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मोदी सरकार में तेज हुई अर्थव्यवस्था की रफ्तार… ये हैं 10 बड़े कदम

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तीन साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब देश की बागडोर संभाली थी, देश एक के बाद एक घोटालों के चलते त्राहिमाम कर रहा था। अर्थव्यवस्था दम तोड़ चुकी थी। लेकिन मात्र तीन साल में देश की इकोनॉमी रोशन हो चुकी है। सरकार के खजाने भरे हुए हैं। अर्थव्यवस्था पर नजदीकी नजर रखने वाले दुनियाभर के विशेषज्ञ भी हैरानी जताते हैं कि आखिर मोदी सरकार ने ऐसा चमत्कार कर दिया। लेकिन सच्चाई ये है कि ये सब संभव हुआ है मोदी सरकार की कड़ी मेहनत और लगन से और सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री मोदी की दूर-दृष्टि और भारत माता के प्रति उनके समर्पण भाव से। अर्थव्यवस्था को तोलने वाले सारे इंडीकेटर आज भारत की डंका बजा रहे हैं।

नोटबंदी का मास्टरस्ट्रोक
पिछले साल 8 नवंबर को रात के 8 बजे प्रधानमंत्री ने 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने का ऐलान करके पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। लेकिन बहुत जल्दी ही देश की आम जनता को बात समझ में आ गई कि पीएम मोदी ने भ्रष्टाचारियों और कालाधन रखने वालों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दिया है। जनता सरकार के फैसले को सिर-माथे पर ले चुकी थी, हर परेशानी झेलने को तैयार थी। लेकिन भ्रष्टाचारियों की नींद उड़ चुकी थी। वो अपनी काली कमाई को छिपाने के एक से एक हथकंडे अपनाने लगे। लेकिन सरकार ने भी उनके हर हथकंडे की काट निकाली। ज्यादातर ब्लैकमनी या तो बैंकिंग सिस्टम में आ गए, जिसपर लगने वाले टैक्स से देश का खजाना भरने लगा। जो रकम बाकी बची वो या तो इनकम टैक्स की कार्रवाई में पकड़ी गई या फिर वो सिर्फ कागज के टुकड़े बनकर रह गए। इस एक निर्णय ने देश में मौजूद 60-70 सालों की गंदगी की एक झटके में सफाई हो गई। सबसे बड़ी बात की सरकार के इस एक फैसले से महीने भर के अंदर डिजिटल लेन-देन में करीब 300 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो गई।

संजीवनी साबित होगा GST
मोदी सरकार एक जुलाई, 2017 से पूरे देश में एक साथ GST लागू करने जा रही है। इसके लागू होते ही देश के टैक्स सिस्टम में क्रांति आने वाली है। जहां इससे एक तरफ देश में इकोनॉमिक फेडरलिज्म का सपना पूरा हो सकेगा तो दूसरी ओर ‘एक देश, एक कर, एक बाजार’ का संकल्प साकार होगा। GST देश में अप्रत्यक्ष करों को खत्म कर देगा लोगों को अलग-अलग करों के बदले सिर्फ GST ही देना होगा। ये व्यवस्था दोहरे और तिहरे टैक्स को खत्म कर देगा। आम लोगों को जहां इसके बाद ज्यादातर चीजों पर कम टैक्स चुकाना होगा, वहीं कारोबारियों को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग टैक्स चुकता नहीं करना पड़ेगा। एक्सपर्ट मानते हैं कि GST देश की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी बूटी साबित होगी। इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा, Make In India को गति मिलेगी। देश की अर्थव्यवस्था में ये बड़ा बदलाव साबित होगा। जिस गति से पिछले तीन साल में हमने विकास पथ पर कदम बढ़ाए हैं उस गति को आने वाले दो साल में गुणा बढ़ा देगा।

डायरेक्ट कैश ट्रांसफर से रुकी चोरी
जब से मोदी सरकार ने सब्सिडी के तहत मिलने वाले पैसे सीधे खाते में डालना शुरू कर दिया है, भ्रष्टाचारियों पर बहुत बड़ी मार पड़ गई है। सिर्फ इस एक उपाय से जनता के अबतक 400 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बच चुकी है। पहले सरकारी खजाने से पैसे तो गरीब जनता के नाम पर निकाले जाते थे, लेकिन वहां तक पहुंचने से पहले ही शीर्ष से लेकर नीचे के छुटभैए दलाल तक उसको हड़प लेते थे। LPG सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी ही जब से खाते में आने लगी है, इसकी कालाबाजारी भी रुक गई है और सरकारी खजाने में हो रही लुट पर भी लगाम लग गया है।

करदाताओं का दायरा बढ़ाया
नोटबंदी के बाद न सिर्फ आयकर से सरकार की आमदनी बढ़ी है, बल्कि निजी आयकर देने वालों की संख्या में भी अचानक 91 लाख से अधिक की बढ़ोत्तरी हो गई है। ये आंकड़ा 2015-16 में आयकर रिटर्न भरने वालों की कुल संख्या का करीब एक-चौथाई है। CBDT के अनुसार नोटबंदी के चलते निजी आयकर कलेक्शन में करीब 17 % की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है जो कि पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले करीब 1.46 लाख करोड़ रुपये अधिक है। एक बड़ी बात ये है कि नोटबंदी के बाद ई-रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में भी 22% की बढ़ोत्तरी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 9 नवंबर 2016 से मार्च 2017 के बीच हुई विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई में 900 ग्रुप के पास 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक के अघोषित आय का पता चला जिसमें से 636 करोड़ रुपये कैश समेत करीबन 900 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति जब्त की गई।

100 % FDI
देश के ढांचागत विकास के लिए मोदी सरकार ने कई क्षेत्रों में 100 प्रतिशत FDI को मंजूरी दी है। इसमें फार्मा, रक्षा, ब्रॉडकास्टिंग कैरियेज सर्विसेज और एवियेशन इंडस्ट्री क्षेत्र प्रमुख हैं। ये मंजूरी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के लिए हैं। जैसे ये कंपनिया देश में नई मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां लगाएंगी। इससे मेक इन इंडिया को भी बढ़ावा मिलेगा। सोचने वाली बात है कि अगर इससे एक तरफ जहां देश की अर्थव्यवस्था में मजबूती आएगी, वहीं इन तमाम सेक्टर में रोजगार की तमाम संभावनाएं पैदा होंगी।

NPA खत्म करने की पहल
सबसे बड़ी बात ये है कि मोदी सरकार के कड़े कदमों के चलते बैंकों के NPA में कमी होने शुरू हो गए हैं। सरकार की पहल पर RBI भी इस संकट से उबरने के लिए एक के बाद एक कोशिशों में जुटा हुआ है। जानकारी के अनुसार डूबे कर्ज से निपटने के लिए RBI ने एक एक्शन प्लान जारी किया है। इसके तहत NPA से निपटने के लिए दोबारा निगरानी कमेटी गठित की जाएगी। यही नहीं अब NPA के लिए रीस्ट्रक्चरिंग के नियम भी बदले जाएंगे। इसके अलावा RBI क्रेडिट रेटिंग के फंड बनाने पर विचार करेगा और इसके लिए बैंक योगदान देंगे। आरबीआई खुद क्रेडिट रेटिंग कराएगा। इस मामले में बैंकों से बड़े डिफॉल्टर्स की जानकारी मांगी गई है।

बजट का समय बदला
अंग्रेजों के जमाने से फरवरी महीने के आखिर में बजट पेश किए जाने का सिलसिला चल रहा था। मोदी सरकार ने इस साल से इसका समय बदल कर 1 फरवरी फिक्स कर दिया है। इस कदम को अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए बहुत ही अच्छा माना जा रहा है। इससे सबसे बड़ा फायदा ये होगा की सरकार के पास अगले वित्त वर्ष के लिए बजट पास करवाने के लिए पूरे दो महीने का समय बचेगा। यानि अप्रैल से नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही बजट के अनुसार कार्यों पर अमल शुरू हो जाएगा और उसे पूरा करने के लिए मंत्रालयों के पास पूरा एक साल का समय रहेगा। इससे पहले दिक्कत ये होती थी, नए वित्त वर्ष के एक-दो महीने बजट पास कराने की प्रक्रिया में ही बर्बाद हो जाते थे। जिससे एक साल के बजट पर जमीनी स्तर पर काम करने के लिए 9-10 महीने ही बच जाते थे। लेकिन पीएम मोदी की एक सोच ने उस दिशा में आमूल-चूल परिवर्तन कर दिया है, जिसके बारे में अभी तक किसी ने सोचा भी नहीं था।

रेल बजट आम बजट में शामिल
भारतीय रेलवे अपने- आप में एक बहुत बड़ा मंत्रालय है। ये देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला विभाग है। अबतक रेल बजट को अलग से आम बजट से पहले पेश किए जाने की परंपरा चली आ रही थी। पूरे साल का बड़ा हिस्सा रेल मंत्रालय और उसके अफसरों का सारा ध्यान लोकलुभावन रेल बजट तैयार करने पर ही खर्च हो जाता था। जाहिर है कि इससे रेलवे के संचालन पर से ध्यान हट जाता था। लेकिन अब मोदी सरकार ने रेलवे से बजट बनाने का काम लेकर उसे आम बजट के साथ मिला दिया है। इससे रेलवे के बहुत बड़े संसाधनों की बचत होगी और मंत्रालय की काफी रकम भी बचेगी। इतना ही नहीं मोदी सरकार रेलवे की भलाई के लिए उसके ढांचागत सुधार पर जोर दे रही है। अबतक रेल बजट का मूल मकसद नई ट्रेनों की घोषणाएं करके वाहवाही लूटने की परंपरा बन गई थी। जबकि मोदी सरकार ने ट्रेनों के संचालन, नई ट्रेनों या फेरे में विस्तार आदि को रेल मंत्रालय के रूटीन कार्य में शामिल कर दिया है, ताकि राजनीतिक वजहों से रेलवे की तरक्की में कोई अड़चन न आए।

नीति आयोग का गठन
मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही Co-operative federalism के सिद्धांत के आधार काम करना शुरू कर दिया। इसी नीति के तहत पीएम मोदी ने योजना आयोग की जगह पर नीति आयोग का गठन कर दिया। ताकि न्यू इंडिया के निर्माण में केंद्र और सारे राज्य मिलकर के नीतियों को बनाएं और फिर उसी दिशा में कार्य में जुट जाएं। तीन साल में विरोधी दल के मुख्यमंत्रियों ने भी महसूस किया है कि नीति आयोग के बनने के बाद से केंद्र के सामने अपनी बातों को रखने में उन्हें अधिक आसानी हुई है। क्योंकि योजना आयोग के ढांचे में ये कमी देखी गई थी, कि उसमें योजना की तामील में कठिनाइयां पैदा होती थीं।

हर इंडीकेटर पॉजिटिव, महंगाई पर लगाम
बीते तीन साल में केंद्र सरकार ने महंगाई को पूरी तरह से काबू में कर रखा है। लगातार दो साल सूखा झेलने के बाद पिछले साल दाल के उत्पादन में काफी कमी आ गई थी। इसके चलते अचानक दाल की कीमतें आसमान छूने लग गईं। जमाखोरों के चलते आम जनता की मुश्किलें बहुत बढ़ गई थीं। मोदी सरकार ने दाल की कीमतों पर लगाम लगाने शुरू किए और आज स्थिति बदल गई है। यही नहीं पिछले कई सालों से खून के आंसू रुलाने वाला प्याज भी मोदी सरकार के आने के बाद से शक्कर की बोली बोलने लगा है। आंकड़े बतातें हैं कि यूपीए सरकार में महंगाई दर जहां 11 प्रतिशत तक पहुंच गया था, अब 4 प्रतिशत के आसपास स्थिर रहता है। स्थिति ये आ चुकी है कि अब विपक्ष को भी महंगाई को मुद्दा बनाने का मौका नहीं मिल रहा है। महंगाई दर ही नहीं GDP, राजस्व घाटा, डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती, यानि सबकुछ नियंत्रण में है और बिल्कुल अनुकूल चल रहा है। यही कारण है कि नोटबंदी के बावजूद अर्थव्यवस्था की ये स्थिति देखकर दुनिया के अर्थशास्त्री भी हैरान हैं।

कुल मिलाकर इन तीन सालों में मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को लगभग विकसित देशों के समकक्ष लाकर खड़ा कर दिया है। अगर सरकार कई कड़े कदम नहीं उठाती तो इस तरह की सफलता हासिल करना संभव नहीं था।

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