Home झूठ का पर्दाफाश LIES AGAINST MODI: विपक्ष के साथ बदले की भावना

LIES AGAINST MODI: विपक्ष के साथ बदले की भावना

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जब से श्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, विपक्ष की ओर से एक झूठ सिलसिलेवार तरीके से फैलाई गई है कि वो बदले की भावना से काम करते हैं। विरोधी ये दुष्प्रचार करते हैं कि उन पर होने वाली हर कानूनी और वैधानिक कार्रवाई के पीछे स्वयं पीएम मोदी का हाथ है। यहां हम इस बात की पड़ताल करेंगे कि क्या सच में विपक्षी नेताओं के आरोपों में कुछ दम भी है ? या फिर ये भी मोदी विरोध के नाम पर पहले 12 साल और फिर 3 साल से चले आ रहे कुप्रचार के सिलसिले की ही कड़ी मात्र है? हैरानी की बात है कि जिन मामलों की जांच कोर्ट की निगरानी में चल रही होती है, उनमें भी मोदी सरकार पर आरोप लगाकर ये पार्टियां जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश नहीं कर रही हैं? आइए एक-एक कर समझते हैं विरोधी दल और उनके नेताओं की बौखलाहट-

ममता बनर्जी 

ममता बनर्जी के मुख्यमंत्रित्व काल में पश्चिम बंगाल पोंजी और शेल (फर्जी) कंपनियों का गढ़ बन गया है। देश के किसी भी राज्य में सबसे अधिक पोंजी और शेल कंपनियों का बोलबाला पश्चिम बंगाल में है। ममता की परेशानी ये है कि इन फर्जीवाड़ों के तार जहां तक पहुंच रहे हैं, उनमें अधिकतर उन्हीं की पार्टी और उनके बेहद करीबी लोग शामिल हैं। बस अगर इन्हीं भ्रष्टाचारियों पर कोर्ट के आदेश पर या जांच एजेंसियों के द्वारा कोई कार्रवाई होती है, तो दीदी आपे से बाहर हो जाती हैं। अगर उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है, तो उन्हें परेशान होने की आवश्यकता क्या है ? 

पोंजी कंपनियां
शारदा और रोज वैली कंपनियों की तरह राज्य में लगभग 60 पोंजी कंपनियां जनता की गाढ़ी कमाई पर धीरे-धीरे हाथ साफ कर रही हैं। इन कंपनियों के पास जनता का लगभग 10 लाख करोड़ रुपये पड़ा हुआ है।

शेल कंपनियां
पोंजी कंपनियों की तरह ही देश भर में सबसे अधिक शेल कंपनियां पश्चिम बंगाल में ही हैं, जिनका उपयोग काली कमाई को सफेद और सफेद को काला करने के लिए किया जाता है। ममता के शासनकाल में 2011-2015 के बीच पश्चिम बंगाल में 17,000 शेल कंपनियां बनी। विमुद्रीकरण के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक टास्क फोर्स को इन शेल कंपनियों पर रोक लगाने का काम दिया है। टास्क फोर्स का कहना है कि ऐसी कंपनियों के माध्यम से नवंबर-दिसम्बर,2016 के दौरान 1,238 करोड़ रुपये बैंकों में जमा हुए। 559 उपभोक्ताओं ने 54 प्रोफेशनल की मदद से 3 हजार 900 करोड़ रुपयों को ठिकाने लगाया।

पोंजी कंपनियों के मालिक ममता के साथी
शारदा घोटाला—25,00 करोड़ रुपये

टीएमसी सांसद कुणाल घोष, पूर्व परिवहन मंत्री और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी मदन मित्रा, पार्टी सांसद श्रीनजंय बोस, टीएमसी नेता रजत मजुमदार और शंकुभदेव पांडा की गिरफ्तारी तक हो चुकी है।

रोज वैली घोटाला— 15000 करोड़ रुपये
रोज वैली चैयरमैन गौतम कुन्डू ने ईडी की पूछताछ के दैरान कबूल किया कि मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी से एक मार्च, 2012 को कोलिपांग के देओलो में मुलाकात की थी। लगभग इसी समय, शारदा घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता सुदीप्तो सेन ने भी देओलो में मुख्यमंत्री से मुलाकात की, इस बात का खुलासा टीएमसी के नेता कुणाल घोष और मुकुल राय ने पूछताछ में किया है। इस केस में भी मदन मित्रा, तपस पाल और सुदीप्तो बंदोप्धाय जैसे नेताओं पर शिकंजा कसा हुआ है।

नारदा स्टिंग आपरेशन
ममता के साथी इतने भ्रष्ट हैं कि धन कमाने का कोई अवसर नहीं छोड़ते, इसी लालच में नारदा स्टिंग ऑपरेशन में 13 मंत्री तक फंस गये। इन सभी ममता के साथियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधी कानून की धारा 7 व 13 और भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी के तहत मुकद्दमा चल रहा है।

शेल कंपनियों में ममता के साथी
ईडी कोलकाता की जिन 90 शेल कंपनियों की जांच-पड़ताल कर रही है उनमें भी तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेताओं के नाम हैं। अब कोई भी समझ सकता है कि ममता बनर्जी के लिए पीएम मोदी क्यों परेशानी के कारण हैं। अगर वो भी मनमोहन सरकार की तरह ममता सरकार के काले कारनामों पर आंखें मूंद लें तो उनकी सारी शिकायतें समाप्त हो जाएंगी।

अरविंद केजरीवाल
बात-बात में केंद्र की मोदी सरकार पर परेशान करने का आरोप लगाने वाले दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री अरविंद के आरोपों का तो कोई अंत ही नहीं है। वो इसी अवसर के तलाश में लग रहते हैं कि अपनी करतूतों को छिपाने के लिए मोदी सरकार पर आरोप लगाकर अपने काले कारनामों पर पर्दा डाल लें।

स्वास्थ्य मंत्री का घोटाला
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ आयकर विभाग की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। उनपर पर हवाला के जरिए 16.39 करोड़ रुपये मंगाने का आरोप है। इन मामलों में उनकी सघन जांच हो रही है। इसके अलावा जैन पर अपनी ही बेटी को दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक परियोजना में सलाहकार बनाने का भी आरोप है। इस केस की जांच भी सीबीआई के जिम्मे है। शुंगलू कमेटी ने भी इस मामले में दिल्ली सरकार पर उंगली उठाई है। यहां ये बताना आवश्यक है कि कपिल मिश्रा ने इन्हीं पर केजरीवाल को दो करोड़ की रिश्वत देने के आरोप लगाए हैं। मिश्रा के अनुसार जैन ने अपनी करतूतों पर पर्दा डाले रखने के लिए केजरीवाल के किसी रिश्तेदार की 50 करोड़ रुपये की डील भी कराई है। अब कोई भी समझ सकता है कि अगर इन मामलों की जांच आगे बढ़ेगी, को केजरीवाल के चेहरे से ईमानदारी का नकाब उतर जाएगा।

विज्ञापन घोटाला
केजरीवाल पर विज्ञापनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप है। इसके लिए उनकी पार्टी से 97 करोड़ रुपये वसूले भी जाने हैं। जांच में पाया गया है कि सरकारी विज्ञापनों के माध्यम से केजरीवाल ने अपनी और अपनी पार्टी का चेहरा चमकाने की कोशिश की है। इनमें से उनकी पार्टी की ओर से दिए गए कई झूठे और बेबुनियाद विज्ञापन भी शामिल हैं। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार भी केजरीवाल सरकार पर दूसरे राज्यों में अपने दल का प्रचार करने के लिए दिल्ली की जनता के खजाने पर डाका डालने का आरोप है। पहले साल के काम-काज पर तैयार रिपोर्ट कहती है कि पहले ही साल में केजरीवाल सरकार ने 29 करोड़ रुपये दूसरे राज्यों में अपने दल के विज्ञापन पर खर्च किए। 2015-16 में केजरीवाल ने जनता के 522 करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च कर किए थे।

‘टॉक टू ए के’ घोटाला
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ भी सीबीआई भ्रष्टाचार के मामले दर्ज कर जांच कर रही है। आरोपों के अनुसार सिसोदिया ने केजरीवाल के टॉक टू एके कार्यक्रम के प्रचार के लिए 1.5 करोड़ रुपये में एक पब्लिक रिलेशन कंपनी को काम सौंप दिया। जबकि मुख्य सचिव ने इसके लिए इजाजत नहीं देने को कहा था।
रिश्तेदार के साथ मिलकर घोटाला
दिल्ली के विवादास्पद सीएम केजरीवाल, उनके रिश्तेदार सुरेन्द्र कुमार बंसल और पीडब्ल्यूडी विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच हो रही है। इस केस में शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री के रिश्तेदार पर जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियों के नाम से ठेके लेने और उसके लिए जाली बिल बनाकर सरकारी खजाना लूटने का आरोप भी लगाया है। सबसे गंभीर बात ये है कि इस केस को उजागर करने वाले पर हाल ही में जानलेवा हमला भी कराया गया है।

बीआरटी कॉरीडोर तोड़ने का घोटाला
केजरीवाल सरकार पर दिल्ली में बीआरटी कॉरीडोर को तोड़ने के लिए दिए गए ठेके में भी धांधली का आरोप लग चुका है। आरोपों के अनुसार इस मामले में दिल्ली सरकार ने ठेकेदार को तय रकम के अलावा कंक्रीट और लोहे का मलबा भी दे दिया, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में थी। इस मामले में पिछले साल एसीबी छापेमारी करके कुछ दस्तावेज भी जब्त कर चुकी है।
अब कोई भी समझ सकता है कि केजरीवाल की घबराहट की वजह क्या है और वो क्यों मोदी सरकार पर बेवजह के आरोप लगाते रहते हैं।

कांग्रेस
कांग्रेस के कारनामों का इतना लंबा इतिहास रहा है कि, अगर कोई सरकार परेशान करने की नीयत से काम करे तो उसपर राजनीति करना भारी पड़ सकता है। लेकिन फिर भी वो आरोप लगाने में सभी भ्रष्ट दलों की अगुवा बनने की कोशिशों में जुटी रहती है। चाहे सोनिया गांधी के दामाद के कारनामों की जांच हो या पुरखों की विरासत के नाम पर जनता के पैसों की लूट का मामला, अगर कानूनी तौर पर जांच होती है तो ये पार्टी भी सियासी बदले का आरोप लगाना शुरू कर देती है। पिछले तीन साल में इन दलों ने इन हथकंडों को अपना हथियार बना लिया है।

वाड्रा का घोटाला
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ जमीन घोटाले और दूसरे फर्जीवाड़ों की जांच चल रही है। उनपर सैकड़ों बीघा भूमि गलत तरीके से इधर से उधर करने के आरोप हैं। जब भी जांच एजेंसियां इस संबंध में अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ाती है। कांग्रेस के नेता इस जांच को मोदी सरकार से जोड़ने की कोशिश करती है। जबकि इनमें से अधितकर मामले तो पुराने सरकार के जमाने से चले आ रहे हैं।

नेशनल हेराल्ड
गांधी परिवार पर आरोप है कि उसने नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों को गलत तरीके से हड़पने की कोशिश की है। इस मामले में राहुल और सोनिया आरोपी हैं और अदालत में सुनवाई चल रही है। लेकिन जब भी अदालतों में सुनवाई या सोनिया और राहुल की पेशी की बात आती है, कांग्रेस के लोग जानबूझकर मोदी सरकार पर निशाना साधने लगते हैं। जबकि ये मामला अदालत के विचाराधीन है।

अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाला
इटली की एक अदालत ने फैसला सुनाया है कि इस हेलिकॉप्टर सौदे के लिए भारतीय अफसरों और नेताओं को सैकड़ों करोड़ रुपये के घूस दिए गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इटली की अदालत में मौजूद दस्तावेजों के आधार पर लगे आरोपों के अनुसार इस सौदे में बिचौलिए ने भारत में अगस्ता वेस्टलैंड के प्रमुख पीटर हुलेट को लिखी चिट्ठी में ‘सिगनोरा गांधी’ को सौदे में मुख्य कारक बताया गया है। लेकिन इटली की अदालत से हुए खुलासों के लिए भी कांग्रेस मोदी सरकार पर निशाना साधने से नहीं चूकती।

चिदंबरम फैमिली का घोटाला
मनमोहन सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम के परिवार के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के कई मामलों में जांच चल रही है। चिदंबरम और उनकी पार्टी को ये जांच मंजूर नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनके बेटे और पत्नी के खिलाफ INX मीडिया मंजूरी मामला, एयरसेल मैक्सिस डील, राजस्थान एंबुलेंस घोटाला, फेमा उल्लंघन और शारदा चिट फंड से जुड़े भ्रष्टाचार की जांच हो रही है। जब भी जांच एजेंसियां इस संबंध में अपनी पड़ताल को आगे बढ़ाती है, कांग्रेस बदले की भावना से कार्रवाई का रोना रोने लगती है।

लालू यादव
घोटाले और लालू यादव एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। लालू स्वयं सत्ता में रहें या न रहें उनके परिवार से घोटालों का नाता टूटता नहीं है। चारा घोटाला में लालू स्वयं सजायाफ्ता मुजरिम हैं। जमानत पर रिहाई मिली हुई है। सजा ऐसी है कि चुनाव लड़ने तक पर रोक है। लेकिन फिर भी भ्रष्टाचार के मामले में उनके परिवार को कोई चुनौती नहीं दे सकता। जब तक एक घोटाले की चर्चा पूरी नहीं होती, दूसरा घोटाला निकल आता है। लालू के परिवार की जमीन घोटाले की चर्चा हो रही थी, तो उनके बेटों पर उसी जमीन की मिट्टी के घोटाले का भी आरोप लग गया। स्थिति ये है कि लालू कई सालों से मंत्री नहीं हैं, लेकिन उनकी करतूतों के पोल अब भी खुलते ही जा रहे हैं। अब ऐसी स्थिति में कानून या सरकार की ओर से कोई कार्रवाई होने लगती है, तो कानूनी तौर पर साबित चारा चोर सबसे अधिक हंगामा काटना शुरू कर देते हैं। ऊपर से लालू ने धर्मनिरपेक्षता का ऐसा चोला ओढ़ा है कि मोदी विरोध वाले उनके हर जुर्म के भागीदार बनने के लिए आतुर हो उठते हैं।

लालू की बेटी का जमीन घोटाला नंबर- 1 ?
दस्तावेजों के अनुसार मीसा भारती और उनके पति शैलेश कुमार ने दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के पास बिजवासन इलाके में एक फार्म हाउस सिर्फ 1.41 करोड़ रुपये में खरीद लिया। ये वो इलाका जहां कई प्रभावशाली लोगों की प्रॉपर्टी है। जमीन की इस डील की प्रक्रिया बहुत ही संदेहास्पद है। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के रेकॉर्ड के अनुसार, मीसा और शैलेश कम से कम चार प्राइवेड लिमिटेड कंपनियों के डायरेक्टर हैं। दोनों ने दिसंबर, 2002 में मिशैल पैकर्स एंड प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई और इसका रजिस्ट्रेशन लालू के सरकारी बंगले 25, तुगलक रोड, नई दिल्ली पर कराया गया। कंपनी की बैलेंस शीट के अनुसार इसकी व्यापारिक गतिविधियां 2006 में बंद हो गईं और फिर उसका प्लांट और उसके मशीनें भी बेच दी गईं। लेकिन फिर भी 2008-09 में इसी कंपनी ने बिजवासन के 26, पालम फार्म्स में एक फॉर्महाउस खरीदा। इसके लिए फंड कंपनी के 1,20,000 शेयर्स बेच कर जुटाए गए। खटकने वाली बात ये है कि 10 रुपये प्रति शेयर कीमत वाले इन शेयरों को वीके जैन और एसके जैन नाम के दो कारोबारियों ने 90 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से खरीद लिया। यहां ये बताना आवश्यक है कि इसी साल मार्च में कालेधन के खिलाफ हुई कार्रवाई में दोनों जैन भाइयों की भी गिरफ्तारियां हुई थीं।

लालू की बेटी का जमीन घोटाला नंबर- 2 ?
लालू के बेटी और दामाद का दिखावे की एक और कंपनी के माध्यम से दिल्ली में एक और संपत्ति खरीदने का भी मामला है। आरोपों के अनुसार KHK होल्डिंग्स नाम की इस कंपनी का उपयोग सैनिक फार्म्स में 2.8 एकड़ का फार्म हाउस खरीदने के लिए किया गया। यह कंपनी असल में विवेक नागपाल नाम के एक व्यक्ति की थी। लेकिन, 2014 में विवेक ने कंपनी के 10,000 शेयर सिर्फ एक लाख रुपये में मीसा और शैलेश को ट्रांसफर कर दिए। नापगाल ने KHK होल्डिंग्स के माध्यम से ही सैनिक फार्म्स की संपत्ति खरीदी थी। माना जा रहा है कि इस प्रॉपर्टी की कीमत भी 50 करोड़ रुपये से अधिक होगी।

दिल्ली में लालू फैमिली की कई और संदिग्ध संपत्ति
लालू और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार से प्रॉपर्टी बनाने का ये कोई पहला मामला नहीं है। लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर दिल्ली में अवैध तरीके से 115 करोड़ की संपत्ति अर्जित करने के आरोप पहले भी लग चुके हैं। इसके अनुसार लालू का परिवार डिलाइट मार्केटिंग, ए़ के इंफोसिस्टम की तर्ज पर ए़ बी एक्सपोर्ट्स कंपनी के भी मालिक हैं। इस कंपनी के सभी शेयरधारक और निदेशक पद पर लालू के परिवार के लोगों का कब्जा है। इतना ही नहीं दिल्ली के सबसे पॉश इलाके में जमीन खरीदने के लिए मुंबई के पांच बड़े ज्वेलर्स, सोने के व्यापारियों ने ए़ बी एक्सपोर्ट्स कंपनी को वर्ष 2007-2008 में एक-एक करोड़ के यानि पांच करोड़ रुपये बिना ब्याज के कर्ज दिए। इसी पांच करोड़ रुपये से उसी वर्ष नई दिल्ली के डी-1088, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में 800 वर्ग मीटर जमीन मकान सहित पांच करोड़ रुपये में खरीदा गया। आज इस जमीन की कीमत 55 करोड़ से ज्यादा है और इस जमीन पर लालू परिवार का चार मंजिला मकान बनकर लगभग तैयार है, जिसकी वर्तमान कीमत लगभग 60 करोड़ रुपये है।

गलत तरीके से पेट्रोल पंप हथिया लिया
लालू एंड फैमिली पर गलत तरीके से पेट्रोल पंप हथियाने का आरोप भी लग चुका है। इसके अनुसार बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप ने पटना के न्यू बाइपास पर बेऊर के पास गलत कागजों के आधार पर अधिकारियों की मिलीभगत से 2011 में भारत पेट्रोलियम का एक पेट्रोल पंप अपने नाम आवंटित करा लिया था। जिस समय तेजप्रताप ने पेट्रोल पंप के लिए आवेदन किया और इंटरव्यू दिया, उस समय नेशनल हाईवे-30 पर न्यू बाइपास की 43 डिसमिल जमीन उनके पास नहीं थी। सुशील मोदी ने आरोप लगाया कि पटना के बिहटा में बीयर फैक्ट्री लगाने वाले अमित कत्याल ने 9 जनवरी, 2012 को एके इंफोसिस्टम कंपनी के निदेशक के नाते लालू के छोटे बेटे और नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को पेट्रोल पंप लगाने के लिए 136 डिसमिल जमीन लीज पर दी थी। यानि पेट्रोल पंप के लिए आवेदन तेजप्रताप ने किया था, लेकिन पेट्रोल पंप की जमीन की लीज तेजस्वी के नाम थी। फिर भी तेजप्रताप को पेट्रोल पंप कैसे आवंटित किया गया ?

एफिडेविट में भी नहीं दी पेट्रोल पंप की जानकारी
सबसे बड़ी बात है कि किसी भी पेट्रोल पंप लेने की प्रक्रिया से पहले एक शपथपत्र देना पड़ता है, जिसमें यह लिखा जाता है कि आवेदक किसी भी निजी और सरकारी पद पर आसीन नहीं होगा। किसी भी तरह के सरकारी पद का लाभ नहीं लेगा। लेकिन फिर भी तेजप्रताप नीतीश सरकार में मंत्री बने हुए हैं, वेतन लेते हैं, सरकारी गाड़ी,और बाकी सुविधाओं का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने जो अपनी संपत्ति का ब्योरा उपलब्ध कराया है, उसमें भी इस पेट्रोल पंप का जिक्र नहीं है।

ये तो वो मामले हैं जो जांच के दायरे में हैं। हाल में ‘करप्शन की फर्स्ट फैमिली’ के कई और कारनामोंं के भी खुलासे हुए हैं। लेकिन जैसे ही उनकी जांच की बात उठती है, लालू और उनके सियासी रक्षक धर्मनिरपेक्षता का रोना रोने लगते हैं।