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झूठ और दुष्प्रचार के बूते देश में अशांति फैलाने की ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ की साजिश

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वामपंथी नेता कविता कृष्णन ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक फोटो शेयर कर कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश की है। उन्होंने अपने जो तस्वीर डाली है उसमें एक व्यक्ति हाथ में ईंट लिए एक पुलिसकर्मी के सामने खड़ा है, जबकि पुलिस के हाथ में बंदूक है। इसमें उन्होंने लिखा है, ”यदि आप ऐसा सोचते हैं कि किसान आतंकी होते हैं और मुझे उम्मीद है कि आप ऐसा नहीं सोचते होंगे। यदि आपको इस किसान के गुस्से से सहानुभूति है तो फिर मैं उम्मीद करती हूं कि आपको पत्थर हाथ में लिए कश्मीर के किसी बच्चे को भी आतंकी कहते हुए एक बार सोचना चाहिए।” हालांकि ऐसा करते हुए कविता कृष्णन पकड़ी गई हैं क्योंकि उन्होंने एक Fake तस्वीर डाली है। ये तस्वीर किसी किसान आंदोलन की नहीं बल्कि 2013 में मेरठ में हुए जाट आंदोलन की तस्वीर है।

दरअसल टुकड़े-टुकड़े गैंग की इस सदस्य ने फेक तस्वीर डाल कर कश्मीरी अलगाववादियों के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया है। हालांकि उनकी यह चोरी पकड़ी गई और जाने माने पत्रकारों ने ने कविता कृष्णन की क्लास लगा दी।

1947 की बंटवारे की मानसिकता वाले लोग
2013 की मेरठ की फ़ोटो दिखाकर
2018 की सरकार को गाली देकर
कश्मीर के पत्थरबाजों को सही साबित करना चाहते हैं

चाहे केजरीवाल हो या कविता कृष्णन – अचानक देश में भड़काऊं माहौल बनाने की, आग लगाने की बेचैनी साफ दिख रही हैं

फेक न्यूज फैलाने की यह तो हाल की घटनाएं, इससे पहले भी सोशल मीडिया और मेन स्ट्रीम मीडिया में मोदी सरकार के खिलाफ झूठी खबरें फैलाने का सिलसिला चलता रहा है। एक नजर डालते हैं।-

किसी भी तरह से सत्ता प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ कांग्रेस और विरोधी दल तमाम तिकड़म कर रहे हैं। जोड़-तोड़ की राजनीति के बीच दुष्प्रचार का भी सहारा भी ले रहे हैं। इस क्रम में कई बार ऐसी झूठी खबरों का जाल भी बुना जाता है जिसका अस्तित्व ही नहीं होता है। हाल में जब दिल्ली के रामलीला मैदान का नाम बदलने की खबर मीडिया में छाई तो इस पर बहुत विवाद हुआ।

आपको बता दें कि खबर में कहा गया कि नॉर्थएमसीडी ने रामलीला मैदान का नाम अटल रामलीला मैदान करने का प्रस्ताव भेजा है। एबीपी न्यूज की इस पर दिल्ली के विवादित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जिस तरह से त्वरित रूप से ट्वीट किया और मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की, इससे जाहिर हो गया कि इसके पीछे कोई साजिश है।

जब दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने ऐसी किसी भी खबर का खंडन किया तो यह साफ हो गया कि ये खबर जान बूझकर फैलाई गई।मनोज तिवारी ने स्पष्ट बताया कि रामलीला मैदान का नाम बदलने का उनका कोई प्रस्ताव नहीं है। यह भ्रम आम आदमी पार्टी फैला रही है। बकौल मनोज तिवारी, राम हमारे आराध्य देव हैं, इसलिए रामलीला मैदान का नाम बदलने का सवाल ही नहीं।

 

दरअसल मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए राजनीतिक दलों के साथ मीडिया का एक खास वर्ग भी बेहद सक्रिय है। 

हाल में ही संयुक्त अरब अमीरात के राजदूत अहमद अल बन्ना ने ऐसी ही झूठी खबरों की पोल तब खोल दी जब उन्होंने खलासा किया कि उनके देश ने केरल को आर्थिक सहायता के लिए किसी रकम की कोई घोषणा नहीं की है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार, इस बात के एलान के साथ ही विरोधी दलों और मीडिया के एक वर्ग का नकारात्मक चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है। केरल के सीएम और मीडिया के एक बड़े वर्ग का यह दावा झूठ साबित हो गया है कि UAE सरकार ने 700 करोड़ की मदद की पेशकश की है। इससे साथ ही यह खबर भी झूठी साबित हुई कि मोदी सरकार ने उसे लेने से इनकार कर दिया है।

दरअसल मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए बड़े स्तर पर साजिशें रची जा रही हैं। हाल में यह ट्रेंड देखा जा रहा है कि भारतीय मीडिया में आजकल ऐसी खबरें सुर्खियां बना दी जा रही हैं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर से बिना किसी तथ्यों के आधार पर निकलती हैं। इसके बाद कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियां उसे मोदी सरकार से जोड़कर बदनाम करने का एक अभियान सा लेकर निकल पड़ती हैं। यूएई से आर्थिक मदद की खबर भी ऐसी ही है। आपको बता दें कि इंडिया टुडे ने एक रिपोर्ट छापी थी जिसके तहत ये कहा गया था कि यूएई ने एक कमेटी का गठन किया है जो यह देखेगी कि कैसे बाढ़ग्रस्त केरल की मदद की जा सकती है।

जाहिर है इसमें न तो किसी रकम की बात है और न ही वित्तीय मदद का कोई आश्वासन। लेकिन कांग्रेस और वामपंथ समर्थित ‘डर्टी ट्रिक गैंग’ ने इसी आधार पर फेक न्यूज फैला दिया ताकि मोदी सरकार बदनाम हो।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का झूठ
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले वर्ष 22 और 23 सितंबर को वाराणसी में विकास योजनाओं का शुभारंभ कर रहे थे, जिसके लिए शहर के लोग वर्षों से इंतजार कर रहे थे तो दूसरी तरफ इन धर्मनिरपेक्ष ताकतों ने गोलबंद होकर शहर की आबोहवा बिगाड़ने का काम किया। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में लड़कियों के विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए हुई पुलिस कार्रवाई को क्रूर और दमनकारी साबित करने के लिए पत्रकारों और राजनेताओं ने एक ऐसी घायल लड़की की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की जो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से सैकड़ों किलोमीटर दूर लखीमपुर खीरी में युवकों से मारपीट में घायल एक लड़की की तस्वीर थी।

दैनिक हिन्दुस्तान की पूर्व संपादक और प्रसार भारती की पूर्व सीईओ मृणाल पांडे ने लिखा-

इसी तस्वीर को प्रशांत भूषण ने भी रीटीव्ट किया-

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथी और आप नेता संजय सिंह ने भी इस तस्वीर की सच्चाई जाने बगैर रीट्वीट कर दिया-

इसके बाद और लोगों ने इस झूठी तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया।

अब देखिए वह तस्वीर जिसके आधार पर झूठी खबर फैलायी गई।

उत्तर प्रदेश के शिक्षा बजट का झूठा प्रचार
जुलाई 2017 में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पहला बजट पेश किया था। इस बजट में शिक्षा के लिए आवंटित धन में कमी दिखाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया किया गया, जबकि शिक्षा का बजट वास्तव में बढ़ाया गया था।

राहुल गांधी को तो प्रधानमंत्री के विरोध का कोई मौका चाहिए था, उन्होंने तुरंत सोशल मीडिया पर हमला बोल दिया

इसके बाद लोगों ने इसे शेयर करना शुरु कर दिया और कांग्रेसी पत्रकारों ने इस पर खबर भी बना डाली।

सच्चाई यह थी कि समाचार एजेंसी पीटीआई ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा पेश बजट के कुछ अंशों के आधार पर ही यह रिपोर्ट तैयार की थी। कागजों को ठीक ढंग से पढ़कर खबर बनाई गयी होती तो पता चलता कि योगी सरकार ने शिक्षा के लिए बजट में कमी नहीं बल्कि 34 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है। अखिलेश यादव की सरकार ने 2016-17 में जहां 46,442 करोड़ रुपये शिक्षा के लिए दिये थे वही 2017-18 में योगी आदित्यनाथकी सरकार ने 62, 351 करोड़ रुपये दिए हैं।

नोटबंदी पर भी झूठा प्रचार किया गया
08 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की। इसे जन विरोधी बताने के लिए भी झूठी तस्वीरों का सहारा लिया गया। नोटबंदी के मुखर विरोधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जब दिल्ली की सड़कों पर ममता बनर्जी के साथ कोई समर्थन नहीं मिला तो उन्होंने 20 नवंबर को एक तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा-

हालांकि केजरीवाल के इस ट्वीट की सच्चाई सामने आ गयी-

अहमदाबाद एयरपोर्ट पर बाढ़ की झूठी तस्वीर
गुजरात के विकास मॉडल पर सबकी नजर है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास के मॉडल की प्रयोगशाला है, इसलिए तथाकथित धर्मनिरपेक्ष बुद्धिजीवी हमेशा ऐसे मौके की तलाश में रहते हैं जहां से वह गुजरात के विकास मॉडल में कोई कमी निकाल सकें। ऐसा ही मौका, इस साल जुलाई में हुई भीषण बारिश से गुजरात के कई शहरों में आये बाढ़ के हालातों में उन्हें मिल गया। 27 जुलाई को सोशल मीडिया पर एक तस्वीर डाली गई, जिसमें अहमदाबाद एयरपोर्ट पूरी तरह से पानी में डूबा दिखाई दे रहा है।

इस तस्वीर के सोशल मीडिया पर आते ही इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडिया टूडे और तमाम लोगों ने शेयर करना शुरु कर दिया।

इस तस्वीर की सच्चाई वह नहीं थी, जिसके साथ इसे सभी शेयर कर रहे थे। यह तस्वीर दिसंबर 2015 में चेन्नई के बाढ़ के समय की थी। उस समय चेन्नई के एयरपोर्ट के बाढ़ की तस्वीर 2 दिसम्बर 2015 को एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर डाली थी।

 

 

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