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गुजरात मॉडल मतलब एक SMS से बदलती है किस्मत

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गुजरात का उदाहरण देकर कह सकता हूं। एक ही चीज को देखने के कई नजरिये हो सकते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि गिलास पानी से आधा भरा है तो कुछ कहते हैं यह आधा खाली है। लेकिन मेरा तीसरा दृष्टिकोण है, गिलास आधा पानी और आधा हवा से भरा है।
– नरेंद्र मोदी

2013 में दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में छात्रों को संबोधित करते हुए कही गई पीएम मोदी की ये बात उनकी कार्यशैली का हिस्सा रही है। एक वक्त था जब कई राज्य दूसरे प्रदेशों के निवासियों को अपने यहां से भगा रहे थे, तब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री रहते उन्हें आमंत्रित कर रहे थे और उन्हें गुजरात के नवनिर्माण में साझीदार बना रहे थे। 

इसी तरह जब पश्चिम बंगाल से टाटा नैनो को अपना प्लांट हटाना पड़ा था तो गुजरात में प्लांट लगाए जाने की सारी प्रक्रिया महज तीन दिन में ही पूरी कर ली गई थी। साफ है कि नरेंद्र मोदी का सोचने, समझने और काम करने का स्टाइल थोड़ा अलग है।

टाटा की नैनो को दी जगह
2008 में जब पश्चिम बंगाल के सिंगूर में जब टाटा के नैनो प्लांट को बंद करने को मजबूर होना पड़ा तो टाटा समूह के तत्कालीन चेयरमैन निराश हो चुके थे। लेकिन गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के एक एसएमएस ने उनके चेहरे की रौनक लौटा दी। उन्होंने रतन टाटा को ‘स्वागतम’ लिखकर एसएमएस किया और रतन टाटा ने इस एक शब्द से प्रभावित होकर साणंद में टाटा नैनो की प्लांट लगा दी। आज उस एक एसएमएस की बदौलत साणंद इलाके की तस्वीर बदल गई है और इस प्लांट में दस हजार लोग काम कर रहे हैं।


जगाया गुजरात का गौरव
30 सितंबर, 2014 को जब अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘केम छो मिस्टर प्राइम मिनिस्टर’ कहकर स्वागत किया तो गुजराती मान को एक नायाब स्थान मिला। गुजराती पगड़ी पहनकर गर्व की अनुभूति जितना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं उतना शायद ही कोई करता हो। आज जब देश-दुनिया में गुजरात मॉडल की चर्चा कर राज्य के विकास की नजीर दी जाती है तो गुजराती अस्मिता को नया आयाम मिलता है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम गुजरात के स्वाभिमान से जुड़ गया है।

गांधी और पटेल के रास्ते का अनुसरण
गुजरात की भूमि से निकले भारत के दो महानायक महात्मा गांधी और सरदार वल्लभ भाई पटेल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को मानते हुए गांधी और सरदार पटेल के रास्ते का अनुसरण वे अपने सार्वजनिक जीवन में भी करते हैं। 2 अक्टूबर, 2014 से शुरू किया गया स्वच्छ भारत अभियान गांधी जी को ही समर्पित है, वहीं एक भारत, श्रेष्ठ भारत का कंसेप्ट सरदार पटेल की नीति का ही अनुसरण है।

पतंग उत्सव को बनाया व्यापक
काइपो छे… काइपो छे… मकर संक्रांति के अवसर पर गुजरात में ये शब्द अनूठा अहसास कराता है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पतंगबाजी को सात दिन का राज्यव्यापी उत्सव बना दिया। पतंग उत्सव में कोरिया, इजरायल, मलेशिया, स्विटजरलैंड, श्रीलंका, तुर्की, वियतनाम, थाईलैंड, स्पेन, सिंगापुर, कनाडा, नीदरलैंड, मकाऊ, कंबोडिया, इटली, पोलैंड और न्यूजीलैंड जैसे देशों के पतंगबाज पेंच लड़ाने आते हैं। सबसे खास ये कि 15 साल पहले यहां का पतंग कारोबार महज 35 करोड़ का था। अब यह बढ़कर 750 करोड़ तक पहुंच गया है। इनमें से 350 करोड़ का कारोबार सिर्फ अहमदाबाद में है। इतना ही नहीं 20 हजार लोग इस रोजगार से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।

गरबा को मिली देशव्यापी पहचान
गरबा एक ऐसी नृत्य शैली है जिसमें देवी शक्ति की पूजा होती है। यह हमारे देश की एक प्राचीन परंपरा है। यह उत्सव किसी व्यक्ति के जीवन में न सिर्फ आध्यात्मिकता लाता है, बल्कि कई तरह के अनुशासन भी लाता है। देश में त्योहारों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए क्योंकि इससे भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार दुनिया भर में होता है।
-नरेंद्र मोदी

गरबा गुजरात की खास पहचान है। इसे नरेंद्र मोदी ने दूसरे राज्यों में भी लोकप्रिय बनाया। गुजरात में गरबा महोत्सव को जहां बड़ा आकार दिया वहीं इस नृत्य के कलाकारों को भी प्रोत्साहन दिया। 30 सितंबर, 2014 को जब पीएम मोदी अमेरिका गए थे तो वहां उनके स्वागत में गरबा नृत्य का आयोजन किया गया था। गुजरात आने वाले पर्यटक एक बार गरबा जरूर देखना चाहते हैं।

पर्यटन को दिया बढ़ावा
नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्रित्व काल में गुजरात में पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिला। एक तरफ सदी के महानायक अमिताभ बच्चन से गुजरात पर्यटन की ब्रांडिंग करवाई वहीं कच्छ जैसे रेगिस्तान में रणोत्सव के आयोजन ने इसे अंतर्राष्ट्रीय आकर्षण का केंद्र बना दिया। गुजरात में 2005 में जहां साठ पर्यटक प्रतिवर्ष आते थे वहीं 2013 में ये आंकड़ा दो करोड़ के पार कर गया।

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