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प्रधानमंत्री मोदी की पहल: दिल्ली से बाहर भी धड़क रहा देश का दिल

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प्रधानमंत्री मोदी अक्सर कहते हैं कि देश की धड़कन केवल दिल्ली में ही नहीं, भारत के अन्य भागों में भी धड़कती है। उनके इस कथन के व्यापक अर्थ हैं। इस एक उक्ति के माध्यम से देश का हर व्यक्ति न केवल प्रधानमंत्री मोदी से स्वयं का जुड़ाव महसूस करता है, बल्कि खुद के मुख्यधारा का हिस्सा होने का भी अनुभव करता है। अपने विदेशी मेहमानों का स्वागत दिल्ली से बाहर अन्य प्रदेशों में करने का उद्देश्य भी यही है।  

दरअसल प्रधानमंत्री मोदी का हरदम यह प्रयास होता है कि दुनिया के देशों की दृष्टि केवल दिल्ली तक ही न सिमटी रहे बल्कि देश के दूसरे हिस्सों पर भी जाए। उनका मानना है कि परंपरागत तरीके से अलग हटकर होस्ट करने से जहां द्विपक्षीय संबंधों में जीवंतता आती है, वहीं दुनिया भर की निगाहें देश के दूसरे हिस्सों में हुए विकास पर भी जाती हैं।

ऐसे कई अवसर आए हैं जब उन्होंने अपने विदेशी मेहमानों का स्वागत दिल्ली से बाहर किया है। आइये हम इनपर एक नजर डालते हैं-

वाराणसी- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का स्वागत
12 फरवरी, 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को भारत की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी की संस्कृति से सीधा साक्षात्कार करवाया। विदेशी मेहमान के साथ जब यहां पहुंचे तो तबले की थाप पर शहनाई की मंगल ध्वनि से उनका स्वागत हुआ। उनकी मौजूदगी में एक तरफ एंफीथिएटर में चित्रकूट का मंचन चला तो दूसरी तरफ पत्थर, काष्ठ, वस्त्र से जुड़े शिल्पी, बुनकर विधाओं का सजीव प्रदर्शन किया गया। इस दौरे में जहां सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखी, वहीं विकास योजनाओं को भी धरातल पर उतारा गया। दोनों नेताओं ने वाराणसी से सटे मिर्जापुर जिले में बने यूपी के सबसे बड़े सोलर प्लांट का उद्घाटन किया। फ्रांस के सहयोग से बना 650 करोड़ की लागत से बना 75 मेगावाट का सोलर प्लांट दोनों देशों के बीच गहरी होती दोस्ती का बेहतरीन उदाहरण है।

वाराणसी- ‘संबंधों में जान ला देते हैं सांस्कृतिक रिश्ते’
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 दिसंबर, 2015 को जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ वाराणसी पहुंचे थे। दोनों ही नेताओं ने यहां के प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा आरती में हिस्सा लेकर दोनों देशों के बीच के पारंपरिक सांस्कृतिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ा। उन्होंने यहां करीब 45 मिनट बिताए और गंगा आरती देखी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- संस्कृति और लोग किसी रिश्ते में जान ला देते हैं। जापान के पीएम का यह दौरा उस समझौते के परिप्रेक्ष्य में भी महत्वपूर्ण था जिसमें क्योटो और वाराणसी के बीच हुए साझेदार शहर का समझौता किया गया था।

अहमदाबाद- ‘सड़कों के माध्यम से सीधे जुड़ती है जनता’
14 सितंबर, 2017 में एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अहमदाबाद को मेजबानी के लिए चुना। इस बार भी उनके मेहमान जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे। दोनों नेताओं ने अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन परियोजना की नींव रखी और उन्होंने आबे को सिद्धि सैय्यद मस्जिद घुमाया। इसके साथ ही शिंजो आबे को प्रधानमंत्री ने साबरमती रिवर फ्रंट भी दिखाया गया। इसके अतिरिक्त जापान के प्रधानमंत्री के लिए एक रोड शो का भी आयोजन किया गया जिसमें हजारों लोगों ने शिरकत की। इस रोड शो का उद्देश्य भी साफ था कि देश सुरक्षित है और यहां पूंजी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण है।

अहमदाबाद- भारत-चीन संबंधों को नया आयाम
26 मई, 2014 को प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने पहली बार सितंबर 2014 में उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अहमदाबाद में मेजबानी की थी।  एक दिवसीय दौरे पर अहमदाबाद पहुंचे शी जिनपिंग का साबरमती रिवर फ्रंट पर शाही स्वागत हुआ था। भारत-चीन संबंधों में चाहे जितना उतार चढ़ाव हो, लेकिन जब भी पीएम मोदी की मेजबानी की बात आती है, तो जिनपिंग को झूला झुलाते मोदी की तस्वीरें आज भी टीवी स्क्रीन पर नजर आती हैं। 

अहमदाबाद- इजरायल और भारत बने साझेदार
17 जनवरी, 2018 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अहमदाबाद में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का स्वागत किया। यहां वो सबसे पहले साबरमती आश्रम गए, जहां उन्होंने अपनी पत्नी के साथ बापू की तस्वीर पर सूत की माला चढ़ाई और वहां रखा चरखा भी चलाया। पीएम मोदी और नेतन्याहू धोलेरा गांव के ‘आई क्रिएट’ सेंटर भी गए। दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने संयुक्त रूप से सेंटर का उद्घाटन किया। दुनिया भर से प्रतिभाओं को लुभाने की खातिर आई क्रिएट का लक्ष्य भारत में एक ऐसे इकोसिस्टम को बनाना है, जिससे बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण उद्यमी पैदा हो।

हैदराबाद- इवांका ट्रंप का भव्य स्वागत
28 नवंबर, 2017 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप का हैदराबाद में शाही तरीके से स्वागत किया गया। इवांका ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ आठवीं ग्लोबल एंटरप्रेन्योरशिप समिट में प्रधानमंत्री हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने यहां प्रसिद्ध फलकनुमा पैलेस में अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी के सम्मान में आयोजित डिनर की मेजबानी की।

अमृतसर- अशरफ गनी से आतंकवाद पर चर्चा
3 दिसंबर, 2016 को अमृतसर में प्रधानमंत्री मोदी ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी का भव्य स्वागत किया। अशरफ गनी ने पीएम मोदी के साथ स्वर्ण मंदिर में मत्था टेका। दोनों ही नेताओं ने अमृतसर में आयोजित ‘हॉर्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस’ में हिस्सा लिया। यहां एशिया में आतंकवाद से निपटने, सुरक्षा और युद्ध से तबाह अफगानिस्तान के हालात में सुधार करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। पंजाब आतंकवाद से पीड़ित रहा है और अगर वहां आतंकवाद के मुद्दे पर कोई कांफ्रेंस हो तो वाकई ये बड़ी पहल है। 

गांधीनगर- अफ्रीकी विकास बैंक समूह का सम्मेलन
अफ्रीकी विकास बैंक समूह का 52वां वार्षिक सम्मेलन गांधीनगर के महात्मा मंदिर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 23 मई, 2017 को उद्घाटन किया। इस सम्मेलन में 81 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। दरअसल पीएम मोदी का मनना है कि अफ्रीका वैश्विक कृषि पावरहाउस बनने की क्षमता रखता है और अगली हरित क्रांति का आगाज कर सकता है। गौरतलब है कि विश्व का 65 प्रतिशत से ज्यादा कृषि योग्य भूमि और 15 से 35 वर्ष की आयु के बीच की 42 करोड़ आबादी इसके लिए अनुकूल परिस्थिति है।

बोधगया- अंतरराष्ट्रीय हिंदी-बौद्ध सम्मेलन
5 दिसंबर, 2015 को प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी-बौद्ध सम्‍मेलन का उद्घाटन किया। यहां उन्होंने दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों से मुलाकात की। पीएम ने पवित्र बोधि वृक्ष के नीचे कुछ वक्‍त बैठकर ध्‍यान भी किया। दिन भर के अपने इस दौरे के दौरान पीएम बोधगया मंदिर और पवित्र पेड़ की पूजा-अर्चना की। बोधगया में हिंदी-बौद्ध महासम्मेलन के आयोजन के पीछे एक उद्देश्य ये भी था कि विकास की रेस में पिछड़ चुके बिहार पर भी दुनिया के उन देशों की दृष्टि पड़े जो बौद्ध धर्म के माध्यम से बिहार की धरती से जुड़ाव महसूस करते हैं।

वैश्विक नेताओं का दूसरे शहरों में सत्कार करने का पीएम मोदी का एजेंडा स्पष्ट है कि दुनिया भी देश की बहलतावादी संस्कृति से परिचित हो और भारत की ‘ताकत’ से परिचित हो।  हालांकि पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के साथ शिमला समझौते के लिए इंदिरा गांधी ने जुल्फिकार भुट्टो की मेजबानी खातिर हिमाचल को चुना था और पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने परवेज मुशर्रफ को करगिल के बाद शिखर सम्मेलन के लिए आगरा बुलाया था। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस अभ्यास को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बना लिया है जिसने पूरे देश में समान विकास के दर्शन को नया आयाम दिया है।

 

 

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