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तीन साल बेमिसाल: रोजगार के लिए सरल माहौल और श्रम का हुआ सम्मान

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की सरकार ‘श्रमजीवी’ को सबसे बड़ी ताकत मानती है। सरकार का मानना है कि – ‘मात्र श्रम का सम्मान करने से मानव जाति का सम्मान हो जाता है।’ सरकार का उद्देश्य श्रम का सम्मान बचाकर दुनिया की सबसे बड़ी आबादी को स्वाभिमान के साथ खड़ा करना है। सोच ये है कि अगर श्रम को उचित स्थान मिला, वाजिब सम्मान मिला तो देश में विकास के नित नये द्वार खुलेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए बीते तीन सालों में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सहकार की भावना के साथ श्रम को सम्मानित करने और रोजगार के नये अवसर उत्पन्न करने की कई योजनाएं धरातल पर रखीं हैं।


संरचनात्मक सुधारों पर बल
नरेन्द्र मोदी सरकार दूरगामी संरचनागत सुधारों के माध्यम से श्रम क्षेत्र में परिवर्तन पर काम कर रही है। इन सुधारों का मुख्य उदेश्य है, रोजगार के अवसरों को बढ़ाना। मोदी सरकार की विकास की रणनीति, रोजगार के अवसरों को उपलब्ध कराने के लिए जोरदार ढंग से काम कर रही है। इस रणनीति में मेक इन इंडिया के तहत उद्योग-धंधो को प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्किल इंडिया के माध्यम से रोजगार के लिए युवाओं में कौशल दक्षता बढ़ाया जा रहा है और स्टार्ट अप इंडिया के तहत नवाचार व उद्यमिता के जरिए रोजगार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सम्मान और वेतन की सुरक्षा
प्रत्येक श्रमिक के लिए रोजगार की सुरक्षा, वेतन की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए नीतियों और योजनाओं पर भी अमल हो रहा है।

बोनस भुगतान (संशोधन) विधेयक
श्रमिक संगठनों की मांग को पूरा करते हुए मोदी सरकार ने बोनस भुगतान (संशोधन) विधेयक, 2015 पारित कर दिया। इसके अंतर्गत योग्यता की सीमा को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 21 हजार रुपये करने और अनुच्छेद 12 के अंतर्गत गणना की अधिकतम सीमा को 3500 रुपए से बढ़ाकर 7000 रुपये करने या सरकार द्वारा निर्धारित अनुसूचित रोजगार के लिए वेतन इनमें से जो कोई भी अधिक हो की व्यवस्था की गई है।

मातृत्व लाभ (संशोधन) विधेयक 
मातृत्व लाभ (संशोधन) विधेयक 11 अगस्त 2016 को राज्यसभा ने पारित कर दिया गया। इसके महिलाओं का मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह हो गया। यह अवकाश महिला के दो जीवित बच्चों की जरूरी देखभाल के लिए है। इसके साथ ही सरोगेट माता के लिए 12 सप्ताह का अवकाश, बच्चे को गोद लेने वाली महिला के लिए रोजगार प्रदाता और कामगार की आपसी रजामंदी से घर से काम करने की सुविधा, 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों के लिए यह सुविधा देना आवश्यक है। इसके अलावा बच्चे की दैनिक देखभाल की सुविधा भी नियमों के अंतर्गत इस विधेयक में की गई है।

बाल श्रम (निषेध एंव नियमन) संशोधन विधेयक
26 जुलाई 2016 को संसद में बाल श्रम (निषेध एंव नियमन) संशोधन विधेयक 2016 पारित किया गया। यह संशोधन विधेयक 14 साल से कम आयु के बच्चों से मजदूरी कराने पर पूर्णतया पाबंदी और इसका उल्लंघन करने पर कड़ी से कड़ी सजा देने का प्रावधान करता है। यह बच्चे के शिक्षा के अधिकार को भी सुनिश्चित करता है। हालांकि, बच्चे पढ़ाई के बाद खतरनाक ना माने जाने वाले अपने परिवार के काम में हाथ बंटा सकते हैं। 14 से 18 साल के किशोरों के लिए स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माने जाने वाले कामों को छोड़कर दूसरे कारोबार में कुछ शर्तों के साथ छूट मिल सकती है।


मॉडल दुकानों और प्रतिष्ठान विधेयक

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मॉडल दुकानों और प्रतिष्ठान (रोजगार एवं सेवा शर्तों का नियमन) विधेयक लाने पर विचार किया है। सरकार का मानना है कि मॉडल विधेयक एक विचारोत्तेजक कानून है और सहकारी संघवाद की भावना को ध्यान में रखकर ही इसे अंतिम रूप दिया जाना है। यह राज्यों को मॉडल विधेयक पर उनकी आवश्यकता के अनुसार बेहतर तालमेल बनाने की आजादी देता है। यह विधेयक उन दुकानों और प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जहां पर दस या उससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं। विधेयक प्रतिष्ठानों को साल के 365 दिन खोलने की आजादी देता है। यदि किसी प्रतिष्ठान में रात में रुकने की व्यवस्था है तो वहीं पर महिलाएं रात में काम कर सकती हैं यह प्रावधान भी इस संशोधित विधेयक में किया गया है।

श्रम कानूनों और नियमों को आसान बनाया
सरकार ने विभिन्‍न तरह के फॉर्मों और रिपोर्टों को 36 से घटकर 12 कर दिया, ताकि लागत कम हो और विभिन्‍न प्रतिष्‍ठानों पर नियमों के पालन का बोझ कम हो।

श्रम संहिताएं—दूसरे श्रम आयोग ने श्रम कानूनों की 4 से 5 समूह में कार्यात्मक आधार पर संहिताकरण करने की सिफारिश की थी। वर्तमान में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय 43 श्रम कानूनों को 4 श्रम संहिताओं में करने के प्रावधानों पर काम कर रहा है।
· वैतनिक श्रम संहिता
· औद्योगिक संबधों की श्रम संहिता
· सामाजिक सुरक्षा व कल्याण की श्रम संहिता
· सुरक्षा एवं कार्य करने की स्थितियों की श्रम संहिता

विभिन्न श्रम कानूनों के तहत रजिस्टरों का सरल रखरखाव सरकार ने 5.85 करोड़ प्रतिष्ठानों के लिए श्रम रजिस्टरों की संख्या को 56 से घटाकर केवल 5 रजिस्टर कर दिया है। ये रजिस्टर कर्मचारियों, उनके वेतन, ऋणों/ वसूली, हाजिरी इत्यादि से संबंधित हैं। अनावश्यक क्षेत्रों वाले रजिस्टरों की संख्या कम कर देने से ही यह संभव हुआ है, इससे इन प्रतिष्ठानों को अपनी लागत एवं प्रयासों में कमी करने में मदद मिलेगी और इसके साथ ही श्रम कानूनों का बेहतर अनुपालन भी सुनिश्चित होगा।

केंद्रीय क्षेत्र में श्रम सुविधा पोर्टल
16 अक्टूबर 2014 एक एकीकृत वेब पोर्टल श्रम सुविधा पोर्टल लांच किया गया। इससे श्रम कानूनों के पालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। इसके माध्यम से सितम्बर 2016 तक 13 लाख 19 हजार श्रमिकों को विशिष्ट पहचान संख्या आवंटित की जा चुकी थी। इस पोर्टल के माध्यम से ईकाइयों को 9 श्रम अधिनियम के अंतर्गत अलग से रिटर्न भरने के बजाय सिर्फ एक संगठित ऑनलाइन रिटर्न भरना पड़ता है। इस पोर्टल के प्रयोग से प्रतिष्ठान कर्मचारी राज्य बीमा निगम और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के लिए मासिक अंशदान रिटर्न भी करते हैं।

नेशनल कॅरियर सर्विस (एनसीएस) 
एनसीएस पोर्टल (www.ncs.gov.in) सूचना प्रोद्यौगिकी के प्रयोग से रोजगार संबंधी सेवाएं, जैसे- नौकरी मिलान, कॅरियर परामर्श, कौशल विकास कोर्स, प्रशिक्षुता आदि उपलब्ध कराकर नौकरी चाहने वालों, नियोक्ताओं और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाता है। इसमें 52 क्षेत्रों के 3600 से ज्यादा व्यवसायों के कॅरियर कोष में शामिल है। लगभग 3.71 करोड़ से ज्यादा उम्मीदवार, 14.8 लाख प्रतिष्ठान एनसीपी पोर्टल पर पंजीकृत हैं और ये अब तक 3.25 लाख रिक्तियां भर चुके हैं।

सार्वजनिक रोजगार सेवा मंच यानी एनसीएस पोर्टल युवाओं को रोजगार के अवसरों को बढ़ाने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए उभरते जॉब पोर्टल, प्लेसमेंट संगठनों और संस्थानों से करार किए गए हैं। सरकारी रिक्तियों के संबंध में भारत सरकार उन्हें एनसीएस पोर्टल पर डालने को अनिवार्य बना चुकी है। एनसीएस कार्यक्रम गुणवत्तापरक रोजगार सेवाएं देने के लिए 100 आदर्श करियर केंद्र भी स्थापित करने में लगा हुआ है और ये केंद्र राज्यों और संस्थानों के सहयोग से स्थापित किए जा रहे हैं। सभी रोजगार कार्यालयों को एनसीएस पोर्टल के साथ जोड़े गए हैं ओर ये निरंतर स्तर पर रोजगार मेलों का आयोजन करते हैं।


प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना (पीएमआरपीवाई)
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में पंजीकृत नियोक्ताओं को नए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना को लागू किया है। इस योजना के अंतर्गत नए रोजगार के लिए सरकार 3 साल के लिए 8.33 प्रतिशत ईपीएस अंशदान अदा करेगी। कपड़ा क्षेत्र में भी सरकार नियोक्ता का 3.67 प्रतिशत ईपीएफ अंशदान का भुगतान करेगी।

न्यूनतम वेतन में 42 प्रतिशत की वृद्धि 
सरकार ने केंद्र के अंतर्गत आने वाले सभी क्षेत्रों में काम करने वालों के लिए न्यूनतम वेतन में 42 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। कृषि, गैर कृषि, निर्माण आदि सभी क्षेत्रों के लिए यह पहली बार था जब इसमें एक साथ बढ़ोतरी हुई हो। गैर कृषि क्षेत्र में ‘सी’ श्रेणी क्षेत्र में काम करने वाले की मजदूरी को 246 रुपए दैनिक से बढ़ाकर 350 किया गया, बी श्रेणी क्षेत्र में 437 रुपए दैनिक और एक श्रेणी क्षेत्र के मजदूरों के लिए 523 रुपए दैनिक किया गया।

बंधुआ मजदूरों की आर्थिक सहायता में बढ़ोतरी
बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास योजना को आर्थिक सहायता की प्रतीकात्मक मात्रा 20 हजार रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर संशोधित कर दिया गया है। जबकि, तस्करी, यौन शोषण और ट्रांसजेंडर से बचाए गए दिव्यांग, महिलाओं और बच्चों को 3 लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके तहत विशेष श्रेणी की महिलाओं और नाबालिगों को 2 लाख रुपए दिए जाने का प्रावधान है। एक सामान्य बंधुआ मजदूर वयस्क को 1 लाख रुपये दिए जाएंगे।

कर्मचारी राज्य बीमा योजना

कर्मचारी राज्य बीमा योजना यानी ईएसआई के क्षेत्र को बढ़ाया गया है, ताकि पूरे देश में सामाजिक सुरक्षा के नेटवर्क को बढ़ाया जा सके। जिन 165 जनपदों में कर्मचारी बीमा योजना पहले से लागू थी उन्हें कवर करने के लिए सरकार ने कवरेज अधिसूचना जारी कर दी है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम के अंतर्गत मातृत्व लाभ की सीमा को 12 सप्ताह से 26 सप्ताह कर दिया गया है। बच्चा गोद लेने वाली माताएं भी मातृत्व का लाभ ले सकेंगी। निर्माण क्षेत्र के श्रमिकों के लिए ईएसआई कवरेज को बढ़ा दिया गया है। 1 अगस्त 2015 से निर्माण श्रेत्र के श्रमिक भी ईएसआई योजना का लाभ ले सकते हैं। उत्तर-पूर्वी राज्यों अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और अंडमान एवं निकोबार द्विप समूह में ईएसआई योजना की सामाजिक सुरक्षा के लाभों को देने के लिए लागू कर दिया।

ईएसआईसी योजना का दायरा बढ़ाया गया
राज्य कर्मचारी बीमा के लिए वेतन की अधिकतम सीमा को 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 21 हजार रुपये कर दिया गया। अभी तक इसका लाभ अधिकतम 15,000 रुपये वेतन पाने वालों के लिए सीमित था। सीमा बढ़ाए जाने से 50 लाख अतिरिक्त सदस्यों को ईएसआईसी के दायरे में लाने में मदद मिलेगी।

एक बीमित-दो डिस्‍पेंसरी

 इस योजना के तहत ईएसआई ने बीमित व्‍यक्‍ति (आईपी) को नियोक्‍ता के जरिए दो डिस्‍पेंसरी का चयन करने का विकल्‍प दिया है। इनमें से एक डिस्‍पेंसरी का चयन खुद के लिए और दूसरी डिस्‍पेंसरी का चयन अपने परिवार के लिए करना होगा। इससे सभी बीमित व्‍यक्‍ति विशेषकर ऐसे प्रवासी कामगार लाभान्‍वित होंगे, जो अपने गृह राज्‍य को छोड़ कहीं और कार्यरत हैं और उनका परिवार मूल राज्य में ही रह रहे हों। दूसरी डिस्‍पेंसरी का विकल्‍प उपलब्‍ध न होने के कारण परिवार के आश्रित सदस्‍यों को अक्‍सर चिकित्‍सा लाभों से वंचित रहना पड़ता है। ‘एक बीमित- दो डिस्‍पेंसरी’ की अवधारणा को मूर्त रूप प्रदान करने से अब बीमित व्‍यक्‍तियों के साथ-साथ उनके परिवारिक सदस्‍यों को भी इनमें से किसी भी डिस्‍पेंसरी में इलाज कराने की सुविधा मिल जाएगी और इसके साथ ही आपातकालीन स्‍थिति में उन्‍हें किसी भी ईएसआई संस्‍थान में यह सुविधा मिल जाएगी। वर्तमान में लगभग 3 करोड़ बीमित व्‍यक्‍तियों को ईएसआईसी के अंतर्गत कवर किया जा चुका है और लाभार्थियों अर्थात बीमित व्‍यक्‍तियों एवं उनके पारिवारिक सदस्‍यों की कुल संख्‍या 12 करोड़ से भी ज्‍यादा हो गई है।

न्यूनतम पेंशन में संशोधन
अप्रैल 2015 में प्रति शेयर आमदनी के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन को संशोधित कर 1000 रुपये प्रति माह किया गया।
• कर्मचारी से जुड़े जमा के बीमा यानी ईडीएलआई को अधिकतम 3.6 लाख से बढ़ाकर 6.0 लाख किया गया।
• भविष्य निधि पर दावे निपटान की सीमा को 30 दिन से घटाकर 20 दिन किया गया।
• पेंशन निकालने की वैकल्पिक आयु सीमा को 60 वर्ष से घटाकर 58 वर्ष किया गया वह भी 4 प्रतिशत प्रोत्साहन के साथ।

 सार्वभौम खाता संख्या (यूएएन)
 एक सदस्य को बहु सदस्यीय पहचान के लिए एक अंब्रेला की तरह काम करने वाली सार्वभौम खाता संख्या (यूएएन) कार्यक्रम को 16 अक्टूबर 2014 को शुरू किया गया। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अगस्त 2016 तक अपने 8.11 करोड़ सदस्यों को यूएएन दे चुका था। लगभग 2.82 करोड़ सदस्य इसे अपने मोबाइल नंबरों पर सक्रिय कर इससे जुड़ी विभिन्न सेवाओं का लाभ ले रहे हैं।

प्रतिष्ठानों का ऑनलाइन पंजीकरण (ओएलआरई)
व्यापार को आसान बनाने के सरकार के वादों को पूरा करते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने 30 जून 2014 को प्रतिष्ठानों के लिए भविष्य निधि कोड संख्या आवंटन के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा को शुरू किया। दिसंबर 2015 से कर्मचारी भविष्य निधि कोड संख्या के लिए ऑनलाइन आवेदन कर रहा है और आवेदन के समय स्वयं डिजिटल हस्ताक्षर वाले दस्तावेज अपलोड करता है और उसे तत्काल कोड संख्या भी मिल जाता है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन का ई-पोर्टल
प्रतिष्ठान, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, और संगठन लगभग 3 लाख करोड़ जैसी बड़ी निधि का प्रबंधन करता है। बेहतर तालमेल और पारदर्शिता के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने अंशदान के मासिक रिटर्न जमा करने, निवेश और अन्य क्रियाकलापों के लिए ऑनलाइन सुविधा की शुरुआत की है।

आधार पर आधारित ऑनलाइन दावा प्रस्‍तुतिकरण 
इस योजना के तहत वे सभी ईपीएफ सदस्‍य पीएफ के अंतिम निपटान (फॉर्म 19), पेंशन निकासी लाभ (फॉर्म 10-सी) और पीएफ आंशिक निकासी (फॉर्म 31) के लिए सीधे अपने यूएएन इंटरफेस से आवेदन कर सकेंगे जिन्होंने अपने यूएएन को सक्रिय कर दिया है और अपने केवाईसी (आधार) को ईपीएफओ से जोड़ दिया है। ईपीएफ के दावा संबंधी कार्यभार में 80 प्रतिशत से भी ज्‍यादा का सामूहिक योगदान इन्‍हीं तीनों फॉर्मों का रहता है। सदस्‍य समूची प्रक्रिया को ऑनलाइन ही पूरा कर सकते हैं और दावे को ऑनलाइन पेश करने के लिए उन्‍हें न तो नियोक्‍ता और न ही ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क साधने की कोई जरूरत है।

स्व-घोषणापत्र से हुई आसानी
कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के सदस्यों को अब अपने सदस्यों/आश्रितों की बीमारी के मामले में अग्रिम राशि लेने के लिए केवल स्व-घोषणापत्र प्रस्तुत करना होगा। दिव्यांग सदस्य भी स्व-घोषणा पत्र के आधार पर अग्रिम राशि ले सकते हैं। किसी भी सदस्य को अब ईपीएफ योजना-1952 के अनुच्छेद 68-जे या 68-एन के अंतर्गत अग्रिम राशि पाने के लिए चिकित्सा प्रमाण पत्र या अन्य प्रमाण पत्र अथवा दस्तावेज या प्रोफार्मा प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी।

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