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हजारों करोड़ के घोटाले के आरोपी जिग्नेश शाह से राहुल और प्रियंका के व्यापारिक रिश्ते

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के घोटालेबाज जिग्नेश शाह के साथ कारोबारी रिश्ते सामने आए हैं। जिग्नेश शाह वही शख्स है, जिसने अपनी कंपनी नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) के जरिए 2007 से हजारों निवेशकों के करीब 6 हजार करोड़ रुपये लूट लिए। जिग्नेश शाह को 2016 में गिऱफ्तार किया गया और अभी मामला अदालत में चल रहा है। दरअसल राहुल और प्रियंका ने घोटालेबाज जिग्नेश शाह को उस समय अपना फार्म हाउस किराए पर दिया था जब 2013 में यूपीए सरकार उसके खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में केस चला रही थी।
राहुल-प्रियंका और जिग्नेश शाह के सबंध
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा का दिल्ली के मेहरौली क्षेत्र के सुल्तानपुर गांव में 4.692 एकड़ का एक फार्म है। इसे  इंदिरा गांधी फार्म हाउस के नाम पर जाना जाता है, कहा जाता है कि यह गांधी परिवार की पैतृक संपत्ति है। नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) के प्रमुख शेयर धारक और प्रमोटर जिग्नेश शाह ने अपनी एक और कंपनी फाइनेंशियल टेक्नालॉजीस (इंडिया) लिमिटेड(FTIL) बनाई। FTIL ने राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के फार्म हाउस को 1 फरवरी 2013 से किराए पर लेने के लिए Rent Agreement किया इसके तहत हर माह 6.7 लाख रुपये  का किराया तय हुआ। जिग्नेश शाह ने किराए के रुप में 40.20 लाख रुपये अग्रिम राशि के रुप में भी दे दिया। सबसे बड़ी बात यह थी कि इस पर कंपनी ने नियमों के अनुसार कोई टैक्स भी नहीं लिया। यह पूरी धनराशि दो चेक के जरिए, राहुल और प्रियंका गांधी को दी गई।

जिग्नेश शाह की कंपनी और 6 हजार करोड़ का घोटाला
जिग्नेश शाह ने 2006 में अपनी एक प्राइवेट स्टाक एक्सचेंज कंपनी,नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) खोली। इस पर निवेशकों को उत्पादकों के कमोडटिज पर निवेश करना का मौका मिलता था, इसका देश के अन्य स्टाक एक्सजेंच की तरह ही काम करने का तरीका था। लेकिन यूपीए की सरकार ने 1 जून 2007 को एक नोटिफिकेशन के माध्यम से इस कंपनी को सरकारी निगरानी से मुक्त कर दिया, ऐसा क्यों किया गया, किसके कहने पर किया गया, इसकी अभी जांच चल रही है। यूपीए सरकार के इस नोटिफिकेशन ने इस कंपनी को Forward Contracts Regulation Act के नियमों के उल्लंघन करने की पूरी छूट दे दी। इस छूट का फायदा उठाकर इस कंपनी ने हजारों लोगों से निवेश करवाया। लोगों के निवेश किए हुए पैसे वापस मिलने में 2012 के अंत से दिक्कत आने लगी। इसी समय, 1 फरवरी 2013 को जिग्नेश शाह अपनी दूसरी कंपनी FTIL के जरिए राहुल और प्रियंका गांधी के फार्म हाउस को 11 महीने के लिए किराए पर लेते हैं। निवेशकों के पैसे वापस न मिलने पर घोटाला का खुलासा जुलाई 2013 में होता है, जिसकी जांच के लिए यूपीए सरकार शुरू करती है,  लेकिन सिर्फ कागजी कार्रवाई और दिखावे के लिए एजेंसियों को दौड़ाया भगाया जाता है।

मोदी सरकार ने जिग्नेश शाह पर की कार्यवाई
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने जिग्नेश शाह की कंपनियों की गंभीरता से जांच शुरू करवाई। इसका परिणाम हुआ कि जिग्नेश शाह को 6 हजार करोड़ रुपये के घोटाले के लिए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। अभी यह मामला अदालत के सामने लंबित है। जांच एजेसिंयों को पड़ताल में अन्य कई बातों का पता चला है, इसमें यह भी है कि जिग्नेश शाह के गांधी परिवार से व्यापारिक रिश्ते थे। 
गांधी परिवार से इन व्यापारिक रिश्तों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए ईडी ने 29 नवंबर को जिग्नेश शाह को एक और नोटिस भेजा है, जिसका जल्द ही जवाब मिलने के बाद आगे की कार्यवाई शुरु होगी।इसमें कोई संदेह नहीं है कि गांधी परिवार देश के घोटालों बाजों को पनपने का पूरा मौका दिया और घोटले की कमाई में  मलाई खाने का कोई मौका नहीं छोड़ा है। यही है कांग्रेस की संस्कृति, जिसके खिलाफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनआंदोलन छेड़ रखा है।

जाहिर है कि देश के आजाद होने के बाद कांग्रेस और गांधी परिवार ने 60 सालों तक देश को जमकर लूटा है। कांग्रेस की सरकारों के तहत हुए घोटालों की सूची इतनी लंबी है कि कभी खत्म ही नहीं होती। अगस्ता वेस्टलैंड स्कैम, बोफोर्स घोटाला, नेशनल हेराल्ड घोटाला, जमीन घोटाला… न जाने कितने ऐसे स्कैम हैं, जो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े हैं। डालते हैं नेहरू-गांधी परिवार के घोटालों पर एक नजर-

गांधी परिवार के लिए चित्र परिणाम

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला
वर्ष 2013 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल पर इटली की चॉपर कंपनी ‘अगस्ता वेस्टलैंड’ से कमीशन लेने के आरोप लगे। दरअसल अगस्ता वेस्टलैंड से भारत को 36 अरब रुपये के सौदे के तहत 12 हेलिकॉप्टर ख़रीदने थे, जिसमें 360 करोड़ रुपए की रिश्वतखोरी की बात सामने आई। इतालवी कोर्ट ने माना कि इस मामले में भारतीय अफसरों और राजनेताओं को 15 मिलियन डॉलर रिश्वत दी गई। इतालवी कोर्ट ने एक नोट में इशारा किया था कि सोनिया गांधी सौदे में पीछे से अहम भूमिका निभा रही थीं। कोर्ट ने 225 पेज के फैसले में चार बार सोनिया का जिक्र किया।

बोफोर्स घोटाला
बोफोर्स कंपनी ने 1437 करोड़ रुपये के होवित्जर तोप का सौदा हासिल करने के लिए भारत के बड़े राजनेताओं और सेना के अधिकारियों को 1.42 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी थी। आरोप है कि इसमें दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ सोनिया गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं को को स्वीडन की तोप बनाने वाली कंपनी बोफ़ोर्स ने कमीशन के बतौर 64 करोड़ रुपये दिये थे। इस सौदे में गांधी परिवार के करीबी और इतालवी कारोबारी ओतावियो क्वात्रोकी के अर्जेंटीना चले जाने पर सोनिया गांधी पर भी आरोप लगे।

वाड्रा-डीएलएफ घोटाला
वर्ष 2012 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी और उनके दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ घोटाले का आरोप लगा। उनपर शिकोहपुर गांव में कम दाम पर जमीन खरीदकर  भारी मुनाफे में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को बेचने का आरोप लगा। रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ से 65 करोड़ का ब्याज-मुक्त लोन लेने का आरोप लगा। बिना ब्याज पैसे की अदायगी के पीछे कंपनी को राजनीतिक लाभ पहुंचाना मूल उद्देश्य था। यह तथ्य भी सामने आया है कि केंद्र में कांग्रेस सरकार के रहते रॉबर्ट वाड्रा ने देश के कई और हिस्सों में भी बेहद कम कीमतों पर जमीनें खरीदीं। इस मामले में हाल ही में हरियाणा सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

बीकानेर में जमीन घोटाले का मामला
राजस्थान के बीकानेर में हुए जमीन घोटालों में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनियों के जमीन सौदे भी शामिल हैं। अंग्रेजी न्यूज पोर्टल इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार गलत जमीन सौदों के सिलसिले में 18 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें से 4 वाड्रा की कंपनियों से जुड़े हैं। ये सारी एफआईआर 1400 बीघा जमीन जाली नामों से खरीदे जाने से जुड़ी हैं, जिनमें से 275 बीघा जमीन वाड्रा की कंपनियों के लिए जाली नामों से खरीदे जाने के आरोप हैं।

मारुति घोटाला
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी को यात्री कार बनाने का लाइसेंस मिला था। वर्ष 1973 में सोनिया गांधी को मारुति टेक्निकल सर्विसेज प्राइवेट लि. का एमडी बनाया गया, हालांकि सोनिया के पास इसके लिए जरूरी तकनीकी योग्यता नहीं थी। बताया जा रहा है कि कंपनी को सरकार की ओर से टैक्स, फंड और कई छूटें मिलीं थी।

मूंदड़ा स्कैंडल
कलकत्ता के उद्योगपति हरिदास मूंदड़ा को स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे घोटाले के तौर पर याद किया जाता है। इसके छींटें प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर भी पड़े। दरअसल 1957 में मूंदड़ा ने एलआईसी के माध्यम से अपनी छह कंपनियों में 12 करोड़ 40 लाख रुपये का निवेश कराया था। यह निवेश सरकारी दबाव में एलआईसी की इंवेस्टमेंट कमेटी की अनदेखी करके किया गया। तब तक एलआईसी को पता चला उसे कई करोड़ का नुक़सान हो चुका था। इस केस को फिरोज गांधी ने उजागर किया, जिसे नेहरू ख़ामोशी से निपटाना चाहते थे। उन्होंने तत्कालीन वित्तमंत्री टीटी कृष्णामाचारी को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें अंतत: पद छोड़ना पड़ा।

एक नजर कांग्रेस की सरकारों में हुए कुछ प्रमुख घोटालों पर-

2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला (2008)
भारत में सबसे बड़ा घोटाला 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला था, जिसमें दूरसंचार मंत्री ए. राजा पर निजी दूरसंचार कंपनियों को 2008 में बहुत सस्ते दरों पर 2 जी लाइसेंस जारी करने का आरोप लगाया गया था। नियमों का पालन नहीं किया गया था, लाइसेंस जारी करते समय केवल पक्षपात किया गया था। इसमें 1.96 लाख करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। दरअसल सरकार ने 2001 में स्पेक्ट्रम लाइसेंस के लिए प्रवेश शुल्क रखा था। इसमें दूरसंचार के बारे अनुभवहीन कंपनियों को लाइसेंस जारी किया गया था। भारत में 2001 में मोबाइल उपभोक्ता 4 मिलियन थे जो 2008 में बढ़ोतरी करके 350 मिलियन तक पहुंच गये।

सत्यम घोटाला (2009)
सत्यम कंप्यूटर सर्विसेजस के घोटाले से भारतीय निवेशक और शेयरधारक बुरी तरह प्रभावित हुए। यह घोटाला कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े घोटालों में से एक है, इसमें 14,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया था। पूर्व चेयरमैन रामलिंगा राजू इस घोटाले में शामिल थे, जिन्होंने सब कुछ संभाला हुआ था। बाद में उन्होंने 1.47 अरब अमेरिकी डॉलर के खाते को किसी प्रकार के संदेह के कारण खारिज कर दिया। उस साल के अंत में, सत्यम का 46% हिस्सा टेक महिंद्रा ने खरीदा था, जिसने कंपनी को अवशोषित और पुनर्जीवित किया।

कॉमनवेल्थ गेम घोटाला (2010)
राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी और संचालन के लिए लिये लिया गया धन भारी मात्रा में घोटाले में चला गया। इसमें लगभग 70,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। इस घोटाले में कई भारतीय राजनेता नौकरशाह और कंपनियों के बड़े लोग शामिल थे। इस घोटाले के प्रमुख पुणे के निर्वाचन क्षेत्र से 15 वीं लोकसभा के लिए कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि सुरेश कलमाड़ी थे। उस समय, कलमाड़ी दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन समिति के अध्यक्ष थे। इसमें शामिल अन्य बड़े लोगों में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री- शीला दीक्षित और रॉबर्ट वाड्रा हैं। इसका गैर-अस्तित्व वाली पार्टियों के लिए भुगतान किया गया, उपकरण की खरीद करते समय कीमतों में तेजी आई और निष्पादन में देरी हुई थी।

कोयला घोटाला (2012)
कोयला घोटाले के कारण भारत सरकार को 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। सीएजी ने एक रिपोर्ट पेश की और कहा कि 194 कोयला ब्लॉकों की नीलामी में अनियमितताऐं शामिल हैं। सरकार ने 2004 और 2011 के बीच कोयला खदानों की नीलमी नहीं करने का फैसला किया था। कोयला ब्लॉक अलग-अलग पार्टियों और निजी कंपनियों को बेच दिये गये थे। इस निर्णय से राजस्व में भारी नुकसान हुआ था।

टाट्रा ट्रक घोटाला (2012)
वेक्ट्रा के अध्यक्ष रवि ऋषिफॉर्मर और सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह के खिलाफ मनी लॉन्डरिंग प्रतिबंध अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला पंजीकृत किया था। इसमें सेना के लिए 1,676 टाटा ट्रकों की खरीद के लिए 14 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई थी।

आदर्श घोटाला (2012)
इस घोटाले में मुंबई की कोलाबा सोसायटी में 31 मंजिल इमारत में स्थित फ्लैटों को बाजार की कीमतों से कम कीमत पर बेचा गया था। इस सोसायटी को सैनिकों की विधवाओं और भारत के रक्षा मंत्रालय के कर्मियों के लिए बनाया गया था। समय की अवधि में, फ्लैटों के आवंटन के लिए नियम और विनियमन संशोधित किए गए थे। इसमें महाराष्ट्र के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों- सुशील कुमार शिंदे, विलासराव देशमुख और अशोक चव्हाण के खिलाफ आरोप लगाये गये थे। यह जमीन रक्षा विभाग की थी और सोसायटी के लिये दी गई थी।

प्रमुख घोटालों की सूची और उसकी रकम-

कोयला घोटाला  1.86 लाख करोड़ रुपये
2जी घोटाला  1.76 लाख करोड़ रुपये
महाराष्ट्र सिंचाई घोटाला 70,000करोड़ रुपये
कामनवेल्थ घोटाला 35,000 करोड़ रुपये
स्कार्पियन पनडुब्बी घोटाला  1,100 करोड़ रुपये
अगस्ता वेस्ट लैंड घोटाला 3,600 करोड़ रुपये
टाट्रा ट्रक घोटाला 14 करोड़ रुपये

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