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ढोला-सदिया: पूर्वोत्‍तर के लिए नई आशा का पुल

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 26 मई को असम में देश के सबसे लम्‍बे नदी पुल ढोला-सदिया का उद्घाटन करेंगे। इसका उद्घाटन होने से पूर्वोत्‍तर में सड़क संपर्क में एक प्रमुख बदलाव आयेगा। यह पुल तीन लेन का होगा तथा 9.15 किलोमीटर लम्‍बे पुल का निर्माण ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी लोहित पर किया गया है। यह पुल असम के ढोला को अरूणाचल के सादिया से जोडेगा। इस पुल के अस्तित्‍व में आने से इस क्षेत्र में संपर्क का एक लम्‍बा अंतर खत्‍म हो जायेगा। अभी तक ब्रह्मपुत्र को पार करने के लिए केवल दिन के समय नौका का ही उपयोग किया जाता था, और बाढ़ के दौरान यह भी संभव नहीं होता था। ब्रह्मपुत्र नदी पर बना अंतिम पुल तेजपुर स्थित कालियाभोमोरा पुल था। इस पुल का उद्घाटन होने के बाद ऊपरी असम और अरूणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग के लिए चौबीसो घंटे संपर्क सुनिश्ति हो जायेगा।

इस पुल के बनने से असम के राष्‍ट्रीय राजमार्ग-37 में रूपाई और अरूणाचल प्रदेश के राष्‍ट्रीय राजमार्ग-52 में मेका/रोईंग के बीच 165 किलोमीटर की दूरी कम हो जायेगी। इन दो स्‍थानों के बीच यात्रा करने में वर्तमान में 6 घंटे का समय लगता है, जो अब घटकर 1 घंटा हो जायेगा और इस तरह 5 घंटे के समय की बचत होगी। इसके परिणामस्‍वरूप प्रतिदिन पेट्रोल और डीजल में 10 लाख रूपये तक की बचत होगी।

ढोला-सदिया पुल से पूर्वोत्‍तर में विकास के नये रास्‍ते खुलेंगे। इस पुल के निर्माण से सुदूर और पिछड़े क्षेत्रों को सड़क मार्ग से जोड़ने का मौका मिलेगा। यह पुल ऊपरी आसाम के ब्रह्मपुत्र और अरूणाचल प्रदेश के संपूर्ण आर्थिक विकास में एक महत्‍वपूर्ण योगदान देगा। इसके अलावा यह अरूणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में देश की सामरिक आवश्‍यकताओं को पूरा करेगा, तथा राज्य में चल रही कई पणबिजली परियोजनाओं को सुविधाजनक बनाने में मदद करेगा क्‍योंकि संपर्क नहीं हो पाने के कारण कई बिजली परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में दिक्‍कते आ रही थीं।

पीआईबी विज्ञप्ति के अनुसार ढोला-सदिया पुल परियोजना की कुल लम्‍बाई दोनों तरफ की सड़कों को मिलाकर कुल 28.50 किलोमीटर है और पुल की लम्‍बाई 9.15 किलोमीटर है। इस पुल का निर्माण बीओटी एन्यूटी द्वारा किया गया जिसकी कुल लागत 2,056 करोड़ रूपये है। इस पुल का उद्देश्‍य असम और अरूणाचल प्रदेश के लोगों को एक दूसरे के करीब लाना है।

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