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कालेधन के खिलाफ यज्ञ में शामिल हुए संगम के तीर्थ पुरोहित, करा रहे हैं कैशलेस कर्मकांड

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नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैशलेस अभियान को लोगों ने हाथों-हाथ लिया है। जो पहले कैश इज किंग की बात करते थे आज कैशलेस ट्रांजेक्शन अपना रहे हैं। छोटे से लेकर बड़े दुकानदार तक डिजिटल ट्रांजेक्शन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इस मुहिम की कामयाबी का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि अब आप संगम तट पर कर्मकांड भी कैशलेस करा सकते हैं।

अगर इलाहाबाद में संगम तट पर आपके पास कैश नहीं है तो परेशान होने की कोई बात नहीं है। अब आप बिना नकद दक्षिणा दिए भी सभी कर्मकांड करा सकते हैं। संगम के तीर्थपुरोहितों ने यजमानों की सुविधा के लिए अब स्वाइप मशीन रखना शुरू कर दिया है। उनके एक हाथ में कर्मकांड की पोथी है और दूसरे में स्वाइप मशीन।

प्रयाग में करीब 50 हजार तीर्थ पुरोहित हैं। इन्हें 112 तख्त-निशान आवंटित हैं। एक तख्त और निशान में करीब पांच सौ लोगों का परिवार संचालित होता है। वे यहां से गऊदान, पिंडदान, वेणीदान के साथ ही घाट पर पूजा कराते हैं।

नोटबंदी का असर संगम तट पर होने वाले कर्मकांड पर भी पड़ने लगा था। तीर्थ पुरोहित आर्थिक तंगी से जूझने लगे थे। यजमान या तो पुरानी नोट देते थे, या पैसा न होने की दुहाई देकर बाद में दक्षिणा देने का वादा करके चले जाते थे। जिसके बाद तीर्थ पुरोहितों ने स्वाइप मशीन से दक्षिणा लेना शुरू कर दिया। पहले दक्षिणा उनकी जेब में आता था अब बैंक खाते में जा रहा है।

अभी तक 423 पुरोहितों ने स्वाइप मशीन पाने के लिए अलग-अलग बैंकों में आवेदन किया है। प्रयाग धर्म संघ के अध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार, आतंकवाद और कालेधन के खिलाफ जो यज्ञ आरंभ किया है, उसमें तीर्थ पुरोहित भी बढ़-चढ़ कर आहुतियां डालने को बेताब हैं।

तीर्थपुरोहितों के पास स्वाइप मशीन होने से यजमानों को भी सहूलियत हुई है। अब वे स्वाइप मशीन के जरिए भी दक्षिणा दे रहे हैं। इससे नोटबंदी के बाद उत्पन्न हुई समस्या से काफी हद तक निजात मिली है।

सौजन्य- जागरण

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