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तो केजरीवाल के राबर्ट वाड्रा हैं निकुंज अग्रवाल!

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भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने और ईमानदारी का ढोंग रचने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आजकल तिलमिलाए हुए हैं। दिल्ली के हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन के ओएसडी डॉक्टर निकुंज अग्रवाल पर सीबीआई के छापे के बाद से वे आपे में नहीं हैं। गाली-गलौज पर उतर आए हैं। आखिर केजरीवाल के भड़कने का असली कारण क्या है?

असल में डॉक्टर निकुंज अग्रवाल आप संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी रिश्तेदार हैं। निकुंज रिश्ते में केजरीवाल के दामाद लगते हैं। निकुंज अग्रवाल की कहानी भी काफी कुछ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा जैसी है। केजरीवाल राज में निकुंज सत्ता का पूरा मजा वैसे ही ले रहे थे, जैसे यूपीए राज में वाड्रा ने लिया। लोगों को दामाद होने के बारे में पता ना चले इसके लिए केजरीवाल ने निकुंज को अपने साथ रखने के बजाय सत्येद्र जैन के साथ लगाया।

केजरीवाल पर आरोप है कि दामाद को नौकरी दिलाने के लिए उन्होंने बड़े स्तर पर धांधली की। निकुंज ने फर्जी तरीके से ना सिर्फ सरकारी अस्पताल में नौकरी पाई बल्कि सरकारी खर्चे पर चीन सहित कई जगहों की यात्रा भी की। फर्जीवाड़े की बानगी यह देखिए कि चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में जॉब के लिए निकुंज अग्रवाल ने 6 अगस्त 2015 को हाथ से लिखकर आवेदन किया। अस्पताल डायरेक्टर को लिखे पत्र में खुद को डीएनबी ऑर्थोपेडिक सर्जन बताते हुए सीनियर रेसीडेंट पद पर काम करने की इच्छा जताई। लेकिन अस्पताल में कोई वैकेंसी ना होने के बावजूद चार दिन के अंदर 10 अगस्त 2015 को एडहॉक पर नियुक्त भी कर लिया गया। जबकि इस पोस्ट के लिए कोई विज्ञापन भी नहीं निकाला गया था। आप इसे क्या कहेंगे कि सीनियर रेसीडेंट नियुक्त करने का कोई प्रस्ताव नहीं होने और इस तरह का कोई पद उपलब्ध नहीं होने पर भी डायरेक्टर महोदय डॉक्टर निकुंज के घर नियुक्ति पत्र भेज देते हैं। क्या यह केजरीवाल के रिश्तेदार हुए बिना संभव था?

इसके साथ ही कई योग्य अधिकारियों को नजरअंदाज कर, सभी नियमों को ताक पर रखते हुए अगले महीने 4 सितंबर 2015 को निकुंज को सत्येंद्र जैन का ओएसडी बना दिया गया। इतना ही नहीं सत्येंद्र जैन ने निकुंज को ओएसडी पद पर चार बार सेवा विस्तार भी दिया। एक न्यूज वेबसाइट न्यूजलूज के अनुसार कंट्रेंक्ट पर होने के बाद भी सरकारी खर्च पर आईआईएम अहमदाबाद में मैनेजमेंट डेवलेपमेंट प्रोग्राम के लिए भेजा गया। पांच दिन की इस कोर्स की फीस करीब सवा लाख रुपए है। आप समझ सकते हैं कि दामादजी ने आम आदमी के पैसे पर मैनेजमेंट की पढ़ाई की। बताया यह भी जा रहा है कि चाचा नेहरु बाल चिकित्सालय में किसी चिकित्सक को सरकारी खर्च पर मैनेजमेंट पढ़ाई का कोई प्रावधान नहीं है।

न्यूजलूज ने यह भी कहा है कि दिल्ली के मुख्य सचिव ने उनके अप्वाइंटमेंट की फाइल पर नोटिंग में लिखा है कि इसमें तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। इसके बाद दिल्ली सरकार के उप सचिव सतर्कता केएस मीणा से शिकायत मिलने पर सीबीआई ने 30 दिसंबर को निकुंज के दफ्तर में तलाशी ली। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अग्रवाल की नियुक्ति के कुछ दिन के भीतर उनकी सेवाएं दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी के तौर पर नियुक्ति के लिए मांगी गईं। रेजीडेंसी योजना के अनुसार रेसीडेंट चिकित्सक अस्पतालों में कामों के लिए लगाए जाते हैं और अन्य ड्यूटी के लिए नहीं लगाए जाते हैं।

अब आप समझ सकते हैं कि सिर्फ केजरीवाल का दामाद होने के कारण निकुंज की सरकारी डॉक्टर के लिए नियुक्ति हाथ से लिखी अप्लीकेशन के आधार पर हुई। और भाई-भतीजावाद के कारण ही हेल्थ मिनिस्टर का ओएसडी बनाया गया।

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