाउंट खोले गए। बकौल चिदंबरम जीरो बैलेंस रहने से खाते सक्रिय नहीं हो सके। क्या कांग्रेस अपनी विफलता के चलते ही ये स्वीकार नहीं कर पाती कि मोदी सरकार ने जन धन योजना को इतने सरल और सुलझे तरीके से पेश किया कि लोगों ने इसे हाथों हाथ लिया। जन धन के डिपॉजिट पर ब्याज के साथ इंश्योरेंस कवर का भी प्रावधान किया गया, इतना ही नहीं बैंक अधिकारियों ने भी घर-घर जाकर लोगों के खाते खुलवाये। ढाई साल में 27 करोड़ बैंक अकाउंट खुलने के साथ ही रिकॉर्ड गिनेस बुक में दर्ज हो गया। आज इन खातों में 65 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि जमा है। क्या गरीबों के नाम पर महज खानापूर्ति के लिए ये योजना लाई गई होती तो इसे ये अभूतपूर्व सफलता हासिल हो पाती? प्रधानमंत्री जन धन योजना को BSBDA का रिपैकेज्ड वर्जन बताना कुछ वैसा ही है जैसे मोटरबाइक को साइकिल का रिपैकेज्ड वर्जन बताना।

नीम कोटेड यूरिया

कांग्रेस कहती है: ‘’नीम कोटेड यूरिया का चलन 13 साल पहले शुरू हुआ, मोदी सरकार ने उसके उत्पादन को 35 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का काम किया बस। यानी बड़े ही शातिराना अंदाज में कांग्रेस अपनी करनी को ढंकने की कोशिश कर जाती है। रिसर्च और ट्रायल से ये साबित हुआ कि नीम कोटेड  यूरिया धान और गेहूं की पैदावार बढ़ाने में काफी कारगर है जिसके बाद नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड ने 2002 में नीम कोटेड यूरिया बनाने की मानक तकनीक विकसित कर ली थी। खाद के रूप में यूरिया का चलन सबसे ज्यादा था जिसके चलते इसका खूब बेजा इस्तेमाल भी हो रहा था। किसानों के हाथ में ना पहुंचकर ये कुछ वैसी केमिकल इंडस्ट्रीज या फिर उन शरारती तत्वों के हाथ में भी पहुंच रहा था जो यूरिया के सहारे मिलावटी दूध तैयार करते थे। ऐसे में यूरिया के पूरे उत्पादन को नीम कोटेड बनाकर जानलेवा इस्तेमाल पर भी रोक लगाई जा सकती थी साथ ही फसलों की पैदावार में भी भारी बढ़ोतरी की जा सकती थी। लेकिन यूपीए सरकार ने  क्या किया – नीम कोटेड के उत्पादन की 35 प्रतिशत तक की सीमा तय कर दी। अब 65 प्रतिशत यूरिया से किसे फायदा पहुंचाया गया होगा, ये समझना मुश्किल नहीं। 10 साल तक नीम कोटेड यूरिया सिर्फ 35 फीसदी ही तैयार किया जाता रहा, लेकिन केंद्र की सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने इसे 100 फीसदी कर दिया। सरकार के इस कदम से उन केमिकल इंडस्ट्रीज को चलाने वालों को भारी धक्का पहुंचा, जो इसकी आड़ में सेहत से खिलवाड़ कर भारी मुनाफा बटोर रहे थे। सवाल तो ये भी है इतने खतरनाक खुलासे के बावजूद कांग्रेस नेता किस मुंह से मोदी सरकार को सूट-बूट की सरकार कहती है?

ग्रामीण विद्युतीकरण अभियान

कांग्रेस आरोप लगाती है कि मोदी सरकार की दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना- RGGVY का बदला हुआ नाम भर है। जबकि सच ये है कि यूपीए की योजना वाजपेयी सरकार की त्वरित ग्रामीण विद्युत कार्यक्रम की तर्ज पर बनाई गई थी। लेकिन जैसा कि यूपीए की हर योजना के साथ होता रहा, 2005 में शुरू की गई RGGVY भी पांच साल की अपनी समयसीमा में लक्ष्य से कहीं पीछे रह गई। मोदी सरकार के तीन साल में आज स्थिति ये है कि भारत ना सिर्फ एक पावर सरप्लस देश है, बल्कि 2016-17 में पहली बार ऊर्जा का निर्यातक होने का गौरव भी हासिल किया।

 बीमा योजना

कांग्रेस आरोप लगाती है कि 2007 में शुरू की गई आम आदमी बीमा योजना का ही नाम बदलकर मोदी सरकार में उसे प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना कर दिया गया। लेकिन दोनों ही योजनाओं में बुनियादी फर्क ये है कि यूपीए की स्कीम जहां सिर्फ एलआईसी के लिए थी, वहीं मोदी सरकार की स्कीम किसी भी बैंक के बचत खाते से जुड़ी है।

यूपीए की स्कीम में जहां साल के 200 रुपये प्रीमियम भरने होते थे, वहीं मोदी सरकार की स्कीम में महज 12 रुपये। आम आदमी बीमा योजना में जहां कवरेज राशि 30 हजार रुपये थी, वहीं प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में कवरेज राशि दो लाख रुपये हैं। इन सबसे ऊपर गौर करने वाली बात ये है कि मोदी सरकार ने इस योजना का लाभ नागरिकों को देने के लिए जोरशोर से प्रचार भी करवाया।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

कांग्रेस की मानें तो मोदी सरकार का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम उसके नेशनल गर्ल चाइल्ड डे का दूसरा नाम है। लेकिन आसानी से समझा जा सकता है कि यूपीए का एक दिन का कार्यक्रम था, जबकि एनडीए का मौजूदा कार्यक्रम एक जन अभियान है।  

कांग्रेस की राजनीति: काम किसी का नाम किसी का

दरअसल केंद्र में जब से नरेंद्र मोदी सरकार ने एक पर एक कल्याणकारी योजनाओं को लाना शुरू किया, कांग्रेस ने ये रट लगानी शुरू कर दी कि मौजूदा सरकार उसी की योजनाओं को नये सांचे में ढालकर पेश करने में लगी है। जब कभी जनकल्याणकारी योजनाओं की बात होती है दो अलग-अलग सरकारों में उनकी रूपरेखा का मेल खाना कोई बड़ी बात नहीं। यही वजह रही जो यूपीए के दौर में 2004 से 2014 के बीच एनडीए ने ये कहकर हायतौबा नहीं मचाई कि फलां योजना उसके रहते शुरू की गई, लेकिन क्रेडिट कांग्रेस ले रही है। हालांकि यूपीए के दौर में सामने आए भ्रष्टाचार के मामलों का पुलिंदा इतना भारी पड़ गया कि जनहित की योजनाएं किनारे ही लगी रहीं। कांग्रेस के लिए आज ये पचाना आसान नहीं हो पा रहा कि मोदी सरकार में जनहित की इतनी योजनाओं का अंबार कैसे लगा और अगर लग भी गया तो जमीन पर उसका क्रियान्वयन इतना सफलतापूर्वक कैसे हो रहा? मुद्रा योजना हो, उज्ज्वला हो, स्टार्ट अप इंडिया हो या फिर डिजिटल इंडिया, आइडिया और उस पर अमल करके मोदी सरकार ने जन-जन का दिल जीत लिया है। विरोधियों के कलेजे पर सांप लोट रहा है जिसके असर से वो हर योजना को ही अपना बताने में लगे हैं।

 

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