Home नरेंद्र मोदी विशेष पाकिस्तान से अमेरिका का मोहभंग! पीएम मोदी की पहल का कमाल

पाकिस्तान से अमेरिका का मोहभंग! पीएम मोदी की पहल का कमाल

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अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में बराक ओबामा मौजूद हों या फिर डोनाल्ड ट्रंप, पिछले तीन सालों में पाकिस्तान के प्रति अमेरिकी रवैए में भारी बदलाव नजर आया है। जो अमेरिका हर कदम पर पाकिस्तान की रक्षा कवच बनकर डटा रहता था, अब उसे स्पष्ट शब्दों में सुधर जाने की चेतावनी दे रहा है। ये संभव हुआ है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफल कूटनीति से। वो पहले ओबामा और अब ट्रंप को ये समझाने में सफल रहे हैं कि, पाकिस्तान ही वैश्विक आतंकवादियों का असली पनाहगार है। ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान की करतूतों के बारे में अमेरिका को पहले कुछ नहीं पता था। लेकिन, वो अपने स्वार्थ के चलते हमेशा पाकिस्तान की गुनाहों पर आंखें मूंदे रहता था। लेकिन पीएम मोदी की नीतियों के चलते अब पाकिस्तान के प्रति अमेरिका का नजरिया बदलने लगा है और लाचारी में वो चीन की गोद में सिर छिपाने को मजबूर हो रहा है।

पाकिस्तान को खुली चेतावनी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साझा बयान में स्पष्ट तौर पर पाकिस्तान को सुधर जाने के लिए चेता दिया है। भारत हमेशा से कहता रहा है कि पाकिस्तान अपनी धरती का इस्तेमाल भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए करता है। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी प्रधानमंत्री के साथ मिलकर कहा है कि, पाकिस्तान अपनी सीमा के पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए अपनी जमीन का उपयोग करना बंद कर दे। यही नहीं दोनों नेताओं ने पाकिस्तान से ये भी कहा है कि 26/11 के मुंबई हमलों और पठानकोट एयरबेस पर हुए अटैक के गुनहगारों को जल्द से जल्द सजा दिलाए। पीएम मोदी की मौजूदगी में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का ये बयान, अमेरिकी रुख में हुए बदलाव का साफ संकेत माना जा सकता है, “भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग बहुत आवश्यक है। दोनों देश आतंकवाद से पीड़ित हैं और दोनों देश आतंकवाद एवं उससे जुड़ी कट्टरपंथी विचारधारा को खत्म करना चाहते हैं। हम कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद को खत्म कर देंगे।”

अमेरिका में सर्जिकल स्ट्राइक की हुंकार
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान में भारतीय सेना द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक करने का जिक्र किया था। पीएम मोदी का अमेरिका में ये कहना कि हम किसी के मोहताज नहीं हैं और अपनी रक्षा करना जानते हैं, एक ठोस कूटनीति का प्रमाण है। अपने बयान से पीएम मोदी ने न सिर्फ अमेरिका को बल्कि पूरी दुनिया को जता दिया कि पाकिस्तान एक आतंकवादी राष्ट्र है। यही नहीं, पीएम ने दुनिया को भी आगाह किया कि भारत तो अपनी रक्षा करना जानता है, लेकिन दुनिया अगर पाकिस्तान जैसे आतंकवादी देशों के प्रति समय रहते नहीं चेती तो उसका परिणाम भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। वर्जिनिया में दिए पीएम के इस बयान और फिर व्हाइट हाउस से ट्रंप के साथ साझा बयान में पाकिस्तान को दिए गए चेतावनी को जोड़कर देखिए। आप स्वयं समझ सकते हैं कि अपने प्रिय पाकिस्तान के लिए अमेरिका अपना दृष्टिकोण बदल रहा है और ये संभव बनाया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीति ने।

हिजबुल सरगना सलाहुद्दीन को सबक
पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी सोच में परिवर्तन का एक और बड़ा उदाहरण कश्मीरी आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के सरगना सैय्यद सलाहुद्दीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करना है। ट्रंप और पीएम मोदी की बातचीत से ठीक पहले अमेरिका ने ये कदम उठाकर अपने पुराने दोस्त पाकिस्तान को सीधे तौर पर आगाह कर दिया है। यानी अब अमेरिका भी स्वीकार करने लगा है कि भारत में जो भी आतंकवादी गतिविधियां चलाई जा रही हैं वो बिना पाकिस्तान की पैंतरेबाजियों के संभव नहीं है। दरअसल हिजबुल मुजाबिद्दीन पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी संगठन है, जो पिछले कई सालों से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। कुछ समय पहले मारे गए हिजबुल के कमांडर बुरहान वाणी के एनकाउंटर के बाद घाटी में आतंकी हमलों, पत्थरबाजी की जो भी वारदातें हो रही हैं उसमें सलाहुद्दीन के संगठन का ही हाथ बताया जा रहा है। ये बात किसी से छिपी नहीं कि इन आतंकवादियों को पाकिस्तान आर्थिक, नैतिक और लॉजिस्टिकल सहयोग दे रहा है।

सहयोगी का दर्जा समाप्त करने की अमेरिकी पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले भी अमेरिका ने पाकिस्तान को तगड़ा झटका दिया था। दरअसल अमेरिका ने पाकिस्तान को 2004 से मेजर नॉन-नाटो सहयोगी (MNNA) का दर्जा दिया हुआ था। लेकिन अब अमेरिकी संसद में पाकिस्तान को मिले इस दर्जे को रद्द करने का बिल पेश किया गया है। इसकी वजह ये बताई गई कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ प्रभावशाली कदम उठाने में नाकाम रहा है। दरअसल इस दर्जे के चलते पाकिस्तान की अमेरिकी हथियारों तक पहुंच आसान थी। लेकिन जैसे-जैसे पाकिस्तान के अमेरिकी माई-बाप की आंखें खुल रही हैं, वो उसपर नकेल डालने की तैयारियों में जुट गया है। ये स्थिति एक दिन में नहीं आई है। पीएम मोदी सरकार की विदेश नीति में इसपर तीन साल से दिन-रात काम चल रहा है। भारत की कोशिश है कि विश्व समुदाय को पाकिस्तान का असली चेहरा दिखाकर मानवता की रक्षा की जाय। क्योंकि अबतक पाकिस्तान आतंकवादियों को पालता-पोसता रहा है और अमेरिका , पाकिस्तान को। इस स्थिति को समाप्त करना भारत के लिए ही नहीं पूरी दुनिया के लिए भी आवश्यक है।

पाकिस्तान पर कार्रवाई भी कर सकता है अमेरिका!
खबरें तो यहां तक हैं कि आतंकवाद को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान पर सख्त रूख अपनाने की तैयारी में हैं। अमेरिका, पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों पर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है। अफगानिस्तान में लगातार हो रहे आतंकी हमलों को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात के संकेत दिए हैं कि आतंक के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की जा सकती है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने नाम न बताने की शर्त पर अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप प्रशासन पाक स्थित आतंकी अड्डों पर अमेरिकी ड्रोन हमलों के दायरे को बढ़ाने पर विचार का विकल्प मौजूद है। ट्रंप प्रशासन 16 साल से अफगानिस्तान में चले आ रहे युद्ध पर अपनी नीति की समीक्षा कर रहा है। अमेरिका की मुख्य चिंता उन पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने की है, जो कि अफगानिस्तान को निशाना बनाते हैं।

पाकिस्तान से उठ चुका है अमेरिका का भरोसा ?
अमेरिका पर हमला करने वाले अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने पनाह दिया। जब अमेरिका को इसकी भनक लगी तो उसने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा का नामोनिशान तक मिटा दिया। लेकिन फिर भी अपने पालतू पाकिस्तान और पाकिस्तानी सेना के प्रति अमेरिकी शासकों का उस तरह से मोहभंग नहीं हो पाया जैसी की सारी दुनिया को उम्मीद थी। लेकिन, पीएम मोदी की पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मित्रता परवान चढ़ने के बाद पाकिस्तान के प्रति अमेरिकी व्यवहार में बदलाव स्पष्ट तौर पर महसूस किया जा सकता है। पीएम मोदी की सरकार आने के बाद से भारत ने अमेरिका समेत पूरी दुनिया तक ये बात सफलतापूर्वक पहुंचाई है कि पाकिस्तान ही विश्व में आतंकवाद का एक बहुत बड़ा शरणस्थली है। धीरे-धीरे पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी नीतियां बदलने लगीं। ओबामा प्रशासन ने पाकिस्तान को F-16 विमानों की बिक्री में आर्थिक छूट देने से इनकार करने के साथ ही डील पर भी रोक लगा दी। यही नहीं ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से पहले अमेरिकी सरकार ने ये भी कह दिया कि वो पाकिस्तान को करीब 300 मिलियन की मदद नहीं देगा। दरअसल पीएम मोदी की नीतियों की वजह से अमेरिकी प्रशासन को एहसास होने लगा था कि पाकिस्तान अमेरिका से मदद लेकर उसका इस्तेमाल आतंकवाद को ही बढ़ावा देने के लिए करता है।

स्पष्ट है कि जिस अमेरिका की 9/11 की आतंकवादी वारदात झेलने के बाद भी आंखें नहीं खुलीं, वो संभव कर दिखाया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिशों ने। अमेरिका का गुनहगार सालों तक पाकिस्तान में छिपा रहा, लेकिन उसने अमेरिका को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। जब अमेरिका को उसके बारे में पता चला तो उसने ओसामा बिन लादेन को तो सजा दे दी, लेकिन उसका पाकिस्तान प्रेम बरकरार रहा। उसे ये बात समझ में ही नहीं आई कि लादेन से बड़ा मानवता का दुश्मन तो पाकिस्तान है जो ऐसे आतंकवादियों को पालता-पोसता है। परिणाम ये हुआ कि भारत भी आतंकवाद की आग में झुलसता रहा और अमेरिका भी अपना खून जलाता रहा। लेकिन जब से पीएम मोदी ने सत्ता संभाली है उन्होंने पहले आतंकवादियों के माई-बाप पाकिस्तानी शासकों को समझाने की पहल शुरू की। लेकिन जब वो अपनी करतूतों से बाज नहीं आए तो पाकिस्तान में घुसकर उनके पिट्ठुओं को मारकर सख्त चेतावनी दे दी। अब पीएम मोदी की नीतियों से सीख कर अमेरिका को भी अपनी गलतियों का एहसास होना शुरू हो गया है।

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