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बीजेपी के मंथन से कोरोमंडल में खिलेगा कमल !

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भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक शनिवार को भुवनेश्वर में शुरू हुई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह समेत तीन सौ से ज्यादा वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इससे पहले पीएम मोदी एयरपोर्ट से सीधे राजभवन पहुंचे। इस दौरान पीएम मोदी के स्वागत के लिए सड़कों के दोनों किनारों पर भारी भीड़ जमा थी। एयरपोर्ट टेक्निकल एरिया से जनता मैदान तक हुए रोड शो के दौरान प्रधानमंत्री की एक झलक पाने को लोग बेताब थे। स्वत:स्फूर्त उमड़े जनसैलाब को देख कर इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि कोरोमंडल के इस इलाके में भी अब कमल खिलने का वक्त आ गया है।


रोड शो में उमड़ा जनसैलाब
प्रधानमंत्री के भुवनेश्वर रोड शो की शुरुआत एयरपोर्ट टेक्निकल एरिया से हुई जिसके बाद ए जी स्क्वायर होते हुए वे गर्वनर हाउस पहुंचे। यहां गवर्नर एस सी जमीर से मुलाकात के बाद के बाद प्रधानमंत्री जयदेव बिहार फ्लाई ओवर होते हुए जनता मैदान पहुंचे। इस दौरान चिलचिलाती धूप में सड़कों के दोनों तरफ मौजूद भीड़ बीजेपी के लिए बेहद उत्साहजनक है। प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व का ही आकर्षण है कि ओडिशा में पार्टी का महज एक सांसद होने के बावजूद इतनी भीड़ उमड़ी। 

पीएम मोदी का क्रेज
ये पहला ही मौका था जब कोई प्रधानमंत्री ओडिशा की जनता से रोड शो के जरिये मुखातिब हुए हों। पीएम मोदी का क्रेज भुवनेश्वर की सड़कों पर साफ दिख रहा था। जिस तरह वह अभिवादन स्वीकार कर रहे थे और  जनता मोदी-मोदी के नारे से उनका स्वागत कर रही थी वो अद्भुत था। ढोल, ताशे और मंजीरे बजाकर पीएम मोदी का स्वागत किया जा रहा था। इससे पहले शनिवार की सुबह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का यहां आने पर उनका 74 कमल के फूलों की माला से स्वागत किया गया। दरअसल 147 सदस्यीय ओडिशा विधानसभा 74 बहुमत की संख्या को बताता है। साफ है कि बीजेपी की नजर 2019 में लोकसभा चुनाव के साथ होने वाले ओडिशा विधानसभा चुनाव में जीत पर है।

दिग्गज पहुंचे भुवनेश्वर
भुवनेश्वर में हो रही कार्यकारिणी की इस बैठक में लालकृष्ण आडवाणी समेत कई बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री हिस्सा ले रहे हैं। पूरे देश से बीजेपी के करीब 300 से ज्यादा नेता इस बैठक में शामिल हुए।


1997 में हुई थी भुवनेश्वर बैठक
इससे पहले 19 से 21 सितंबर 1997 में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भुवनेश्वर में हुई थी। इसी बैठक के बाद 26 दिसंबर 1997 को बीजू पटनायक ने जनता दल से अलग बीजेडी का गठन किया था और 1998 के लोकसभा चुनाव में बीजेडी ने बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इसके बाद नवीन पटनायक नेतृत्व में 2000 में एनडीए की सरकार ओडिशा में बनी थी। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था।

ओडिशा में बढ़ा बीजेपी का जनाधार
दो महीने पहले ओडिशा के स्थानीय निकाय चुनाव में जनता का जबरदस्त समर्थन मिला है। बीजेपी को 850 सीटों में से 306 सीटें मिलीं थीं। लेकिन बड़ी बात ये रही कि कांग्रेस को पछाड़कर बीजेपी यहां दूसरे नंबर की पार्टी बन गई है। इस चुनाव में बीजेडी को 191 और कांग्रेस को 60 सीटों का नुकसान हुआ। गौरतलब है कि 2012 के नगर पालिका और निकाय के चुनाव में बीजेपी को जहां 36 सीटें ही मिली थीं।

कोरोमंडल में भी कमल खिलाने की कवायद
यूपी, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में पार्टी को मिली सफलता के बाद बीजेपी अब कोरोमंडल तट में अपना प्रभाव बढ़ाने पर कार्य कर रही है। बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा भी है कि पार्टी का स्वर्णिम समय तब आएगा जब केरल, बंगाल, ओडिशा जैसे राज्यों में भाजपा की सरकार होगी।

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