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तीन साल मोदी सरकार, रोजगार के खुल गए द्वार

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तीन साल पहले सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने जो नीतियां अपनानी शुरू कीं, जिस तरह के कार्यक्रम बनाए, जो योजनाएं शुरू कीं, उसने रोजगार के दृष्टिकोण से हर तरफ द्वार ही द्वार खोल दिए। मोदी सरकार ने उन विपरीत परिस्थितियों में भी युवाओं को रोजगार देने के लिए लगातार काम किया है, जब दुनियाभर से इस क्षेत्र में तमाम चुनौतियां मिल रही हैं। इस सबके पीछे खुद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की युवाओं के प्रति चिंता और देश के भविष्य के प्रति उनकी सोच को दिखाता है। मोदी सरकार ने ऐसी योजनाएं एवं नीतियां बनाई हैं जिनसे रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं और रोजगार का सृजन करने वाले उद्यमियों का एक तंत्र भी स्थापित हुआ है। ये योजनाऐं हैं-

मेक इन इंडिया
सितंबर, 2014 में मेक इन इंडिया लॉन्च होने के बाद अक्टूबर 2014 से मई 2016 के बीच एफडीआई इक्विटी इन्फ्लो 46 प्रतिशत बढ़कर 61.58 करोड़ डॉलर (करीब 4 खरब रुपये) तक पहुंच गया। पहली बार देश में मेक इन इंडिया के तहत भारतीय कंपनी पुंज लॉयड, इजराइली वेपन कंपनी के साथ मिलकर सेना के लिए घातक राइफल बनाने जा रही है।

स्टार्टअप इंडिया
यह योजना उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो लोग अपना खुद का कारोबार शुरू करना चाहते हैं। इसके तहत कारोबार शुरू करने की इच्छा रखने वाले लोगों को आर्थिक मदद दी जाती है और साथ ही उन्हें टैक्स में छूट भी मिलती है। इसकी शर्तों में ये भी शामिल किया जा रहा है कि कितने लोगों को रोजगार मिलेगा।

डिजिटल इंडिया
डिजिटल इंडिया की योजना से युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर पैदा हुए। सरकार के हर क्षेत्र में ई- क्रांति के कदम से स्वास्थ्य के क्षेत्र में गांवों और गैर महानगरीय शहरों को नये उत्पाद और सेवा देने वाले युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे है। इसी तरह पर्यटन के क्षेत्र में भी डिजिटल क्रांति ने नये बाजार खोलकर युवाओं को रोजगार के काफी अवसर दिये हैं।

मुद्रा योजना
इस योजना के तहत छोटे कारोबारियों को उनके कारोबार में मदद दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये तक के लोन दिए जाते हैं। इस योजना के तहत तीन तरह के लोन दिए जाते हैं। इनके नाम हैं शिशु, किशोर और तरुण। शिशु योजना के तहत 50 हजार रुपये तक के लोन दिए जाते हैं, किशोर योजना के तहत 50 हजार रुपये से 5 लाख रुपये तक के लोन दिए जाते हैं। जबकि तरुण योजना के तहत 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक के लोन दिए जाते हैं। मुद्रा बैंक से देश के करीब 5 करोड़ 77 लाख छोटे कारोबारियों को फायदा हुआ है। छोटी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और दुकानदारों को इससे लोन मिलता है। इसके साथ ही सब्जी वालों, सैलून, खोमचे वालों को भी इस योजना के तहत लोन दिए जाने का प्रावधान है। इससे रोजगार सृजन करने और देने वालों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी हुई है।

कौशल विकास योजना
इसके लिए 21 मंत्रालयों और 50 विभागों में फैले कौशल विकास कार्य को एक ही मंत्रालय के अधीन लाया गया है। अगले चार साल में एक करोड़ युवकों को प्रशिक्षित करने के लिए 12,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना प्रारंभ की गयी है। इस योजना में 20 लाख से अधिक युवक पहले ही लाभान्वित हो चुके हैं। इसके तहत देशभर में फैले हुए 978 रोजगार कार्यालय राष्ट्रीय कॅरियर सेवा पोर्टल में एकीकृत किये गये हैं।

इतना ही नहीं मोदी सरकार की पहल से ऐसे ढेर सारे कार्य चल रहे हैं, जिसके चलते रोजगार के अवसरों में लगातार बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है-

• सड़क, आवास, रेल, परिवहन, कृषि क्षेत्र की तमाम योजनाओं ने रोजगार के अवसरों को बढ़ाया ही नहीं है बल्कि उसे लाभप्रद भी बनाया है।

• सरकार अकेले ही सारे रोजगार पैदा नहीं कर सकती। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्यमिता की भावना सुनिश्चित करने के लिए भी काम कर रहे हैं। स्टैंड अप, स्टार्ट अप इंडिया और मुद्रा योजनाओं को इसी दिशा में उठाए गए कदम के रूप में देखा जा सकता है।

• रोजगार के प्रति पीएम की चिंता का ही असर है कि केंद्रीय कैबिनेट को भेजे जाने वाले सभी प्रस्तावों में यह जानकारी होनी आवश्यक है कि उन प्रस्तावों पर अमल करने से रोजगार के कितने मौके पैदा होंगे।

• ग्रोथ के साथ रोजगार के मौके बनने की रफ्तार बढ़ाने के लिए नीति आयोग ने तीन साल की कार्ययोजना तैयार की है। इसमें अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए उठाये जाने वालों कदमों के बारे में बताया गया है।

• इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने इसी महीने कहा है कि भारत में जीडीपी की विकास दर मौजूदा वित्त वर्ष में 7.2 % और 2018-19 में 7.7 % तक रह सकती है। तय है कि ऐसा होने पर रोजगार के क्षेत्र में भी और संभावनाएं बढ़ती चली जाएंगी।

• रक्षा और रेलवे जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश हो रहा है। जाहिर है कि इन क्षेत्रों में अभी रोजगार की काफी संभावनाएं पैदा होंगी।

• हाल ही में आए आंकड़ों से जो तथ्य सामने आते हैं उससे यह स्पष्ट है कि देश में औद्योगिक विकास की रफ्तार 2016 में तेज हुई है। देश में लगने वाले औद्योगिक योजनाओं, विदेशी पूंजी निवेश और निर्यात में अच्छी-खासी बढ़ोत्तरी देखी गई है। देश में शुरू होने वाले औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में 29 % की बढ़ोतरी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार के कितने मौके मिले हैं।

मोदी सरकार जिस संकल्प और दूर दृष्टि के साथ विभिन्न योजनाओं पर काम करने में जुटी है उसमें थोड़ा समय भले ही लग जाए, लेकिन इसके परिणाम सबके लिए बेहद ही अच्छे रहने वाले हैं। तीन साल के काम तो यही बताते हैं। क्योंकि सरकार जिस लक्ष्य और सोच के साथ आगे बढ़ रही है, उसे अंजाम तक पहुंचना अब निश्चित लग रहा है।

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