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गांधी जी की अंतिम इच्छा…

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देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद, कांग्रेस का राजनीतिक काम पूरा हो चुका है, अब उसे सामाजिक काम करने के लिए “लोक सेवक संघ” का रूप ले लेना चाहिये। महात्मा गांधी ने अपना ये विचार 28 जनवरी, 1948 के लेख में व्यक्त किया था। यह लेख ‘हरिजन’ में 2 फरवरी, 1948 को प्रकाशित हुआ। गौर करने वाली बात है कि इस लेख को लिखने के दो दिन बाद ही 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की हत्या हो गई। गांधी जी के इस लेख को ‘हरिजन’ ने “ His Last Will and Testament” के शीर्षक के साथ प्रकाशित किया था।

गांधी जी का वो लेख पढ़िए-

कांग्रेस को सत्ता से दूर रखना चाहते थे गांधी
गांधी जी का मत था कि कांग्रेस का देश में जितना व्यापक विस्तार और समाज में पकड़ है उसे सत्ता संघर्ष से दूर रहना चाहिए। इसके बजाय उसे देश के लाखों गांवों में स्वच्छता और शिक्षा के लिए काम करना चाहिए। इस उद्देश्य से गांधी जी ने ‘लोक सेवक संघ’ के गठन से लेकर कोष की व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं पर भी विचार रखे थे।

सत्ता के लिए कांग्रेस ने गांधी को ठुकराया
गांधी जी की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व तैयार नहीं हुआ। उन्होंने ये दलील दी कि अगर कांग्रेस सत्ता से दूर होगी तो देश में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। इसी बहाने से कांग्रेस ने खुद को सत्ता की दौड़ में बनाये रखा और गैर-कांग्रेसी राजनीति को सत्ता के आसपास भी फटकने नहीं दिया।

कांग्रेस को आज तक समझ नहीं आई गांधी की बात

कांग्रेस की इसी नीति के चलते देश के लाखों गांव सुधारों और विकास के बाकी कामों से वंचित रह गये थे। स्वतंत्रता के 70 साल बाद गांधी जी की उस अंतिम इच्छा का मर्म और भी स्पष्ट हो चुका है। उस महात्मा ने अपनी दूरदृष्टि से भांप लिया था, कि आने वाले समय में कांग्रेस से देश को लाभ नहीं, हानि ही हानि होने वाली है। लेकिन, कांग्रेसियों का दुर्दिन देखिये कि उनके नेतृत्व को आज तक गांधी जी की बात समझ में ही नहीं आई है।

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