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देश को बदनाम कर अपनी राजनीति चमका रही कांग्रेस

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कांग्रेस का पाकिस्तान प्रेम किसी से छिपा नहीं है। इनके नेता मणिशंकर अय्यर हर चुनाव के वक्त पाकिस्तान जाकर मदद मांगते हैं। भाजपा को हराने के लिए वहां के मुसलमानों की मदद मांगते हैं। आतंकी हाफिज सईद भी कांग्रेस की तारीफ में कसीदे गढ़ते हैं। दिग्विजय सिंह, सलमान खुर्शीद, पी चिदंबरम और शशि थरूर जैसे कई नाम हैं जो पाकिस्तान से भारत की तुलना कर देश को बदनाम करने की राजनीति करते रहे हैं। कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी का पाकिस्तान प्रेम भी कई बार छलक आता है। एक बार फिर उन्होंने अपने पाकिस्तान प्रेम का इजहार खुलेआम कर दिया है। 

17 मई को जब राहुल गांधी छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे, तो वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना करते हुए देश को ही ‘नीच’ कहने लगे। इसी क्रम में राहुल गांधी ने भारतीय न्यायपालिका का मजाक उड़ाते हुए उसकी तुलना पाकिस्तान की न्यायपालिका से कर दी। उन्होंने कहा, ”आरएसएस देश की हर संस्थान में अपना रास्ता बना रही है। ऐसा पाकिस्तान या तानाशाही में होता है।”

जाहिर है राहुल गांधी का यह बयान इसलिए आपत्तिजनक है, क्योंकि पाकिस्तान एक असफल राष्ट्र है, और वहां लोकतंत्र जैसी कोई चीज नहीं है। वहां की न्यायपालिका भी निष्पक्ष नहीं है और सेना के निर्देश पर चलती।  वहां की सरकार भी लोकतांत्रिक नहीं हैै, क्योंकि वह एक डमी सरकार है, लेकिन राहुल गांधी को फिर भी लगता है कि भारत भी पाकिस्तान के समकक्ष खड़ा है। 

साफ है कि राहुल गांधी का यह बयान देश के प्रति उनकी मानसिकता को दर्शाता है। सवाल उठ रहा है कि वे अपने भारत की तुलना-पाकिस्तान से करके आखिर क्या संदेश देना चाहते हैं? सवाल ये भी कि क्या वे अपने खास वोट बैंक को संदेश देना चाह रहे हैं कि पाकिस्तान से अलग नहीं है भारत? 

दरअसल यह आपत्तिजनक इसलिए भी है, क्योंकि भारत की न्यायपालिका  ही आधी रात में भी उठकर किसी केस की सुनवाई करने का माद्दा रखती है, तो यह देश की निष्पक्ष न्यायपालिका का बेहतरीन उदाहरण है। राहुल गांधी को यह तो अवश्य पता होना चाहिए कि जिस न्यायाधीश की निष्पक्षता पर वह सवाल उठा रहे थे, उन्होंने ही कांग्रेस पार्टी कि याचिका पर सुनवाई के लिए आधी रात में बेंच का गठन किया था।

गौरतलब है कि कोई दिन ऐसा नहीं बीतता है जब वे देश के सम्मानीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भला-बुरा कहते हैं। उनकी पार्टी के लोग हर दिन उन्हें गालियां भी दे रहे हैं, तब भी वे देश के नेतृत्व को तानाशाह कह रहे हैं।

बहरहाल देश के भीतर सत्ता संघर्ष के लिए राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहते हैं। एक दूसरे को मात देने के लिए कई रणनीतियां बनाते हैं। लेकिन कांग्रेस पार्टी सत्तालोलुपता में इतनी नीचता पर उतर आई है कि देश को बदनाम करने में ही अपनी शान समझने लगी है। आइये हम ऐसे ही कुछ उदाहरणों पर नजर डालते हैं- 

मणिशंकर अय्यर का मोदी विरोध और पाकिस्तान प्रेम
2016 में होने वाले असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल विधानसभा चुनाव होने वाले थे। इससे पहले कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने 6 नवंबर, 2015 को पाकिस्तानी टीवी चैनल ‘दुनिया’ पर गुहार लगाते हुए कहा, ”इनको (बीजेपी सरकार) हटाइए, हमें ले आइए और कोई रास्ता नहीं है।” जाहिर है मणिशंकर अय्यर का सीधा इशारा था कि भारत की सत्ता को अस्थिर करने के लिए पाकिस्तान कांग्रेस की सहायता करे और देश में मोदी सरकार को हटाने में मदद करे।

गुजरात चुनाव में पाकिस्तानी साजिश का पर्दाफाश
दिसंबर, 2017 में गुजरात चुनाव के दौरान कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर ने पीएम मोदी को ‘नीच’ कहा था। लेकिन क्यों, इसका पता तब लगा जब 10 दिसंबर, 2017 को खुलासा हुआ कि कांग्रेस के नेताओं ने पाकिस्तानी नेताओं और अधिकारियों से मुलाकात के बाद यह सब किया गया था। दिसंबर के पहले हफ्ते में मुलाकात से कांग्रेस ने इनकार, लेकिन पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने स्वयं ही स्वीकार किया कि कांग्रेस नेताओं और पाकिस्तानियों की मुलाकात हुई थी। दरअसल आरोप यह है कि पाकिस्तान की सहायता से कांग्रेस अहमद पटेल को गुजरात का सीएम बनाना चाह रही थी।

पाकिस्तान परस्त कांग्रेस के ‘दिग्गज’ दिग्विजय सिंह
लोकसभा चुनाव, 2014 से पहले कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह पाकिस्तानी आतंवादी हाफिज सईद को ‘जी’ और ‘साहब’ शब्द से संबोधित किया था। 2016 मों तो उन्होंने पाकिस्तानियों को खुश करने के लिए भारत के कब्जे वाला कश्मीर तक कह दिया था। गुजरात चुनाव से पहले दिग्विजय सिंह ने अपने पाकिस्तानी आकाओं को खुश करने के लिए ये भी कहा था कि भारतीय सेना कश्मीरियों को मारती है।

सलमान खुर्शीद का पाकिस्तान से एकतरफा मोहब्बत
नवंबर, 2015 में बिहार चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस सरकार में विदेश मंत्री रहे सलमान खुर्शीद ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत बंद होने के लिए पाकिस्तान नहीं, बल्कि भारत सरकार जिम्मेदार है। इस्लामाबाद के जिन्ना इंस्टीट्यूट में उन्होंने कहा, ”पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ का पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होना उनकी दूरदर्शिता थी, लेकिन मोदी सरकार बातचीत का माहौल बनाने में नकाम रही है।‘’

पाकिस्तान प्रेम में देश का अपमान करते रहे मनमोहन सिंह
जुलाई, 2009 में मिस्र के शर्म-अल-शेख में तत्कालीन पाकिस्तानी पीएम युसूफ रजा गिलानी के साथ मनमोहन सिंह की बैठक के बाद जारी साझा बयान में भारत की ओर से पाकिस्तान के आरोपों को स्वीकार कर लिया गया था। मनमोहन सिंह की इस करतूत के चलते देश को न सिर्फ शर्मिंदा होना पड़ा, बल्कि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ झूठा प्रोपेडेंडा करने का एक हथियार भी मिल गया। सितंबर, 2006 में हवाना में उन्होंने पाकिस्तान परस्ती में ये तक कह दिया कि भारत की तरह पाकिस्तान भी ‘आतंकवाद से पीड़ित’ है।

कर्नाटक में मुसलमानों के ध्रुवीकरण के प्रयास
वरिष्ठ कांग्रेसी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने मुसलमानों से विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को वोट देने की अपील की। उन्होंने कहा, “भाजपा को किसी भी हाल में कर्नाटक की सत्ता में नहीं आने देना चाहिए। मुसलमानों को बड़ी तादाद में एकजुट होकर कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करना चाहिए।” जाहिर है आजाद का यह बयान सीधे तौर पर मुस्लिम मतदाताओं की गोलबंदी का प्रयास है।

नेतन्याहू की यात्रा से पहले कांग्रेस ने शेयर किया बेहूदा वीडियो
15 जनवरी, 2018 को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी 6 दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा पर भारत आए। जब इजरायल के प्रधानमंत्री देश की सरजमीं पर कदम रख रहे थे, उसी वक्त कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर प्रधानमंत्री मोदी के बारे में एक बेहूदा वीडियो शेयर किया। इस ट्विटर में पीएम मोदी को तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ गले मिलते हुए दिखाया गया था, और पीएम मोदी की गले मिलने की कूटनीति का मजाक उड़ाया गया था। कांग्रेस पार्टी ने इस शर्मनाक वीडियो में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, तुर्की के राष्ट्रपति रज्जब, फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वां ओलांद के साथ पीएम मोदी के गले मिलने के दृश्यों को दिखाया था।

राहुल ने बहरीन में देश की नीतियों की आलोचना की
8 जनवरी, 2015 को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बहरीन के दौरे पर थे। वहां आर्गेनाइजेशन ऑफ पीपुल ऑफ इंडियन ओरिजिन की एक बैठक में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार के विरोध में कई बातें कहीं। राहुल ने रोजगार संकट, गिरती जीडीपी, नोटबंदी के गलत आंकड़े पेश कर और असहिष्णुता का मुद्दा उठाकर अपनी तुच्छ मानसिकता का परिचय दिया।

अमेरिका में भी राहुल ने किया था भारत को बदनाम
सितंबर, 2017 में जब राहुल गांधी अमेरिका दौरे पर थे, तो उन्होंने यूएस की बर्कले यूनिवर्सिटी में भाषण देते समय, तमाम नीतियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उस वक्त भी राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगाकर, विदेश में भारत को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।


कश्मीर में आतंकियों पर कार्रवाई का विरोध
28 अक्टूबर, 2017 को पी चिदंबरम ने कहा, ”जम्मू-कश्मीर के लोगों से मेरी बातचीत के जरिए मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि जब भी वे आजादी की मांग करते हैं तो दरअसल, इसमें ज्यादातर लोगों की आजादी का मतलब स्वायत्तता से होता है।”  कांग्रेस के पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम के इस बयान ने शांत होते कश्मीर को एक बार फिर सुलगा दिया। पी चिदंबरम के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस कश्मीर में आतंकियों की मांग को समर्थन करती है। स्पष्ट है कि भारत से अलग होने और पाकिस्तान में मिलने की ख्वाहिश रखने वालों को पी चिदंबरम उकसाया। इससे न देश की बदनामी हुई बल्कि भारत सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए जाने लगे। 

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डोकलाम मामले पर सरकार के स्टैंड का विरोध
जून, 2017 में भारत-चीन के बीच 73 दिनों तक सिक्किम से सटे डोकलाम क्षेत्र जबर्दस्त तनातनी का माहौल रहा। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जिन हालातों में चोरी-छिपे भारत में मौजूद चीन के राजदूत लिओ झाओहुई से मिलने पहुंच गए उसने सारे देश को हैरान कर दिया। लेकिन पार्टी ने पहले मुलाकात से इनकार किया और फिर स्वीकार किया। सवाल उठने लगे कि राहुल और अन्य कांग्रेसी नेताओं के मन में कुछ गलत नहीं था तो उनकी पार्टी को पहले इस मुलाकात पर झूठ क्यों बोलना पड़ा?

चीनी राजदूत से मिले राहुल के लिए चित्र परिणाम

आतंकियों की फांसी पर भी पॉलिटिक्स
संसद पर हमले के दोषी आतंकी अफजल गुरु की फांसी पर भी कांग्रेस ने पॉलटिक्स की थी। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा था कि संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देना गलत था और उसे गलत तरीके से दिया गया। इतना ही नहीं यही कांग्रेस है जिनके नेताओं ने याकूब मेनन की फांसी पर भी आपत्ति जताई थी।

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