Home केजरीवाल विशेष सिर्फ पद, दौलत और अय्याशी की भूखी है केजरीवाल एंड कंपनी!

सिर्फ पद, दौलत और अय्याशी की भूखी है केजरीवाल एंड कंपनी!

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दिल्ली के मतदाताओं ने करीब ढाई साल पहले बड़ी उम्मीदों और अरमानों के साथ आम आदमी पार्टी को प्रचंड बहुत देकर राज्य की सत्ता सौंपी थी। शायद उनको भरोसा था कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकली पार्टी ही उनके भविष्य का कायापलट कर सकती है। लोग भी आप और उसके नेताओं के इस बहकावे में आ गए कि वो तो सच्चाई और ईमानदारी की राजनीति करने आए हैं। आम आदमी के लिए, आम आदमी की तरह और आम आदमी बनकर काम करेंगे। उनके लिए धन-दौलत, पद और शानो-शौकत ये सब बहुत ही तुच्छ चीजें हैं। लेकिन हुआ ठीक इसके उल्टा। केजरीवाल एंड कंपनी ने शपथग्रहण समारोह में पहुंचने तक तो दिखावे का खेल जारी रखा, वो और उनके साथी मेट्रो में सवार होकर शपथग्रहण स्थल पहुंचे। लेकिन, संविधान के अनुसार पद और गोपनीयता की शपथ लेने के साथ ही उन्होंने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया। दिल्ली की जनता के साथ गद्दारी करने वाले गद्दारों के सिरमौर कोई और नहीं खुद दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं।

अरविंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल दिल्ली के भोले-भाले मतदाओं को ठगने वाले गैंग के सरगना हैं। वो जिस-जिस चीज का विरोध करके सत्ता में आए, कुर्सी मिलते ही उसे भोग-विलास का साधन बना लिया। सबकी राय से पार्टी और सरकार चलानी की बात कहते थे, लेकिन मौका मिलते दोनों जगहों पर खुद ही कब्जा कर लिया। मुख्यमंत्री होने के साथ ही आम आदमी पार्टी में तानाशाह की भूमिका में बने हुए है। बड़ी गाड़ी, बड़ा बंगला और बाकी तामझाम की पहले खिल्ली उड़ाते रहते थे, लेकिन मुख्यमंत्री बनते ही निर्लज्जता की हदें पार करनी शुरू कर दीं। केजरीवाल की शानो-शौकत देखकर आज देश के बड़े-बड़े राज्यों के मुख्यमंत्री भी दांतों तले उंगलियां दबाते हैं। दिखावे के लिए अपने शरीर पर वो जरूर साधारण वेशभूषा रखते हैं, लेकिन असलियत उनके बनावटी आवरण से पूरी तरह विपरीत है। यूं समझ लीजिए कि कंबल ओढ़कर घी पीने में उन्होंने भ्रष्ट से भ्रष्ट नेताओं को भी पीछे छोड़ रखा है।

कपिल मिश्रा
कपिल मिश्रा के लिए कुर्सी छीने जाने से एक दिन पहले तक पार्टी में सबकुछ ठीकठाक चल रहा था। अनाप-शनाप बोलने की आदत उन्हें गुरु से ही वरदान में मिली थी। लेकिन, जब गुरु ने प्रिय शिष्य को अपना असली रंग दिखाया, तो उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। अबतक जिस व्यक्ति के कुकर्मों पर सिर्फ पर्दा डालने की आदती बनाई थी, अचानक उसी की पोल खोलने की नौबत आ गई। शायद गुरु से धोखेबाजी वाली दीक्षा का आखिरी मंत्र सीखने में गच्चा खा चुके थे।

आसिम अहमद खान
केजीवाल सरकार के पूर्व मंत्री आसिम अहमद खान की मानें तो सत्ता संभालते ही सरकार में पैसे का खेल शुरू हो गया था। इन्हें एक बिल्डर से कथित रिश्वत मांगने के स्टिंग के बहाने केजरीवाल ने कैबिनेट से चलता कर दिया था। अब आसिम खान भी आरोप लगा रहे हैं कि केजरीवाल बहुत बड़े रिश्वतखोर हैं। उनके अनुसार केजरीवाल ने उनसे भी 5 करोड़ रुपये बतौर घूस मांगे थे। लेकिन जब वो इतने पैसे नहीं दे पाए तो उन्हें फर्जी स्टिंग के बहाने मंत्री पद से हटा दिया। आसिम खान का आरोप है कि ये पैसे केजरीवाल दिल्ली और पंजाब में केवल नेटवर्क का अधिकार खरीदने के लिए मांग रहे थे, ताकि दोनों राज्यों में कोई भी चैनल उनके खिलाफ कोई स्टोरी न चला सके। लेकिन जब वो केजरीवाल की डिमांड पूरी नहीं कर सके तो उनके गुर्गे दिलीप पांडे ने पार्टी की बैठक में आसिम के साथ मारपीट भी की।

कुमार विश्वास
बड़ी-बड़ी लच्छेदार बातें करने में कुमार विश्वास अपने गुरु से थोड़े भी कम नहीं हैं। खासियत ये है कि अपने कुछ कविताओं से आम लोगों का थोड़ा-बहुत मनोरंजन कर लेते हैं। जब पंजाब, गोवा, रजौरी गार्डन और एमसीडी चुनाव में गुरु घंटालों के चलते पार्टी की मिट्टी पलीद हुई तो इन्होंने एकाएक तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए। अचानक उन्हें भी लगने लगा कि पार्टी पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। कभी वीडियो के माध्यम से तो कभी ट्वीटर के जरिए अपनी भड़ास निकालनी शुरू कर दी। यौन शोषण के आरोपी पार्टी के एक विधायक ने जब उनपर सीधे हमले शुरू कर दिए तो कुमार विश्वास आपे से बाहर हो गए। ऐसी तड़क-भड़क देने लगे कि अब तो वो अपने ही नेता की ईंट से ईंट बजाकर रख देंगे। लेकिन जैसे ही सुप्रीमो ने एक राज्य में पार्टी की बागडोर सौंपी वो शांत हो गए। कवि हृदय से बगावती सुर के बदले, ‘तुम्हीं हो माता, पिता तुम्हीं हो’ टाइप भावनाएं उबाल मारने लगीं।

भगवंत मान
भगवंत मान पंजाब में खुद को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार मानकर चल रहे थे। पहले पार्टी ने गच्चा दिया, फिर मतदाताओं ने औकात दिखा दी। इस बात से इतने भड़के की नेतृत्व की ऐसी की तैसी करने का संकेत देकर अमेरिका चले गए। लेकिन तब तक आप का बंटाधार हो चुका था। रही सही कसर कभी केजरीवाल के हनुमान कहे जाने कपिल मिश्रा ने पूरी कर दी। आम आदमी पार्टी के नेतृत्व को लगा कि इन हालातों में पंजाब में बगावत झेलना नामुकिन है। केजरीवाल ने उन्हें प्रदेश की कमान सौंपने के फैसले का ऐलान कर दिया। पद मिल गया तो मान की ज्यादा मान-मनौव्वल की जरूरत नहीं पड़ी।

अमानतुल्लाह खान
ओखला से आम आदमी पार्टी के विधायक मुख्यमंत्री के बेहद चहेते रहे हैं। उनपर अपनी ही रिश्तेदार ने यौन शोषन का आरोप लगाया है। बावजूद इसके वो आम आदमी पार्टी में बने हुए हैं। आपसी खुन्नस में उन्होंने कुमार विश्वास पर कई संगीन आरोप लगा दिए। इस पर कवि विश्वास बहुत भड़क गए और उनपर कार्रवाई की जिद पर अड़ गए। केजरीवाल ने विश्वास को राजस्थान का इंचार्ज बनाकर शांत कर दिया और अमानतुल्लाह को दिखाने के लिए पार्टी से सस्पेंड करके उनके बयानों की जांच की बात कह दी। दो दिन बाद अमानतुल्लाह को विधानसभा की कई समितियों में शामिल कर लिया गया। पद मिलते ही विश्वास भी शांत हो गए और अमानतुल्लाह के सारे आरोप भी शून्य हो गए।

‘आप’ की चौकड़ी
‘आम आदमी पार्टी’ को अगर अब ‘एक आदमी पार्टी’ कहें तो गलत नहीं होगा। पार्टी पर पूरी तरह से अरविंद केजरीवाल का कब्जा है, जो अपनी चौकड़ी की मदद से सारे खेल को अंजाम देते हैं। इस चौकड़ी में मनीष सिसोदिया, आशुतोष, संजय सिंह, दिलीप पांडे,गोपाल राय, आतिशी मार्लेना और राघव चड्ढा जैसे लोग शामिल हैं। अपने अलोकतांत्रिक साम्राज्य में केजरीवाल ने मनीष सिसोदिया को नंबर दो का स्थान दिया हुआ है। संजय सिंह पंजाब से लेकर दिल्ली तक पार्टी का टिकट बांटने में खूब नाम कमा चुके हैं। संजय समेत चौकड़ी के सारे नेताओं की नजर राज्यसभा की तीन सीटों पर अटकी पड़ी हैं। उन्हें लगता है कि अगर वो अपने आका को खुश कर पाए, तो 6 साल की संसद सदस्यता की गारंटी है। कहीं न कहीं यही उम्मीद कुमार विश्वास के विश्वास को भी हिलाता रहता है।

सत्येंद्र जैन
स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन अभी के वक्त में केजरीवाल के सबसे वफादारों में से हैं। वो हवाला के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन के आरोपी हैं और उनके खिलाफ तेजी से जांच चल रही है। मोहल्ला क्लीनिक की सोच के पीछे के खिलाड़ी यही रहे हैं। साहब को जैसे ही मौका मिला, सरकारी खर्च और तामझाम के साथ अपनी बेटी को मोहल्ला क्लीनिक का सलाहकार नियुक्त कर दिया। कपिल मिश्रा ने इन्हीं पर 50 करोड़ की लैंड डील के खेल के लिए मुख्यमंत्री केजरीवाल को दो करोड़ रुपये देने का आरोप लगाया है।

मनीष सिसोदिया
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी शानो-शौकत के मामले में अपने आका की राह पर ही चल रहे हैं। उनके बंगले की साइज की खबर काफी दिनों तक समाचार पत्रों में सुर्खियां बनी रही थी। जिस वीआईपी संस्कृति पर कटाक्ष करके सत्ता में आए, मौका मिलते ही उसी रास्ते पर चल पड़े। ‘टॉक टू ए के’ प्रोग्राम के नाम पर धांधली और विदेश यात्राओं के नाम जनता के पैस से सैर-सपाटा कर उन्होंने दिखा दिया कि ये तो सिर्फ मौके का इंतजार कर रहे थे।

21 संसदीय सचिवों का खेल
अरविंद केजरीवाल को लगा कि मुख्यमंत्री और बाकी मंत्रियों की ठाठ-बाट देखकर बाकी विधायकों में बगावत के सुर फूट सकते हैं। उनकी लाचारी ये थी कि वो तय सीमा से अधिक मंत्री नहीं बना सकते थे। शातिर दिमाग ने इसका रास्ता निकाला और संविधान को ताक पर रखकर 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाकर बड़ी-बड़ी गाड़ियां और बाकी सुविधाएं दे डालीं।

‘आप’ सरकार की अय्याशी
जो पार्टी आम आदमी की बात कहकर सत्ता में आई थी, उसपर आरोप है कि उसने सिर्फ दो साल में चाय-समोसे के नाम पर करोड़ों रुपये डकार लिए हैं। यही नहीं केजरीवाल सरकार पर आरोप है कि उसने एक मीटिंग में खाने के नाम पर 16 हजार रुपये प्रति थाली के हिसाब से पेमेंट किए। अय्याशी का इससे बड़ा नमूना क्या होगा कि जहां की जनता नमक-रोटी के लिए दिन-रात संघर्ष करती है वहां के मुख्यमंत्री और उनके मंत्री 16-16 हजार रुपये वाली थाली की दावत उड़ाते हैं।

यूं समझ लीजिए कि जो लोग ज्यादा समझदार थे, उन्होंने तुरंत ही भांप लिया कि दिल्ली वालों ने अपने पैरों पर अपने हाथों से ही कुल्हाड़ी मार ली है। वो समझ गए कि जो आदमी पद के लिए अपने जिगर के टुकड़ों की झूठी कसमें खाकर गुलाटी मार सकता है, वो संविधान की शपथ पर कितनी देर तक टिक सकता है। लेकिन तब भी अधिकतर लोगों की तादाद उनमें से थी, जो भावना में बहकर केजरीवाल की बातों में आ जाया करते थे। लेकिन, धीरे-धीरे केजरी एंड कंपनी ने उनकी भावनाओं को भी चकनाचूर करके रख दिया है। ये बात अब सबके समझ में आ गई है कि अरविंद केजरीवाल की बड़ी-बड़ी बातों का मकसद येन-केन-प्रकारेण सत्ता हथियाना था और कुछ नहीं। उनका और उनकी पार्टी के बाकी लोगों का असल इरादा तो बेईमानी से पद, प्रतिष्ठा एवं अय्याशी करना और जनता की दौलत पर खुलेआम डाका मारना था।

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