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शिखर पर सेंसेक्स: आर्थिक मोर्चे पर बल्ले-बल्ले

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व में देश आर्थिक मोर्चे पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। सेंसेक्स 30000 के पार निकलकर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने में कामयाब हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपया भी मजबूत होकर पिछले 21 महीनों में उच्चतम स्तर है। बाजार जनवरी से करीब 14-15 फीसदी ऊपर है। दुनियाभर के बाजारों में सबसे अच्छे रिटर्न भारत में रहे हैं। यहां की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती इकोनॉमी है और इसी रफ्तार से विकास करती रही तो जीडीपी मौजूदा स्तर से तीन गुना तक ज्यादा बढ़ जाएगी। भारत की वृद्धि दर सुदृढ़ बनी हुई है, मुद्रा स्‍फीति में कमी आई है, चालू खाता घाटा नीचे है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व के कारण देश की अर्थ-व्यवस्था काफी मजबूत हुई है।

निवेशकों की पसंद
भारत विदेशी निवेशकों के लिए एक पसंदीदा ठिकाना बना हुआ है। शेयर बाजार के अलावा वे भारतीय कंपनियों के बॉन्ड्स में भी काफी रकम लगा रहे हैं क्योंकि इससे उन्हें अच्छा रिटर्न मिल रहा है। इस साल देश के डेट और इक्विटी मार्केट में फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स ने 87,465 करोड़ रुपये लगाए हैं।

निर्यात में वृद्धि से बेहतर व्यापार संतुलन
निर्यात में वृद्धि से व्यापार संतुलन बेहतर हुआ है। मार्च, 2017 के दौरान 29232.05 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्‍य की वस्‍तुओं का निर्यात किया गया, जो मार्च, 2016 में हुए 22911.74 अमेरिकी डॉलर मूल्‍य के निर्यात के मुकाबले डॉलर के लिहाज से 27.59 फीसदी ज्‍यादा है। रुपये के लिहाज से मार्च, 2017 के दौरान निर्यातों का मूल्‍य 192571.13 करोड़ रुपये दर्ज किया गया जो कि मार्च, 2016 के दौरान 153558.85 करोड़ रुपये था। इस प्रकार, इसमें 25.41 प्रतिशत की सकारात्‍मक वृद्धि दर्ज की गई है। वाणिज्‍यि‍क वस्‍तुओं एवं सेवाओं को एक साथ ध्‍यान में रखते हुए समग्र व्‍यापार घाटा अप्रैल-मार्च, 2016-17 के दौरान 46420.55 मिलियन अमेरिकी डॉलर का रहने का अनुमान है, जो अप्रैल-मार्च 2015-16 में दर्ज किए गए 54287.53 मिलियन अमेरिकी डॉलर के व्‍यापार घाटे से 14.49 फीसदी कम है।

कर संग्रह में वृद्धि
इस साल सरकार को पिछले छह साल की तुलना में सबसे ज्यादा टैक्स से पैसा मिला है। प्रत्‍यक्ष और परोक्ष कर वसूली में कुल मिलाकर करीब 18 प्रतिशत वृद्धि के साथ राजस्‍व विभाग ने 2016-17 के लिए संशोधित कर वसूली लक्ष्‍य पार कर लिया है। आंकड़ों के अनुसार 2016-17 में कुल कर वसूली 17.10 लाख करोड़ रुपये की हुई, ज‍बकि संशोधित लक्ष्‍य 16.97 लाख करोड़ रुपये का रखा गया था। इसी तरह मार्च 2017 तक प्रत्‍यक्ष कर वसूली 8.47 लाख करोड़ रुपये की हुई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की निवल वसूली की तुलना में 14.2 प्रतिशत अधिक है। 2016-17 में परोक्ष कर वसूली 8.63 लाख करोड़ रुपये की हुई, जो वित्‍तीय 2015-16 वर्ष की वास्‍तविक राजस्‍व प्राप्तियों की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है

आर्थिक विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने कहा है कि भारत की आर्थिक विकास दर 2017-18 में बढ़कर 7.4 प्रतिशत और इससे अगले वित्त वर्ष में बढ़कर 7.6 प्रतिशत हो सकती है। एडीबी ने कहा है कि दक्षिण एशिया क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत की विकास दर पिछले वित्त वर्ष में 7.1 प्रतिशत रहने के बाद 2017-18 में 7.4 प्रतिशत और इससे अगले साल 2018-19 में 7.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है

आर्थिक विकास को गति के लिए 300 विशिष्ट कदम
हाल ही में नीति आयोग की कार्यकारी परिषद की बैठक में आर्थिक विकास को गति देने के लिए 300 विशिष्ट कदम बताए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई परिषद की तीसरी बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने एक प्रस्तुति के माध्यम से इन्हें सामने रखा। पनगढ़िया ने कहा कि 300 ऐसे विशेष कदमों को चिन्हित किया गया है, जो सभी क्षेत्रों के लिए कारगर होंगे। ‘कार्य एजेंडा’ की अवधि 14वें वित्त आयोग की अवधि के बराबर है और इससे केंद्र और राज्यों के आकलनों के अनुसार कोष जारी करने में स्थिरता मिलेगी।

GST से बदलेगी देश की आर्थिक तस्वीर
1 जुलाई, 2017 से पूरा देश गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी GST के दायरे में आ जाएगा और भारत वन इंडिया वन टैक्स के आधार पर ‘पूरा देश, एक बाजार’ के कंसेप्ट को अपना लेगा। यानी इस दिन से देश की अर्थव्यवस्था को नयी रफ्तार मिल जाएगी। इस दिन से देश को ‘टैक्स ऑन टैक्स’ के मकड़जाल से मुक्ति मिल जाएगी और व्यापार का तरीका भी बदल जाएगा। इसके लागू होने के साथ जहां जरूरी चीजों के दाम घट जाएंगे वहीं शौक की चीजें महंगी हो जाएंगी। ये दिन स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के सबसे बड़े आर्थिक सुधार का गवाह बनने वाला है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यू इंडिया’ के सपने को नया आधार देगी। माना जा रहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लाखों लोग संगठित क्षेत्र में आ जाएंगे। अगर 1 फीसदी लोग भी असंगठित क्षेत्र से संगठित क्षेत्र में जाते हैं तो 40 लाख और नौकरियां आएंगी।

पर्यटकों की संख्या में वृद्धि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के कारण देश में विदेशी पर्यटकों की संख्यां में भी वृद्धि हुई है। जनवरी-फरवरी, 2017 के दौरान विदेशी पर्यटकों की संख्या 19.40 लाख के साथ इसमें 14.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही जनवरी-फरवरी, 2016 में कुल 20.54 लाख पर्यटकों के आगमन की तुलना में जनवरी-फरवरी, 2017 के दौरान ई-वीजा पर कुल 32.18 लाख पयर्टकों का आगमन हुआ, जो 56.6 प्रतिशत अधिक था।

गैस सिलिंडर-बिजली उत्पादन और कैरोसिन उपभोग में कमी

  • उज्जवला योजना के जरिए अप्रैल 2016 से फरवरी 2017 के बीच रिकार्ड तीन करोड़ नये उपभोक्ताओं को कनेक्शन दिए गए।
  • अब तक देश में 20 करोड़ कनेक्शन दिए जा चुके हैं।
  • इसी तरह से बिजली के उत्पादन में भी रिकार्ड वृद्धि ने केरोसिन तेल के उपभोग को कम कर दिया है।
  • खाना बनाने और घरों में रोशनी के लिए गांवों में केरोसीन का अधिक उपयोग होता था जो अब गैस सिलिंडर और बिजली की उपलब्धता से कम हो गया है।
  • 2017 के फरवरी माह में केरोसिन तेल के उपभोग में 34 प्रतिशत की कमी आयी जबकि अप्रैल 2016- फरवरी 2017 के दौरान 20.4 प्रतिशत की कमी आयी। इस कमी से सरकार को सब्सिडी बजट में भारी कमी आयी है।

2015-16 तक के आंकड़े-

मोदी मैजिक का कमाल

  • पिछले ढाई दशक में पहली बार किसी सरकार को आर्थिक सुधारों के लिए इतना व्यापक जनसमर्थन हासिल हुआ है। हाल के विधानसभा चुनावों के परिणाम इस बात के संकेत हैं।
  • देश में अब तक आर्थिक सुधार टुकड़ों में हुए थे, 1991 से शुरु हुए आर्थिक सुधारों के दौर में पहली बार है जब मोदी सरकार ने एकीकृत तरीके से सुधार किया है और कर रही है।
  • नरेन्द्र मोदी सरकार ने महंगाई दर पर नियंत्रण किया है।
  • एफडीआई बढ़ाने के उपायों को सरल किया है
  • ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए किए गए कामों को तेज गति से आगे बढ़ाया है। भारत की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग भी 2017 में बढ़कर 130 हो गई है, जो 2015 में 142 थी।
  • जनधन खाते-आधार संख्या-मोबाइल के जरिए सब्सिडी में कमी लायी है। विभिन्न समाज कल्याण योजनाओं में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की व्यवस्था अपनाने से उसे 34,000 करोड़ रुपए की बचत हुई है। इसके साथ ही आधार को कई योजनाओं के साथ जोड़ने से भ्रष्टाचार पर निगरानी रखने और सुविधाओं के स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिली है।

मोदी के इन सुधार के कदमों का परिणाम रहा कि-

  • पिछले तीन सालों में वैश्विक सुस्ती के बावजूद भारत ने सात से आठ फीसदी के बीच विकास किया है।
  • दुनिया की सबसे खुली अर्थव्यवस्थाओं में से एक हो गया है।
  • देश में सबसे ज्यादा विदेशी निवेश हासिल करने वाले देशों में से एक बन गया है
  • 1991 में न्यू इकनॉमिक पॉलिसी अपनाने के बाद पहली बार भारत के चालू वित्तीय घाटे की भरपाई एफडीआई के जरिए हो रही है। भारत का निर्यात आयात के मुकाबले बढ़ रहा है।
  • हाल ही में वित्त वर्ष के खत्म हुए पहले 10 महीनों में (अप्रैल 2016 से जनवरी 2017) के दौरान कुल एफडीआई 53.3 बिलियन डॉलर रहा, जो पहले इसी अवधि के दौरान 47.2 बिलियन डॉलर था और 2016 के पूरे वित्त वर्ष में यह 55.6 बिलियन डॉलर रहा।

यह देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काबिलियत में निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत है। जिस वित्तीय घाटे की भरपाई अब तक तक विदेशी मुद्रा बाजार में कंपनियों द्वारा उधार लेने, एनआरआई की फंडिग और पोर्टफोलियो इन्फ्लो के जरिए होती थी, उसमें अब बदलाव दिखने लगा है। एफडीआई में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का इस्तेमाल कंपनियां और सेंट्रल बैंक पुराने उधारों को चुकाने में कर रहे हैं।

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