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बेनामी ट्रांजेक्शन पर सरकार का कसता शिकंजा

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 99 प्रतिशत पुरानी मुद्रा बैंकों में वापस लौट आयी है। लेकिन आयकर विभाग नोटबंदी की घोषणा के बाद से लगातार बेनामी खातों को खंगालने का काम में जुटा हुआ है। जिन खातों में काला धन जमा कराए जाने का शक है, ऐसे खातों का पता लगाने के लिए आयकर विभाग लगातार काम कर रहा है। 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद से आयकर विभाग खातों की जांच में करने में लगा है। अब इस कार्यवाही का दूसरा दौर आरंभ कर चुका है। वर्तमान कार्यवाही आरबीआई द्वारा खातों में जमा संदेहास्पद राशियों के विवरण के आधार पर की जा रही हैं।

बेनामी ट्रांजेक्शन करने वालों की अब खैर नहीं
इस कार्यवाही के क्रम में आयकर विभाग ने कालेधन के खिलाफ अभियान के दौरान तमिलनाडु में एक ऐसे बेनामी बैंक खाते का पता लगाया है जिसमें एक ही ट्रांजेक्शन में 246 करोड़ रुपये जमा करवाये गये। यह ट्रांजेक्शन नोटबंदी के दौरान की गयी सबसे बड़ी ट्रांजेक्शन में से एक है। आयकर विभाग को तमिलनाडु में नोटबंदी के बाद 441 बैंक खाताधारकों ने 240 करोड़ रुपये की संचयी जमा का पता नहीं लग सका है। बैंकों के पास इन खाताधारकों की ठीक-ठीक जानकारी नहीं है। जबकि इस संबंध में आरबीआई के स्पष्ट निर्देश हैं कि खाताधारकों की जानकारी बैंकों के पास होनी चाहिए। विभाग ने संदेहास्पद ट्रांजेक्शन के सिलसिले में 27,739 खाताधारकों को ईमेल के माध्यम से नोटिस भेजकर उनके खातों में जमा धनराशि के स्रोत की जानकारी मांगी। लेकिन बार-बार नोटिस भेजने के बाद भी खातों में जमा धनराशि के स्रोत की जानकारी नहीं देने के बाद यह कार्यवाही की गयी। विभाग ने कई बैंकों को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं जिन्होंने काले धन को सफेद करने के लिए बेनामी खाता खोलने में खाताधारकों की मदद की है।

बेनामी लेनदेन के लिए 7 साल की सजा का प्रावधान
काले धन को दूसरों के बैंक खाते में जमा कराने वालों को आयकर विभाग ने कई बार चेतावनी दी थी। डिपार्टमेंट ने कहा था कि इन लोगों के खिलाफ हाल ही में बने बेनामी ट्रांजैक्शंस एक्ट के तहत मुकदमा चलेगा। इस कानून में दोषियों पर जुर्माना लगाने और अधिकतम 7 साल की कैद जैसे प्रावधान हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार दूसरों के खातों में काला धन जमा कराने वालों पर बेनामी एक्ट के तहत मुकदमा चलेगा। यह कानून चल और अचल संपत्ति दोनों पर लागू होता है। इस कानून को इस साल 1 नवंबर से लागू किया गया है।

इस कानून के अनुसार जमाकर्ता और अपने खातों में दूसरों के काले धन को जमा करने देने वाले दोनों पर मुकदमा चलाया जा सकता है। दूसरों के खातों में जमा कराए जाने वाले पैसों पर आयकर विभाग कड़ी नजर रखे हुए है। अगर किसी शख्स के खाते में दूसरे इंसान ने 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट जमा कराए हैं और अगर दोनों के बीच यह समझ बनी है कि पहला शख्स इसके बदले नई करेंसी में रकम वापस करेगा तो इसे बेनामी लेनदेन माना जाएगा और इस कानून के तहत एक्शन लिया जाएगा। इसमें पुरानी करेंसी जमा कराने वाले को बेनेफिशियल ओनर माना जाएगा। वहीं, जिसके खाते में पैसा जमा कराया गया, उसे बेनामीदार करार दिया जाएगा। बेनामी कानून में एक से सात साल तक की सजा का प्रावधान है।

पीएमजीकेवाई के अंतर्गत कालेधन की घोषणा
नोटबंदी के बाद अघोषित आय का खुलासा करने के लिए लाई गई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत दिसंबर 2016 से 31 मार्च 2017 तक 21,000 लोगों ने 4900 करोड़ रुपये के कालेधन की घोषणा की गई। आयकर विभाग को इससे अब तक 2451 करोड़ रुपए प्राप्त किए हैं। यह योजना पिछले साल दिसंबर में लॉन्च की थी जिसमें कालाधन रखने वालों को टैक्स और 50 प्रतिशत जुर्माना देकर पाक-साफ होने का मौका दिया गया। योजना के तहत 49.9 प्रतिशत टैक्स, सेस और जुर्माना देना था। साथ ही कुल अघोषित आय का 25 प्रतिशत ऐसे खाते में चार साल तक रखना था जिसमें कोई ब्याज नहीं मिलता है।

करदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी
नोटबंदी के बाद से करदाताओं की संख्या में 25.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष 5 अगस्त तक तक भरे गए 2.22 करोड़ ई-रिटर्न की तुलना में बढ़कर 2.79 करोड़ हो गई। यानी इस अवधि के दौरान कुल 57 लाख रिटर्न ज्यादा भरे गये। इसका सीधा अर्थ है कि कर की चोरी पर लगाम लगी है। नोटबंदी के दौरान बैंकों में जमा की गई राशि की जांच पड़ताल में सरकार को करीब 3-4 लाख लाख करोड़ रुपये की आय में टैक्स चोरी का पता चला है।

डिजिटलीकरण और पारदर्शिता बढ़ी
नोटबंदी के निर्णय का स्पष्ट उद्देश्य कालेधन, नकली नोटों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना था। इससे बाजार में घूम रही पूंजी यानी काला धन बैंकिंग प्रणाली में लाना संभव हो सका है। इससे पैसे की गोपनीयता खत्म हुई और इस पैसे के मालिक कर देकर इस रकम का ज्यादा बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगे। नोटबंदी के परिणामस्वरूप डिजिटलीकरण में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गयी, डिजिटल और इलेक्ट्रानिक लेनदेन बढ़ा है। डिजिटल भुगतान के स्वाइप मशीनों, पीओसी मशीनें, पेटीएम और भीम ऐप जैसे सरल उपाय सहजता के साथ अपना लिए गये हैं। यह देश में एक डिजिटल क्रांति का बड़ा महत्वपूर्ण चरण रहा है। डिजिटल लेनदेन में वृद्धि के फलस्वरूप इससे शासन, प्रशासन, नौकरशाही में पारदर्शिता आयी और नागरिकों में भी जागरुकता आयी है।

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