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‘डेटा लीक’ पर झूठ बोल रही कांग्रेस, देखिये 10 सबूत!

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कैंब्रिज एनालिटिका और कांग्रेस के कनेक्शन को लेकर देश में कोहराम मचा हुआ है। कांग्रेस पर आरोप है कि उसने चुनाव जीतने के लिए कैंब्रिज एनलिटिका (सीए) से सौदा किया और आम लोगों के डेटा चुराए। हालांकि कांग्रेस मना कर रही है, लेकिन अब तो फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने भी मान लिया है कि डेटा लीक हुई है। 

दरअसल सत्ता के खेल में जीत हार लगी रहती है और राजनीतिक दल तमाम रणनीति बनाते हैं। जनता तक अपना संदेश पहुंचाने के लिए कई माध्यमों का इस्तेमाल भी करते हैं, परन्तु कांग्रेस ने चुनाव जीतने के लिए तो देश के करोड़ों लोगों की गोपनीयता ही दांव पर लगा दिया और कैंब्रिज एनलिटिका कंपनी के साथ मिलकर भारत के 5 करोड़ से अधिक लोगों का पर्सनल डाटा लीक कर दिया।

चुनावों में लगातार हार की हताशा और खीझ से कांग्रेस देश के लोगों के साथ ऐसा धोखा करेगी ये किसी ने सोचा तक नहीं था। हालांकि कांग्रेस ऐसे किसी ‘गठजोड़’ से इनकार कर रही है और भाजपा पर साजिश रचने का आरोप लगा रही है, लेकिन हमने जब पड़ताल की तो एक के बाद एक सबूत सामने आते गए जिससे ये साफ हो गया कि कांग्रेस इस मसले पर झूठ बोल रही है।

दरअसल ये मामला महज धोखा, विश्वासघात और झूठ का ही नहीं बल्कि उस फर्जीवाड़े का भी है जो कांग्रेस ने आम लोगों के साथ किया है। आइये हम सिलसिलेवार सबूतों को जरिये जानते हैं कि कांग्रेस इस मसले पर कैसे झूठ बोल रही है-

सबूत नंबर 1
कांग्रेस पार्टी के करीबी रहे शहजाद पूनावाला ने साफ माना है कि कांग्रेस ने कैंब्रिज एनालिटिका की मदद ली है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, “2017 में अखबारों में ये सब बातें छपी थीं। अगर उनका कंपनी से कोई रिश्ता नहीं था तो वे उस समय क्यों कुछ नहीं बोले। साल 2011-12 में ओवलेनो के सीईओ मेरे संपर्क में रहे थे और उन्होंने मुझसे कहा था कि कांग्रेस को उनके साथ मिलकर कुछ काम करना चाहिए।”

सबूत नंबर 2
शहजाद पूनावाला ने एक और खुलासा करते हुए कहा, “इसके सबूत हैं कि ओवलेनो के लिए काम करने वाले अमरीश त्यागी राहुल गांधी और उनकी टीम के साथ संपर्क में हैं।” दरअसल अमरीश त्यागी ओवलेनो बिजनेस इंटरनेशनल के मालिक हैं और जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी के बेटे हैं। केसी त्यागी ने भी माना है कि वह कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी के लिए काम करते हैं।

सबूत नंबर 3
28 सितंबर, 2017 की INC 42 वेबसाइट पर – ”Indian Opposition Party May Seek Help From Big Data Analytics Startup Cambridge Analytica For 2019 Polls’’ पर ये खबर छपी थी, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने तब भी इस बात का खंडन नहीं किया था।

सबूत नंबर 4
इसके बाद Sunday Guardian में 12 नवंबर, 2017 को छपी इस खबर को देखिए तो साफ समझ में आ जाता है कि आज कांग्रेस पार्टी इनकार कर रही है, परन्तु सत्य यही है कि उसने कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी से करार किया था और इसका इस्तेमाल चुनाव में भी किया।

सबूत नंबर 5
कांग्रेस का दोहरा चरित्र आप इससे भी समझ सकते हैं कि जब 21 मार्च को डेटा लीक की खबरों को बीजेपी ने तूल दिया तो कांग्रेस पार्टी ने रिएक्ट किया। लेकिन 19 मार्च, 2018 की Money control में छपी इस रिपोर्ट पर कांग्रेस ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

सबूत नंबर 6
कांग्रेस कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी से अपने रिश्तों को लेकर मना कर रही है, लेकिन 9 जुलाई 2017 की इस रिपोर्ट को पढ़िये। नवभारत टाइम्स में छपी ये खबर साबित करती है कि कांग्रेस पार्टी ने इस कंपनी से संपर्क किया था, और अगर ऐसा नहीं था तो कांग्रेस ने तब इस बात से इनकार क्यों नहीं किया?

सबूत नंबर 7
कांग्रेस लगातार इस बात से इनकार कर रही है कि कांग्रेस का कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी से कोई संपर्क नहीं किया है और न ही कोई डाटा लीक किया है। लेकिन 10 सितंबर, 2017 को नवोदय टाइम्स में छपी इस खबर को देखिये। कांग्रेस ने तब भी ऐसी किसी बात से इनकार नहीं किया था।

सबूत नंबर 8
9 अक्टूबर, 2017 को नवभारत टाइम्स में ही दोबारा ये खबर छपी थी कि कांग्रेस कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी से मदद ले रही है और इसका इस्तेमाल चुनाव जीतने के लिए कर रही है। तब इस अखबार ने कांग्रेस के लिए इसे ब्रह्मास्त्र कहा था। तथ्य ये भी है कि तब भी कांग्रेस ने इस खबर से इनकार नहीं किया था।

सबूत नंबर 9
झारखंड यूथ कांग्रेस के चुनावों में भी ग्राउंड सर्वे का काम अमरीश त्यागी की कंपनी ओवलेने बिजनेस इंटरनेशनल ने किया था। जेडीयू के नेता और अमरीश त्यागी के पिता केसी त्यागी ने भी माना है कि ओवलेनो बिजनेस इंटरनेशनल ने यूथ कांग्रेस के लिए काम किया था।

सबूत नंबर 10
गुजरात चुनाव में सोशल मीडिया कैंपेन के लिए भी कांग्रेस पार्टी ने कैंब्रिज एनालिटिका की मदद ली थी। इस बाबत भी छपी खबरें सुर्खियों में रही थी, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने तब भी कैंब्रिज एनालिटिका से अपने संबंधों के बारे में मना नहीं किया था।

बहरहाल खबरें तो ऐसी भी हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हराने के लिए कांग्रेस ने 68 पत्रकारों को हायर किया है। इनमें कई नामचीन पत्रकार भी शामिल हैं। इसके साथ ही ये भी खबरें हैं कि कई ब्यूरोक्रेट्स और लेखकों को कांग्रेस ढाई लाख रुपये महीने सिर्फ इस बात के लिए दे रही है कि वे पीएम मोदी के विरुद्ध माहौल बनाएं। 

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