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मोदी सरकार की नीतियों से एशिया में कृषि बीज के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है भारत

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ने बीते चार वर्षों में किसानों की उन्नति के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। चाहे फसल बीमा की बात हो या फिर सिंचाई के आधुनिक साधन, चाहे ई मंडी की बात हो या फिर डेढ़ गुना एमएसपी की बात। हर तरह से मोदी सरकार ने किसानों को हित में काम किया है। मोदी सरकार का मानना है कि बीज से लेकर बाजार तक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि किसानों को कहीं भी कोई परेशानी का अनुभव नहीं हो। मोदी सरकार के इन्हीं प्रयासों का नतीजा है कि आज भारत एशिया में एक प्रमुख बीज ‘केंद्र’ के रूप में उभर रहा है। एक ताजा अध्ययन में शामिल 24 बीज कंपनियों में से 18 ने भारत में बीजों के विकास और उत्पादन गतिविधियों में निवेश किया है।

वर्ल्ड बेंचमार्किंग अलायंस (डब्ल्यूबीए) द्वारा प्रकाशित एक्सेस टु सीड्स इंडेक्स (एएसआई) रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक और स्थानीय बीज कंपनियां भारत में भारी निवेश कर रही हैं ताकि छोटी कृषि जोत वाले किसानों के लिए फसल उत्पादकता बढ़ाई जा सके। रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 10 करोड़ किसान ऐसे हैं जिनके पास छोटी कृषि जमीन है। अध्ययन में कहा गया है, ‘‘क्षेत्र की 24 प्रमुख बीज कंपनियों के आकलन से पता चलता है कि इनमें से 21 कंपनियां भारत में बीज बेचती हैं। 18 कंपनियों ने देश में बीच नए बीजों के विकास और उत्पादन गतिविधियों में निवेश किया है।’’

इंडेक्स की पहली बार जारी रैंकिंग में चार भारतीय कंपनियों एडवांटा, एक्सेन हाइवेज, नामधारी सीड्स ओर न्यूजीवेदु सीड्स दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशिया की शीर्ष दस कंपनियों में शामिल हैं। यह रैंकिंग छोटी जोत वाले किसानों को उत्पादकता में मदद देने के प्रयासों के आधार पर तैयार की गई है।

आइए उन योजनाओं पर नजर डालते हैं जिसने देश के किसानों की जिंदगी बदल दी है-

किसानों का जीवन संवार रही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हमेशा से ये मानते आए हैं कि अगर भारत को तरक्की करना है तो उसे खेती को लाभ का धंधा बनाना ही होगा। इसलिए मोदी सरकार के साढ़े चार साल में किसानों की बेहतरी के लिए इतने ज्यादा काम हुए हैं, जिन पर 70 सालों में ध्यान दिया गया होता तो आज भारत की तस्वीर ही दूसरी होती। किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा भी एक ऐसा ही कदम है। 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अब और लोकप्रिय
13 जनवरी, 2016 को लागू हुई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में अब तक भारत के 13 करोड़ 77 लाख किसान आ चुके हैं औऱ ये दायरा और व्यापक रूप लेता जा रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की सफलता का अनुमान इसी बात से लगाया जाता है कि पहले इस तरह की स्कीम का फायदा केवल पांच फीसदी किसान ही उठाते थे लेकिन अब देश के एक चौथाई से ज्यादा किसान फसल बीमा का फायदा ले रहे हैं। इस योजना की कामयाबी को देखते हुए इसके लिए राशि का आवंटन भी बढ़ा दिया गया है। 2015-16 में इसके लिए 3000 करोड़ रुपये आवंटित थे, जिसे 2017-18 में बढ़ाकर 9000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही इस योजना में फसल क्षेत्र के दायरे का लक्ष्य 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया रखा गया है।

क्या है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बेहद कम प्रीमियम पर किसानों की फसल का बीमा किया जाता है ताकि किसान इसकी किस्तें आसानी से वहन कर सकें। यह योजना ना सिर्फ खरीफ और रबी की फसलों को बल्कि वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए भी सुरक्षा प्रदान करती है।
  • खरीफ की फसल के लिए 2 प्रतिशत प्रीमियम और रबी की फसल के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होता है। जबकि वार्षिक वाणिज्‍यिक एवं बागवानी फसलों के लिए पांच प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होता है।
  • कम प्रीमियम पर अधिकतम बीमा देने वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की खासियत है कि इस योजना में सभी खाद्य फसलें, तिलहन, वार्षिक व्यावसायिक या साग सब्जी का बीमा होता है। पहले की योजनाओं में कुछ फसलें और तिलहन का ही बीमा होता था।
  • पहले किसानों को 50 फीसदी फसल नष्ट होने पर मुआवजा मिलता था अब महज 33 फीसदी फसल नष्ट होने पर ही फसल का बीमा मिलता है।
  • बीमित किसान यदि प्राकृतिक आपदा के कारण बोनी नहीं कर पाता तो यह जोखिम भी शामिल है और उसे दावा राशि मिल सकेगी।
  • ओला, जलभराव और लैण्ड स्लाइड जैसी आपदाओं को स्थानीय आपदा माना जाएगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में इसे स्थानीय हानि मानकर केवल प्रभावित किसानों का सर्वे कर उन्हें दावा राशि प्रदान की जाएगी। इस योजना में पोस्ट हार्वेस्ट नुकसान भी शामिल किया गया है। फसल कटने के 14 दिन तक यदि फसल खेत में है और उस दौरान कोई आपदा आ जाती है तो किसानों को दावा राशि प्राप्त हो सकेगी।

सरकार रख रही है किसानों का ध्यान
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को पर्याप्त हर्जाना सुनिश्चित करने के साथ संगत फसल जोखिम प्रबंधन की व्यवस्था है। राधा मोहन सिंह ने कहा किसान समग्र जोखिम कवरेज के लिए नाम मात्र प्रीमियम चुका रहे हैं। सरकार ने किसानों के कल्याण और कृषि विकास के लिए कई योजनाएं शुरू की है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हो या प्रधानमंत्री सिंचाई योजना इन योजनाओं के क्रियान्वयन से किसान और कृषि का विकास होगा। उनका कहना है कि आजादी के बाद पहली बार कृषि, किसान, गांव के लिये सबसे अधिक बजट प्रदान किया गया है और सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने की पहल कर रही है। इसमें पशुपालन, मधुमक्खी पालन, कुक्कुट पालन, मतस्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

खाद की किल्लत दूर हो गयी
मोदी सरकार ने खाद की किल्लत दूर करने के लिए नीम कोटिंग यूरिया का प्रयोग शुरू किया। उसके बाद से खाद का उपयोग सिर्फ और सिर्फ खेती में होना सुनिश्चित हो गया। ऐसा होते ही खाद की कालाबाजारी रुक गयी। अब किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया मिलता है। खाद की कमी नहीं रहती। मोदी सरकार ने समस्या का ऐसा समाधान निकाला है कि किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि
मोदी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी कर किसानों को बड़ी राहत दी। 2016-17 की खरीफ फसल की दालों में अरहर के समर्थन मूल्य को 4,625 रुपये से बढ़ाकर 5,050 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया, उड़द के मूल्य को 4, 625 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति क्विंटल और मूंग के लिए 4,850 रुपये से बढ़ाकर 5,250 रुपये तक कर दिया गया है। बाकी फसलों का समर्थन मूल्य भी इसी तर्ज पर बढ़ा दिया गया। इससे किसानों की आमदनी में इतनी बढ़ोतरी हुई कि जीना आसान हो गया।

गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान
गन्ना उत्पादक किसानों को सालों से उनका बकाया नहीं मिल रहा था। मोदी सरकार ने किसानों का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 4,305 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी। इससे 32 लाख किसानों को फायदा हुआ। इस तरह से 2014-15 के 99.33 प्रतिशत और 2015-16 के 98.21 प्रतिशत किसानों को अपना बकाया रुपया वापस मिल चुका है। गन्ना किसानों के लिए मोदी सरकार वरदान बनकर आयी।

धान की खरीद में लेवी प्रणाली का खात्मा
धान की खरीद में लेवी प्रणाली खत्म कर मोदी सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी। अपनी उपज अब वे सीधे सरकारी केन्द्रों पर बेच सकते हैं। कोई बिचौलिया नहीं, जो उन्हें परेशान करे। धान की न सिर्फ कीमत अच्छी मिलने लगी है बल्कि कीमत की वसूली का रास्ता भी आसान हो गया है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
हर खेत को पानी कभी बीजेपी का नारा हुआ करता था। मोदी सरकार ने इसे साकार कर दिखाया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत देश में 28.5 लाख हेक्टेयर खेत में पानी पहुंचाया गया है। 2016-17 में Per Drop More Crop की सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत 15.86 लाख हेक्टेयर खेतों को सिंचाई के अंतर्गत लाया गया। खेती में यह योजना किसानों के लिए मददगार साबित हो रही है।

 

मिट्टी की सेहत के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड 
किस जमीन पर कौन सी फसल होगी, किस जमीन की उर्वरा शक्ति कैसी है इसकी जानकारी किसान को उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने सॉइल हेल्थ कार्ड शुरू किया। मोदी सरकार ने फसलों के अनुसार इस योजना शुरुआत की है। इसकी मदद से किसानों को पता चल जाता है कि उन्हें किस फसल के लिए कितना और किस क्वालिटी का खाद उपयोग करना है। फसल की उपज पर इसका सकारात्मक असर पड़ा है। अभी तक 16.69 करोड़ किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिये जा चुके हैं।

डिजिटल इंडिया की पहल-e-Nam
मोदी सरकार ने उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को उपज की सही कीमत मिले, इस दिशा में भी कोशिश की है। e-Nam के रूप में देशव्यापी स्तर पर एक ऐसा ई-प्लैटफॉर्म तैयार किया गया है जिनसे किसानों के साथ देश की कृषि मंडियां आपस में जुड़ी हैं। यहां किसान अपनी उपज को बेच सकता है। ई-नाम पर 455 मंडियां जुडी हुई हैं। इससे किसानों के लिए बाजार की जरूरत पूरी हो गयी है।

कृषि मौसम विज्ञान सेवा की शुरुआत 
मौसम विज्ञान से किसानों को लाभ पहुंचाने की नीति मोदी सरकार ने शुरू की है। मौसम विज्ञान से मिलने वाली सीधी सूचनाओं से किसानों को बहुत फायदा हुआ है। मौसम के बारे में किसानों को एसएमएस से मिलने वाली सूचना से हर दिन के काम को सही ढंग से करने में बड़ी मदद मिलती है। 2014 में 70 लाख किसानों तक एसएमएस के माध्यम से ये सूचनाएं पहुंचती थीं, वहीं आज 2 करोड़ 10 लाख किसानों तक सूचनाएं पहुंच रहीं हैं।

किसानों के लिए शुरू हुआ किसान चैनल
पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने मंत्र दिया- हर खेत को पानी और हर हाथ को काम। इसी अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हल के पीछे चल रहे आदमी की सुध ली और देश को किसान चैनल की शुरुआत की। 26 मई 2015 को शुरू किया गया 24 घंटे का यह किसान चैनल कृषि तकनीक का प्रसार, पानी के संरक्षण और जैविक खेती जैसे विषयों की जानकारी देता है। इसमें किसानों को उत्पादन, वितरण, जोखिम, बचने के तरीके, खाद, बीज, वैज्ञानिक कृषि के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है।

जैविक खेती पर जोर 
जैविक उत्पादों की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए सरकार जैविक खेती के विकास के लिए काम कर रही है। 2015 से 2018 तक 10000 समूहों के अन्तर्गत 5 लाख एकड़ क्षेत्र को जैविक खेती के दायरे में लाया गया है। अब तक राज्य सरकारें 7186 समूहों के माध्यम से 3.59 लाख एकड़ भूमि को जौविक खेती के दायरे में ला चुकी हैं। देश के उत्तर पूर्वी राज्यों की भौगोलिक दशा को देखते हुए जैविक खेती पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिसके लिए 2015 से 2018 तक 400 करोड़ की परियोजना चल रही है। 2015 -17 तक 143.13 करोड़ रुपये दिये जा चुके हैं जिनसे 2016-17 तक 1975 समूहों के माध्यम से 39,969 किसानों को जैविक खेती का काम कर रहे हैं।

ब्लू रिवोल्यूशन से बढ़ा मत्स्य उत्पादन
देश में ब्लू रिवोल्यूशन के जरिए किसानों को आय के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराने के संकल्प से सरकार ने मत्स्य प्रबंधन और विकास के लिए अगले पांच साल में 3000 करोड़ रुपये की योजना दी है। 15000 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र विकसित किया गया है। 2012-14 में मत्स्य उत्पादन जहां 186.12 लाख टन था वहीं 2014-16 में 209.59 लाख टन हो गया।

किसानों के लिए ऋण सुविधा बढ़ी
खेती के लिए ऋण लेने की सुविधा बढ़ायी गयी है। अब 10 लाख करोड़ ऋण किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ-साथ जिन राज्यों में किसानों की आर्थिक स्थिति खराब है और ऋण लौटाने में दिक्कत हो रही है वहां स्थानीय सरकार से बातचीत कर रास्ता निकालने की कोशिश बढ़ी है। यूपी जैसे राज्यों ने किसानों के लिए बड़े पैमाने पर ऋण माफ कर दिया है।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन
मिशन मोड में लागू की गयी गोकुल योजना का उद्देश्य देश की पशुधन संपदा को संवर्धित करके किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारना है। इससे देशज पशुधन के जेनेटिक स्टाक संवर्धित होगा और दूध उत्पादन भी बढ़ेगा। इस योजना में 14 गोगुल गांव स्थापित किये गये हैं। 41 बुल मदर फार्म का आधुनिकीकरण किया गया है। देश में दूध उत्पादन 155 मिलियन टन के पास पहुंच चुका है। इसी प्रकार इस क्षेत्र में युवाओं को शिक्षित और प्रशिक्षित करने के लिए पशुविज्ञान कॉलेजों की संख्या 36 से बढ़कर 46 तक पहुंच चुकी है। देश के प्रति व्यक्ति के लिए 2013-14 में जहां 307 ग्राम दूध उपलब्ध था वहीं 2015-16 में बढ़कर 340 ग्राम हो गया।

2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके तहत नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने, फसल चक्र में परिवर्तन करने और कम लागत में खेती की जाए की जानकारी किसानों को दी जा रही है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी की जाए। इस संकल्प के साथ कई आधारभूत योजनाओं को जमीन पर उतारा गया है जो खेती-किसानी में सहायक सिद्ध हो रहा है।

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