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देश को बदनाम करने की ‘नीच’ राजनीति करती है कांग्रेस !

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देश के भीतर सत्ता संघर्ष के लिए राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहते हैं। एक दूसरे को मात देने के लिए कई रणनीतियां बनाते हैं। घरेलू नीतियो में मतभेद होने के बावजूद विदेश नीति को लेकर पार्टियों में एकजुटता रहती है, लेकिन कांग्रेस पार्टी सत्तालोलुपता में इतनी नीचता पर उतर आई है कि देश को बदनाम करने में ही अपनी शान समझने लगी है। कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जो न केवल देश के मान को ठेस पहुंचाती है, बल्कि दुनिया में भारत की नीतियों को भी कठघरे में खड़ा कर देती है।

मणिशंकर अय्यर को पाकिस्तान से प्यार क्यों है?
‘‘भारत और पाकिस्ताान के बीच के मुद्दों को सुलझाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता है- निरंतर और निर्बाध बातचीत। मुझे बहुत गर्व है कि पाकिस्तान ने इस नीति को स्वीकार कर लिया है, लेकिन दुखी भी हूं कि इसे भारतीय नीति के तौर पर नहीं अपनाया गया है। बातचीत को भारतीय नीति के तौर पर अपनाने की जरूरत है।’’
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने ये बयान पाकिस्तान की धरती पर दिया है। उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की है कि भारत और पाकिस्तान के बीच विवादों की वजह भारत सरकार है। उन्होंने यह भी जताने का प्रयास किया है कि पाकिस्तान सुधर गया है और भारत बिगड़ गया है। उनके इस बयान के मायने समझे जाएं तो ये साफ है कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में सबसे बड़ी बाधा भारत सरकार का रुख है न कि पाकिस्तान की आतंकवादपरस्त नीति। जो पाकिस्तान मोदी सरकार की नीतियों के कारण पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ गया है, कांग्रेस नेता उसी नीति को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। 

मणिशंकर अय्यर ने कहा था ‘हमें ले आइये इन्हें हटाइये’
6 नवंबर, 2015 को मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान के टीवी चैनल ‘दुनिया’ पर पाकिस्तान से गुहार लगाते हुए  कहा, ”राष्ट्रपति मुशर्रफ, जो कि फौज के आदमी थे, और हमारे मनमोहन सिंह के बीच तीन साल तक बातचीत जारी रही।” इस पर इंटरव्यू लेने वाले पत्रकार ने उनसे पूछा कि मौजूदा गतिरोध को दूर करने का क्या तरीका है, इसके जवाब में अय्यर ने कहा, ”इनको (बीजेपी सरकार) हटाइए और हमें ले आइए। और कोई रास्ता नहीं है।” इसपर पत्रकार ने कहा कि यह तो आप लोगों को करना होगा, इसके जवाब में अय्यर ने कहा कि तब तक आप लोग इंतजार कीजिए।

जाहिर है मणिशंकर अय्यर का सीधा इशारा था कि भारत की सत्ता को अस्थिर करने के लिए पाकिस्तान कांग्रेस की सहायता करे और देश में मोदी सरकार को हटाने में मदद करे।

दरअसल अय्यर ही क्यों कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से लेकर कई नेताओं ने देश को विदेशों में जाकर बदनाम किया है। ऐसे कई प्रकरण सामने हैं जिनमें कांग्रेसी नेताओं ने देश के मान को नुकसान पहुंचाने का कुत्सित प्रयास किया है। आइये हम ऐसे ही कुछ अन्य प्रकरण की चर्चा करते हैं जब कांग्रेस के नेताओं ने देश को बदनाम करने की कोशिश की है।

सलमान खुर्शीद ने पाकिस्तान में कहा, ”मोदी अभी सीख रहे हैं”
नवंबर, 2015 के पहले हफ्ते में कांग्रेस सरकार में विदेश मंत्री रहे सलमान खुर्शीद ने भी भारत को यह कहकर बदनाम करने की कोशिश की थी कि भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत बंद होने के लिए पाकिस्तान नहीं बल्कि भारत सरकार जिम्मेदार है। इस्लामाबाद के जिन्ना इंस्टीट्यूट में अपने संबोधन उन्होंने कहा, ”पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ ने मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होकर दूरदर्शिता का परिचय दिया था, लेकिन बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार पाकिस्तान के शांति संदेश का माकूल जवाब देने में नाकाम रही।” खुर्शीद ने यह भी कहा था कि मोदी अभी राजनेता बनने के तौर-तरीके सीख रहे हैं।

सलमान खुर्शीद और मोदी के लिए इमेज परिणामनेतन्याहू की यात्रा से पहले कांग्रेस ने शेयर किया बेहूदा वीडियो

15 जनवरी, 2018 को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी 6 दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा पर भारत आए। जब इजरायल के प्रधानमंत्री देश की सरजमीं पर कदम रख रहे थे, उसी वक्त कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर प्रधानमंत्री मोदी के बारे में एक बेहूदा वीडियो शेयर किया। इस ट्विटर में पीएम मोदी को तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ गले मिलते हुए दिखाया गया था, और पीएम मोदी की गले मिलने की कूटनीति का मजाक उड़ाया गया था। कांग्रेस पार्टी ने इस शर्मनाक वीडियो में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, तुर्की के राष्ट्रपति रज्जब, फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वां ओलांद के साथ पीएम मोदी के गले मिलने के दृश्यों को दिखाया था।

राहुल ने बहरीन में देश की नीतियों की आलोचना की

8 जनवरी, 2015 को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बहरीन के दौरे पर थे। वहां आर्गेनाइजेशन ऑफ पीपुल ऑफ इंडियन ओरिजिन की एक बैठक में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार के विरोध में कई बातें कहीं। राहुल ने रोजगार संकट, गिरती जीडीपी, नोटबंदी के गलत आंकड़े पेश कर और असहिष्णुता का मुद्दा उठाकर अपनी तुच्छ मानसिकता का परिचय दिया।

अमेरिका में भी राहुल ने किया था भारत को बदनाम
सितंबर, 2017 में जब राहुल गांधी अमेरिका दौरे पर थे, तो उन्होंने यूएस की बर्कले यूनिवर्सिटी में भाषण देते समय, तमाम नीतियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उस वक्त भी राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगाकर, विदेश में भारत को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।


कश्मीर में आतंकियों पर कार्रवाई का विरोध
28 अक्टूबर, 2017 को पी चिदंबरम ने कहा, ”जम्मू-कश्मीर के लोगों से मेरी बातचीत के जरिए मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि जब भी वे आजादी की मांग करते हैं तो दरअसल, इसमें ज्यादातर लोगों की आजादी का मतलब स्वायत्तता से होता है।”  कांग्रेस के पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम के इस बयान ने शांत होते कश्मीर को एक बार फिर सुलगा दिया। पी चिदंबरम के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस कश्मीर में आतंकियों की मांग को समर्थन करती है। स्पष्ट है कि भारत से अलग होने और पाकिस्तान में मिलने की ख्वाहिश रखने वालों को पी चिदंबरम उकसाया। इससे न देश की बदनामी हुई बल्कि भारत सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए जाने लगे। 

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डोकलाम मामले पर सरकार के स्टैंड का विरोध
जून, 2017 में भारत-चीन के बीच 73 दिनों तक सिक्किम से सटे डोकलाम क्षेत्र जबर्दस्त तनातनी का माहौल रहा। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जिन हालातों में चोरी-छिपे भारत में मौजूद चीन के राजदूत लिओ झाओहुई से मिलने पहुंच गए उसने सारे देश को हैरान कर दिया। लेकिन पार्टी ने पहले मुलाकात से इनकार किया और फिर स्वीकार किया। सवाल उठने लगे कि राहुल और अन्य कांग्रेसी नेताओं के मन में कुछ गलत नहीं था तो उनकी पार्टी को पहले इस मुलाकात पर झूठ क्यों बोलना पड़ा?

चीनी राजदूत से मिले राहुल के लिए चित्र परिणाम

आतंकियों की फांसी पर भी पॉलिटिक्स
संसद पर हमले के दोषी आतंकी अफजल गुरु की फांसी पर भी कांग्रेस ने पॉलटिक्स की थी। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा था कि संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देना गलत था और उसे गलत तरीके से दिया गया। इतना ही नहीं यही कांग्रेस है जिनके नेताओं ने याकूब मेनन की फांसी पर भी आपत्ति जताई थी।

 

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