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इलाज के लिए पसंदीदा देश बना भारत, अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया से भी आ रहे मरीज

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार सस्ती और गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए कटिबद्ध है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में सरकार सरकार देशभर के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाएं बढ़ाने का काम कर रही है। देशभर में सरकार जगह-जगह पर जन औषधि केंद्र खोल रही है। चिकित्सा क्षेत्र में प्रगति से भारत की ख्याति दुनियाभर में बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण भारत इलाज कराने के लिए पसंदीदा गंतव्य बनाता जा रहा है। वर्ष 2016 में 1,678 पाकिस्तानियों और 296 अमेरिकियों समेत दो लाख से अधिक विदेशियों ने भारत आकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में दुनिया भर के 54 देशों के 2,01,099 नागरिकों को चिकित्सा वीजा जारी किए गए। भारत के प्रमुख चिकित्सा स्थल के रूप में उभरने का प्राथमिक कारण विकसित देशों की तुलना में यहां काफी कम कीमत पर उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश का चिकित्सा पर्यटन तीन अरब डॉलर का होने का अनुमान है, जो 2020 तक बढ़कर 7-8 अरब डॉलर का हो सकता है।

आइए, एक नजर डालते हैं, मोदी सरकार की स्वास्थ्य संबंधी कुछ नीतियों पर-

मेडिकल टूरिज्म और देशीय चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा
प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने हमेशा भारतीय चिकित्सा पद्धति को प्रोत्साहित किया है। उन्होंने बाकायदा मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की बात हमेशा कही है। यह बात इसलिए भी उत्साहवर्धक है, क्योंकि विदेशों में भी पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति की ओर काफी झुकाव देखने को मिलता है। प्रधानमंत्री मोदी ने योग, आयुर्वेद आदि को हमेशा प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयास किया है और देशीय चिकित्सा पद्यति के महत्त्व को रेखांकित किया है। समस्त भारतवासी का संपूर्ण स्वास्थ्य उनकी प्राथमिकताओं में सर्वोपरि है।

आयुष्मान भारत योजना
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की बड़ी फ्लैगशिप योजना ‘आयुष्मान भारत’ के लिए बजट में प्रारंभिक रूप से 2000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं, हेल्थ और वेलनेस सेंटर खोलने के लिए 1200 करोड़ रुपए का अलग से प्रावधान किया गया है। आयुष्मान भारत की फ्लैगशिप योजना नए वित्त वर्ष के आगाज यानी 1 अप्रैल 2018 से लागू होगी। यानी, गरीब परिवारों के लोग 1 अप्रैल से 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त में करा सकेंगे। 2011 की जनगणना के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को हेल्थ बीमा मुफ्त में दिया जाएगा। यह योजना भी लाभ आधार नंबर से लिंक्ड रहेगा। यानि इसके लिए प्रीमियम सरकार देगी। योजना के तहत गरीब परिवार न केवल सरकारी बल्कि चुनिंदा प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज करा सकेंगे।

प्रधानमंत्री की पहल पर हर किसी के पहुंच में स्वास्थ्य सेवाएं
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए लगातार नीतियों में बदलाव कर रहे हैं। सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को 2025 आते-आते जीडीपी के 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। सभी सरकारी स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में दवा और निदान मुफ्त निर्बाध रूप में मिले, इसके लिए राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन नि:शुल्‍क औषध एवं नि:शुल्‍क नैदानिक पहल का कार्यान्‍वयन कर रहा है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन प्रधानमंत्री मोदी की अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है, जो स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश के समस्त वर्गों का हित सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई गई है। इसके अंतर्गत राज्य सरकारों को कुछ वित्तीय सहायता द्वारा ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य की स्थिति को और बेहतर बनाने की दिशा में भी प्रयास किया गया और शहरी वर्ग के स्वास्थ्य को भी इस दायरे में लाया गया। इसके अंतर्गत 4 घटकों को शामिल किया गया, जो इस प्रकार हैं- राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, शहरी स्वास्थ्य मिशन, तृतीयक देखभाल कार्यक्रम तथा स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा के लिए मानव संसाधन।

प्रधानमंत्री जन औषधि योजना
प्रधानमंत्री मोदी ने इस योजना के द्वारा न केवल वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई, बल्कि सामान्य नागरिकों को भी इससे बड़ी राहत मिली। इस योजना में केंद्र सरकार द्वारा उत्तम गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाओं को बाजार मूल्य से काफी सस्ते दामों पर उपलब्ध कराया जाता है। गरीबों के लिए जन औषधि स्टोर पर निशुल्क जांच की सुविधा की व्यवस्था भी की गई है। इस योजना के अतिरिक्त यौन शोषण पीड़ित को सरकारी व निजी, दोनों ही अस्पतालों में मुफ्त चिकित्सा सहायता दिए जाने का प्रावधान किया गया।

जिला अस्पतालों में डायलिसिस मुफ्त
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के तहत जिला अस्पतालों में गरीबों के लिए निशुल्क डायलिसिस सेवा देने की योजना पर सरकार काम कर रही है। सभी पीएचसी और उप स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं बढ़ाकर, उसे स्वास्थ्य एवं आरोग्य केन्द्रों में बदलने का काम हो रहा है। राज्‍य सरकारों के सहयोग से “जन औषधि स्‍कीम” के अंतर्गत सभी के लिए जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना के तहत परिवार फ्लोटर आधार पर स्‍मार्ट कार्ड आधारित नकद रहित स्‍वास्‍थ्‍य बीमा प्रदान किया जा रहा है।

साफ अक्षरों में और मरीज की भाषा में हो दवाई का नुस्खा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जन-जन को सशक्त बनाना चाहते हैं। इसी संकल्प के साथ केंद्र सरकार हर योजना पर काम कर रही है। केंद्र सरकार के आदेश पर भारतीय चिकित्‍सा परिषद (पेशेवर आचरण, शिष्‍टाचार और नीति ) विनियम में बदलाव किया गया है, और सभी डॉक्टरों को आदेश दिया गया कि उनके द्वारा पठनीय और यथासंभव अंग्रेजी के बड़े अक्षरों में जेनरिक नाम से औषधियों का नाम लिखा जाना चाहिए। साथ ही डॉक्टरों से यह भी कहा गया कि दवाओं का नुस्‍खा एवं प्रयोग युक्तिसंगत होना चाहिए।

पाठ्यक्रम के बाद ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देना अनिवार्य
ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में अच्छे डॉक्टर उपलब्ध हों, इसके लिए केंद्र सरकार के अनुमोदन पर भारतीय चिकित्सा परिषद ने चिकित्सा शिक्षा नियमों में कुछ सुधार किए। अब स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त करने वाले सभी चिकित्सकों को अनिवार्य रूप से दो साल दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देनी होगी।

दुर्गम क्षेत्र में सेवा देने वाले चिकित्सकों को मिलेगी वरीयता
भारतीय चिकित्सा परिषद ने चिकित्सा शिक्षा नियमों में बदलाव करके स्‍नातकोत्‍तर डिप्‍लोमा पाठ्यक्रमों में 50 प्रतिशत सीटें सरकारी सेवारत ऐसे चिकित्‍सा अधिकारियों के लिए आरक्षित कर दी हैं, जिन्होंने कम से कम 3 वर्ष की सेवा दुर्गम क्षेत्रों में की हो। वहीं, स्‍नातकोत्‍तर मेडिकल पाठ्यक्रमों में नामांकन कराने के लिए प्रवेश परीक्षा में दुर्गम क्षेत्रों में सेवा के लिए प्रति वर्ष के लिए 10 प्रतिशत अंक का वैटेज दिया जाएगा, जो कि प्रवेश परीक्षा में प्राप्त अंकों का अधिकतम 30 प्रतिशत प्रोत्‍साहन अंक दिया जा सकेगा। इसके अतिरिक्‍त एनएचएम के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने के लिए एमबीबीएस तथा स्‍नातकोत्‍तर डॉक्‍टरों को वित्तीय प्रोत्‍साहन भी दिया जाता है।

घुटना प्रतिरोपण, स्टेंट की कीमतों में कटौती
किफायती कीमत में उपचार सबको मिले, इसी को लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घुटना प्रतिरोपण की मूल्य सीमा 54 हजार रुपये से 1.14 लाख रुपये के बीच निर्धारित कर दी है। ऐसा करने से घुटना सर्जरी की कीमत में 70 प्रतिशत तक की कमी आई है। अनुमान है कि इससे सालाना देशवासियों के करीब 1500 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। इसी तरह कैंसर और ट्यूमर के लिए विशेष इम्प्लांट की 4 से 9 लाख रुपये की कीमत को कम करके एक लाख 14 हजार रुपये के भीतर रखा गया है। इससे पहले सरकार स्टेंट की कीमते तय कर चुकी है।

मिशन इंद्रधनुष द्वारा बच्चों के टीकाकरण की सुनिश्चितता
प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दिसंबर 2014 में सुशासन दिवस के अवसर पर मिशन इंद्रधनुष को आरंभ किया गया था। इस योजना का लक्ष्य वर्ष 2020 तक उन सभी बच्चों के टीकाकरण को सुनिश्चित करना था, जिन्हें विविध रोगों से बचाव के टीके नहीं लगे हैं या अगर लगे भी हैं तो आंशिक रूप से आधे-अधूरे ढंग से। इन टीकों से डिप्थेरिया, टिटनस, खसरा, तपेदिक, पोलियो, हेपेटाइटिस-बी जैसे रोगों की पूर्णतया रोकथाम संभव है। यह अभियान प्रति वर्ष अधिकाधिक बच्चों के टीकाकरण के लक्ष्य के साथ विविध अभियानों द्वारा जारी रखा जाएगा।

गर्भवती महिलाओं के पोषण के लिए आर्थिक सहायता
एक गर्भवती महिला के पोषण और स्वास्थ्य रक्षा में ही बच्चे का संपूर्ण स्वास्थ्य छिपा होता है, परंतु गरीब एवं वंचित वर्ग की महिलाएं कुपोषण की शिकार होने को विवश होती हैं। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने इन महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए, चुने गए जिलों की प्रत्येक गर्भवती महिला को 6 हजार रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया। इस योजना का उद्देश्य मातृत्व मृत्यु दर जैसी स्थिति में बदलाव लाना भी है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि मातृत्व दर में भारत की दशा बहुत भयानक है। गरीब महिलाएं गर्भावस्था जैसे संवेदनशील समय में भी अपने पोषण पर ध्यान नहीं दे पाती हैं, इसलिए मोदी सरकार ने यह प्रावधान किया कि इस 6 हजार की वित्तीय सहायता द्वारा गर्भावस्था काल में उनके आवश्यक पोषण को सुनिश्चित किया जा सके। यह राशि उन महिलाओं के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर कर दी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत सरकार इस दिशा में भी काम कर रही है कि इस वर्ग की गर्भवती महिलाओं को कैशलेस ट्रीटमेंट दिए जाने की भी व्यवस्था की जा सके।

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