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2022 तक दुनिया की टॉप फाइव में होगी ‘न्यू इंडिया’ की इकोनॉमी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का सकारात्मक और सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। जहां विश्व की बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाएं कमजोरी की मार झेल रही हैं, वहीं भारत इस क्षेत्र में बुलंदियां हासिल कर रहा है।नोटबंदी के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज गति से ग्रोथ करने वाली आर्थिक शक्ति है। वहीं अब अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि 2022 तक भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकती है।

आईएमएफ ने साल 2017 और 2022 के लि‍ए ग्रॉस डोमेस्‍टि‍क प्रोडक्‍ट (जीएसटी) पर देशों की रैंकिंग के आधार पर आकलन किया है। ईएमएफ के अनुमान के अनुसार भारत ब्रिटेन को दुनिया की पांच सबसे बड़ी इकोनॉमी से बाहर कर देगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत 9.9 फीसदी की ग्रोथ रेट के साथ जर्मनी को भी पीछे छोड़ देगा।

रिकवर कर रही है भारतीय अर्थव्यवस्था
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) की माने तो भारत की अर्थव्यवस्था अभी खुद को रिकवर कर रही है। नोटबंदी के बाद 86 प्रतिशत करेंसी को चलन से बाहर कर दिया गया था। वहीं जीएसटी को देशभर में लागू करने से छोटी अवधि में इकोनॉमी प्रभावि‍त होगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबि‍क कंपनि‍यों के खराब लोन, पुनर्गठित लोन और पहले लिया गया कर्ज कुल कर्ज का करीब 16.6% हैं। इससे फंसे कर्ज की संख्‍या में इजाफा हुआ है और बैंकों को कर्ज रि‍कवर करने पर फोकस करना पड़ रहा है। इसकी वजह से लोन ग्रोथ रि‍कॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के करीब है। हालांकि यह मोदी सरकार के लि‍ए बड़ी चुनौती है, लेकिन सरकार इससे पार पा सकती है।

भारत की आर्थिक शक्ति को अमेरिकी सलाम
आर्थिक ग्रोथ के मामले में अगले 5 साल में भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगा। अमेरिका की खुफिया थिंक टैंक द नैशनल इंटेलिजेंस काउंसिल (NIC) की ग्लोबल ट्रेंड्स रिपोर्ट कहती कि चीन की अर्थव्यवस्था नरम पड़ रही है और दूसरी अर्थव्यवस्थाओं का विकास भी मंद पड़ रहा है, ऐसे में भारत अगले 5 साल में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इतना ही नहीं NIC के मुताबिक भारत दक्षिण एशिया के छोटे देशों को विकास में सहयोग और अपनी अर्थव्यवस्था से संलग्नता बढ़ाकर उनकी आर्थिक हैसियत का फायदा देगा। इस प्रयास में खुद भारत को इलाके में अपना दबदबा कायम करने की कोशिश को बल मिलेगा।


गेमचेंजर साबित हो सकती है जीएसटी
1 जुलाई, 2017 से पूरा देश बदल जाएगा। इस दिन से पूरा देश गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी GST के दायरे में आ जाएगा और भारत वन इंडिया वन टैक्स के आधार पर ‘पूरा देश, एक बाजार’ के कंसेप्ट को अपना लेगा।जीएसटी देश की अर्थव्यवस्था को नयी रफ्तार देने वाला तो साबित होगी ही इससे ‘टैक्स ऑन टैक्स’ के मकड़जाल से मुक्ति मिल जाएगी। व्यापार का तरीका तो बदलेगा ही जरूरी चीजों के दाम घट जाएंगे। हालांकि शौक की चीजें महंगी हो सकती हैं। लेकिन एक जुलाई की तारीख देश के सबसे बड़े आर्थिक सुधार का गवाह बनने वाला है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यू इंडिया’ के सपने को नया आधार देगी।

कारोबार में भारत सबसे आशावादी देश
ग्रांट थॉर्नटन इंटरनेशनल बिजनेस रिपोर्ट (आईबीआर) के मुताबिक भारत एक ऐसी अर्थव्यवस्था है जिसमें आगे बढ़ने की विशाल क्षमता है। राजस्व, रोजगार, लाभ में वृद्धि की दृष्टि से भारतीय कारोबार सबसे आशावादी है। बीते साल अक्तूबर-दिसंबर 2016 की तीसरी तिमाही में आशावाद सूचकांक में भारत ने पहला स्थान हासिल किया। जनवरी में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय कारोबारी 2017 में अर्थव्यवस्था में सुधार को लेकर अधिक आशावान हैं। वहीं भारत ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में भी आगे है।

बड़ी चुनौतियां भी हैं भारत के सामने
हालांकि इस दौरान भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों को चुनौति‍यों का सामना करना पड़ेगा। अन्य देशों में मौजूद बेकार पड़े असेट्स को नि‍पटाने से लेकर धीमी पड़ी उत्पादकता को सुधारने जैसी चुनौतियों के साथ नौकरी के अवसरों को बढ़ाना, कॉर्पोरेट निवेश को बढ़ावा देना और बड़े पैमाने पर मूलभूत सुविधाओं की कमी को पूरा करना बड़ी चुनौती साबित होने वाली है। आबादी का बोझ भी भारत जैसे देश के लिए मुश्किलें खड़ी करता रहा है। साथ ही मौसम के अनुकूल नहीं होने से ग्रोथ रेट भी प्रभावित होता है।

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