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केरल की बाढ़ से निपटने में प्रधानमंत्री मोदी की तत्परता से कांग्रेस परेशान, आरोप के लिए लिया झूठ का सहारा

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कांग्रेस को त्रासदी पर भी राजनीति का रंग चढ़ाने में महारत हासिल है। केरल जब भयानक कुदरती आपदा का सामना कर रहा है, ऐसी स्थिति में भी वह अपनी इस महारत को साबित करने में लगी है। पूरा देश गवाह है कि केरल में बाढ़ की भयावहता देखकर कैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्य को मुसीबत से निकालने के लिए खुद को समर्पित कर दिया। उन्होंने न केवल राहत कार्यों के मुस्तैद प्रबंधन को सुनिश्चित किया, बल्कि इसके लिए भी बिना किसी देरी के कदम उठाकर दिखाया कि बाढ़ से हुए नुकसान की जल्द से जल्द भरपाई हो। प्रधानमंत्री की इस तत्परता पर विरोधियों के लिए भी उंगली उठाना मुश्किल था। यही वजह है कि कांग्रेस को कोई मौका नहीं मिल रहा तो अब झूठ का सहारा लेने पर उतर आई है।

झूठ पर आधारित कांग्रेस का आरोप
बाढ़ की मुसीबत से निपटने में केरल को केंद्र से मिली सहायता राशि को नाकाफी बताने के लिए कांग्रेस ने जिस बात का सहारा लिया है वह हैरान करने वाली है। कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा है कि प्रधानमंत्री 35 करोड़ रुपये अपने फिटनेस वीडियो पर खर्च करते हैं लेकिन केरल की मदद में सिर्फ 500 करोड़ रुपये देते हैं। बाढ़ से जोड़कर प्रधानमंत्री के फिटनेस वीडियो का हवाला कांग्रेस ने तब दिया है जब यह साबित हो चुका है कि उस वीडियो शूट पर सरकारी खर्चे की बात सफेद झूठ है।

पत्रकारों के झूठ का हो चुका है पर्दाफाश
फिटनेस चैलेंज के तहत प्रधानमंत्री के वीडियो शूट को लेकर विवादित पत्रकार निखिल वागले और IndiaScoops की पत्रकार मेघा चौधरी ने झूठ फैलाया था। एक RTI पर मिले जवाब से ये साबित हो चुका है कि इस वीडियो को बनाने में सरकार ने एक रुपया भी खर्च नहीं किया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने दो महीने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि प्रधानमंत्री आवास पर फिल्माया गया यह पूरा वीडियो पीएमओ के आधिकारिक कैमरामैन ने शूट किया था और इस पर कोई पैसा खर्च नहीं किया गया था। तस्वीर में आप RTI में मांगी गई जानकारी और उस पर दिए गए जवाब को देख सकते हैं। निखिल वागले और मेघा चौधरी के खिलाफ अब केस दर्ज करने की तैयारी चल रही है। दोनों को कानूनी नोटिस भेजने वाले वकील का कहना है, ‘’प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ लगाए गए आरोप ‘न केवल झूठे थे, बल्कि तथ्यात्मक रूप से गलत एवं भ्रामक थे। ये बदनीयत का प्रमाण हैं।‘’

बाढ़ पीड़ितों के दर्द पर कांग्रेस की राजनीति भारी
केरल की बाढ़ के मुद्दे पर प्रधानमंत्री पर सवाल उठाने के लिए कांग्रेस ने भी फर्जी खबरें देने वाले पत्रकारों के झूठ को आजमाकर अपने लिए नई मुसीबत को बुलावा दिया है। सवाल तो असल में यह है कि बाढ़ सहायता के लिए केंद्र के कदमों को लेकर क्या कांग्रेस के पास कुछ भी बोलने का मुंह है? पूरा देश देख चुका है कि कैसे पिछले साल जब गुजरात के कई हिस्से बाढ़ की वीभीषिका झेल रहे थे, तब कांग्रेस के कई विधायक कर्नाटक में सियासी मौज कर रहे थे। कांग्रेस नेताओं के लिए बाढ़ में घिरी अपने क्षेत्र की जनता की मुसीबत दूर करने से ज्यादा अपने आलाकमान के एक करीबी नेता को जिताने की गोटी सेट करना अधिक महत्वपूर्ण था। वहीं कर्नाटक के हसन जिले के राहत कैंप में कांग्रेसी मंत्री रेवन्ना की तो एक ऐसी तस्वीर भी लोगों ने देखी है जहां वे बाढ़ पीड़ितों पर बिस्कुट फेंक रहे हैं। यह तस्वीर वायरल हो चुकी है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या ऐसे कोई जानवरों को भी चारा देता है?

मुसीबत में संकटमोचक बनते रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी
चार साल पहले जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ हो या आज की केरल की बाढ़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऐतिहासिक तत्परता के साथ सामने आए हैं। वे हमेशा देश के किसी भी राज्य में मुसीबत में घिरे लोगों के लिए संकटमोचक बनते रहे हैं। बाढ़ के हालात का जायजा लेने के साथ ही प्रधानमंत्री ने ना केवल केरल के लिए 500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद की घोषणा की, बल्कि अनाज और दवाओं सहित राज्य सरकार द्वारा मांगी गई सभी प्रकार की राहत सामग्रियों को मुहैया कराने का आश्वासन भी दिया। बाढ़ से हुए नुकसान की तेज भरपाई कराने के लिए प्रधानमंत्री ने जहां बीमा कंपनियों को विशेष शिविर आयोजित कर दिए नुकसान के आकलन के निर्देश दिए, वहीं जिन लोगों के घर बाढ़ में उजड़ गए उनके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर घर देने का भी भरोसा दिया।

मुख्यमंत्री विजयन ने की प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा
बाढ़ पीड़ितों के राहत और बचाव के लिए केंद्र ने अपनी टीमों को झोंकने में भी जरा सी देरी नहीं की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुस्तैदी ऐसी रही कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी उनकी तारीफ करने से खुद को रोक नहीं सके। अपने एक इ-मेल इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि बाढ़ की त्रासदी से निपटने में केंद्र सरकार ने तत्परता दिखाई और इसके लिए सकारात्मक कदम भी उठाया। मुख्यमंत्री विजयन ने बाढ़ से निपटने के लिए केंद्र की ओर से अब तक की कुल 600 करोड़ रुपये की मदद पर भी खुशी जाहिर की। गौर करने वाली बात है कि केंद्र केरल की बाढ़ को बेहद गंभीर प्राकृतिक आपदा भी घोषित कर चुका है, जिसकी मांग मुख्यमंत्री विजयन ने भी की थी। जाहिर है प्रधानमंत्री मोदी यह देखकर केंद्रीय मदद में आगे नहीं आते कि किस राज्य में किस पार्टी का शासन है, उनकी चिंता होती है तो हमेशा सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए।

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