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देश के दुश्मनों को क्यों गले लगाती है कांग्रेस?

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कांग्रेस की राजनीति का आधार क्या देश के दुश्मनों को गले लगाना है? शब्द जरूर सख्त लग रहा होगा, लेकिन कांग्रेस और उसके ‘युवराज’ की हरकतों ने ऐसे शब्दों के इस्तेमाल करने की इजाजत दी है। एक तरफ सिक्किम की सीमा पर देश के जवान चीनी सैनिकों की दबंगई का विरोध कर रहे हैं। चीन की राजनीतिक दादागीरी का पीएम मोदी हर स्तर पर प्रतिकार कर रहे हैं, उसका जवाब दे रहे हैं। लेकिन कांग्रेस देश से ‘दुश्मनों’ को गले लगाने पर तुली हुई है। भारत और चीन में युद्ध जैसे हालात में भी कांग्रेस के ‘युवराज’ चीनी दूतावास में जाकर वहां के राजदूत से मुलाकात कर रहे हैं। बात इतनी होती तो विवाद नहीं बढ़ता, लेकिन कांग्रेस ने यहां भी नौटंकी कर दी। पहले मिलने की बात से इनकार किया, फिर इकरार भी कर लिया। अब देश सवाल पूछ रहा है कि आखिर ऐसा क्यों?

चीनी दूतावास ने की थी बैठक की पुष्टि
दरअसल चीनी दूतावास के WeChatअकाउंट ने 8 जुलाई को राहुल की बैठक की पुष्टि की थी, जबकि कांग्रेस ने राहुल गांधी की चीनी राजदूत से मुलाकात करने की खबरों को ‘फर्जी’ करार देते हुए इसे सिरे से खारिज किया था। हालांकि सच यह है कि भारत में चीनी दूतावास ने बताया कि 8 जुलाई को राजदूत लियो झाओहुई के साथ में राहुल गांधी से मिले। लेकिन कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि कुछ समाचार चैनल भारत में चीन के राजदूत लियो झाओहुई के साथ राहुल गांधी की कथित मुलाकात की झूठी खबरें दिखा रहे हैं।

कांग्रेस ने फिर मारी पलटी
विवाद बढ़ा, बातें होने लगीं और सबूत भी सामने आने लगे तो कांग्रेस ने पलटी मार ली। कुछ देर के बाद रणदीपर सुरजेवाला सामने आए और उन्होंने खुद ही अपनी बात का खंडन कर दिया और कहा, ”सिर्फ चीनी राजनयिक ही राहुल गांधी से नहीं मिले, बल्कि भूटान के राजनयिक ने भी उनसे मुलाकात की ।” लेकिन लोगों के सवाल तो और भी तीखे हो गए। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है।

राहुल को सवाल पूछना पड़ा महंगा
बढ़ते विवादों के बीच राहुल गांधी के कार्यालय के एक और ट्वीट ने आग में घी का काम कर दिया। दरअसल राहुल गांधी ने चीन के मामले में पीएम मोदी के कुछ बयान नहीं आने को लेकर सवाल उठा दिए। लेकिन राहुल गांधी अभी राजनीति की ककहरा पढ़ रहे हैं तो उन्हें विदेश नीति की समझ कहां से आएगी? लेकिन राहुल के ट्वीट पर तो लोगों ने ऐसी की तैसी कर दी।

ट्वविटर पर जमकर हुई खिंचाई
बहरहाल कांग्रेस के इनकार और इकरार के बीच राजनीति ने तूल पकड़ लिया। लेकिन सबसे बड़ा नुकसान तो देश का हो गया। वो इसलिए कि जब चीन हमें युद्ध की धमकी दे रहा है तब भारत को एक दिखना चाहिए,लेकिन कांग्रेस ने मोदी सरकार के सख्त रूख की हंसी उड़ाने का चीन को मौका दे दिया। हालांकि कांग्रेस पार्टी इस मामले में पूरे तौर पर अलग-थलग हो गई है और लोगों के निशाने पर है।


मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान से मांगी थी मदद
दरअसल कांग्रेस के गिरने की कोई हद नहीं है। देशद्रोहियों के साथ काग्रेस की मिलीभगत है। कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान जाकर मोदी को हटाने के लिए उनकी मदद मांगते हैं। तो क्या कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भी कांग्रेस के दूसरी-तीसरी कतार के नेताओं से भी गिरी सोच रखते हैं।

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