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गुजरात से मिट जाएगा कांग्रेस का नामोनिशान !

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एक लोकप्रिय कहावत है: ‘मस्तराम मस्ती में आग लगे बस्ती में’। गुजरात के कांग्रेस विधायक इस कहावत को चरितार्थ करते हुए ‘मस्तराम’ की ही भूमिका में नजर आ रहे हैं। गुजरात की कई बस्तियों में आई बाढ़ के बीच वो बेंगलुरू के रिजॉर्ट में ऐश कर रहे हैं। कहर आग का हो या बाढ़ का, अपने इलाके के लोगों की सुरक्षा के कदम उठाना जनप्रतिनिधियों का दायित्व बनता है, लेकिन कांग्रेस विधायक मुसीबत में फंसी जनता को डूबता हुआ छोड़कर भाग गए हैं।

ये तो पब्लिक है सब जानती है
कांग्रेस के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यही रही है कि वो जनता को हमेशा मूर्ख समझती रही है। उसे लगा कि पार्टी आलाकमान के चहेते अहमद पटेल को राज्यसभा पहुंचाने के लिए उसके राजनीतिक दांव-पेच को जनता बाढ़ से जोड़कर नहीं देख पाएगी। लेकिन कहते हैं ना ये तो पब्लिक है सब जानती है, कांग्रेस बुरी तरह पकड़ी गई है। कुदरती आपदा में उसने जिस तरह से अपने क्षेत्रों की जनता का दामन छोड़ा है, उससे गुजरात में उसके अंत की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। कांग्रेस पर लोगों का गुस्सा जिस तरह से फूटता हुआ नजर आ रहा है उससे ये साफ हो रहा है कि पार्टी इस बार दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी।

क्या इसी दिन के लिए कांग्रेस को वोट किया था?
कांग्रेस विधायकों के क्षेत्रों में बाढ़ से उपजा लोगों का दर्द अब गुस्से में तब्दील हो चुका है। धनेरा तालुका के भातीब गांव के किसान भूराभाई पटेल ने 20 एकड़ में मूंगफली और अनार की फसल लगाई थी जो बाढ़ में बर्बाद हो गई। कीमत के लिहाज से देखें तो ये बर्बादी करीब 30 लाख रुपये की है। भूराभाई कहते हैं: “पिछले चुनाव में हमने कांग्रेस को 30,000 वोटों से जिताया लेकिन आज जब हमें अपने MLA की जरूरत है तो उन्होंने हमें धोखा दे दिया। पूरी कांग्रेस पार्टी ने हमें धोखा दिया है। बनासकांठा में अब कांग्रेस के दिन लद चुके हैं।”

बाढ़ पीड़ितों से कांग्रेस का मजाक
जब से कांग्रेस का ये अमानवीय चेहरा खुलकर सामने आया है वो आनन-फानन में ऐसे कदम उठाती जा रही है जिससे उसके खुद के ही पैरों पर कुल्हाड़ी चलती दिख रही है। जरा सोचिए कि वो बेंगलुरू में मौज कर रहे अपने उन विधायकों को बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए वापस नहीं बुला रही बल्कि अपने कुछ दूसरे नेताओं को बाढ़ पीड़ित इलाकों में भेजकर दायित्वपूर्ति का नाटक करने में जुटी है।

कांग्रेस के रवैये से दलितों में भी गुस्सा
कांग्रेस को लेकर कांकरेज के किसान उमेदभाई परमार का भी भ्रम टूट गया है। उनके इलाके के कांग्रेस विधायक दर्शीभाई खानपुरा भी कर्नाटक गये हुए हैं। उदयभाई का कहना है : ‘जो सोचकर यहां के दलितों ने कांग्रेस को वोट किया, हो रहा है उसका ठीक उल्टा। हमें तकलीफ में छोड़कर हमारा विधायक कर्नाटक भागा हुआ है, तो अब ये कोई कैसे सोच भी सकता है कि हम कांग्रेस को वोट करेंगे।’

राहत में जुटे हैं बीजेपी विधायक
वहीं चगवाड़ा के किसान जगदीशभाई पटेल का कहना है:  ‘हमारे इलाके के बीजेपी विधायक केशाजी चौहान बीजेपी के कई और नेताओं के साथ बाढ़ में घिरे गांव वालों की लगातार सुध लेने में लगे हैं। उन्होंने हमारे नुकसान का सर्वे कर मुआवजे का भरोसा दिया है।’

सबकी सुध ले रही राज्य की बीजेपी सरकार
वैसे बीजेपी विधायकों का क्षेत्र हो या कांग्रेस विधायकों का, राज्य की बीजेपी सरकार के लिए हर क्षेत्र की जनता की तकलीफ उसकी अपनी तकलीफ है और अपने इसी सोच के साथ वो राहत और बचाव के हरसंभव इंतजाम करने में जुटी हुई है। लेकिन एक बात तो साफ है कि कांग्रेस का असली चेहरा अब गुजरात की जनता के सामने पूरी तरह से उजागर हो चुका है।

खिसियानी ‘बिल्ली’ खंभा नोचे!
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अब शायद अपने बेटे राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य के अलावा और कोई चिंता नहीं और राहुल हैं जिनकी कार्यप्रणाली के चलते कई कांग्रेस नेता पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं। गुजरात में शंकर सिंह वाघेला ने जबसे कांग्रेस को बाय-बाय बोला है, राज्य में राहुल को अपनी खाट खड़ी नजर आ रही है। ऐसे में उनके साथ कुछ भी होता है तो बौखलाहट में उन्हें पीएम मोदी पर बेतुका निशाना साधने के अलावा और कुछ नहीं सूझता। दरअसल गुजरात से अपना नामोनिशान मिटने का खतरा भांपकर कांग्रेस बहुत घबरा गई है।  

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