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कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, NPS में अब 14% योगदान देगी मोदी सरकार

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को एक बड़ा तोहफा दिया है। कैबिनेट ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में सरकार का योगदान 10 प्रतिशत से बढ़ाकर मूल वेतन का 14 प्रतिशत कर दिया है। इससे एनपीएस में कर्मचारियों का न्यूनतम योगदान 10 प्रतिशत पर बना रहेगा, जबकि सरकार का योगदान 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत हो जाएगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को 10 प्रतिशत तक व्यक्तिगत योगदान पर आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत कर योग्य आय से छूट भी मिल जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में सरकारी कर्मचारियों को कुल कोष में से 60 प्रतिशत अंतरित करने को मंजूरी दी गई जो फिलहाल 40 प्रतिशत है। इस कदम से 36 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ होगा।

मोदी सरकार ने हमेशा कर्मचारियों के हितों को सर्वोपरि रखा है, एक नजर डालते हैं बीते साढ़े चार वर्षों में कर्मचारियों की बेहतरी के लिए उठाए गए कदमों पर-

3 साल पर मिलेगी ग्रेच्युटी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते साढ़े चार वर्षों में देश में हर क्षेत्र, हर तबके के लोगों को ध्यान रखा गया है। सबका साथ सबका विकास मंत्र के साथ मोदी सरकार ने सभी को उनका अधिकार दिलाने का काम किया है। देश में बड़ी संख्या में निजी क्षेत्र में लोग नौकरी करते हैं और अक्सर देखा गया है कि जल्दी-जल्दी नौकरी बदलने पर उनकी ग्रेच्युटी नहीं मिल पाती है। दरअसल ग्रेच्युटी के लिए कम से कम पांच वर्ष की नौकरी अनिवार्य है। निजी क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों की इसी परेशानी को दूर करने के लिए मोदी सरकार अब प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वालों के लिए ग्रेच्युटी संबंधित नियम को बदलने का फैसला किया है। इससे प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों को लाखों रुपये का फायदा होगा। मोदी सरकार प्राइवेट सेक्टर में ग्रेच्युटी के लिए न्यूनतम सेवा की अवधि घटा कर 3 साल करने की तैयारी कर रही है। यानि अगर किसी कर्मचारी ने किसी कंपनी में 3 साल तक नौकरी कर ली है तो उसे ग्रेच्युटी मिलेगी।

लेबर मिनिस्ट्री ग्रेच्युटी की गणना करने के तरीकों में भी बदलाव करने पर विचार कर रही है। इसके तहत ग्रेच्युटी की गणना 30 दिन की सैलरी पर की जा सकती है. वर्तमान समय में प्राइवेट सेक्टर में कर्मचारी की 15 दिन की सैलरी पर ग्रेच्युटी की गणना की जाती है।

मोदीराज में देश के कामगारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा हुई मजबूत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साढ़े चार सालों में देश के करोड़ों कामगारों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए कई नीतिगत फैसले लिए हैं। ये फैसले ऐसे हैं, जिन्हें कांग्रेस की सरकारों ने दशकों से लटकाये रखा था। इन फैसलों से कामगारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मजबूत हुई है। देश के संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के अधिकारों को प्रधानमंत्री मोदी ने सुनिश्चित किया। देश में, आजादी के बाद से  कांग्रेस की सरकारों के दौरान कामगारों के अधिकार सिर्फ और सिर्फ फाइलों में ही बंद होकर रह गये थे। बीते चार सालों में प्रधानमंत्री मोदी ने कामगारों को उपक्रमों से अधिकार दिलवाने के लिए कानूनी उलझनों को खत्म कर दिया।

कामगारों को अधिकार मिलना सुनिश्चित किया- कामगारों के स्वास्थ्य, पेंशन, भत्ते, सुरक्षा आदि से संबंधित अधिकारों को सुनिश्चित कराना सरकार के लिए सरल हो चुका है। देश के 5.85 करोड़ उपक्रमों को मात्र 5 रजिस्टरों में सारी जानकारी वेबपोर्टल-श्रम सुविधा पोर्टल- के माध्यम से देनी होती है। सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना पूरी तरह से बंद हो गया है, साथ ही इंस्पेक्टर राज भी बंद हो चुका है।

असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा – आजादी के दशकों बाद भी, कांग्रेस सरकारें देश के 92 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र के कामगारों के जीवन को सुविधापूर्ण और सम्मानजनक बनाने के लिए भत्ते, स्वास्थ्य, शिक्षा, मकान, बीमा, पेंशन जैसे अधिकार नहीं दे सकी थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले चार सालों में देश के 47 करोड़ असंगठित क्षेत्र के कामगारों के जीवन को सम्मानजनक और सुविधापूर्ण बनाने के लिए असंगठित श्रमिक सूचकांक संख्या (UWIN) कार्ड दे रही है। सभी कामगारों की UWIN को आधार संख्या से जोड़ कर बैंक खातों से जोड़ा जा रहा है। इस संपूर्ण प्रक्रिया को इस साल के अंत तक पूरा कर लेने का लक्ष्य है। बैंक खातों के जरिए, सरकार असंगठित क्षेत्र के कामगारों को पेंशन, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि के लिए दी जा रही आर्थिक सहायता को सीधे खातों में देगी। प्रधानमंत्री मोदी डीबीटी के जरिए, कामगारों को न केवल आर्थिक सहायता दे रहे हैं बल्कि चार सालों में 50,000 करोड़ रुपये से अधिक के धन को दुरुपयोग होने से बचाया है।

संगठित क्षेत्र में रोजगार के अवसरों के लिए सूचना तंत्र को मजबूत किया– देश के संगठित क्षेत्र में कामगारों को रोजगार के अवसरों की जानकरी देने के लिए विस्तृत सूचना तंत्र विकसित किया गया है। इस सूचना तंत्र से देश के सभी रोजगार केन्द्र जुड़ चुके हैं। National Career Service पोर्टल पर सभी प्रकार के रोजगार के अवसरों के बारे में जानकारी के साथ-साथ, Career के कई विकल्पों के बारे में भी वृहत जानकारी मिलती है।

रोजगार बढ़ाने के लिए, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाएं लागू- विश्व के सबसे अधिक युवाओं वाले देश भारत को 2022 तक ‘न्यू इंडिया’ में ट्रांसफॉर्म करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी, सबका साथ, सबका विकास के संकल्प के साथ पिछले चार सालों से काम कर रहे हैं। जिस देश में आबादी का 65 प्रतिशत 2020 में 29 साल की औसत आयु का होने वाला है, उसको रोजगार के भरपूर अवसर उपलब्ध कराने की रणनीति को लागू किया गया है। मेक इन इंडिया के जरिए औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, कौशल विकास के माध्यम से रोज़गार को बढ़ाने और स्टार्ट अप इंडिया के जरिए नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक व्यापक रणनीति पर तेजी से काम हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार के भरपूर अवसर उपलब्ध कराने की योजना लागू हो चुकी है।

संगठित क्षेत्र में गरीब कामगारों के लिए बेहतर अवसर बनाया- प्रधानमंत्री मोदी, एक तरफ असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए सम्मानजनक जीवन की परिस्थितियां बना रहे हैं तो दूसरी तरफ संगठित क्षेत्र के 8 प्रतिशत कामगारों के अधिकारों को सुनिश्चित करने और समाजिक सुरक्षा को उन्नत करने का काम किया है। संगठित क्षेत्र के सभी श्रमिकों को सीधे खाते में वेतन को दिए जाने को सुनिश्चिचत करने के लिए 50 लाख से अधिक जन धन खाते खोले गये। Employees’ Provident Fund में एक करोड़ नये श्रमिकों का खाता खोला जा चुका है। संगठित क्षेत्र के गरीब कामगारों को स्वास्थ्य की अच्छी सुविधा देने के लिए ESIC की सुविधा को उन्नत करने के साथ साथ सदस्यों की संख्या बढ़ायी जा रही है। ESIC में एक करोड़ से अधिक सदस्यों को जोड़ दिया गया है।

वेतन और स्वास्थ्य की सुविधाओं को संगठित क्षेत्र के गरीब कामगारों के लिए सुनिश्चित कर दिया गया है। 

सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा के धन को 20 लाख किया– प्रधानमंत्री मोदी ने संगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए कानून में संशोधन करके ग्रेच्युटी के भुगतान की सीमा को 20 लाख रुपये कर दिया है। अब निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों को भी महंगाई और वेतन वृद्धि को देखते हुए उनकी भी ग्रेच्युटी 20 लाख रुपये होगी।

पेंशनधारियों के लिए पेंशन मिलना सरल किया- प्रधानमंत्री मोदी कामगारों की छोटी से छोटी समस्याओं के प्रति बेहद संवेदनशील हैं तभी सरकार  कामगारों के जीवन को सरल और खुशहाल बनाने के लिए कई फैसले लिए। पेंशनधारियों के लिए हर साल बैंकों में जाकर सत्यापन कराने की समस्या को पूरी तरह से खत्म कर दिया, अब डिजिटल सत्यापन के माध्यम से घर बैठे ही कोई बुजुर्ग अपना भत्ता पा सकता है। अब तक 1.94 करोड़ से भी अधिक पेंशनधारियों को यह सुविधा मिल चुकी है।  इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं से सभी कामगारों को तेजी से लाभ मिल रहा है। 

जाहिर है प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साढ़े चार सालों में संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के जीवन को सरल और सशक्त बनाने के लिए योजनाओं को जितनी तेज गति से लागू किया है वह अपने आपमें एक मिसाल है।

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