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बरखा दत्त की उदारवादी पत्रकारिता का INTOLERANCE

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सच को झूठ के अंबार से छांटकर जनता के सामने रखना पत्रकारिता का धर्म होता है, लेकिन देश के पत्रकार सच को झूठ से अलग करने के धर्म का पालन नहीं करते हैं। ऐसे पत्रकारों के लिए हर वह तथ्य सच है, जिनसे उनकी राजनीतिक विचारधारा को शक्ति मिलती है। पत्रकारों के एक गिरोह ने अपने स्वार्थ के लिए धर्मनिरपेक्षता, उदारवादी, उदार हिन्दू आदि जुमलों की आड़ में पत्रकारिता की दुकान खोल रखी है। ऐसी ही एक उदारवादी पत्रकारिता की दुकान बरखा दत्त ने भी खोल रखी है।

बरखा दत्त, पूर्व में NDTV की एंकर हुआ करती थीं, अब विभिन्न समाचार पत्रों और वेबसाइटों पर लिखती रहती हैं। सोशल मीडिया ने इन पत्रकारों को अपना भौकाल बनाने का एक अच्छा प्लेटफार्म उपलब्ध करा दिया है, यही वजह है कि ये दिन रात प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार के खिलाफ  आग उगलती रहती हैं। अपनी पत्रकारिता को उदारवादी मानने वाली बरखा दत्त कांग्रेसी संस्कृति को सर्वश्रेष्ठ मानती हैं।

बरखा दत्त का यह कैसा उदारवाद है जहां एक विशेष विचारधारा और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति असहिष्णुता है। असहिष्णुता के साथ उदारवाद की बात करने वाली बरखा दत्त उदारवादी नहीं हैं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने वालों को एकजुट करने का काम करती हैं। आइए, आपको बताते हैं कि कैसे बरखा दत्त उदारवादी पत्राकारिता के नाम पर INTOLERANCE की मुहिम चलाती है-

बरखा की उदारवादी पत्रकारिता का INTOLERANCE-1  

साउथ की फिल्मी दुनिया के दो दिग्गज-रजनीकांत और कमल हासन ने जब से तमिलनाडु की राजनीति में प्रवेश का निर्णय लिया है, बरखा दत्त ने भी अपना पाला चुन लिया है। बरखा, कमल हासन का भरपूर साथ दे रही हैं, उनका इंटरव्यू करती हैं, उनके बारे में लेख लिखती हैं और सोशल मीडिया पर कमल हासन की बातों को शेयर करती हैं। कमल हासन की उन बातों को भरपूर प्रचारित करती हैं जहां वह राजनीकांत और केसरिया रंग वाली राजनीति का विरोध करते हैं। बरखा दत्त, कमल हासन को उदारवादी रुप में केसरिया रंग का विरोधी बताती हैं। 12 फरवरी को बरखा दत्त द्वारा किए गए Tweets से साफ पता लग जाता है कि वह पत्रकारिता के नाम पर देश में असहिष्णुता की जड़ों को मजबूत कर रही हैं-

बरखा की उदारवादी पत्रकारिता का INTOLERANCE-2 

बरखा दत्त की उदारवादी पत्रकारिता का विकृत चेहरा तब दिखा जब उन्होंने कांग्रेस के लोकसभा सांसद शशि थरूर का इंन्टरव्यू, उनकी नई किताब ‘Why I am Hindu’ पर लिया। बरखा दत्त चुन कर उन लोगों का इंटरव्यू करती हैं, जो दिखते तो उदारवादी हैं, लेकिन वास्तव में एक विशेष विचारधारा के प्रति असहिष्णु होते हैं। असहिष्णुता से भरे इस इंटरव्यू को बरखा दत्त ने 2 फरवरी को Tweet करके प्रचारित किया-

बरखा की उदारवादी पत्रकारिता का INTOLERANCE-3 बरखा दत्त की उदारवादी पत्रकारिता का एक नया मतलब उनके 2 फरवरी के Tweet में सामने आता है। बरखा इस Tweet में मानती हैं कि कांग्रेस का गुजरात चुनावों में मुसलमानों के बारे में बात न करना और राजस्थान में होने वाले चुनावों के मद्देनजर फिल्म पद्मावत के बारे में मौन रहना राजनीतिक रुप से सही है। वहीं दूसरी तरफ बरखा ने प्रधानमंत्री मोदी पर फिल्म और मुसलमानों को लेकर निशाना साधना नहीं छोड़ा। 2 फरवरी के इस Tweet को पढ़कर, बरखा की कथित उदारवादी पत्रकारिता का नया चेहरा दिखाई पड़ता है-

बरखा की उदारवादी पत्रकारिता का INTOLERANCE-4 राजस्थान में हुए उपचुनावों के परिणाम आने पर बरखा दत्त का उदारवादी पत्रकार बहुत ही खुश हुआ। उन्होंने इस जीत से मिलने वाली सीख भी कांग्रेस को दे दी ताकि आने वाले चुनावों में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित हो सके। बरखा के अंदर के उदारवादी पत्रकार को प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार नापसंद है। देश में बरखा जैसे उदारवादी पत्रकारों ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ असहिष्णुता की मुहिम चला रखी है। 1 फरवरी को बरखा द्वारा किए गये इस Tweet को देखिए-

बरखा की उदारवादी पत्रकारिता का INTOLERANCE-5 बरखा दत्त की उदारवादी पत्रकारिता में कांग्रेस प्रेम साफ नजर आता है। बरखा अपने लेखों में कांग्रेस द्वारा की जा रही भूलों से आगाह कराती रहती हैं, ताकि प्रधानमंत्री मोदी के सामने राहुल गांधी वाली कांग्रेस का हाल 2014 की तरह से 2019 में न हो जाए। बरखा अपने उदारवाद के चोले में प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करती हैं और कांग्रेस को फिर सत्ता में देखना चाहती हैं। यह उदारवादी पत्रकारिता कदापि नहीं हो सकती, जिसमें निहित स्वार्थों के लिए पत्रकारिता का इस्तेमाल किया जाता है। 9 फरवरी को बरखा के इस Tweet में बरखा की उदारवादिता देखिए-

बरखा की उदारवादी पत्रकारिता का INTOLERANCE-6 

बरखा के उदारवादी पत्रकार की प्रसन्नता 5 फरवरी के Tweet में दिखाई पड़ी, जब राहुल गांधी ने कांग्रेस के सोशल मीडिया कैंपेन के लिए प्रवीण चक्रवर्ती को Data Analytics department के मुखिया के रुप में नियुक्ति किया। बरखा को इस बात की अधिक खुशी है कि आखिरकार कांग्रेस, प्रधानमंत्री मोदी से राजनीतिक जंग लड़ने के लिए अपने को तैयार कर रही है। उदारवादी पत्रकार का नकाब पहनकर, बरखा का इस तरह कांग्रेस से प्रेम और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति असहिष्णुता, देश की पत्रकारिता के लिए खतरनाक है। जाहिर है इस तरह की पत्रकारिता में जनता को सच्चाई बताने के नाम पर धोखा दिया जा रहा है।

बरखा की उदारवादी पत्रकारिता का INTOLERANCE-7 -बरखा के अंदर के उदारवादी पत्रकार का कांग्रेस प्रेम 24 दिसंबर को Twitter पर छलक कर सामने आ गया। आप भी इस Tweet को पढ़िए और समझिए कि बरखा की पत्रकारिता किस हद तक उदारवाद के नाम पर कांग्रेस के हाथों में खेलने वाली है। 

बरखा की उदारवादी पत्रकारिता का INTOLERANCE-8 

कांग्रेस के प्रति बरखा दत्त का अगाध प्रेम 16 दिसंबर को Twitter पर दिखा, जब राहुल गांधी अपनी मां सोनिया गांधी से कांग्रेस अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण कर रहे थे।

बरखा की उदारवादी पत्रकारिता का INTOLERANCE-9

बरखा दत्त को कांग्रेस की संस्कृति से इस हद तक प्रेम है कि बरखा ने 8 फरवरी को Tweet करके राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के दौरान कांग्रेसी सांसद रेणुका चौधरी के अट्टाहस को सही ठहरा दिया। इस कथित उदारवादी पत्रकार को सिर्फ महिला सासंद के हंसने का अधिकार दिखाई दिया, जबकि संसद में प्रधानमंत्री का भाषण चल रहा था, वहां हंसने का कोई माहौल नहीं था। यह सरासर तर्कहीनता की पराकाष्ठा है, जहां परिस्थितियों के अनुसार सोचने की जगह भावनात्मक और मात्र प्रधानमंत्री मोदी के विरोध के लिए सोचा जाता है।

बरखा की उदारवादी पत्रकारिता का INTOLERANCE-10 बरखा दत्त ने 30 जनवरी को एक Tweet करके अपनी उदारवादी पत्रकारिता का असली मकसद बता ही दिया। इनका मकसद है देश को दो धाराओं में बांटने की बात को उछालना, ताकि इनकी झूठी उदारवादी पत्रकारिता को जनता सच्चा उदारवाद समझने लगे। पत्रकारिता के नकाब में जिस सूक्ष्म राजनीति को बरखा जैसे उदारवादी पत्रकार हवा दे रहे हैं, वह निहायत ही खतरनाक खेल है। इस खेल में विभाजन को हवा देकर अपनी विचारधारा को सही साबित करने की कोशिश करते हैं। इस खेल के Tweet को देखिए-

उदारवादी चेहरों के पीछे छिपी कांग्रेसी संस्कृति से अगाध प्रेम करने वाले इन पत्रकारों को समझना जरुरी है, क्योंकि इन पत्रकारों ने देश में ध्रुवीकरण को हवा देकर उदारवादी सोच के नाम पर जनता से छलावा किया है। छल की इस पत्रकारिता में देश की बहुमत की सरकार के प्रति असहिष्णुता का माहौल पैदा करने का काम होता है।

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