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जनता जनार्दन के मूड से घबराई कांग्रेस, अपनी तय हार को भांपकर ईवीएम हैकिंग का प्लॉट गढ़ने में जुटी

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लोकसभा चुनावों की अधिसूचना जारी होने में अभी करीब डेढ़ महीने का वक्त है। चुनावों के लिए मतदान का दौर शुरू होने में भी लगभग तीन महीने का समय बचा है। लेकिन कांग्रेस को अभी से चुनावी हार का डर सताने लगा है। इसलिए हार की वजह बताने के लिए उसने ईवीएम हैकिंग के अपने प्लॉट पर काम करना शुरू कर दिया है। उसके इसी प्लॉट का हिस्सा बनते हुए विदेश में बैठे एक तथाकथित साइबर एक्सपर्ट ने बिना किसी आधार के ये दावा कर दिया कि 2014 के चुनावों में ईवीएम की हैंकिंग हुई थी। आइए, जानने की कोशिश करते हैं कि हर तरह से खोखला साबित हुआ यह दावा क्यों कांग्रेस पर बुरी तरह से भारी पड़ने वाला है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कपिल सिब्बल कैसे
सोमवार को लंदन में जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईवीएम हैकिंग का दावा किया गया, उसमें कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल मौजूद थे। सवाल है कि वे आखिर किस हैसियत से वहां थे? दरअसल कपिल सिब्बल संयोगवश नहीं पहुंचे थे। उन्हें राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने सुनियोजित तरीके से वहां भेजा था। राहुल और सोनिया अपने इस नेता का इस्तेमाल किस तरह से खुराफाती चाल चलने में करते हैं, इसका ये एक और नमूना है। पूरा देश देख चुका है कि सिब्बल ने राम जन्मभूमि पर क्या-क्या किया था। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग लाने की कोशिश करने वाले भी वही रहे थे।

बिना सबूत सनसनीखेज दावा
ईवीएम हैकिंग के दावे करने वाला कथित अमेरिकी एक्सपर्ट सैयद शुजा भारतीय मूल का है। उसने यहां तक दावा कर दिया कि बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे की मौत हादसा नहीं,बल्कि हत्या थी, क्योंकि वे ईवीएम हैकिंग के बारे में जानते थे। गौर करने वाली बात है कि एम्स के डॉक्टर ने मुंडे का पोस्टमॉर्टम किया था और बताया था कि उनकी मौत गर्दन में चोट लगने से हुई थी। अब सवाल है कि इतना सनसनीखेज दावा बिना किसी सबूत के किया जाए, तो उसे क्या कहेंगे? यह तो वही बात हुई कि कोई खुद को साइबर एक्सपर्ट बताते हुए ये दावा कर जाए कि भारत में 2004 और 2009 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस नेतृत्व की सरकार ईवीएम हैकिंग के चलते बनी थी।

मतदाताओं के अपमान का प्लॉट बनाने में कौन-कौन
बताया जा रहा है कि हैकिंग के दावे वाले इस कार्यक्रम के प्रायोजक कांग्रेसी थे और इसे आयोजित किया था आशीष रे नामके एक समर्पित कांग्रेसी ने। प्रधानमंत्री मोदी के विरोधी ईवीएम हैकिंग को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हैरानी की बात है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के बार-बार इस दावे को खारिज करने के बावजूद वे इससे बाज नहीं आ रहे। यह देश के करीब 90 करोड़ मतदाताओं का अपमान है। ऐसे प्लॉट सिर्फ कांग्रेस और कथित साइबर एक्सपर्ट बनाने में नहीं लगा है। इस खेल में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ चुनावी सुपारी लेने वाले देश के कई पत्रकार भी शामिल हो सकते हैं। उनके रोल का भी पर्दाफाश होना जरूरी है।

हैकिंग संभव नहीं: चुनाव आयोग
चुनाव आयोग ने कहा है कि भारत में मतदान में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम हैकप्रूफ है। आयोग की रिलीज में ये भी कहा गया है, ”इस बात को दोहराने की आवश्यकता है कि ये ईवीएम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड तैयार करते हैं। उस दौरान कड़ी निगरानी और कड़ी सुरक्षा रहती है। साल 2010 में गठित तकनीकी विशेषज्ञों की कमेटी हर चरण पर तय मानकों के अनुसार कड़ी निगरानी करती है।” आयोग का कहना है कि लंदन में हैकथॉन आयोजित करवाकर इलेक्शन कमीशन की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया है। इसलिए इसको लेकर कानूनी कार्रवाई के बारे में सोचा जा रहा है।

पांच सवाल:

1. गोपीनाथ मुंडे पर कथित एक्सपर्ट के दावे पर कोई सबूत क्यों नहीं

2. 2014 के चुनावों में यूपीए के सत्ता में रहते हैकिंग कैसे

3. सैयद शुजा ने क्यों नहीं किया चुनाव आयोग की चुनौती का सामना

4. क्या कांग्रेस अपने जीते राज्यों में फिर से चुनाव करवाएगी

5. शुजा की तरह 2004 और 2009 के चुनावों में भी ईवीएम हैकिंग का दावा क्यों नहीं किया जा सकता है

विदेशी धरती से कांग्रेस की चुनावी साजिश
चुनाव आयोग ने ईवीएम पर सवाल उठाने वाली सभी पार्टियों को ईवीएम हैकिंग का चैलेंज भी दिया था। इस चैलेंज को स्वीकार करने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पहुंची तक नहीं थी। एनसीपी और सीपीएम पहुंची भी थीं तो चैलेंज में हिस्सा नहीं लिया। वहीं अब एक बार फिर साबित हो गया है कि कांग्रेस पार्टी को चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है। यह दरअसल विदेश की धरती से लोकसभा चुनाव प्रभावित करने की कांग्रेसी साजिश का हिस्सा है। इस कोशिश में पहले वो ब्रिटिश एनालिटिका का इस्तेमाल भी कर चुकी है। कांग्रेस दरअसल अपने सियासी फायदे के लिए देश की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाने में लगी हुई है। चुनावी मौसम में कांग्रेस के इस पैंतरे पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ”2019 के चुनाव में कांग्रेस हारने का बहाना अभी से ढूंढ़ रही है। यह भी अब पता चल गया है कि राहुल जी होमवर्क नहीं करते है, पूरी टीम भी होमवर्क नहीं करती है।”

कांग्रेस डरी है जनता-जनार्दन के मूड से
कांग्रेस जनता जनार्दन के मूड को भांप चुकी है। पार्टी ने ये महसूस कर लिया है कि पिछले विधानसभा चुनावों में उसे भले थोड़ी-बहुत कामयाबी मिल गई हो, लेकिन लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी की छवि के सामने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बेहद बौने हैं। कांग्रेस को उन दलों और नेताओं का साथ भी नहीं मिल रहा, जिनके दम पर वो चुनावी ताल ठोक सकती थी। बाकी पार्टियों में कांग्रेस के साथ गठबंधन से परहेज साफ तौर पर देखा जा रहा है। पूरे हालात में अपनी डूबती हुई चुनावी नैया को देखकर कांग्रेस हताश है। अपनी सुनिश्चित हार की वजहों का प्लॉट गढ़ने में ही उसे अपनी भलाई लग रही है। 

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