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रंग ला रहीं पीएम मोदी की आर्थिक नीतियां, शेयर मार्केट में 18 हजार करोड़ का विदेशी निवेश

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के चलते देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। देश ही नहीं तमाम विदेशी रेटिंग एजेंसियां भी भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक रुख दिखा चुकी हैं। अब अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक और अच्छी खबर यह आई है कि भारतीय शेयर मार्केट में जनवरी महीने में 3 बिलियन डॉलर यानी लगभग 18,000 करोड़ रुपये का विदेशी समूह निवेश हुआ है। इसके पीछ सबसे बड़ा कारण है कि विदेशी समूह निवेशक को लग रहा है कि इंडियन इकॉनामी निकट भविष्य में और मजबूत होकर उभरेगी। जानकारों के अनुसार विदेशी समूह निवेशकों का ही असर है कि पिछले कुछ हफ्तों से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच रहे हैं। आंकड़ों की बात करें तो विदेशी समूह निवेशकों ने 1 से 25 जनवरी के बीच 11,759 हजार करोड़ रुपये स्टॉक मार्केट में और 6,127 करोड़ रुपए डेट फंड में निवेश किए हैं। इतना ही नहीं विदेशी समूह निवेशकों के इस कदम से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भी अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार 19 जनवरी तक विदेशी मुद्रा भंडार 414.784 बिलियन डॉलर पहुंच चुका है। आरबीआई को अभी इसमें और बढ़ोतरी की उम्मीद है।


आर्थिक सर्वेक्षण में दिखी अर्थव्यवस्था की शानदार तस्वीर

वित्त वर्ष 2018 के आर्थिक सर्वे में भी सरकार ने अर्थव्यवस्था की मजबूती का उम्मीद जताई है। इस सर्वे में वित्त वर्ष 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ के 7 से 7.5 फीसद रहने की अनुमान लगया है। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर के 6.75 फीसद रहने का अनुमान जताया गया है। आर्थिक सर्वे 2018 पेश होने के बाद नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि अगले साल आर्थिक विकास दर 8 फीसद तक पहुंच सकती है। आर्थिक सर्वे के अनुसार-
• वित्त वर्ष 2019 में सकल घरेलू उत्पाद 7 से 7.5 प्रतिशत होगी । वित्त वर्ष 2018 में 6.75 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
•वित्त वर्ष 2018 में जीवीए ग्रोथ 6.1 प्रतिशत रहने का अनुमान।
• वित्त वर्ष 2018 कृषि विकास दर 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान।
• वित्त वर्ष 2018 में सर्विस सेक्टर की विकास दर 8.3 रहेगी।
• वित्त वर्ष 2018 में औद्योगिक विकास दर 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान।
• 3.2 फीसदी का वित्तीय घाटा सरकार के लिए ज्यादा चिंता का विषय नहीं है और इसे तय दायरे में ही रखा जाएगा।
• साल 2017-18 के बीच महंगाई दर 6 साल के अब तक के सबसे निचले स्तर पर रही है।
• जीएसटी रेवेन्यू में पहले से सुधार देखा गया है और इसमें 12 फीसदी ग्रोथ दर्ज की गई है।
• रिपोर्ट के अनुसार, GST के आंकड़ों के शुरुआती विश्लेषण के आधार पर अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ी है।
• नोटबंदी और जीएसटी के बाद टैक्स फाइल करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ और नए टैक्सपेयर्स जुड़े हैं। कुल मिलाकर 18 लाख नए टैक्सपेयर्स जुड़े हैं और इंडीविजुएल इनकम टैक्स कलेक्शन्स में भी बढ़ोत्तरी दिखी है।
• अगले वित्त वर्ष अर्थव्यवस्था में सुधार दिखेगा।
• सरकार का फोकस रोजगार, मैन्यूफैक्चरिंग और कृषि पर रहेगा।
• आर्थिक सर्वे का कहना है कि संभावनाओं का सबसे बड़ा स्रोत निर्यात क्षेत्र है।
• दिसंबर 2016 से दिसंबर 2017 के दौरान फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व साल दर साल आधार पर बढ़कर 14.1 फीसदी हो गया है।
• अप्रैल-दिसंबर 2017 के दौरान एक्सपोर्ट की विकास दर 12.1 फीसदी रही है।
• डायरेक्ट टैक्स वसूली लक्ष्य पाने की उम्मीद।
• निजी निवेश में तेजी की तैयारी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अर्थव्यवस्था के लिए हर तरफ से अच्छी खबर आ रही है। आइए देखते हैं कि भारतीय अर्थव्यस्था के बारे वैश्विक एजेंसियों का क्या कहना है- 

2018 में भारत रहेगा दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था:IMF
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने एक बार फिर दोहराया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2018 में 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। आईएमएफ ने उम्मीद जताई है कि नोटबंदी और जीएसटी के बावजूद भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से विकास करेगा। आईएमएफ ने कहा का कि इस दौरान चीन की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहेगी। दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के मौके पर अलग से जारी अपने ताजा विश्व आर्थिक परिदृश्य (डब्ल्यूईओ) रिपोर्ट में आईएमएफ ने 2019 में भारत की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

2018 में चीन को पछाड़ भारत बनेगा सबसे तेज उभरती अर्थव्यवस्था
इसके पहले सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट ने कहा कि अर्थव्यवस्था के मामले में भारत 2018 में चीन को भी पीछे छोड़ देगा। सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट में कहा गया कि 2018 में भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और वह चीन के मुकाबले आगे निकल जाएगा। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2018 में ही इक्विटी मार्केट के मामले में भारत दुनिया का 5वां सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा। सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे समय जब विकसित देशों की जीडीपी 2 से 3 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रहे हों, भारत की अर्थव्यवस्था 7.5 की दर से विकास करेगी, जबकि चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट का दौर जारी रहेगा

भारत में विकास की है अपार क्षमता- विश्व बैंक
विश्व बैंक ने कहा है कि सरकार में हो रहे व्यापक सुधार उपायों के कारण भारत में दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में विकास की कहीं अधिक क्षमता है। विश्व बैंक ने इसके साथ ही वर्ष 2018 के लिए भारत की विकास दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। विश्व बैंक के डेवेलपमेंट प्रॉस्पेक्ट समूह के निदेशक आइहन कोसे के अनुसार, ‘आने वाले दस वर्षों में भारत दुनिया की दूसरी किसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में उच्च विकास दर प्राप्त करने जा रहा है। हमारा छोटी अवधि के आंकड़ों पर फोकस नहीं है। भारत की जो विशाल तस्वीर बनती दिख रही है उसके मुताबिक इसमें कहीं ज्यादा क्षमता है।’ उन्होंने भारत और चीन की तुलना करते हुए कहा कि चीन की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती दिख रही है, जबकि भारत विकास के रास्ते पर धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है।

अगले 5 वर्षों में चीन को पीछे छोड़ देगा भारतः फिच
भारत विकास के मामले में अगले 5 वर्षों में चीन को पीछे छोड़ देगा। अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने एक रिपोर्ट में ये अनुमान लगाया है। फिच के अनुसार 6.7% विकास दर से भारत अगले 5 वर्षों में चीन को पीछे छोड़ देगा। इसके साथ ही भारत सबसे तेजी से विकास करने वाला देश भी बन जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक भारत फिच रेटिंग ग्लोबल इकॉनोमिक आउटलुक में शामिल 10 सबसे बड़े उभरते बाजारों की सूची में शीर्ष पर है। फिच ने बताया कि अगले 5 सालों में चीन की जीडीपी जहां 5.5 प्रतिशत रहेगी वहीं भारत की जीडीपी विकास दर 6.7 रहेगी। फिच ने बताया कि पूरी दुनिया में इस समय सबसे ज्यादा युवा जनसंख्या भारत में है। युवा आबादी के ही चलते भारत अगले 5 सालों में दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगी।

ब्रिटेन-फ्रांस को पछाड़ दुनिया की टॉप 5 अर्थव्यवस्था में होगा भारत
सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस रिसर्च (सीईबीआर) की रिपोर्ट के अनुसार भारत 2018 में ब्रिटेन और फ्रांस को पछाड़कर पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तैयारी कर रहा है। सीईबीआर के डिप्टी चेयरमैन डोगलस मैकविलियम ने कहा कि वर्तमान में अस्थायी असफलताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था फ्रांस और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के बराबर टक्कर दे रही है। अगर भारत की अर्थव्यवस्था इसी क्रम में बढ़ती रही तो भारत अगले साल 2018 में फ्रांस और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ देगा। इतना हीं नहीं अगले साल भारत दोनों देशों को पछाड़कर दुनिया की शीर्ष पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

इमर्जिंग देशों से तेज रहेगी भारत की ग्रोथ: नोमुरा
हाल ही में जापानी वित्तीय सेवा कंपनी नोमुरा ने भारत की ग्रोथ के बारे में पॉजिटिव रिपोर्ट दी थी। नोमुरा में इमर्जिंग मार्केट्स इकनॉमिक्स के हेड रॉबर्ट सुब्बारमण का कहना था कि भारत कई ग्लोबल शॉक से बचा हुआ है और अगले साल उसकी ग्रोथ 7.5 पर्सेंट रह सकती है। इकॉनोमिक टाइम्स के अनुसार उन्होंने कहा कि, ‘हम भारत पर बुलिश हैं। यहां साइक्लिकल रिकवरी शुरू हो चुकी है। नोटबंदी के शॉक, जीएसटी और बैंक फंडिंग जैसी इवेंट्स गुजर चुकी हैं। अब हमें यहां ग्रोथ तेज होने की उम्मीद है। अगले साल की पहली छमाही में हमें भारत की ग्रोथ 7.8 पर्सेंट रहने की उम्मीद है। साल 2018 में हम 7.5 पर्सेंट ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। भारतीयों को अहसास होगा कि यह टिकाऊ ग्रोथ है। उसकी ग्रोथ दूसरे इमर्जिंग देशों से अधिक रह सकती है। अगले साल हम चीन की ग्रोथ 6.4 पर्सेंट और भारत की 7.5 पर्सेंट रहने की उम्मीद कर रहे हैं।’

एसोचैम का अनुमान
वहीं एसोचैम ने कहा है कि 7% विकास दर का उसका अनुमान प्रधानमंत्री मोदी सरकार की नीतियों में स्थिरता, अच्छे मॉनसून, औद्योगिक गतिविधियों एवं ऋण वृद्धि में तेजी और स्थिर विदेशी मुद्रा दर के अनुमानों पर आधारित है। 2018 के लिए जारी एसोचैम के आउटलुक में कहा गया है कि, ‘2017-18 की दूसरी तिमाही में 6.3 फीसद पर पहुंची भारत की जीडीपी विकास दर की तुलना में सितंबर 2018 की तिमाही तक आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।’

भारत 8 फीसदी दर से करेगा विकास : गोल्डमैन सैक्स
प्रसिद्ध निवेश संस्था गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2018-19 में भारत 8 फीसदी की दर से विकास करेगा। इसके पीछे का मुख्य कारण होगा, बैंकों का पुनर्पूंजीकरण। गोल्डमैन का मानना है कि बैंकों के पूंजीकरण से देश के क्रेडिट डिमांड और निजी निवेश को मजबूती मिलेगी। गोल्डमैन के मुताबिक, ‘हम भारत की जीडीपी विकास को वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 8 फीसदी पर निर्धारित कर रहे हैं। 2017-18 में हालांकि जीडीपी विकास 6.4 फीसदी पर रहा, जिसका मुख्य कारण नोटबंदी और जीएसटी का शुरुआती प्रभाव रहा, लेकिन बैंकों का पुनर्पूंजीकरण जीडीपी के विकास में मददगार साबित होगा।’

सबसे तेज अर्थव्यवस्था वाला देश होगा भारत: मॉर्गन स्टेनली
भारत अगले 10 वर्षों में दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगा। वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने दावा किया है कि डिजिटलीकरण, वैश्वीकरण और सुधारों के चलते आने वाले दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगी। मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि डिजिटलीकरण से जीडीपी वृद्धि को 0.5 से 0.75 प्रतिशत की बढ़त मिलेगी और अनुमान है कि 2026-27 तक भारत की अर्थव्यवस्था 6,000 अरब डॉलर की हो जाएगी। मॉर्गन स्टेनली के अनुसार आने वाले दशक में भारत की सालाना जीडीपी वृद्धि दर 7.1 से 11.2 के बीच रहेगी।

7.5 की विकास दर हासिल करेगा भारत: मूडीज
अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग संस्था मूडीज के इंवेस्टर सर्विस सर्वे में पता चला है कि भारत की विकास दर अगले 12 से 18 महीने के दौरान 6.5 से 7.5 प्रतिशत के दायरे में रहेगी। सर्वेक्षण में 200 से ज्यादा मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि संभावना को लेकर विश्वास व्यक्त किया। सर्वे में शामिल सभी लोगों का मानना था कि जीएसटी के लागू होने से 12 से 18 माह में आर्थिक वृद्धि बढ़ेगी।

मूडीज को विश्वास है कि आर्थिक वृद्धि की रफ्तार अगले 3-4 साल में बढ़कर 8 प्रतिशत के आसपास पहुंच जाएगी। मूडीज के सहायक प्रबंध निदेशक मैरी डिरोन का कहना है कि भारत में चल रहे आर्थिक और संस्थागत सुधारों और आने वाले समय में होने वाले बदलावों को देखते हुए नोटबंदी से पैदा हुई अल्पकालिक अड़चन के बावजूद अगले कुछ महीनों के दौरान भारत उसके जैसे दूसरे देशों के मुकाबले अधिक तेजी से वृद्धि करेगा।

7.7% की वार्षिक वृद्धि- हार्वर्ड
भारत की अर्थव्यवस्था की गति और इसकी मजबूती पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में माना गया है कि भारत चीन से आगे बढ़कर वैश्विक विकास के आर्थिक स्तंभ के रूप में उभरा है और आने वाले दशक में वो नेतृत्व जारी रखेगा। सेंटर फॉर इंटरनेशल डेवलपमेंट (CID) ने 2025 तक सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में भारत को सबसे ऊपर रखा है। CID के अनुमान के अनुसार भारत 2025 तक सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं की सूची में सबसे ऊपर है। भारत में अर्थव्यवस्था के ग्रोथ की गति औसत 7.7 प्रतिशत की वार्षिक रहेगी। CID के रिसर्च से ये निकलकर आया है कि वैश्विक आर्थिक विकास की धुरी अब भारत है। चीन की तुलना में दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ा है, जो आने वाले एक दशक से अधिक समय तक कायम रह सकता है।

आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत हो जाएगी: स्टैंडर्ड चार्टर्ड
स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने आर्थिक परिदृश्य-2018 के बारे में एक शोध पत्र में कहा है कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का बुरा समय बीत चुका है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत तथा अगले वित्त वर्ष के लिए 7.2 प्रतिशत का पूर्वानुमान भी व्यक्त किया है। उसने कहा, ‘प्रमुख नीतिगत बदलावों का असर समाप्त हो जाने के बाद हमें अगली चार से छह तिमाहियों में आर्थिक वृद्धि में क्रमिक सुधार की उम्मीद है।’ अगली कुछ तिमाहियों में वृद्धि दर सात प्रतिशत पर पहुंच जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र ने बताया अर्थव्यवस्था के विकास को सकारात्मक
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास को सकारात्मक बताया है। यूएन ने साल 2018 में भारत की विकास दर 7.2 और 2019 में 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। दुनिया की अर्थव्यवस्था पर जारी रिपोर्ट में यूएन ने कहा गया है कि भारी निजी उपभोग, सार्वजनिक निवेश और संरचनात्मक सुधारों के कारण साल 2018 में भारत की विकास दर वर्तमान के 6.7 प्रतिशत से बढ़कर 7.2 प्रतिशत हो जाएगी और ये विकास दर साल 2019 में 7.4 प्रतिशत तक पहुंचेगी।‘वर्ल्ड इकोनोमिक सिचुएशन एंड प्रोस्पेक्ट 2018’ रिपोर्ट में यूएन ने कहा है कि कुल मिला कर दक्षिण एशिया के लिए आर्थिक परिदृश्य बहुत अनुकूल नजर आ रहा है।

 

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