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125 करोड़ देशवासियों का पीएम मोदी को 50 रिटर्न गिफ्ट

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8 नवंबर की रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया और भ्रष्टाचारियों में हड़कम्प मच गया। कालाधन के सूरमा धन छिपाने-खपाने में लग गये। वहीं आम आदमी अपने प्रिय प्रधानमंत्री के इस लोकप्रिय अभियान पर उनका साथ देने कतारों में लग गये। लोगों को भड़काने की खूब कोशिशें हुईं। राजनीतिक स्तर से लेकर मीडिया और दूसरी जगहों पर भी इस अभियान को विफल बनाने की कोशिशें हुईं, लेकिन जनता ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। चाहे उपचुनाव हो या नगर निकायों के नतीजे या फिर कोई सर्वे- जनता ‘मोदी-मोदी’ का जयकार करती दिखी। बीते 50 दिनों में जहां पीएम मोदी की नोटबंदी ने जनता को कई तरह के गिफ्ट दिए, वहीं जनता ने भी अपने प्रिय प्रधानमंत्री को मौका खोज-खोज कर रिटर्न गिफ्ट सुपुर्द किए। आइये नजर डालते हैं ऐसे ही 50 गिफ्ट और रिटर्न गिफ्ट पर – .

  1. नोटबंदी के बाद हर चुनाव में बीजेपी की बंपर जीत

मौका मिलते ही जनता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नोटबंदी की पहल को अपना वोट देकर समर्थन दिया। इस कड़ी में एक के बाद एक सौगात दी। देश में हुए लोकसभा या विधानसभा के उपचुनाव हों या महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान या चंडीगढ़ में हुए स्थानीय निकायों के चुनाव- जनता ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया।

उपचुनावों में मोदी-मोदी

नोटबंदी के बाद देश में हुए पहले उपचुनाव में असम, अरुणाचल प्रदेश और मध्यप्रदेश की सभी सीटें जनता ने बीजेपी के खाते में डाल दी। एमपी की शहडोल लोकसभा और नेपानगर विधानसभा सीट पर बीजेपी ने परचम लहराया। असम में लखीमपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी के प्रधान बरुआ ने जीत हासिल की, जबकि बैथालांगसो विधानसभा सीट पर बीजेपी के मानसिंह जीते। विभिन्न राज्यों की 10 विधानसभा और चार लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुआ था। अरुणाचल प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कलिखो पुल की पत्नी बीजेपी प्रत्याशी देसिंगू पुल को हायूलियांग विधानसभा सीट से जीत मिली है।

महाराष्ट्र निकाय चुनाव

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में जनता ने नरेन्द्र मोदी को नोटबंदी का इनाम दिया। कुल 2501 सीटों में बीजेपी 610 सीटें जीत कर नंबर-1 पार्टी बनी। शिवसेना-401, एनसीपी 482, कांग्रेस 408, मनसे 12 और बीएसपी ने 4 सीटें जीतीं।

गुजरात में निकाय चुनाव

गुजरात की कुल 123 सीटों पर हुए मतदान में बीजेपी को जनता ने छप्पर फाड़कर 107 सीटें दे डालीं। वापी में नगरपालिका की 44 में से 41 सीटें और कनकपुर-कांसद नगरपालिका की 28 में से 27 सीटों पर बीजेपी ने कब्जा कर लिया। कांग्रेस के प्रभाव वाले गोंडल तालुका पंचायत के मध्यावधि चुनाव में बीजेपी ने 22 में से 8 सीटें जीतीं।  इसके अलावा अलग-अलग नगरपालिका, तालुका पंचायत और जिला पंचायत की 29 सीटों पर उपचुनाव में बीजेपी ने 21 सीटों पर कब्जा किया।

राजस्थान में लहराया परचम

राजस्थान में हुए 24 पंचायत समिति की सीटों के लिए हुए उपचुनाव में बीजेपी ने आधी सीटों पर कब्जा कर लिया। यहां तीन जिला परिषद की सीटों में से 2 पर बीजेपी ने परचम लहराया। बांसवाड़ा और भीलवाड़ा जिला परिषदों में भी बीजेपी ने कब्जा किया। 29 नवंबर को 9 जिलों में चुनाव हुए। उनकी 10 निगम परिषद की सीटों में से 5 पर बीजेपी ने कब्जा जमाया।

चंडीगढ़ में मोदी-मोदी

चंडीगढ़ में तो बीजेपी की बल्ले-बल्ले रही। नोटबंदी का जादू सर चढ़कर बोला। पीएम मोदी की नोटबंदी को पूरा समर्थन देते हुए यहां लोगों ने बीजेपी को 26 वार्डों में से 21 पर जीत दिलायी। एक सीट पर बीजेपी से बागी निर्दलीय विजयी रहा।

  1. हर सर्वे में पीएम मोदी को मिला जनता का साथ

हर सर्वे में ये बात सामने आयी कि नोटबंदी सही है और भ्रष्टाचार एवं कालाधन पर हमला जायज है। खुद पीएम नरेन्द्र मोदी के सर्वे में 5 लाख लोगों ने भाग लिया जिनमें 90 फीसदी जनता ने नोटबंदी को सही ठहराया। 98 फीसदी ने माना कि देश में कालाधन है और 99 फीसदी ने माना कि देश से करप्शन और कालाधन खत्म किए जाने की जरूरत है। उसके बाद दैनिक भास्कर. डॉट कॉम के सर्वे में 85 फीसदी जनता नोटबंदी पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ दिखी। Inshorts के सर्वे में 82 फीसदी लोग सरकार के साथ दिखे, तो HuffsPost-BW-CVoter के सर्वे में 87 फीसदी लोगों ने कहा कि नोटबंदी कालाधन पर करारी चोट है। सी-वोटर के सर्वे ने बताया कि 87 फीसदी लोग नोटबंदी के साथ हैं। वहीं जागरण समूह ने सर्वे में समर्थकों की संख्या 86 फीसदी बतलायी। हिन्दुस्तान के सर्वे में 78 फीसदी लोगों ने नोटबंदी पर सरकार का समर्थन किया। और भी सर्वे हुए, जिनमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ जनता एक आवाज़ में खड़ी दिखाई दी।

  1. गांव के गांव हुए कैशलेस

नोटबंदी के बाद देश ने कैशलेस इकॉनोमी की अहमियत जानी। लेकिन, आपको आश्चर्य होगा कि इसकी जरूरत सबसे पहले गांवों ने समझी और शुरूआत भी वहीं से हुई। गुजरात का अकोडरा पहला डिजिटल गांव बना, तो जम्मू कश्मीर के बडगाम जिले का लनूरा, विशाखापट्टनम का धर्मासागरम, तेलंगाना का इब्राहिमपुर, महाराष्ट्र का धसाई, बिहार का मनेर और कुर्जी में बिंद टोली और भोपाल के पास बदझीरी गांव सबसे पहले कैशलेस होने वाले गांव रहे। उसके बाद तो मानो स्पर्धा हो गयी। अकेले नोएडा के 24 गांव कैशलेस होने को तैयार हो चुके हैं, तो देश के दूसरे राज्यों से भी ऐसी खबरों की भरमार है जहां गांव के गांव कैशलेस होने की ओर बढ़ रहे हैं।

  1. शादियों में एक से बढ़कर एक सामने आई मिसाल

कैशलेस विवाह- नोटबंदी के बाद लोगों ने कैशलेस की अहमियत को समझा और एक से बढ़कर एक मिसालें पेश कीं। गुजरात के सूरत में एक मुस्लिम परिवार ने कैशलेस निकाह का आयोजन किया। 17 दिसंबर को हुई इस शादी में डेबिट, क्रेडिट, चेक से तोहफे देने के विकल्प मौजूद थे। लोगों ने चेक के अलावा पेटीएम, ई-बटुआ और क्रेडिट कार्ड से शगुन दिए।

कैशलेस ही नहीं कॉस्टलेस शादी- कटिहार में जय सिंह बेगानी और ऋचा रिजवानी की शादी कैशलेस और कॉस्टलेस बनकर मिसाल बनी। शादी के मंच से दोनों ने मोदी-मोदी के जयकारे लगाए।

चाय पर शादी- मोदीजी की प्रेरणा ने शादी की परम्परा में एक नयी परम्परा तैयार करायी। तमाम खर्चों को दरकिनार करते हुए महज चाय पीते-पिलाते हुए ये शादी यूपी के जहांगीराबाद में हुई, जहां जलीलपुर के दिनेश की शादी जेपी नगर की वीना से हुई। इसके बाद तो मानो ऐसे उदाहरणों का तांता लग गया।

  1. जनधन खातों में पहुंची रकम, बढ़ी गरीबों की पूछ

आम लोगों के लिए पीएम ने जो जनधन खाते खुलवाए थे, उसमें रातों रात रकम जमा होने लगी। पुराने नोटों के रूप में बड़ी मात्रा में रकम उन खातों में जमा कराई गयीं। अकेले 7000 खातों में 1300 करोड़ रुपये जमा हुए। नोटबंदी के बाद सिर्फ नवंबर महीने में लगभग 65 हजार करोड़ रुपये जमा कराए गये। गरीबों की पूछ बढ़ गयी।

  1. गरीबों ने खुद का इस्तेमाल करने से रोका

नोटबंदी के मकसद से खुद को जोड़ते हुए गरीब सामने आए और कालाधन के खिलाफ आवाज बुलन्द की। कई जगहों पर या तो डरा-धमका कर या फिर बिना सहमति लिए जनधन खातों में रकम डाली गयीं। गरीबों ने इसका प्रतिवाद किया और मामले की जानकारी मीडिया के सामने रखी। इस तरह उन्होंने खुद का इस्तेमाल करने से रोका। मेरठ की एक महिला के अकाउन्ट में रातों रात एक अरब रुपये पहुंच गये। ब्रह्मपुरी इलाके के माधवपुरम में रहने वाली शीतल ने तुरंत इसकी सूचना प्रधानमंत्री को दी। शारदा रोड स्थित स्टेट बैंक की शाखा में उसका अकाउन्ट था।

  1. दिखी बेमिसाल ईमानदारी

जब पूरा देश कतार में खड़ा था और 100-50 के नोटों की किल्लत झेल रहा था। तब सहारनपुर से सटे गांव पंजौरा में एक बुजुर्ग ने आदर्श प्रस्तुत किया। सुदिष्ट पाठक नाम के इस सीनियर सिटिजन ने पीएम मोदी के फैसले को सपोर्ट करने के लिए पीएनबी की शाखा में 50 और 100 के नोट जमा कराए। घर खर्च से बचा कर उन्होंने ये रकम रखी थी, जिसे बैंक में जमा कराया। बैंककर्मियों ने भी उनका खूब स्वागत किया और उन्हें चाय पिलाई।

  1. ‘उत्सव’ बनी नोटबंदी, कतार में लगते हुए ‘चाय-पानी’

बैंकों के बाहर कतारें लगीं। लोगों ने इसका बुरा नहीं माना। अखबार, टीवी, वेब न्यूज़ हर जगह लोगों ने अपनी आवाज़ बुलन्द की कि कालाधन के खिलाफ इस लड़ाई में वो योगदान दे रहे हैं। इसलिए तकलीफ होने के बजाए उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। हरियाणा के यमुनानगर में कतार में लगे लोगों ने इसे एक उत्सव का रूप दे दिया। चाय-पानी की व्यवस्था के साथ कतारों में ऐसे लगे मानो देवी-देवता के दर्शन के लिए कतारबद्ध हों। यही नज़ारा देश के दूसरे भागों में भी देखने को मिला।

  1. कैशलेस इकॉनोमी की ओर देश

महज 3 फीसदी कैशलेस देश को सौ फीसदी या इसके करीब ले जाने की चुनौती प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वीकार की है। काम तेजी से शुरू हो चुका है। 40 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट यूजर्स हैं और 65 करोड़ लोगों के पास डेबिट कार्ड। वहीं ढाई करोड़ लोगों के पास क्रेडिट कार्ड हैं। कैशलेस इकॉनोमी को बढ़ावा देने के लिए सरकार मुफ्त डाटा देने पर विचार कर रही है। आम लोगों तक स्मार्टफोन पहुंचे, इसके लिए भी सरकार योजना बना रही है। वहीं कैशलेस होने के लिए जरूरी दूसरे विकल्पों पर भी काम जारी है।

पेटीएम का कारोबार बढ़ा– नोटबंदी के दौरान पेटीएम यूजर्स की तादाद 300 फीसदी बढ़ गयी।

SBI का UPI एप्स हुआ पोपुलर- एसबीआई के यूपीआई को 5 लाख लोगों ने एक महीने में डाउनलोड किया है। इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है।

आधार कार्ड से भी लेन-देन– आधार कार्ड के जरिए भी कैशलेस लेन-देन को सम्भव बनाया गया है ताकि आम लोग इसका फायदा उठा सकें।

लोगों को कैशलेस के लिए प्रेरित करने वाली कई स्कीमें लेकर सरकार सामने आ रही है।

  1. रीयल इस्टेट में करेक्शन, खरीदारों को फायदा

नोटबंदी के बाद रीयल इस्टेट बाज़ार में करेक्शन हुआ है। मकानों की कीमत में गिरावट आयी है। कालाधन के जरिए डीलर मकानों की कीमत को पहले गिरने नहीं देते थे और कृत्रिम बाजार पैदा कर मुनाफाखोरी किया करते थे। अब बड़े नोटों के बैंक में चले जाने पर पूरा कारोबार सफेद धन पर आ टिका है। ऐसे में कृत्रिम मांग कम हो गयी है और आपूर्ति ज्यादा। नेशनल रीयल इस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल के मुताबिक 30 प्रतिशत तक मकानों की रजिस्ट्री में कमी आयी है। यूपी के नोएडा में रजिस्ट्री 85 से 90 फीसदी तक घट गयी। इस वजह से कीमत में भी 20 से 30 फीसदी का फर्क पड़ा है। रीयल इस्टेट से जुड़े लोगों का मानना है कि आम लोगों के लिए मकान अब अफोर्डेबल हो गये हैं।

  1. सबको आवास योजना

केन्द्र सरकार ने 20 नवम्बर को सबके लिए आवास योजना की शुरुआत की है। अगले तीन साल में 1 करोड़ मकान बनाने की योजना है। मकसद हर गरीब को छत मुहैया कराना है। आगरा में इस योजना की शुरुआत की गयी है। इसके अंतर्गत जरूरत मंदल लोगों के लिए मैदानी इलाकों में 1.20 लाख रुपये और पहाड़ी इलाकों में 1.30 लाख रुपये की मदद की जाएगी। मौजूदा वित्त वर्ष में 33 लाख मकान बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

12. जनता ने मोदी की जयकार करते हुए चुकाए बकाया बिल

नोटबंदी के बाद से बकाया बिलों को चुकाने के लिए जनता ने पूरा उत्साह दिखाया। मोदी की पहल की जयकार हर जगह सुनाई पड़ी चाहे वो राजधानी हो या छोटे शहर या सम्भाग। हर जगह बिजली से लेकर टेलीफोन, जल कर, हाऊस टैक्स जमा कराने लोग अपनी इच्छा से सामने आए और संबंधित विभागों को बकाया बिल का भुगतान किया।

राजधानी दिल्ली में नोटबंदी के बाद सिर्फ तीन दिन में ही लोगों ने जल बोर्ड को 10 करोड़ से ज्यादा की रकम चुकायी।

लखनऊ में इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एडमिनिस्ट्रेशन-LESA- में नोटबंदी के बाद 10 से 15 नवंबर के बीच ही 93 करोड़ रुपये के बकाया बिलों का भुगतान हुआ। एक सज्जन ने तो 45 लाख रुपये कैश जमा करवाए, वहीं दो अलग-अलग लोगों ने भी 27 लाख और 28 लाख रुपये कैश में जमा कराए।

हिमाचल के नालागढ़ में सब डिवीजन 1 में 8 से 24 नवंबर के बीच 4 करोड़ 24 लाख रुपये बतौर बिजली बिल जमा कराए गये, सब डिवीजन-2 में इसी दौरान करीब 34 लाख रुपये की राशि जमा करायी गयी।

नारनौल में दो दिन में ही 4.5 लाख रुपये से ज्यादा के टेलीफोन बिल जमा हुए, तो 9 लाख 69, 528 रुपये के हाऊस टैक्स चुकाए गये।

दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम नारनौल में 11 नवंबर को 119.83 लाख, 12 नवंबर को 48.03 लाख, 13 नवंबर को 31.57 लाख, 14 नवंबर को 51.81 लाख, 15 नवंबर को 84.37 लाख रुपये के बिल पुराने नोटों से भरे गये। यानी 11 नवंबर से 15 नवंबर के बीच ही कुल 335.61 लाख रुपये बिल पुराने नोटों से जनता ने चुकाए।

राजस्थान के सिवनी सम्भाग में नवंबर महीने में 12 करोड़ 70 हजार रुपये बिजली बिल के रूप में वसूले गये, जो पिछले साल इस अवधि में 10 करोड़ 5 लाख रुपये था।

13. अपने अकाउन्ट सार्वजनिक करेंगे बीजेपी के MP-MLA

बीजेपी के सांसद और विधायक भी नोटबंदी पर पारदर्शिता को अपनाकर समर्थन दे रहे हैं ताकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुहिम पर कोई उंगली ना उठा सके। सांसदों और विधायकों ने तय किया है कि 8 नवंबर से 31 दिसंबर के बीच उनके अकाउन्ट में ट्रांजेक्शन का सारा रिकॉर्ड पार्टी को देंगे। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के पास ये लोग अपना ब्योरा रखेंगे। उसके बाद ये अकाउन्ट भी सार्वजनिक कर दिया जाएगा। ऐसा करके पार्टी के सांसद और विधायक जनता में ये संदेश देंगे कि सत्ता में होने के बावजूद उन्होंने इसका कोई बेजा इस्तेमाल नहीं किया है।

  1. कश्मीर में पत्थरबाजी खत्म

अब बुरहान बानी के नाम पर फर्जी और प्रायोजित विरोध नहीं दिख रहा। नहीं दिख रही है पत्थरबाजी की घटनाएं, जो 8 जुलाई को बुरहान के मारे जाने के बाद से 8 नवंबर को नोटबंदी लागू होने तक जारी रही। चंद लोग जो पैसे लेकर पत्थरबाजी कर रहे थे, उन्हें पैसे मिलने बंद हो गये। जो देशविरोधी ताकतें सक्रिय थीं, वो सुस्त पड़ गयीं। और, ये सब हुआ नोटबंदी की वजह से। आंकड़े इसकी गवाही देते हैं। जहां जुलाई में पत्थरबाजी की 820 घटनाएं हुईं थीं, अगस्त में 747 और सितम्बर में 535, वहीं 8 से 14 नवम्बर के बीच महज 15 घटनाएं रिपोर्ट की गयीं। और, बाद में तो ये बिल्कुल ही रुक गयीं। सरकार ने भी कश्मीर में पत्थरबाजी की घटना कम होने की बात संसद में स्वीकार की है।

  1. कश्मीर में सामान्य हुआ जन-जीवन

नोटबंदी ने कश्मीर को भी हिंसा से आज़ादी दिलाई, शान्ति की राह दिखलाई। दरअसल इसने आतंकियों की कमर तोड़ दी। इसलिए जबरन बंद के लिए आतंकियों का आह्वान कमजोर पड़ गया और नोटबंदी के बाद छठे दिन ही स्कूली छात्रों ने उन्हें ऐसा करारा जवाब दिया कि मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर के मुंह से निकला- यही असली सर्जिकल स्ट्राइक है। दरअसल 12वीं की परीक्षा में 95 फीसदी उपस्थिति ने ये दिखा दिया था कि कश्मीर के छात्र-नौजवान हिंसा नहीं, शांति चाहते हैं, पढ़ाई चाहते हैं। बीते चार महीनों में कश्मीर घाटी के 30 फीसदी स्कूलों को आग लगा दी गयी थी जिस पर छात्र-छात्राओं का आक्रोश उपस्थिति बनकर सामने आया। बाज़ारों में रौनक लौट आयी है। खेल के मैदान, चौक-चौराहे, सड़कों पर ट्रैफिक सबकुछ अब पहले जैसा है। और, अब शान्ति की राह पर है कश्मीर।

  1. नक्सलियों का सरेंडर

दबाव डालकर नोट बदलवाने की घटनाओं के सामने आने पर बड़ी संख्या में नक्सलियों के खाते जब्त किए गये। झारखण्ड, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में खासकर नज़र रखी गयी। नतीजा हुआ कि आर्थिक तंगी ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी। नक्सलियों के सामने आत्मसमर्पण के सिवा दूसरा विकल्प नहीं बचा। नतीजा ये हुआ कि पिछले साल के मुकाबले आत्मसमर्पण में तिगुनी बढोतरी हुई है। 15 दिसंबर, 2016 तक 1420 माओवादियों ने सरेंडर किया है जबकि 2015 में 570, 2014 में 670 और 2013 में 282 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। 2011 से इस साल 15 नवम्बर तक कुल 3766 माओवादियों ने समर्पण किया था।

  1. नक्सली हिंसा खत्म

नोटबंदी ने नक्सली हिंसा पर भी लगाम लगायी है। इस वजह से वे अपने किसी ऑपरेशन को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी ये माना है कि नोटबंदी के बाद वामपंथी उग्रवादियों की गतिविधियां थम गयी हैं और उनकी स्थिति बहुत खराब है। 2013 में जहां नक्सली घटनाओं की संख्या 379 थी, जो 2014 में 426 और वर्ष 2015 में 557 हो गई। 2016 के पहले तीन महीने में हिंसा की 202 घटनाओं के मुकाबले नवंबर और दिसंबर में बमुश्किल दो दर्जन घटनाएं हुईं और इनमें भी कोई बड़ी घटना नहीं रही।

  1. जाली करंसी खत्म

नोटबंदी के बाद जाली करंसी से देश आजाद हो गया। 400 करोड़ के जाली नोट का कारोबार बंद हो गया। राजस्व खुफिया निदेशालय के मुताबिक पाकिस्तान से हर साल 200-500 करोड़ रुपये जाली नोट भारत भेजे जा रहे थे। ये जाली करंसी नेपाल, थाइलैंड और बांग्लादेश के रास्ते भारत पहुंचाए जा रहे थे। इस बार भी इसी मकसद से पाकिस्तान ने स्याही और कागज की खरीदारी जर्मनी और स्विटजरलैंड से कर रखी थी। पर, नोटबंदी ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। इस बाबत लोकसभा में जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने बताया कि नोटबंदी के बाद पड़ोसी देशों से जाली नोटों को भेजने पर रोक लग गयी है।

  1. हवाला कारोबार पर रोक, आतंकियों को फंडिंग खत्म

बड़े नोटों के बंद होने और जाली नोटों की तस्करी रुकने से हवाला कारोबार को बड़ा झटका लगा है। इससे आतंकियों समेत देश में सक्रिय सभी देश विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लग गया है जो हवाला पर निर्भर थे। पाकिस्तान के बड़े हवाला कारोबारी जावेद खानानी ने 8वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। आतंकियों को फंडिग रुक गयी है। IB की रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के पहले हफ्ते में कश्मीर में सीमा पार से कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुआ। नेपाल में हवाला के जरिए इकट्ठा हुई 10 हजार करोड़ की रकम कूड़े में बदल गयी।

  1. भारत की राह पर दिखी दुनिया

भारत ने बड़े नोटों को बंद करने का फैसला किया, तो दुनिया देखती रह गयी।आतंकवाद, कालाधन और तस्करी का ये इलाज सबको पसंद आया। यूरोपीय यूनियन ने तो तुरंत 500 यूरो के बड़े नोट बंद करने की तैयारी कर ली।  इसके लिए 2018 तक की डेडलाइन भी तय कर दी। भारत के नक्शे कदम पर एक के बाद एक देश आते चले गये। वेनेजुएला, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान…और ये सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है।

  1. विरोधी भी हुए मुरीद

कालाधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ नोटबंदी ऐसी पहल रही कि पीएम नरेन्द्र मोदी के विरोधी भी उनका साथ देते नजर आए। चाहे ऐसे लोग संगठन के हों या बाहर के। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और अलग-अलग कारणों से खफा रहे शांता कुमार ने खुलकर पीएम नरेन्द्र मोदी की नोटबंदी की तारीफ की, तो हर बार उल्टे सुर बोलते रहे शत्रुघ्न सिन्हा का भी दिल नोटबंदी ने जीत लिया। सहिष्णुता के मुद्दे पर मोदी सरकार की आलोचना कर चुके आमिर खान खुलकर मोदी के पक्ष में आए और उन्होंने कहा कि यह कदम देश हित में जरूरी है। वहीं, राजनीति में धुर विरोधी नीतीश कुमार ने नोटबंदी के लिए पीएम मोदी की तारीफ कर दुनिया को चौंका दिया। यहां तक कि उन्होंने इसके लिए अपने सहयोगी आरजेडी के लालू प्रसाद और ममता बनर्जी की दुश्मनी भी मंजूर कर ली। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव हों या ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक- सबने राजनीतिक विरोध को दरकिनार करते हुए पीएम मोदी की पहल को कालाधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा कदम बताया और जनता से सहयोग की अपील की।

  1. पहली बार सेलेब्रेटिज ने भी समझी जिम्मेदारी

सेलिब्रेटीज ने भी पहली बार अपनी जिम्मेदारी समझी। कालाधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ वे खुलकर सामने आए। आमिर खान के बाद सन्नी देओल, शाहिद कपूर, अजय देवगन, दीपिका पादुकोण, आलिया भट्ट सरीखे बॉलीवुड स्टारों ने कालाधन के खिलाफ नोटबंदी को स्वागतयोग्य कदम बताया, तो क्रिकेटर विराट कोहली ने भी नोटबंदी की खुलकर तारीफ की। कई स्टारों ने तो कैशलेस की जरूरत बताने के लिए लोगों के बीच अभियान भी चलाए।

  1. डिजिटल भुगतान पर तोहफे

कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ने क्रिसमस के दिन से लेकर बाबा साहब अम्बेदकर की जयंती यानी 14 अप्रैल से एक दिन पहले 13 अप्रैल तक इनामी योजना की शुरूआत की। लकी ग्राहक योजना के तहत ये पुरस्कार रोजाना और साप्ताहिक ड्रॉ में दिए जाएंगे। जो लोग डिजिटल लेन-देन के भागीदार होंगे, उनमें से 1000 उपभोक्ताओं को हर दिन इनाम दिए जा रहे हैं। आम डिजी ग्राहकों को 1 करोड़, 50 लाख और 25 लाख के नकद पुरस्कार दिए जाएंगे। डिजी धन व्यापार योजना के तहत करोड़ों रुपये इनाम की ये स्कीम डिजिटल कारोबार को जन-जन तक पहुंचाने के इरादे से की गयी है। कारोबारियों के लिए भी इनाम की योजना है। उनको 50 लाख, 25 लाख और 5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा।

  1. एनसीआर के लोगों को तोहफा, डीटीसी में सस्ता हुआ सफर

एनसीआर के लोगों नोटबंदी के बाद बड़ा तोहफा मिला है। उनके लिए सस्ते सफर का इंतजाम किया गया है। जनवरी से डीटीसी की बसों में नॉन एसी बसों में 5 रुपये और एसी बसों में 10 रुपये किराया लगेगा चाहे जितनी दूरी तक का सफर क्यों ना हो। अभी ये किराया 5 रुपये से लेकर 25 रुपये तक है। ये फैसला नोएडा, गुड़गांव, फरीदाबाद, गाजियाबाद जाने वाली बसों पर भी लागू होगा। ये फैसला एक महीने के लिए लागू किया जा रहा है लेकिन बाद में इसे बढ़ाया भी जा सकता है।

डेली पास अब 20 रुपये का होगा। पहले एसी बसों में यह 50 रुपये और नॉन एसी बसों में 40 रुपये का होता था।

मंथली पास एसी और नॉन एसी दोनों के लिए 250 रुपये करने की तैयारी है। पहले ये नॉन एसी में 800 रुपये और एसी बसों में 1000 रुपये का होता था।

फ्री पास पर भी सरकार विचार कर रही है। 21 साल तक के स्टूडेन्ट्स और सीनियर सिटिजन के लिए फ्री बस पास देने का भी प्रस्ताव है।

  1. मजदूरों की बल्ले-बल्ले- अकाउन्ट में आएगी सैलरी

मोदी सरकार ने अध्यादेश लाकर नकद सैलरी पर रोक लगा दी है। वेतन भुगतान संशोधन विधेयक 2016 के तहत इसका फायदा असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सबसे अधिक होगा जिसकी तादाद सबसे ज्यादा है। उन्हें या तो चेक से पैसे मिलेंगे या फिर उनके अकाउन्ट में सीधे सैलरी जाएगी। ऐसे में बिचौलिए की भूमिका खत्म हो जाएगी जो मजदूरों का पैसा डकार लेते थे। इतना ही नहीं कागज पर कुछ और असल में कुछ भुगतान की स्थिति भी खत्म हो जाएगी।

  1. समांतर अर्थव्यवस्था खत्म होगी, कृत्रिम अमीरी घटेगी

देश में सड़क किनारे चाय और सब्जी बेचने वालों से लेकर कोयला खदान तक, अपराध की दुनिया से लेकर काले कारोबार तक समांतर अर्थव्यवस्था चल रही है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत में 30 लाख करोड़ रुपये की समांतर अर्थव्यवस्था है। नोटबंदी के बाद कैशलेस हो रही अर्थव्यवस्था से ये समांतर अर्थव्यवस्था खत्म होगी। इससे कृत्रिम अमीरी भी घटने के आसार हैं। इसका मतलब ये हुआ कि वैसे लोग जो टैक्स देते वक्त गरीब बन जाते थे, अब ऐसा नहीं कर सकेंगे। अगर तिजोरियां भरी हैं तो वे वास्तव में अमीर की तरह टैक्स भी देंगे। ऐसे लोगों को डिजिटल इकोनॉमी से मुख्य धारा में जोड़ने में मदद मिलेगी।

  1. भ्रष्टाचार के खिलाफ दिखा अनैतिक गठजोड़

कालाधन के खिलाफ बोलती रहीं पार्टियां एकजुट हो गयीं। संसद के बाहर तो उनके विरोध को किसी ने तवज्जो नहीं दिया, लेकिन संसद के भीतर उन्होंने जरूर अनैतिक गठजोड़ दिखाया और संसद नहीं चलने दी। चंदों का हिसाब-किताब सामने रखने के सवाल पर सबकी जुबान बंद हो गयी। विरोध में विपक्ष एकजुट हो गया, लेकिन ये एकजुटता उन्हें बेनकाब होने से नहीं बचा सकी। संसद में विपक्ष के गैर जिम्मेदाराना रवैये की वजह से लोकसभा में 15 फीसदी और राज्यसभा में 17 फीसदी ही काम हो पाया।

  1. बेनकाब हुईं राजनीतिक पार्टियां

नोटबंदी के बाद पहली बार राजनीतिक दल बेनकाब हुए। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बीएसपी के दफ्तरों में काला-सफेद होने लगा। नोटों को बदलने का धंधा शुरू हो गया। और, ये सब देश ने देखा टीवी पर। बीएसपी के खाते में सौ करोड़ और मायावती के भाई के खाते में लगभग डेढ़ अरब की रकम डाले जाने की खबर ने भी सबको चोंकाया।

  1. फेल हुई स्वार्थ की राजनीति, भारत बंद टांय-टांय फिस्स

मोदी विरोध पर आमादा राजनीतिक दलों की नोटबंदी पर एक नहीं चली। चूकि मोदी की पहल कालाधन के खिलाफ थी, भ्रष्टाचार के खिलाफ थी और जनता का व्यापक समर्थन था, इसलिए भारत बंद का आह्वान फेल हो गया। कहीं किसी राज्य या कस्बे से भी नोटबंदी के खिलाफ विरोध की आवाज़ सुनाई नहीं पड़ी। विपक्ष की इतनी बड़ी हार आजाद हिन्दुस्तान में पहले कभी नहीं हुई थी। दरअसल ये जीत पीएम मोदी की थी जिन्होंने कालाधन के खिलाफ देशव्यापी मुहिम छेड़ी।

  1. कालाधन पर एक और हमला

कालाधन पर एक और हमला बोलते हुए केंद्र सरकार ने अध्यादेश जारी किया है कि अमान्य नोट पास रखने पर जुर्माना लगेगा और आर्थिक दंड के साथ-साथ 4 साल तक की कैद भी हो सकती है। इस तरह सरकार ने ये सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि कोई पुराना नोट ना रहे और आगे भी गलत तरीके से इसे बदलने का काम ना हो सके। पुराने नोटों को बैंकों के पास जमा कराने की समय-सीमा 30 दिसंबर को खत्म हो रही है। एक घोषणा पत्र के साथ 31 मार्च तक इन नोटों को रिजर्व बैंक के विशिष्ट कार्यालयों में जमा कराया जा सकेगा। नये नियम के मुताबिक 10 से ज्यादा अमान्य नोट पास रखना अपराध होगा।

  1. टैक्स चोरों पर नकेल

नोटबंदी के दौरान जिस किसी ने भी 500 और 1000 के नोटों के रूप में ढाई लाख से ज्यादा की रकम जमा करायी है और जिनका स्रोत संदेहास्पद समझा गया है, बैंक ने उन्हें नोटिस भेजा है। ऐसे 3500 लोगों को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया। जवाब और संबंधित व्यक्ति के पिछले दो साल के आईटी रिटर्न को सामने रखकर एक्शन लिया जाएगा। इससे कर-चोर पकड़ में आ जाएंगे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। यहां तक कि कार खरीदने वालों पर भी नजर रखी जा रही है। कार डीलरों को भी नोटिस भेजे जा रहे हैं जिन्होंने नवंबर के बाद से संदिग्ध तरीके से खूब बिक्री दिखलाई है। अकेले तेलंगाना में एक करोड़ से ज्यादा जमा कराने वाले 5 हजार लोगों को इनकम टैक्स ने नोटिस भेजा है।

  1. देशभर में हुई छापेमारी, 500 करोड़ की संपत्ति जब्त

नोटबंदी के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में 500 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की। 42 दिनों में इनकम टैक्स विभाग ने देशभर में 4200 करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता लगा। नोटबंदी के बाद 458 करोड़ रुपये की नकदी और गहने भी जब्त किए। वहीं इनकम टैक्स ने 3 हजार से ज्यादा लोगों को नोटिस जारी किए और 86 करोड़ रुपये के नये नोट जब्त इस दौरान 677 लोगों से पूछताछ की गयी।

  1. नोटबंदी ने बैंकों को मजबूत बनाया

नोटबंदी ने बैंकों को मजबूत बनाया है। भारत के बैंकों में NPA यानी नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स दुनिया की तुलना में ऊंचे स्तर पर है। इसका मतलब ये है कि जो पैसा बैंकों से जनता के पास आता है वो वापस जनता तक नहीं पहुंच पाता। नोटबंदी से कालाधन सामने आए हैं और बहुत सारे नोट रद्दी हो गये हैं। जो रद्दी हुए हैं और कालाधन से जो कमाई हुई है उतने नोटों को दोबारा छापकर बैंक अपनी स्थिति को मजबूत करेंगे। इससे एनपीए सूचकांक नीचे आएगा। बैंक अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास करेगें और जनता को कम ब्याज पर पैसा उपलब्ध करा सकेंगे। बैंकों के पास 13 लाख करोड़ से ज्यादा रकम जमा हो चुकी है। बैंकों में 300 फीसदी नकदी बढ़ी है। उसके बाद से बैंको का कारोबार बढ़ा है। लोन बांटने और उससे कमाई करने के अवसर भी बढ़ गये हैं। कैशलेस अभियान से जुड़कर बैंकों ने उपभोक्ताओं को भी जोड़ने में कामयाबी पायी है। वहीं नोटबंदी से बैंकों के पास एकत्र हुई दौलत से उन्हें अपना पुराना घाटा पाटने में भी मदद मिलेगी.

  1. आम जनता को मिलेगी राहत- टैक्स घटेंगे, दायरा बढ़ेगा

सरकार जनता को टैक्स से राहत देने की सोच रही है। ऐसा नोटबंदी की वजह से सम्भव हुआ है। वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि वो चाहते हैं कि डायरेक्ट और इन डायरेक्ट टैक्स घटे, लेकिन इसके लिए टैक्स का दायरा भी बढ़ाना जरूरी है। टैक्स का दायरा बढ़ाना अब सरकार को सम्भव लग रहा है। अब तक देश में सिर्फ 3.81 प्रतिशत लोग ही टैक्स देते थे। यह रकम जीडीपी का महज 16.6 फीसदी है, जो विकासशील देशों में सबसे कम है। अब डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिलने से हर ट्रांजेक्शन रजिस्टर हो रहे हैं जिन पर इनकम टैक्स की नजर है। ऐसे में बड़ी संख्या में वैसे लोग टैक्स के दायरे में आ रहे हैं जिन्होंने पहले कभी टैक्स नहीं दिया। अभी भारत में कुल 2.87 करोड़ लोग इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं जबकि टैक्स देने वाले सिर्फ 1.25 करोड़ लोग हैं। अब खरीद-फरोख्त में भी टैक्स भुगतान स्वाभाविक हो जाएगा। इससे केन्द्र सरकार की रेवेन्यू में तेजी से उछाल देखने को मिलेगा।

  1. ब्याज दर घटेगी, निवेश बढ़ेगा

बैंक के पास पर्याप्त कैश है और अब इसलिए बैंक ब्याज दर घटाने पर विचार कर रहा है। वहीं बाजार भी ब्याज दर घटने की उम्मीद कर रहा है। रिजर्व बैंक ने अभी इसका एलान नहीं किया है, लेकिन जनवरी महीने में कर्ज सस्ता होगा- इसका अनुमान अर्थशास्त्री लगा रहे हैं। दुनिया भी भारत की तरफ देख रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि ग्लोबल स्तर पर अगर स्पर्धा करनी है तो ब्याज दर में कटौती करनी होगी। उन्होंने कहा है कि कॉरपोरेट टैक्स को 25 फीसदी के स्तर तक लाया जाना चाहिए। ब्याज दर घटने पर देशी और विदेशी पूंजीनिवेश बढेगा और अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी।

  1. लौट रहे हैं सस्ते कर्ज के दिन !

सस्ते कर्ज के दिन लौट सकते हैं। बैंक 1 जनवरी से लोन सस्ता करने के मूड में हैं। आरबीआई के मुताबिक 1 अप्रैल से 9 दिसंबर के बीच डिपॉजिट 13.6 फीसदी बढ़ी है जो पिछले साल के लगभग दोगुनी है। ऐसे में पर्याप्त लिक्विडिटी है। वहीं लोन लेने की दर में गिरावट आयी है। इसलिए एसबीआई समेत दूसरे बैंकों के अधिकारियों ने बैठक कर ये मन बनाया है कि अगले साल से लोन डिसबर्सल की रफ्तार बढ़ायी जाए। उन पर ब्याज दर घटाने के लिए सरकार का भी दबाव है। ऐसे में वो लोन को सस्ता कर लोगों को आकर्षित करने जा रहे हैं। लिहाज लोन के लिए सस्ते दिन लौटने वाले हैं।

  1. इंग्लैंड के बराबर पहुंची भारत की अर्थव्यवस्था

बिजनेस मैगजीन फोर्ब्स में प्रकाशित लेख को मानें तो भारत की अर्थव्यवस्था इंग्लैंड की अर्थव्यवस्था के करीब पहुंच गयी है। महज 3 लाख करोड़ रुपये का फर्क रह गया है। नोटबंदी के बाद कालाधन की समांतर अर्थव्यवस्था अगर मुख्य धारा में शामिल हुई तो हम जल्द ही इंग्लैंड को पीछे छोड़ देंगे। फोर्ब्स के मुताबिक मौजूदा करेंसी रेट के हिसाब से भारत की जीडीपी 2.25 लाख करोड़ डॉलर यानी करीब 153 लाख करोड़ रुपये है, जबकि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था का आकार 2.31 लाख करोड़ डॉलर यानी 156 लाख करोड़ रुपये है।

  1. घटी महंगाई, लौटा सस्ते का दिन

महंगाई से नोटबंदी ने निजात दिलाई है। सब्जी और खाद्यपदार्थ सस्ते हुए हैं। बोलचाल की भाषा में इसे सस्ते दिनों का लौटना कहा जा रहा है। हालांकि बाजार की भाषा में समझें तो नोटबंदी के बाद से मुद्रास्फीति की दर लगातार गिर रही है। अक्तूबर में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 3.39 फीसदी थी जिसके मुकाबले नवंबर 2016 में यह -2.04 फीसदी रही। प्याज के दाम आधे से ज्यादा गिर गये हैं। सब्जियां भी लगातर सस्ती हुई हैं। खुदरा मुद्रास्फीति भी नवंबर में दो साल के न्यूनतम स्तर 3.63 फीसदी पर पहुंच गयी। इसी तरह खाद्य मुद्रास्फीति नवंबर में नरम होकर 1.54 प्रतिशत रही, जो अक्तूबर में 4.34 प्रतिशत थी।

  1. आपराधिक घटनाओं में कमी

नोटबंदी के बाद सिर्फ आतंक और नक्सली हिंसा में ही नहीं, आम अपराध में भी कमी आयी है। मुम्बई में करीब 30 फीसदी अपराध की घटनाएं कम हो गयी हैं। यहां नोटबंदी के बाद वाले हफ्ते में महज 290 अपराध के केस दर्ज हुए, जबकि इससे पहले के हफ्ते में यह संख्या 400 थी। इसी तरह चोरी की घटनाएं भी 118 के मुकाबले नोटबंदी के ठीक बाद के हफ्ते में 99 हुईं। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भी दावा किया है कि मुम्बई में सुपारी लेकर हत्या करने, जबरन वसूली और मादक पदार्थों की तस्करी समेत अपराध के दर में कमी आयी है। उनका दावा है कि मुंबई में 20 दिनों में हत्या की दर आधी हो गयी। राजधानी दिल्ली में जघन्य अपराधों में 33 फीसदी की कमी आयी है। नोटबंदी के बाद एक महीने में हथियारों के बल पर 315 कैश लूटने की घटनाएं हुईं जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह दोगुनी थी। लूटपाट की घटनाएं भी 45 फीसदी कम हुई हैं। दिल्ली में पिछले एक महीने में एक भी फिरौती का मामला दर्ज नहीं हुआ है, वहीं जबरन उगाही के मामलों में 55 फीसदी की कमी दर्ज की गयी है।  इसी तरह गुरुग्राम में पहले की तुलना में 82 के मुकाबले 55 आपराधिक मामले नोटबंदी के बाद वाले हफ्ते में दर्ज हुए हैं। बिहार, यूपी, दिल्ली-एनसीआर समेत सभी राज्यों में अपराध का ग्राफ तेजी से गिरने की सूचना है।

  1. चुनाव आयोग भी लेकर आया नयी पहल

चुनाव आयोग ने भी कालाधन के खिलाफ शुरू मुहिम का समर्थन किया और राजनीतिक दलों को जिम्मेदार बनाने की वकालत की। इस दिशा में कदम उठाते हुए चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के लिए ये अनिवार्य कर दिया गया कि वो कैश में लिए चंदे का भी हिसाब दें। इसके अलावा कैश में चंदा लेने की सीमा भी तय कर दी। 10 हजार से ज्यादा की रकम अब कैशलेस माध्यम से लेने होंगे। माना जा रहा है कि इससे चुनाव में अनैतिक खर्चों को रोका जा सकेगा और राजनीति में धन का जोर कम होगा। ऐसे में उम्मीदवार के चयन से लेकर उसके चुनाव कार्यक्रम तक की प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी। आखिरकार लोकतंत्र मजूबत होगा।

  1. लम्बी अवधि में जीडीपी के लिए वरदान साबित होगी नोटबंदी

विभिन्न क्रेडिट एजेंसियों ने जीडीपी के अनुमान को संशोधित किया है और इसमें गिरावट की आशंका जतायी है, लेकिन यह भी कहा है कि दीर्घावधि में नोटबंदी जीडीपी के लिए वरदान साबित होगा। क्रेडिट एजेंसियों का अनुमान है कि नोटबंदी से कर राजस्व बढ़ेगा और यह तेजी से राजकोष को मजबूत करेगा। इससे जीडीपी पर सकारात्मक असर पड़ेगा। मूडीज इन्वेस्टर सर्विस की रिपोर्ट में भी नोटबंदी के तत्काल पड़ने वाले प्रभावों का जिक्र करते हुए भविष्य में जीडीपी के बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविन्द पनगढ़िया ने कहा है- ‘‘नोटबंदी से पहले, हमने अच्छा किया और जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत थी। फिलहाल हमारे पास सूचना नहीं है लेकिन मैं आपको कह सकता हूं कि 13 विश्लेषकों और पर्यवेक्षकों में से 11 ने कहा कि प्रभाव एक प्रतिशत से कम होगा जबकि दो ने बड़े प्रभाव का अनुमान जताया।’’

  1. बढ़ेगी आर्थिक विकास की रफ्तार

नोटबंदी के बाद देश की आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ेगी, ऐसा ज्यादातर आर्थिक विश्लेषक मान रहे हैं। 2015 में वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण एशिया में भारत की विकास दर सबसे ज्यादा रही। भारत ने जहां 7.5 फीसदी विकास दर हासिल किया, वहीं बांग्लादेश ने 6.55 फीसदी, पाकिस्तान 55.54 फीसदी, श्रीलंका 4.79 फीसदी, नेपाल 3.36 फीसदी की दर से विकास किया। नोटबंदी के बाद कालाधन, नकली नोट और श्यूडो बैंकिंग खत्म होने से देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

  1. किसानों को सूदखोरों से मिलेगी निजात

नोटबंदी का फायदा उन किसानों को भी होगा जो अक्सर सूदखोरों के चंगुल में फंस जाते हैं। एक बार इस चंगुल में फंसने के बाद आत्महत्या तक को मजबूर हो जाते हैं। ज्यादातर आत्महत्या करने वाले किसानों की पीड़ा ही कर्ज रही है। नोटबंदी से शैडो बैंकिंग पर रोक लगेगी। इससे वित्तीय स्थिरता मिलेगी। शैडो बैंकिंग का मतलब है कि बैंकिंग सिस्टम के समांतर बैंकों की तरह के कामकाज। इस पर बैंकिंग जैसी कोई कानूनी बाध्ता नहीं होती और ना ही कोई मजबूत शिकंजा होता है। शारदा चिटफंड घोटाला जैसे मामले शैडो बैंकिंग के दुष्परिणाम हैं जिसमें आम लोगों की गाढ़ी कमाई डूब गयी।

  1. किसानों के लिए आसान हुआ कृषि लोन

नोटबंदी के बाद किसानों को मुश्किल ना हो, उन्हें रबी की फसल के लिए धन की उपलब्धता बनी रहे- इसके लिए तुरंत कृषि ऋण वितरित करने का इंतजाम किया गया। नाबार्ड ने जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को कृषि संबंधी ऋण वितरण की सीमा बढ़ाकर 21 हज़ार करोड़ रुपये की सीमा तय कर दी। किसानों को पुराने ऋण से मुक्ति मिले, उन्हें माफ किया जाए इस पर भी विचार कर रही है। बैंकों के पास किसानों की मदद के लिए पर्याप्त धन हैं, इसलिए किसानों को इसका पूरा फायदा मिल रहा है और मिलेगा।

  1. डेबिट कार्ड के उपयोग पर खत्म हुआ शुल्क

सरकार ने कैशलेस लेन-देने को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया और उसने डेबिट कार्ड्स पर लगने वाले एमडीआर, बैंकों की ओर से लिए जाने वाले शुल्क और स्विचिंग शुल्क को समाप्त कर दिया। इसलिए डेबिट कार्ड का उपयोग शुल्क रहित हो गया। इसके बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और कुछ निजी बैंकों ने 31 दिसंबर तक डेबिट कार्ड के उपयोग पर सर्विस टैक्स नहीं लेने का फैसला किया। रुपे डेबिट कार्ड ने पहले ही स्विचिंग शुल्क से छूट दे दी थी। इससे आम लोगों को नकदी संकट से उबरने में मदद मिली और वे लोग कैशलेस व्यवस्था की ओर बढ़े।

  1. पेपरलेस और कैशलेस हो रहे हैं स्कूल

देश की शिक्षा व्यवस्था पेपरलेस और कैशलेस हो रही है। एचआरडी मिनिस्ट्री ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेन्ट ने 31 मार्च 2017 तक का लक्ष्य रखा है। CBSE, NCERT और NIOS को इस बाबत निर्देश दिए हैं। इसके बाद इन संस्थानों ने भी अपने-अपने विभागों को पेपरलेस और कैशलेस होने के लिए निर्देश दे दिया है। अब मार्कशीट से लेकर दूसरे प्रमाण पत्र तक सभी ऑनलाइन छात्रों को मिलेंगे। फीस भी नकद लेने के बजाए ऑनलाइन लेने को कहा गया है। ये आदेश लागू हो गया है। CBSE ने सबसे पहले इसकी पहल की। उसने निर्देश दिया कि शिक्षकों का वेतन हर हाल में ऑनलाइन हो, फीस कैशलेस मोड में लिए जाएं, कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वालों को भी कैशलेस मोड में ही पेमेन्ट हो। इससे स्कूलों के लाखों कर्मचारियों, शिक्षकों और छात्रों को फायदा होगा।

  1. सर्राफा बाज़ार पर नकेल, आम लोगों को राहत

नोटबंदी के बाद सोना और चांदी के दाम अचानक बढ़ तो गये लेकिन बाद में ये दोनों सस्ते हो गये। नोटबंदी के तुरंत बाद सोने के भाव में आयी तेजी दरअसल बाजार में कालाधन का खेल था। अब सरकार ने इस खेल में शामिल खिलाड़ियों को घेरना शुरू किया है। 7 नवंबर को सोना 30, 850 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 43, 600 रुपये प्रति किलो ग्राम थी। नोटबंदी के बाद अगले दिन सोना 31, 750 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया और चांदी भी 43, 850 रुपये किलो के स्तर पर पहुंच गयी। लेकिन, इनकम टैक्स के छापों के बाद सर्राफा बाजार में हलचल मच गयी और कीमत में कृत्रिम बढोतरी रुक गयी। अब यह 28, 800 के स्तर पर आ चुका है और चांदी 44, 200 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। भविष्य में और भी सस्ता हो सकता है सोना और चांदी।

  1. कालाधन के बाद अब बेनामी संपत्ति निशाने पर

कालाधन पर करारा प्रहार करने के बाद अब सरकार बेनामी संपत्ति पर हमला बोलने वाली है। मन की बात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसका एलान कर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि हमने बेनामी संपत्ति कानून को धारदार बनाया है और अब यह अपना काम करेगा। जब संपत्ति खरीदने वाला अपने पैसे से किसी और के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदता है तब वह बेनामी संपत्ति कहलाता है। दरअसल देश में कालाधन बड़े नोटों के साथ-साथ बेनामी संपत्ति के रूप में भी जमा है। बड़े नोट तो वापस ले लिए गये हैं। अब बारी बेनामी संपत्ति की है। सरकार इस साल जुलाई में फाइल टैक्स रिटर्न और बैंक ट्रांजेक्शन के डाटा के आधार पर संदिग्ध रियल इस्टेट संपत्तियों की पड़ताल कर सकती है।

  1. लोक कल्याणकारी योजनाओं का रास्ता साफ हुआ

नोटबंदी के बाद लोक कल्याणकारी कार्य बढ़ेंगे। सरकार के पास पर्याप्त धन आ चुका है। बैंक इस स्थिति में हैं कि दीर्घकालिक लोन दे सकें। ऐसे में सरकार बड़ी योजनाओं को पूरा कर सकती है। सबके लिए आवास योजना जैसी कई और योजनाएं सामने आ सकती हैं। स्मार्ट सिटी योजना परवान चढ़ सकती है। आदिवासियों और गरीबों के लिए भी नयी योजनाएं लेकर सरकार सामने आ सकती है। इससे मनी फ्लो बढ़ेगा।

  1. रोजगार के अवसर बनेंगे

नोटबंदी का तत्काल असर कालाधन पर पड़ा है लेकिन यहीं से अर्थव्यवस्था सुधरने और रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद भी बनी है। जब सरकार लोक कल्याणकारी योजनाएं लेकर आएंगी, तो उससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। अर्थव्यवस्था मजबूत होने से विदेशी निवेश बढ़ेगा, जिससे भी रोजगार के मौके बनेंगे। सस्ते लोन का असर भी स्वरोजगार मजबूत होने से होगा। अर्थशास्त्री मान रहे हैं कि अर्थव्यवस्था में तेजी आने से इसका चौतरफा असर होगा और रोजगार इनमें से एक क्षेत्र है जहां इसका सबसे ज्यादा असर दिखेगा। नोटबंदी के बाद डिजिटल वॉयलेट कंपनियों में रोजगार बढ़ा है। बिग बाज़ार जैसे रिटेल सेक्टर में भी रोजगार के अवसर बने हैं।

-प्रेम कुमार

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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