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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सामाजिक आंदोलन बन गया सुरक्षित मातृत्व, लाभांवित हुईं एक करोड़ महिलाएं

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर सुरक्षित मातृत्व एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) की शुरुआत हुई। इस अभियान के माध्यम से अब तक एक करोड़ से अधिक महिलाएं लाभांवित हो चुकी हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार अब तक 1 करोड़ से अधिक महिलाओं को पीएमएसएमए का लाभ मिला है। इसमें एक चौथाई दूर-दराज जिलों की महिलाएं हैं, जिन जिलों को केंद्र सरकार ने उच्च प्राथमिकता की सूची में रखा हुआ है। प्रधानमंत्री की परिकल्‍पना थी कि 9 महीने की गर्भावस्‍था के प्रतीक के तौर पर हर महीने की 9 तारीख गर्भवती महिलाओं को समर्पित होना चाहिए। इसी दृष्टिकोण को पूरा करने और देश भर में गर्भवती महिलाओं को व्‍यापक एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच सुनिश्चित करने के लिए हर महीने 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तायुक्‍त प्रसवपूर्व जांच की सुविधा उपलब्‍ध कराई जा रही है।

देश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को घटाने के प्रयास को बढ़ावा देने के लिए मन की बात के 31 जुलाई, 2016 के एपिसोड में प्रधानमंत्री मोदी ने निजी क्षेत्र के डॉक्‍टरों से आग्रह किया था कि वे साल में 12 दिन इस कार्यक्रम को समर्पित करें और हर महीने की 9 तारीख को पीएमएसएमए के तहत स्‍वैच्छिक सेवाएं प्रदान करें। विभिन्‍न राज्‍यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 12,800 से अधिक सरकारी स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों पर हर महीने की 9 तारीख को पीएमएसएमए सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इससे गर्भवती महिलाओं को उनके दूसरे और तीसरे तैमासिक के दौरान निर्धारित तिथि को व्‍यापक एवं गुणवत्तायुक्‍त प्रसवपूर्ण देखभाल की सुविधा मिल रही है।

प्रधानमंत्री के आह्वान पर इस अभियान में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के डॉक्टरों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। निजी क्षेत्र के 4,800 से अधिक डॉक्‍टरों ने पीएमएसएमए के तहत स्‍वैच्छिक सेवा प्रदान करने का वचन दिया है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जैसे उच्‍च प्राथमिकता वाले जिलों में 385 से अधिक निजी क्षेत्र के स्‍वयंसेवकों ने सेवाएं प्रदान की हैं। पिछले कुछ महीनों के दौरान इनमें से कई स्‍वयंसेवकों ने आसपास के सरकारी स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों पर 10 बार से अधिक मुफ्त सेवाएं प्रदान की हैं। ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जहां निजी क्षेत्र के डॉक्‍टरों ने दूरदराज के क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए उम्‍मीद से कहीं अधिक उत्‍साह दिखाया। उदाहरण के लिए, रायपुर की जानीमानी स्‍त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा उपाध्‍याय ने सरकार द्वारा पेश की गई यात्रा सुविधा को ठुकराते हुए अपने खर्च पर पीएमएसएमए के तहत सेवाएं देने के लिए वामपंथी उग्रवाद प्रभावित नारायणपुर जिले तक पहुंची।

व्‍यापक एवं गुणवत्तायुक्‍त एएनसी और उच्‍च जोखिम वाली गर्भावस्‍था की पहचान एवं उस पर लगातार निगरानी रखना इस अभियान का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। उच्‍च जोखिम वाली गर्भावस्‍था की समय रहते पहचान के लिए इस कार्यक्रम के तहत 84 लाख हीमोग्‍लोबिन जांच, 55 लाख एचआईवी जांच, गर्भावस्‍था के दौरान होने वाले मधुमेह की 41 लाख जांच, सिफिलिस के लिए 33 लाख जांच और 15 लाख से अधिक अल्‍ट्रासाउंड किए गए जो गर्भवती महिलाओं की व्‍यक्तिगत जरूरतों पर आधारित थीं। नैदानिक दशाओं और जांच के आधार पर 5.50 लाख गर्भवती महिलाओं को उच्‍च जोखिम वाली गर्भावस्‍था के तौर पर पहचान की गई और उन्‍हें उचित देखभाल के लिए किसी विशेषज्ञ अथवा उच्‍चतर स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों पर भेजा गया। उच्‍च जोखिम वाली गर्भावस्‍था की पहचान माताओं और शिशुओं को रोके जाने वाली मृत्‍यु से बचाने की ओर उठाया गया पहला कदम है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की योजनाओं के माध्यम से मातृशक्ति को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य करती है। उन योजनाओं की एक झलक –

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना
सरकार ने पूरे देश में महिला भ्रूण हत्या, लिंग भेद की रोकथाम और महिला शिक्षा के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना शुरू की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन मंत्रालय के समन्वित प्रयासों से चलाए गए इस अभियान के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए। योजना को पहले वर्ष में एक सौ जिलों में शुरू की गई थी और पहले ही साल के अंत तक ही 58 जिलों में जन्म के समय लिंग अनुपात में वृद्धि दर्ज की गई। दूसरे वर्ष में योजना 161 जिलों में शुरू की गई, जिसमें से 104 जिलों में जन्म के समय लिंगानुपात में बढ़ोतरी हुई।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
भारत सरकार की इस महत्त्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य पांच करोड़ से ज्यादा गरीब परिवारों की महिलाओं को प्रदूषण युक्त चूल्हे के धुएं से मुक्ति दिलाना और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है। केवल गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की महिलाओं को एलपीजी गैस कनेक्शन और चूल्हा मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा। महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के स्वास्थ्य के संदर्भ में इस योजना को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मातृत्व अवकाश, मातृत्व लाभ
वर्तमान सरकार ने नया मातृत्व लाभ संशोधित कानून एक अप्रैल 2017 से लागू कर दिया है। संशोधित कानून के तहत सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए वैतनिक मातृत्व अवकाश की अवधि 12 सप्ताह से बढ़ा कर 26 सप्ताह कर दी है। इसके तहत 50 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाले संस्थान में एक तय दूरी पर क्रेच सुविधा मुहैया कराना अनिवार्य है। महिलाओं को मातृत्व अवकाश के समय घर से भी काम करने की छूट है। मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम के 1 जनवरी 2017 से लागू है। योजना के अंतर्गत गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को पहले दो जीवित शिशुओं के जन्‍म के लिए तीन किस्‍तों में 6000 रुपये का नकद प्रोत्‍साहन दिया जाता है।

महिला उद्यमिता और महिला कौशल को बढ़ावा
स्टैंड-अप इंडिया के अंतर्गत महिलाओं को अपना व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए हर बैंक शाखा को 10 लाख से लेकर 1 करोड़ तक के ऋण कम से कम एक महिला को उपलब्ध कराने का नियम बनाया गया है। वहीं प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत महिलाओं को रोजगार योग्य बनाने के लिए 11 लाख से अधिक महिलाओं को अलग-अलग तरह के हुनर में प्रशिक्षित किया गया है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना महिला सशक्तिकरण का एक बहुत बड़ा जरिया बन चुकी है। इस योजना के लाभार्थियों में 70 प्रतिशत महिलाएं हैं।

सुकन्या समृद्धि योजना
केंद्र सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना के माध्यम से देश की बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने का कार्य किया है। योजना के अंतर्गत 0-10 साल की कन्याओं के खाते डाकघर में खोले जाएंगे। इन खातों में जमा राशि पर 8.1 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज दिया जाएगा। सुकन्या समृद्धि योजना अभिभावकों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इस योजना के तहत अभिभावकों को एक हजार रुपया प्रतिमाह 14 वर्ष तक जमा करना होगा।21 वर्ष के बाद खाता परिपक्व होने पर उन्हें 6,41,092 की धनराशि वापस मिलेगी। आकलन के अनुसार 14 वर्ष में खाते में जमा होंगे 1.68 लाख रुपये और 21 वर्ष बाद 6,41,092 रुपये की वापसी होगी। योजना के माध्यम से सरकार ने बेटियों की शिक्षा और समृद्धि दोनों को सुनिश्चित किया है।

मुद्रा योजना में महिलाओं की भागीदारी

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना महिला सशक्तिकरण का एक बहुत बड़ा जरिया बन चुकी है। इस योजना के तहत 29 दिसंबर, 2017 तक 10,17,24,494 लोग लाभ ले चुके हैं, इनमें 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। यानि सात करोड़ से अधिक महिलाओं ने इसका लाभ उठाया है।

महिलाओं के पासपोर्ट बनाना आसान

विदेश मंत्रालय ने महिलाओं को विदेश जाने के लिए पासपोर्ट बनाने के काम को आसान कर दिया गया, इसके लिए शादी या तलाक के सर्टिफिकेट की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई अब वे अपने पिता या मां का नाम लिख सकती हैं। पहले महिलाओं को पासपोर्ट बनवाने में खासी दिक्कत आती थी, लेकिन इस बदलाव के बाद महिलाओं के लिए पासपोर्ट बनवाना आसान हो गया है।

महिला जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण
इस कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायतों की निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की क्षमता, शासन संचालन और उनका कौशल बढ़ाना है, ताकि वो गांवों का प्रशासन बेहतर तरीके से चला सकें। पंचायती संस्थाओं में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को कई बार काम में मुश्किलें पेश आती हैं। इसलिए महिला सरपंचों तथा निचले स्तर पर महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने के लिए देशव्यापी कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इसका सीधा लाभ शासन-प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी के रूप में मिल रहा है।

यौन उत्पीड़न से निवारण के लिए ई-प्लेटफॉर्म
कार्यालयों में महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न की घटनाएं रोकने के लिए ई-प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया गया है। इस ई-प्लेटफॉर्म की सुविधा के माध्यम से केंद्र सरकार की महिला कर्मचारी ऐसे मामलों में ऑनलाइन ही शिकायत दर्ज करा सकेंगी। केंद्र सरकार में करीब 30 लाख से ज्यादा कर्मचारी हैं। 2011 के जनगणना के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों में महिलाओं का प्रतिशत 10.93 है।

मोबाइल में पैनिक बटन और GPS
किसी भी आपात स्थिति से बचने के लिए मोबाइल में जीपीएस सिस्टम के साथ-साथ पैनिक बटन शुरू किया गया है। ताकि ऐसी स्थिति में महिला अपने परिजनों या पुलिस तक अपना संदेश पहुंचा सके। दूरसंचार विभाग ने ‘मोबाइल फोन हैंडसेट में पैनिक बटन और ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम नियम 2016’ को 22 अप्रैल, 2016 को भारतीय वायरलेस टेलीग्राफ एक्ट 1933 की धारा 10 के तहत जारी कर दिया।

इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश का महत्वपूर्ण संसाधन मानते हैं। ज्ञान-विज्ञान, खेलकूद, सूचना-प्रौद्योगिकी, कला-संगीत से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली महिलाओं को प्रधानमंत्री अपनी कई महत्वपूर्ण योजना से जोड़ चुके हैं। कामकाजी से लेकर ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के कल्याण और उनके हितों की रक्षा के लिए सरकार ने सतत प्रयास किये हैं। प्रधानमंत्री स्वयं किसी भी क्षेत्र में कुशल नेतृत्व या उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं की सराहना करके महिलाओं को प्रोत्साहित करने का कार्य करते हैं।

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