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केजरीवाल जी…मोहल्ला क्लिनिक राशन कार्ड बनाने के लिए है क्या?

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर दिल्ली से बाहर हैं। गोवा और पंजाब चुनाव के कारण पिछले दो महीने से उनके साथ उनका पूरा मंत्रिमंडल दिल्ली से बाहर था। चुनाव खत्म होने पर आप संयोजक फिर छुट्टी पर निकल गए हैं। इस बार वे इलाज के लिए दिल्ली से बाहर हैं। वे इलाज के लिए बेंगलुरू के जिंदल प्राकृतिक उपचार केंद्र गए हैं। केजरीवाल के साथ उनकी पत्नी और आप प्रवक्ता संजय सिंह भी उपचार के लिए वहां पहुंचे हैं। वे यहां 15 से 18 दिन तक यहां रहेंगे।

केजरीवाल के इलाज के लिए दिल्ली छोड़कर बार-बार बेंगलुरू जाने से कई सवाल उठने लगे हैं।

1. दिल्ली में इलाज की सुविधा
दिल्ली में इलाज के हिसाब से एम्स और कई अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अस्पताल हैं। दुनिया भर के लोग यहां इलाज के लिए आते हैं। फिर दिल्ली में आप सरकार मोहल्ला क्लिनिक को इलाज के लिए बेहतरीन बताती है, तो फिर वे यहां अपना इलाज क्यों नहीं कराते? दिल्ली के अस्पताल को वर्ल्ड क्लास का बनाने का दावा करने वाले केजरीवाल अपने अस्पताल पर भरोसा क्यों नहीं करते? अगर नेचुरोपैथी उपचार ही करानी है तो इसकी भी अच्छी सुविधा दिल्ली में कई जगह है। फिर वे लाखों रुपए खर्च कर बेंगलुरू ही क्यों जा रहे हैं? जिंदल प्राकृतिक उपचार केंद्र में इलाज काफी महंगा है। फाइव स्टार सुविधा वाले इस उपचार केंद्र में एक आदमी के ठहरने का खर्च ही 12 हजार रुपए है।

जिंदल प्राकृतिक उपचार केंद्र

सुपर डीलक्स नेस्ट में तीन लोगों के ठहरने का खर्च ही तीस हजार रुपए रोजाना पड़ेगा। और बताया जाता है कि यहां इलाज का खर्च करीब दो से ढ़ाई लाख रुपए प्रतिदिन का आता है। आप समझ सकते है कि 15 से 18 दिन का खर्च कितना आएगा। इन सभी खर्च को दिल्ली सरकार वहन करेगी। एक तरह से इसे आप कह सकते हैं सरकारी खर्चे पर मौजमस्ती। बताया जाता है कि पिछली बार इसी अस्पताल में इनके इलाज पर करीब 86 लाख रुपए खर्च हुए थे। आप समझ सकते हैं कि आम आदमी के बीच चप्पल पहल कर चलने वाला यह आदमी कितनी दिखावा करता है।

जिंदल प्राकृतिक उपचार केंद्र

2. प्रचार में दिन-रात क्यों लगे रहे?
बताया जा रहा है कि केजरीवाल के रक्त में शर्करा की मात्रा सामान्य से काफी ज्यादा है। वे पुरानी खांसी और डायबिटीज के साथ कई बीमारियों से परेशान हैं। सवाल यह है कि जब वे इतने बीमार थे तो फिर गोवा और पंजाब चुनाब में जी-जान क्यों लगाए हुए थे। जान है तो जहान है फिर सत्ता के प्रति इतनी आसक्ति क्यों?

3. फिल्म देखने क्यों गए?
दो महीने तक पंजाब और गोवा में प्रचार करने और बीमार होने पर भी दिल्ली आते ही केजरीवाल शाहरुख खान की फिल्म रईस देखने कनॉट प्लेस के एक सिनेमाहॉल में चले गए। जबकि डायबिटीज तेज होने के कारण उन्हें दिन में तीन बार इंसुलिन लेना पड़ता है। सवाल उठता है कि बीमार होने पर भी बाहर से आते ही घर पर आराम करने के बजाय वे सिनेमा देखने क्यों चले गए?

4. दिल्ली बेहाल
केजरीवाल के साथ ज्यादातर मंत्रियों के बाहर रहने से दिल्ली बेहाल है। कामकाज ठप पड़ा हुआ है। मंत्रियों के विदेशी दौरे पर सीएजी ने भी सवाल उठाए हैं। चाहे दिल्ली में डेंगू हो या चिकनगुनिया या फिर कहीं और जगह चुनाव, आप सरकार के मंत्री दिल्ली में कम बाहर ज्यादा दिखते हैं। मंत्रियों के विदेश दौरे से सरकारी खजाने पर लाखों रुपए की चपत लग चुकी है।

5. विकास का काम ठप
केजरीवाल और मंत्रियों के बाहर रहने से साफ तौर पर दिल्ली की अनदेखी हो रही है। दिल्ली सरकार बजट में आवंटित राशि में से 60 प्रतिशत से ज्यादा खर्च नहीं कर पाई है। बताया जा रहा है कि सरकार को खर्च के लिए जो पैसे मिले उसमें से 12 हजार करोड़ से ज्यादा रुपए का इस्तेमाल ही नहीं पाया। केंद्र सरकार पर विकास में रोड़े अटकाने का आरोप लगाने वाली दिल्ली सरकार को लोगों की कितनी चिंता है आप इससे समझ सकते हैं। 14 फरवरी को केजरीवाल सरकार के दो साल होने वाले हैं। ऐसे में आम लोगों ने तो ये भी कहना शुरू कर दिया है कि जनता के सवालों से बचने के लिए ही केजरीवाल दिल्ली से दूर बने रहते हैं।

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