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तीन सालों में 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ी भारत की अर्थव्यवस्था

भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था पर आधारित रिपोर्ट

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देश की सकल घरेलू उत्पाद यानि जीडीपी की वृद्धि दर बीते साल की 7.6 प्रतिशत की तुलना में इस वर्ष 7.1 प्रतिशत पर आ गई है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में कृषि क्षेत्र के काफी अच्छे प्रदर्शन के बावजूद यह वृद्धि दर वास्तव में उम्मीद से कम है। लेकिन बीते तीन सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत की विकास की औसत रफ्तार अभी भी स्थिर बनी हुई है। इतना ही नहीं यूपीए सरकार के अंतिम तीन सालों की जीडीपी दर से ये अब भी बहुत आगे है। इसके साथ ही बीते तीन सालों के चीन और भारत के विकास दर की तुलना करें तो भी भारत की विकास दर चीन से ज्यादा है।

चीन से ज्यादा तेज गति से बढ़ रही है भारत की इकोनॉमी
कुछ मीडिया रिपोर्ट में जिस तरीके से भारत की अर्थव्यवस्था को जनवरी से मार्च की तिमाही में पीछे दिखाया जा रहा है सिर्फ वही सच नहीं है। 2015 में जहां चीन की विकास दर 6.9 थी, जबकि भारत की 7.2 थी। 2016 में यह आंकड़ा चीन के लिए 6.7 प्रतिशत था जबकि भारत ने इस दौरान 7.6 प्रतिशत की रफ्तार से वृद्धि की। वहीं इस वर्ष भारत ने 7.1 प्रतिशत की दर से विकास किया है जबकि चीन का आंकड़ा आना अभी बाकी है। लेकिन चीन ने 6.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान जताया है। जाहिर भारत जहां पिछले तीन सालों में सात प्रतिशत से ज्यादा की गति से वृद्धि कर रहा है वहीं चीन की विकास दर अभी भी सात से कम है।

सीमित था जीडीपी पर नोटबंदी का असर
जनवरी से मार्च की तिमाही में जीडीपी की रफ्तार 6.1 रही है। इसके कारण 2016-17 में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5 से घटकर 7.1 हो गया है। लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये कहा जा रहा है कि भारत ने सबसे तेज गति से विकास कर रही अर्थव्यवस्था का तमगा खो दिया है। लेकिन इन दावों से इतर भारत की अर्थव्यवस्था की सच्चाई अलग है।

यूपीए सरकार से काफी ज्यादा है रफ्तार
यूपीए सरकार के अंतिम तीन सालों की अर्थव्यवस्था की गति पर गौर करें तो ये 2011-12 में 6.7, 2012-13 में 4.5 और 2013-14 में 4.7 प्रतिशत थी। वहीं बीते तीन साल के मोदी सरकार के कार्यकाल पर गौर करें तो 2014-15 में 7.2, 2015-16 में 7.6 थी, वहीं 2016-17 में 7.1 है। जाहिर है बीते तीन सालों में जीडीपी ग्रोथ रेट 7 से ज्यादा रही है।

औसत जीडीपी ग्रोथ में भी यूपीए पर एनडीए भारी
यूपीए के अंतिम तीन साल और एनडीए सरकार के वर्तमान तीन साल पर नजर डालें तो यूपीए के अंतिम तीन सालों का औसत जीडीपी ग्रोथ 5.3 आता है, वहीं एनडीए सरकार में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.3 रही है। अर्थव्यवस्था के विकास की गति में 2 प्रतिशत का अंतर भारी अंतर माना जाता है। यानी साफ है कि मोदी सरकार में देस की विकास दर एक स्थिर रफ्तार से आगे बढ़ रही है।

भारत की जीडीपी वृद्धि दर में स्थिरता-FICCI
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI)ने भी माना है कि लगातार वैश्विक मंदी के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था एक स्थिरता प्राप्त कर रही है। फिक्की के चेयरमैन पंकज पटेल के मुताबिक आर्थिक सुधारों के साथ भारत की अर्थव्यवस्था की ठोस नींव रखी जा रही है। फिक्की के मुताबिक डीमोनिटाइजेशन की प्रक्रिया अब समाप्त हो चुकी है उसका जो असर होना था वो भी हो चुका है। आउटलुक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए फिक्की के अध्यक्ष ने कहा कि 2017-18 में जीडीपी 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।

मूडीज का अनुमान, देश में तेज रहेगी जीडीपी ग्रोथ 
अमेरिकी रेटिंग एजेंसी मूडीज इनवेस्टर सर्विस ने अपनी ग्लोबल मैक्रो आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी का नकारात्मक असर अल्पकालिक था। मूडीज के मुताबिक अगले तीन से चार सालों में भारत के अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर आठ प्रतिशत हो जाएगी। मूडीज के अनुमान में वित्त वर्ष 2017-18 में भारत की अर्थव्यवस्था में 7.5 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2018-19 में 7.7 प्रतिशत की दर से वृद्धि होगी।

भारत की अर्थव्यवस्था में दुनिया का भरोसा बढ़ा
वित्त वर्ष 2016-17 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के दौरान (एफडीआई) में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ये बढ़कर अब 60.08 अरब डॉलर की नई ऊंचाई पर पहुंच गई है। दरअसल एफडीआई नीति में बदलाव तथा विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा मंजूरी की सीमा में वृद्धि और देश में ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति को बढ़ावा देने से एफडीआई में बढ़ोतरी हुई है। एफडीआई इक्विटी प्रवाह वित्त वर्ष 2016-17 में 43.48 अरब डॉलर रहा, जो किसी एक वित्त वर्ष में यह सर्वाधिक है।

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