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देश के गुनहगारों को भगाने में कांग्रेस का हाथ!

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नीरव मोदी, विजय माल्या, ललित मोदी, एंडरसन, दाऊद इब्राहिम… ये ऐसे नाम हैं जिसने देश से दगा किया और मौका लगते ही विदेश भाग गए। इन सभी के साथ एक बात कॉमन ये है कि इनके कांग्रेस के नेताओं और सरकारों के साथ अच्छे संबध रहे हैं। देश के इन गुनहगारों को कांग्रेस ने न केवल घोटाले करने, आतंकवाद फैलाने जैसे अपराध करने की आजादी प्रदान की, बल्कि इन्हें देश से भगाने में भी मदद की। आइये जानते हैं कि आखिर खेल क्या है-

ललित मोदी को कांग्रेस ने भगाया
ललित मोदी पर 2009 में आईपीएल में वित्तीय घोटाले के आरोप लगे और तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 2010 में फेमा के तहत मुकदमा दर्ज किया। जाहिर है इसके तहत मामला उन्हें बचाने के लिए किया गया। 2014 के मई तक कांग्रेस की सरकार ही केंद्र में रही, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अगर कांग्रेस की नीयत ठीक रहती तो ललित मोदी पर मनी लॉंड्रिंग के तहत कार्रवाई की जाती जिससे रुपये रिकवर होने के मौके अधिक होते और उन्हें सजा भी मिलती, लेकिन कांग्रेस सरकार ने ढिलाई बरती। अगर कांग्रेस चाहती तो उनके विरुद्ध रेड कॉर्नर या ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी कर सकती थी, लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया और उसे देश छोड़ने में मदद की। इन तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी से ललित मोदी का कितना करीब का रिश्ता है।

विजय माल्या को कांग्रेस ने दिया प्रश्रय
शराब कारोबारी विजय माल्या को 8,040 करोड़ का लोन उस वक्त दिया गया जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। माल्या को सितंबर 2004 में लोन दिया गया था और फरवरी 2008 में उसकी समीक्षा की भी की गई थी। 2009 में कांग्रेस सरकार ने इतनी बड़ी राशि को डूबी हुई रकम बता दिया और उसे एनपीए घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं कांग्रेस सरकार ने विजय माल्या को राज्यसभा भेजकर सम्मानित भी किया। परन्तु, मोदी सरकार ने माल्या पर शिकंजा कसा तो वह लंदन भाग गया। अब तक कई जांच एजेंसियों से माल्या को समन भेजा जा चुका है। लेकिन मोदी सरकार ने उनका पीछा नहीं छोड़ा है, लेकिन आप ये साफ समझ सकते हैं कि जिस माल्या के गुनाह जानते हुए भी कांग्रेस उन्हें राज्यसभा भेज सकती है तो क्या उन्हें भगाने में मदद नहीं कर सकती? ऐसे भी माल्या ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और वर्तमान अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए अपनी किंगफिशर एयरलाइन्स में खास सुविधाएं दे रखीं थी। सोनिया गांधी और राहुल गांधी को इस एयरलाइन्स में बिजनेस क्लास की यात्रा भी मुफ्त ही मुहैया थीं।

नीरव मोदी को कांग्रेस ने साजिश के तहत भगाया
नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को गलत तरीके से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) जारी करने वाले पूर्व पीएनबी अधिकारी गोकुलनाथ शेट्टी ने सीबीआई को पूछताछ के दौरान बताया कि लेटर ऑफ अंडरटेकिंग 2008 से ही जारी किए जा रहे थे। सीबीआई ने इस बात की जानकारी स्पेशल कोर्ट को भी दी है। जाहिर है शेट्टी के इस खुलासे से साफ है कि नीरव मोदी द्वारा किया गया यह फर्जीवाड़ा कांग्रेस की सरकार के समय से ही चल रहा था। इतना ही नहीं 2013 में जब इलाहाबाद बैंक के तत्कालीन निदेशक दिनेश दुबे ने गलत तरीके से मेहुल चोकसी को ऋण दिये जाने पर आपत्ति जताई थी तो उन्हें धमकी दी गई और उनसे जबरन इस्तीफा भी ले लिया गया। जाहिर है कांग्रेस ने इस घोटाले को छिपाने की हरसंभव कोशिश की। बाद में जब केंद्र सरकार सख्त हुई तो नीरव मोदी को देश से भाग जाने में भी मदद कांग्रेस ने ही की है, ताकि मोदी सरकार पर राजनीतिक वार किए जा सकें।

भोपाल गैस कांड के अभियुक्त को कांग्रेस ने भगाया
भोपाल यूनियन कार्बाइड फैक्टरी से दो-तीन दिसंबर 1984 की मध्य रात्रि में जहरीली गैस निकलने से चार हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई। इस फैक्टरी का मालिक एंडरसन को भोपाल पुलिस ने चार दिन बाद गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन कुछ घंटों के बाद ही उसे रिहा कर दिया गया। सवाल उठ रहे हैं कि क्यों और कैसे? दरअसल उस वक्त केंद्र और राज्य दोनों ही जगहों पर कांग्रेस की ही सरकार थी और एक साजिश के तहत उसे भगा दिया गया। उसके बाद वह फिर कभी भारत नहीं आया और बाद में अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। कहा तो ये जा रहा है कि उसे भगाने के एवज में अर्जुन सिंह जैसे दिग्गज कांग्रेसी नेताओं को मोटी रकम दी गई। एंडरसन की वर्ष 2013 में अमेरिका में मौत हो गयी, लेकिन कांग्रेस की सरकार उसे वापस लाने की इच्छाशक्ति तक नहीं दिखा पाई।

दाऊद इब्राहिम को कांग्रेस ने दिया सेफ वे
1993 मुंबई ब्लास्ट पूरा देश हिल उठा था। जांच के बाद सामने आया कि इसमें दाऊद का हाथ है। दाऊद ने ही पाकिस्तान के साथ मिलकर साजिश रची थी और इसे अंजाम दिया था टाइगर मेमन ने। उस दौर में भी केंद्र से लेकर राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। आरोप तो ये है कि कांग्रेस ने ही दाऊद को देश से भाग जाने के लिए सुरक्षित रास्ता दिया। इसके बाद राज्य और केंद्र में कांग्रेस की सरकारें रहीं, लेकिन पार्टी ने दाऊद इब्राहिम को वापस लाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। कांग्रेस के पूर्व नेता रोमेश शर्मा के तो दाऊद इब्राहिम के साथ रिश्ते जगजाहिर थे।

सिख आतंकियों को भी कांग्रेस ने भेजा विदेश
1980 के शुरुआत में जब खालिस्तान आंदोलन चरम पर था तो कांग्रेस ने कई सिख आतंकवादियों को विदेश आने जाने की छूट दे रखी थी। लेकिन ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद जब सिखों ने इंदिरा गांधी का विरोध करना शुरू किया तो कांग्रेस मुश्किल में पड़ गई। आरोप ये है कि जब केंद्र की सरकार कठघरे में घिरने लगी तो कई कट्टर सिख आतंकियों को देश छोड़ने का मौका दिया।

अलगाववादी नेताओं को भी कांग्रेसी देते हैं तरजीह
कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की पहुंच कांग्रेसी नेताओं के घर तक हुआ करती थी। कांग्रेस नेताओं से अच्छे संबंधों का ही परिणाम था कि अलगाववादियों को पाकिस्तान जाने की भी इजाजत आसानी से मिलती थी। वे लंदन और न्यूयॉर्क में भी भारतीय नागरिक बनकर जाते और भारत के विरोध में ही बातें करते थे। कांग्रेस की सरकारों इनसे अगाध प्रेम उमड़ता रहा है। 

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