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मोदीराज में जीएसटी कलेक्शन: नवंबर में जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये के पार

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वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी के मोर्चे पर अच्छी खबर मिली है। जीएसटी के कलेक्शन में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। जीएसटी संग्रह नवंबर में एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर, 2019 के महीने में कुल सकल जीएसटी राजस्व 1,03,492 करोड़ रुपये का रहा, जिसमें सीजीएसटी 19,592 करोड़ रुपये का, एसजीएसटी 27,144 करोड़ रुपये का, आईजीएसटी 49,028 करोड़ रुपये (आयात पर एकत्र 20,948 करोड़ रुपये सहित) का और सेस 7,727 करोड़ (आयात पर एकत्र 869 करोड़ रुपये सहित) रुपये का रहा। 30 नवंबर, 2019 तक अक्टूबर के महीने के लिए फाइल किये गये जीएसटीआर 3 बी रिटर्न की कुल संख्या 77.83 लाख है।

जीएसटी राजस्व में नवंबर, 2018 के संग्रह के मुकाबले नवंबर, 2019 में 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। महीने के दौरान, घरेलू लेनदेन पर जीएसटी संग्रह में 12 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो वर्ष के दौरान सर्वाधिक रही। जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से यह आठवीं बार है कि मासिक संग्रह एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

सबको मिल रहा है ‘एक राष्ट्र-एक कर’ का लाभ
दो साल पहले 1 जुलाई, 2017 को देश को आर्थिक आजादी मिली थी। आजादी, उन 17 प्रकार के करों से मिली जिसके बोझ के नीचे लोग 70 साल से दबे हुए थे। देश को यह आर्थिक आजादी दिलाने का सेहरा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सिर बंधा। दशकों से चली आ रही सरकारों की इस जंग को प्रधानमंत्री मोदी ने 1 जुलाई 2017 की मध्यरात्रि को जीएसटी कानून लागू करके जीत लिया। इस दिन भारत में ‘वन नेशन, वन टैक्स’ का राज स्थापित हुआ।

जीएसटी के लिए प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना
भारत में ‘वन नेशन, वन टैक्स’ का राज स्थापित होने के दो साल से अधिक हो गए हैं। यह दिन उस दौर को याद करने का है, जब इस कानून को लागू करने की योजना प्रधानमंत्री मोदी की सरकार बना रही थी। उन दिनों मीडिया से लेकर विपक्ष के नेताओं ने जीएसटी से देश को होने वाले नुकसान को लेकर हाहाकार मचा रखा था। हर तरफ मोदी सरकार की आलोचना हो रही थी कि प्रधानमंत्री मोदी कैसे इतने बड़े देश में जीएसटी लागू करेंगे। विपक्ष कह रहा था कि जीएसटी का आईटी तंत्र पूरे जीएसटी के बोझ को संभाल ही नहीं पाएगा। इन तमाम दलीलों और विरोधों के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने देश के हित को आगे रखते हुए जीएसटी व्यवस्था को लागू कर ही दिया। जुलाई, 2017 के बाद से जीएसटी तंत्र ने कई नए मुकाम हासिल किए हैं। ये ऐसे मुकाम हैं जिसके बारे में पत्रकार और विपक्ष के नेता ने हमेशा संदेह पैदा किया था।

जीएसटी में 6.52 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब 01 जुलाई, 2017 को जीएसटी लागू किया  था, तो उस समय अगस्त, 2017 से मार्च, 2018 तक कर के रूप में करीब 7.19 लाख करोड़ रुपये सरकार को मिले थे। लेकिन वित्त वर्ष 2018-19 में अप्रैल, 2018 से मार्च, 2019 तक करीब 11,75,830 करोड़ रुपये का जीएसटी सरकार को मिला। वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान अप्रैल में 1.03 लाख करोड़ रुपये, मई में 94,016 करोड़ रुपये, जून में 95,610 करोड़ रुपये, जुलाई में 96,483 करोड़ रुपये, अगस्त में 93,960 करोड़ रुपये, सितंबर में 94,442 करोड़ रुपये, अक्टूबर में 1,00,710 करोड़ रुपये, नवंबर में 97,637 करोड़ रुपये, दिसंबर में 94,725 करोड़ रुपये, जनवरी, 2019 में 1.02 लाख करोड़ रुपये और फरवरी, 2019 में 97,247 करोड़ रुपये और आखिरी महीने मार्च, 2019 में रिकॉर्ड 1.06 लाख करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में सरकार को मिले। 

प्रधानमंत्री मोदी की जीएसटी लागू करने की सटीक योजना और दृढ़ निश्चय का परिणाम रहा कि जीएसटी के रूप में सरकार को मिलने वाले राजस्व में लगातार बढ़ोतरी हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने संसाधनों और नीतियों में लगातार सुधार करके चालू वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जीएसटी के रूप में 13.71 लाख करोड़ रुपये एकत्रित करने का उच्च लक्ष्य निर्धारित किया है।

वस्तुओं और सेवाओं की दरों में कटौती हुई
देश में जीएसटी लागू होने के बाद विभिन्न आवश्यक वस्तुओं पर कर की दरों को तय करने में सरकार और जीएसटी परिषद के सदस्यों को काफी माथा-पच्ची करनी पड़ी थी। परिषद की करीब दो दर्जन से अधिक बैठकों के दौरान 53 आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों को कम किया गया। आज भी, जीएसटी के तहत अन्य आवश्यक वस्तुओं को जोड़ने और उस पर कर की दरों में कटौती की प्रक्रिया थमी नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी जीएसटी को दो दरों की कर व्यवस्था के रूप में परिवर्तित करने की मंशा रखते हैं।

01अप्रैल, 2018 से लागू हुआ ई-वे बिल
01 जुलाई, 2017 को जीएसटी लागू होने के करीब नौ महीने बाद प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों में वस्तुओं की आपूर्ति करने और उनका ई-वे बिल तैयार करने के लिए 01 अप्रैल, 2018 से नई प्रणाली को लागू करने का निर्णय लिया। इस निर्णय पर भी मीडिया और विपक्ष ने कई सवाल उठाये लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्रणाली को लागू किया और तमाम सवालों के जवाब के लिए नयी प्रणाली में सुधार की प्रक्रिया को रुकने नहीं दिया। दरअसल, ई-वे बिल की जरूरत उन व्यापारियों को पड़ती है जो 50 हजार रुपये से ज्यादा की कीमत की वस्तु ट्रांसपोर्ट के जरिये एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजते हैं।

जीएसटी के संघर्ष का दौर खत्म हुआ
विश्व की सबसे अव्यवस्थित अप्रत्यक्ष कर प्रणाली का पुनर्गठन करना एक भागीरथ प्रयास था। जीएसटी की चुनौतियों को उन बयानों ने और जटिल बना दिया था जो पत्रकार और विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री मोदी को किसी भी हाल में सफल नहीं होने देने के लिए दे रहे थे। पहले तो, राज्यों को करों में कमी को लेकर डराने का काम किया गया। इस डर को विश्वास में बदलने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों को 2015-16 के कर के आधार पर पांच साल की अवधि के लिए 14 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के साथ धन देने की शर्त को माना। दूसरा भ्रम जनता के बीच में फैलाया गया कि इससे वस्तुएं अचानक महंगी हो जाएंगी और व्यापारियों को डराया गया कि व्यापार करना कठिन होगा. क्योंकि जीएसटी को भरने के लिए कंप्यूटर का होना जरूरी है। इन तमाम फैलाए गये भ्रमों को धीरे-धीरे करके प्रधानमंत्री मोदी ने दूर कर दिया।

 

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