Home समाचार मोदी से क्यों डरता है ड्रैगन

मोदी से क्यों डरता है ड्रैगन

1203
SHARE

दुनिया भर में कहीं भी किसी भी देश के राष्ट्राध्यक्ष का चुनाव हो तो उसकी चर्चा होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है लेकिन अगर कहीं किसी देश के राज्य के चुनावों के नतीजों की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे तो एक असमान्य घटना कहलाएगी और कुछ ऐसा ही इस बार उत्तर प्रदेश चुनावों में बीजेपी की जीत पर हुआ। उत्तर प्रदेश में मिली जीत पर मोदी को फिर से विश्व पटल पर चर्चा में ला दिया है।

दुनिया ने माना मोदी का लोहा

यह कोई पहला मामला नहीं है जब दुनिया ने मोदी का लोहा माना हो, इससे पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है। लेकिन उत्तर प्रदेश में बीजेपी को मिली रिकॉर्ड जीत से पड़ौसी देशों के माथे पर शिकन पड़ गई है। भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले चीन के अधिकारिक सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि उत्तर प्रदेश में जीत के बाद अब लग रहा है 2019 में मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे जो भारत के लिए अच्छा हो सकता है लेकिन बाकी देशों के लिए नहीं।

चीन की चिंता बने मोदी
चीन ने मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि दोबारा प्रधानमंत्री बनना भारत की तरक्की के लिए बेहतर साबित हो सकता है लेकिन साथ ही डर भी जताया कि अगर मोदी मजबूत होंगे तो दूसरे देशों के साथ समझौता करने में मुश्किल आएगी। क्योकि जितने ज्यादा मोदी मजबूत होंगे, तो वो नोटबंदी की ही तरह विदेशी देशों से कूटनीतिक संबंधों में और सख्त रूख अपना सकते हैं।

104 सैटेलाइट लॉच पर भारत से डरा चीन


भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ही रॉकेट से 104 सैटेलाइट लॉच कर जो विश्व रिकॉर्ड बनाया उसने पूरी दुनिया में वाह-वाही लूटी। लेकिन चीन ने इस उपलब्धि पर कहा कि भारत अभी भी अमेरिका और रूस से काफी पीछे है लेकिन बाद में चीनी अधिकारियों ने खुद कहा कि इस लॉच से भारत ने दिखा दिया कि वो कम खर्च में व्यवसायिक सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज सकता है। इससे अंतरिक्ष के बढ़ते बाजार की प्रतिस्पर्धा में भारत ने बढ़त बना ली है।

जी-20 शिखर वार्ता में चीन ने बदले सुर

पिछले ढाई साल में आठ बार पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हो चुकी है। 2016 में हुए जी – 20 शिखर सम्मेलन में पहली बार चीन के पाकिस्तान को लेकर सुर बदलते नजर आए। ये मोदी के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते कद का ही नतीजा था कि चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के साथ मुश्किल से संबंध अच्छे बने हैं, हम इसे खोना नहीं चाहते। उन्होंने ये भी कहा कि दोनों देशों को एक दूसरे की चिंताओं का सम्मान करना चाहिए। भारत की ताकत का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है कि पहली बार जी – 20 ग्रुप में भारत पहली कतार में आया।

भारतीय उद्योग से चीन में खलबली
मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में चीन के दबदबे को खुली चुनौती देते हुए मोदी की ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप’ और ‘स्टेंडअप इंडिया’ जैसी योजनाओं ने चीन की नींद उड़ा दी है। जिस मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की वजह से चीन ने पूरी दुनिया अपनी बादशाहत कायम की है अब वो भारत के पक्ष में जाता दिख रहा है

बढ़ते रोजगार ने चीन की चिंता बढाई
पिछले साल दिसंबर में भारत में इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में 1.14 लाख करोड़ के प्रस्ताव मिले। इसमें 15 प्रस्ताव मोबाइल कंपनियों के थे। चीन की कंपनियों के अलावा सैमसंग, हिताची, सोनी, एलजी और पैनासोनिक जैसी विदेशी कंपनियां भी भारत में फैक्ट्रियां लगाने की योजना बना रही है। यही नहीं चीन की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी हुआवेई ने भी भारत में मैन्यूफेक्चरिंग की योजना बनाई है।

2014 में प्रचंड बहुमत लेकर सरकार बनाने वाले मोदी ने 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी बीजेपी के सर पर विजय ताज पहना दिया। और राज्यसभा में बीजेपी के पक्ष में समीकरण का गणित बैठा दिया यानि अब मोदी को देशहित और उसकी रक्षा के लिए कड़े फैसले लेने के लिए किसी का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। एक मजबूत सरकार और एक मजबूत मोदी नेतृत्व ने चीन को हिला कर रख दिया है।

LEAVE A REPLY