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किसानों को स्थायी राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है मोदी सरकार

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पिछले कुछ दिनों से विपक्ष किसानों के नाम पर मोदी सरकार के खिलाफ साजिश का ताना-बाना बुनने में जुटा हुआ है। लेकिन किसानों को उकसावे के विपक्ष के तमाम मंसूबों को केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी के नेतृत्व की राज्य सरकारें नाकाम करने में कामयाब रही हैं जिससे विपक्ष और बौखलाया हुआ है। अन्नदाताओं की पीड़ा महसूस करते हुए महाराष्ट्र में कर्जमाफी की घोषणा के साथ-साथ किसानों को तुरंत 10-10 हजार रुपये का एडवांस देने का भी फैसला किया गया। इसके पीछे मकसद ये था कि बुआई को लेकर किसानों को किसी तरह की दिक्कत ना आए। सरकार के इस कदम से एक बार फिर विपक्ष के इरादे पर पानी फिर गया और अब वो ये कहने में लगा है कि कर्जमाफी नहीं ये बस एक तात्कालिक राहत है। यानी किसानों को भड़काने की हर चाल में लगा विपक्ष ये कहते हुए घूम रहा है कि सरकार के पास किसानों की समस्या का समाधान नहीं है।

किसानों को स्थायी राहत की मोदी सरकार की तैयारी

सच ये है कि मोदी सरकार किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान में जुटी हुई है। मोदी सरकार को किसानों के उस जख्म को मिटाना है जो उन्हें साठ वर्षों के कांग्रेस शासन के दौरान मिले हैं। किसानों का हित मोदी सरकार की प्राथमिकता की सूची में किस कदर सबसे ऊपर है इसका पता इसी से चलता है कि प्रधानमंत्री के वादे के मुताबिक उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की पहली ही कैबिनेट बैठक में किसानों के कर्ज माफी के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। योगी सरकार ने सीमांत किसानों के एक लाख रुपये तक के कर्ज को माफ करने का फैसला लिया था।

मोदी सरकार के लिए देश के किसान सर्वोपरि

पिछले दिनों कांग्रेस के भड़काने पर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में कुछ किसान सड़कों पर आ गए थे। तस्वीरों ने भी इस बात की तसदीक की थी कि कांग्रेस के नेता आग भड़काने में लगे थे। किसानों की मांगों में खास ये था कि उनकी कर्ज माफी की जाए साथ ही फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए, जबकि बीजेपी के नेतृत्व की सरकारें इस दिशा में पहले से काम कर रही थी। केंद्र सरकार की ओर से कर्ज माफी को लेकर भी ये साफ कर दिया गया है कि जो भी राज्य सरकारें किसानों की जरूरी मांगों को पूरा करने में सक्षम हैं, वो इस दिशा में कदम उठा सकती हैं। इसके साथ ही केंद्र की मोदी सरकार किसानों को चार फीसदी तक के कम ब्याज पर लोन देने की पहल भी कर चुकी है।

कांग्रेस की कर्ज माफी में नीयत में खोट

बीजेपी की देखादेखी  पंजाब की अमरिंदर सरकार और कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने भी एक निश्चित सीमा तक किसानों की कर्ज माफी का फैसला किया। हालांकि जिस तरह से दोनों ही राज्यों में ये फैसले लिये गए, उससे ये साफ है कि इसमें किसानों की चिंता कम, राजनीतिक अस्तित्व बचाने की परवाह ज्यादा थी। कर्नाटक के बारे में तो ये भी कहा जा रहा है कि कर्जमाफी के उसके फैसले के पीछे आने वाले विधानसभा चुनाव हैं, जहां कांग्रेस आलाकमान समय से पहले भी चुनाव करवाने की सोच रहा है।  

केंद्र सरकार ने बढ़ाई कर्ज के ब्याज पर छूट की सीमा

गौर करने वाली बात है कि केंद्र सरकार ने किसानों के 3 लाख तक के कर्ज पर ब्याज छूट की सीमा को बढ़ाकर 3 से 5 फीसदी कर दिया है। ये स्कीम उन किसानों को फायदा पहुंचाएगी जो 1 साल के अंदर अपने लोन को चुका देते हैं। कैबिनेट की ओर से लिया गया ये बड़ा फैसला सीधे तौर पर ईमानदार किसानों को फायदा पहुंचाएगा साथ ही किसानों के कर्ज के बोझ तले दबे बैंकों के एनपीए में भी कमी आ सकती है।

जरूरतमंद किसानों की होती है कर्जमाफी

किसान कृषि उपकरण खरीदने के लिए या फिर बुआई के लिए कर्ज लेता है। जब खेती अच्छी होती है, तो किसान और बैंक दोनों को फायदा होता है लेकिन, जब मॉनसून दगा दे जाता है और सूखे की स्थिति आ जाती है, तो किसान कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं होता।  ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों पर यह दबाव होता है कि वह किसानों द्वारा लिये गए कर्ज को आंशिक रूप से या पूरी तरह से माफ कर दे। ऐसे में केंद्र या राज्य सरकारें किसानों की जिम्मेदारी लेती है और जिन बैंकों से किसानों ने कर्ज लिये होते हैं, उन बैंकों को वह रकम सरकारी कोष से अदा कर देती हैं। इसमें कुछ खास तरीकों के ऋणों को माफ किया जाता है। किसानों की स्थिति आंकने के बाद केंद्र की मोदी सरकार हो या फिर बीजेपी के नेतृत्व वाली राज्य सरकारें, सभी ने किसानों के हित में हरसंभव फैसले लेकर दिखाये हैं।    

फसल बिक्री में किसानों को बिचौलिये से राहत

किसानों के लिए एक बड़ी पहल करते हुए मोदी सरकार ने धान की खरीद में लेवी प्रणाली को खत्म कर दी। इससे किसानों को बड़ी राहत मिली है। अपनी उपज अब वे सीधे सरकारी केन्द्रों पर बेच सकते हैं जहां कोई बिचौलिया नहीं, जो उन्हें परेशान करे। किसानों को धान की न सिर्फ कीमत अच्छी मिलने लगी है बल्कि कीमत की वसूली का रास्ता भी आसान हो गया है। यूपी में भी योगी सरकार के सत्ता संभालते ही गेहूं खरीद केंद्रों पर बिक्री में भारी बढ़ोतरी देखी गई। इस बार 1625 रुपये प्रति क्विंटन के समर्थन मूल्य पर इन केंद्रों पर गेहूं बिके। एक जानकारी के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले किसानों से दोगुना ज्यादा गेहूं की खरीद की गई। जाहिर है केंद्र की मोदी सरकार से लेकर यूपी की योगी सरकार तक, हर तरफ किसानों की उन्नति पर खासा जोर है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से सिंचाई योजना तक
किसानों को अब 33 फीसदी फसल नुकसान पर भी उसका बीमा मिलता है। पहले ये सीमा 50 प्रतिशत की थी। न्यूनतम प्रीमियम पर अधिकतम मुआवजे का प्रावधान है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत देश में 28.5 लाख हेक्टेयर खेत में पानी पहुंचाकर बीजेपी तेजी से हर खेत को पानी के अपने वादे को पूरा करने की दिशा में अग्रसर है।  

किसानों के लिए अब खाद की कमी नहीं

मोदी सरकार ने खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए नीम कोटिंग यूरिया का प्रयोग शुरू किया। नीम कोटिंग यूरिया के उत्पादन की 35 फीसदी की सीमा को बढ़ाकर सौ फीसदी कर दिया, जिससे अब किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया मिलता है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि
मोदी सरकार ने 2016-17 की खरीफ फसल की दालों में अरहर के न्यूनतम समर्थन मूल्य को 4,625 रुपये से बढ़ाकर 5,050 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया। उड़द के मूल्य को 4, 625 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति क्विंटल जबकि मूंग के लिए 4,850 रुपये से बढ़ाकर 5,250 रुपये तक कर दिया गया। किसानों के लिए ये बढ़ी हुई कीमत बड़ा फायदा लेकर आई।

मिट्टी की सेहत के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड 
मोदी सरकार की इस योजना से किसानों को पता चल जाता है कि उन्हें किस फसल के लिए कौन सी और कितनी खाद चाहिए। फसल की पैदावार पर इसका सकारात्मक असर पड़ा है। अभी तक 6.5 करोड़ किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिये जा चुके हैं।

किसानों के लिए ढेर सारी पहल

इनके अलावा किसानों के लिए e-Nam का एक देशव्यापी ई-प्लैटफॉर्म भी तैयार किया गया है जिनसे किसानों के साथ देश की 250 कृषि मंडियां आपस में जुड़ी हैं। यहां किसान अपनी उपज सीधा बेच रहे हैं और उन्हें मुनाफा भी हो रहा है। मौसम विज्ञान से मिलने वाली सीधी सूचनाओं से भी किसानों को बहुत फायदा हुआ है। एसएमएस से मिलने वाली इस सूचना से हर दिन के काम को सही ढंग से करने में किसानों को बड़ी मदद मिल रही है। 2014 के मुकाबले तीन गुना ज्यादा किसान आज इस सेवा से फायदा उठा रहे हैं।

किसानों पर राजनीति ना कर पाने से कांग्रेस परेशान

तो एक तरफ जहां मोदी सरकार कर्ज से दबे किसानों की मदद में जुटी है वहीं उनकी फसल के समर्थन मूल्य को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने को लेकर भी वो लगातार प्रयत्नशील है। विपक्षी पार्टियां अपने समर्थकों के जरिए जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं। केंद्र की मौजूदा सरकार शुरू से किसानों और गरीब समेत अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के कल्याण के लिए गंभीर है और लगातार कदम उठा रही है। सब जानते हैं कि मोदी सरकार ने पांच साल में किसान की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है । विपक्ष को लग रहा है कि मोदी सरकार जमीन पर अपनी हर योजना को लागू करने में सफल हो जा रही है और यही होता रहा तो किसानों के नाम पर उसकी राजनीति की दुकान बंद हो जाएगी। विपक्ष की इस सियासी परेशानी को दरअसल किसान भी समझ चुके हैं।

 

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