Home विचार केरल की घटना पर क्यों चुप हैं मानवाधिकार के पैरोकार?

केरल की घटना पर क्यों चुप हैं मानवाधिकार के पैरोकार?

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केरल को भगवान का देश (God’s Own Country) कहा जाता है, लेकिन यहां इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटनाएं हो रही हैं। यहां सीपीएम कार्यकर्ताओं ने एक दस माह के बच्चे की हत्या करने की कोशिश की। मासूम को पिता की गोद से छीनकर फेंक दिया। मासूम की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसके पिता भाजपा कार्यकर्ता हैं।

घटना के चार दिन बाद भी कहीं से कोई सुगबुगाहट नहीं है। कहीं कोई हलचल नहीं हैं। सबके-सब चुप हैं। ऐसे में, कुछ सवाल है जिसका जवाब मीडिया, अवार्ड वापसी समूह और असहिष्णुता की राजनीति करने वालों को देना होगा।

  • क्या सीपीएम कार्यकर्ताओं द्वारा मासूम को जान से मारने की कोशिश असहिष्णुता की श्रेणी में नहीं आता? 
  • इस घटना पर सीपीएम और तमाम पार्टियों के नेताओं को सांप क्यूं सुंघ गया है? 
  • राजनीतिक विरोध का स्तर क्या इतना गिर गया है कि एक मासूम बच्चे की जान लेने पर ये दल और उनके नेता आमादा हो गए हैं? 
  • आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराने पर मानवाधिकार की बात करने वाले, मासूम के मानवाधिकार की बात पर चुप क्यों हैं? 
  • शर्मसार करने वाली घटना के आरोपियों को मीडिया क्यों बचा रही है? हमला करने वाले सीपीएम के ही कार्यकर्ता थे तो फिर ‘केरल के लोगों द्वारा’ लिखने की जरूरत क्यों?

क्या थी घटना 

आरोप है कि सीपीएम के गुंडों ने केरल के मल्लपुरम जिले में तिरूर के नजदीक भाजपा कार्यकर्ता सुरेश की कार को घेर लिया गया। हथियार के बल पर जबरन कार का दरवाजा खुलवाया और उनके गोद से दस माह के बेटे को छीन लिया और सड़क फेंक दिया। सुरेश पर भी कातिलाना हमला किया। बच्चे को आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां बच्चे की हालत में अब सुधार है।

कहते हैं कि शिक्षा, व्यक्ति को इंसानियत से जीना सीखाती है, विनम्रता सीखाती है और दूसरे को भी अपना मत, मंतव्य रखने का माहौल बनाने में योगदान करने में सहयोगी बनने को तैयार करती है। लेकिन देश के सबसे शिक्षित प्रदेश केरल में ये हो क्या रहा है? आखिर यह कैसा राजनीतिक विरोध है, जहां उस बच्चे तक को बख्शा नहीं जा रहा है, जिसे मालूम ही नहीं, दुनिया क्या है? सियासी रंजिश में इतनी नफरत क्यों?

फाइल फोटो

केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन भी हत्यारोपी 

केरल के वर्तमान मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर भी हत्या का आरोप है। उन पर आरएसएस कार्यकर्ता वडिकल रामकृष्णन की हत्या का आरोप है। रामकृष्णन की हत्या 28 अप्रैल 1969 को हुई थी। यह केरल राज्य में आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या की पहली घटना है। तब से लेकर अब तक 172 आरएसएस-भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या का केस पुलिस की फाइलों में दर्ज है। एक आंकड़े के मुताबिक हर पांच में से चार घटनाओं के लिए सीपीएम कार्यकर्ता कसूरवार है।

कन्नूर जिले में सिर्फ पांच महीने में 300 से अधिक राजनीतिक हिंसा की घटनाएं हुईं।कन्नूर जिला केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन का गृह जनपद है। पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, 1 मई, 2016 से 16 सितंबर के बीच केवल कन्नूर जिले में राजनीतिक हिंसा की कुल 301 वारदातें घटित हुईं। दर्ज रिपोर्ट होने के बाद सर्वाधिक 485 सीपीएम से जुड़े नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। ये वो आंकड़ा है, जो रिकॉर्ड में है।

2012-2016 की प्रमुख राजनीतिक हत्याएं 

सी. राधाकृष्णन (पलक्कड़) – 28 दिसंबर, 2016 को सीपीएम कार्यकर्ताओं ने कोझिकोड के पलक्कड़ में 44 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता सी. राधाकृष्णन को उनके ही घर में जिंदा जलाने की कोशिश हुई। उनके घर के सामने खड़ी उनकी बाइक में पहले आग लगाई। फिर घर में गैस का छिड़काव करके घर में आग लगा दी। इस आगजनी में सी राधाकृष्णन सहित दो परिजन और बुरी तरह से झुलस गए। त्रिस्सुर जुबली मिशन हॉस्पिटल में 6 जनवरी, 2017 को उपचार के दौरान सी. राधाकृष्णन की मौत हो गई।

 

मुख्यमंत्री के पैतृक गांव में बीजेपी वर्कर रेमिथ की हत्या

रेमिथ (कन्नूर) : अक्टूबर, 2016 में ही 26 साल के रेमिथ नामक युवक की हत्या कर दी गई। चौदह साल पहले उसके पिता को भी मार दिया गया था। ये दोनों बीजेपी-आरएसएस से जुड़े थे। ये हत्याएं पिनाराई गांव में हुई जो कि केरल के मुख्यमंत्री का गांव है।

कथिरूर मनोज (कन्नूर) : तीन सितंबर, 2014 को कथित तौर पर सीपीएम कार्यकर्ताओं के हमले में आरएसएस कार्यकर्ता मनोज की मौत हो गई। इस मामले में वरिष्ठ सीपीएम नेता पी जयराजन को भी पुलिस हिरासत ने हिरासत में लिया था।

केके रंजन (कन्नूर) : सीपीएम कार्यकर्ताओं की ओर से की गई पत्थरबाजी में केके रंजन के सिर पर गहरी चोट लगी और एक दिसंबर को उनकी मौत हो गई।

विनोद कुमार (कन्नूर) : एक दिसंबर, 2013 को आरएसएस कार्यकर्ता विनोद कुमार की हत्या मार्च निकालने के दौरान सीपीएम कार्यकर्ताओं ने की।

साजिन मोहम्मद (तिरुअनंतपुरम) : 30 अगस्त, 2013 को एक कॉलेज में एसएफआई और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प के दौरान बम हमले में मारे गए।

सुजीत (कन्नूर) : 19 फ़रवरी 2016 को आरएसएस कार्यकर्ता सुजीत की उनके परिवार के सामने ही कथित सीपीएम कार्यकर्ताओं ने गला काटकर हत्या कर दी।

नेडुमकंडम अनीश रंजन (इडुक्की) : 18 मार्च, 2012 को एसएफआई के 23 साल के नेडुमकंडम अनीश रंजन की हत्या दो सीपीएम कार्यकर्ताओं ने चाकू मारकर की थी।

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